मैं तो बचपन से 'सशक्तीकरण' को ही सही मानते आया हूँ। मुझे पता नहीं कि
श्री अरविन्द कुमार जी के समान्तर कोश में क्या लिखा गया है। किन्तु
संस्कृत/हिन्दी में व्युत्पन्न शब्द और मूल शब्द में मात्रों का अन्तर
होना सामान्य बात है, इसमें कोई गलती नहीं होती।
उदाहरण के लिए
'तुष्टि' से व्युत्पन्न तुष्टीकरण।
'इतिहास' से ऐतिहासिक
भूगोल से भौगोलिक
राजनीति से राजनैतिक
देवी से देवियाँ
कठिनाई से कठिनाइयाँ ( 'कठिनाईयाँ' नहीं)
बुद्धि से बौद्धिक
दर्शन से दार्शनिक
आदि
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