कनिष्ठ हिन्दी अनुवादक का वेतनमान 6500-10500 के हिसाब से निर्धारित करना ...

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swati chadha

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Feb 22, 2012, 2:34:57 AM2/22/12
to राजभाषा कर्मी Rajbhasha Karmi
कनिष्ठ हिन्दी अनुवादक का वेतनमान 6500-10500 के हिसाब से निर्धारित
करना ...

कनिष्ठ हिन्दी अनुवादको को नया संशोधित वेतनमान 6500-10500 लागू हो गया
है और हमारे कार्यालय मे मंत्रालय से इस संबंध मे पत्र भी आ गया है कि इस
के अनुसार कार्रवाई कि जाए किन्तु हमारे अधिकारी का कहना है कि यह ऑर्डर
कोई काम का नहीं है और मेरा वेतन निर्धार्ण 5000 -8000 के हिसाब से ही
किया जा सकता है । उनका कहना है कि सीसीएस revised रुल्स 2008 के हिसाब
से फ़िक्सेशन करते समय वही वेतनमान लिया जाना चाहिए , जो 1-1-2006 को
कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन था ....अतः 5000 *1.86 का गुना करके ही
वेतन निर्धार्ण किया जा सकता है ॥उनके अनुसार यह upgradation का मामला
है और नियमानुसार 5000 से ही फिक्स किया जाना चाहिए ॥जबकि मेरे अनुसार
वेतन निर्धारण 6500*1.86 के हिसाब से किया जना चाइए..कृपया बताए कि क्या
सही है और यदि किसी का वेतन निर्धारण 6500*1.86 के हिसाब से किया गया है
तो कृपया सूचित करने कि कृपा करे
सादर
स्वाति

Devendra Tiwari

unread,
Feb 23, 2012, 1:22:54 AM2/23/12
to rajb...@googlegroups.com
Swati Ji
Following references/orders clarifications are helpful in our cases
(1) DOE OM Nom7/14/2010-E.III(A) dated 05 Jul 2010
(2) DOE OM No 10/1/2009-IC dated 14.12.2009
(3)RTI reply issued by MOF(Exp)UC No.22/01/2010-IC dated 23.03.2010
(4) 3rd NAC minutes vide OM No 11/2/2008-JCA dated 21.04.2011
(5) CAT Princial Bench Mumbai Order dated 13.04.2010 againt OA
Nos.2120,2138 and 2139/2005 filed by Hindi Translators of Central
Excise& IT Deptt
(6) DOL OM No.13034/20/2009 dt 06 Apr 2009
however legal fight is a last option.

On 2/23/12, Devendra Tiwari <dtiwa...@gmail.com> wrote:
> Some of the central Govt. Offices have recently given the enhanced
> grade pay of Rs. 4600/ to Jr. Hindi Translatorsalong with 6500 *
> 1.86=12090. Such offices sre MAB-II, Kolkata , PDTM, Kolkata, Satyajit
> Ray Film & Telivision Institute, O/o the Jute Development
> Commissioner, Ministry of Coal, Kolkata. BNP Dewas, CSIR, etc.

>> --
>> आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "राजभाषा कर्मी
>> Rajbhasha Karmi" समूह की सदस्यता ली है.
>> इस समूह में पोस्ट करने के लिए, rajb...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.
>> इस समूह से सदस्यता समाप्त करने के लिए,
>> rajbhasha+...@googlegroups.com को ईमेल करें.
>> और विकल्पों के लिए, http://groups.google.com/group/rajbhasha?hl=hi पर इस
>> समूह पर जाएं.
>>
>>
>

avdhesh tiwari

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Feb 22, 2012, 5:45:28 AM2/22/12
to rajb...@googlegroups.com
स्वाति जी,
इस विषय को मैंने सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत कई विभागों के साथ उठाया हुआ है। कृपया बताएं की आपका विभाग कौन सा है तथा आपके मंत्रालय से आए हुए स्पष्टीकरण की पूर्ण विषय-वस्तु बताएं।

सादर

-अवधेश तिवारी

22 फरवरी 2012 1:04 pm को, swati chadha <swv...@yahoo.co.in> ने लिखा:
--
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इस समूह में पोस्ट करने के लिए, rajb...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.
इस समूह से सदस्यता समाप्त करने के लिए, rajbhasha+...@googlegroups.com को ईमेल करें.
और विकल्पों के लिए, http://groups.google.com/group/rajbhasha?hl=hi पर इस समूह पर जाएं.




--
Avdhesh Tiwari

Madhukar Suryawanshi

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Feb 22, 2012, 11:23:15 PM2/22/12
to rajb...@googlegroups.com
मैडम आप किस मंत्रालय के अधीन कार्य करती है, यह इस में नहीं बताया ।
खैर, नियम ऐसा है कि यदि आप का बेसिक 5000-8000 है तो वह 6500-10500 में
लगभग 2003 में अपग्रेड हो गया था और वरिष्ट अनुवादक को 7450----- का
ग्रेड दिया गया था । बाद में छठे वेतन आयोग में कनिष्ठ अनुवादक को 4200
ग्रेड पे दिया गया और वरिष्ठ अनुवादकको 4600 ग्रेड पे दिया गया है । यदि
पे फिक्सेशन की बात है तो वर्तमान में आप का जो बेसिक है उसे 1.86 से
गुणा करना है । उस के अनुसार फिक्स किया जायेगा । यानि यदि आप का बेसिक
5000-8000 में रू. 6200 है तो गुणा 1.86 = 11532 यानि 11540 हो जायेगा ।
- एम. ए. सूर्यवंशी, राजभाषा अधीक्षक, इरीन, पो.बॉ.न.233, नासिक रोड-422 101
मोबाईल 09421608015

2012/2/22 swati chadha <swv...@yahoo.co.in>:

Raj Kumar Sharma

unread,
Feb 22, 2012, 10:10:02 AM2/22/12
to rajb...@googlegroups.com, swv...@yahoo.co.in
प्रिय स्वाति जी 
आप उदहारण हिंदी अधिकारियों के उच्चीकृत वेतनमान पी बी ३- ग्रेड पे ५४००/-० को दर्शाएं
और अपने मुर्ख अधिकारियों से पूछें कि जब हिंदी अधिकारियों को नवीन वेतन मान एवं ग्रेड पे 
दे सकते हैं तो कनिष्ठ अस्नुवादकों से भेदभाव कैसा?
आप मुझसे  चर्चा कर सकते हैं | 
आर के शर्मा 
8010113343 .

2012/2/22 swati chadha <swv...@yahoo.co.in>
--
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इस समूह से सदस्यता समाप्त करने के लिए, rajbhasha+...@googlegroups.com को ईमेल करें.
और विकल्पों के लिए, http://groups.google.com/group/rajbhasha?hl=hi पर इस समूह पर जाएं.




--
Regards,
RK Sharma

Devendra Tiwari

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Feb 23, 2012, 1:07:31 AM2/23/12
to rajb...@googlegroups.com
Some of the central Govt. Offices have recently given the enhanced
grade pay of Rs. 4600/ to Jr. Hindi Translatorsalong with 6500 *
1.86=12090. Such offices sre MAB-II, Kolkata , PDTM, Kolkata, Satyajit
Ray Film & Telivision Institute, O/o the Jute Development
Commissioner, Ministry of Coal, Kolkata. BNP Dewas, CSIR, etc.


On 2/22/12, swati chadha <swv...@yahoo.co.in> wrote:

Dr Rajeev kumar Rawat

unread,
Feb 22, 2012, 8:47:50 PM2/22/12
to rajb...@googlegroups.com
कृपया मंत्रालय से प्राप्त पत्र की स्कैन कापी
प्रेषित करें। मैं जबलपुर, कोलकाता उच्च न्यायालयों
में लंबित मामलों के साथ उसे जोडकर देखना चाहता हूं।

प्रसंगवश जान लें कि एक ही विभाग में एक अनुवादक को 6500 और उसी की दूसरी यूनिट मे
5000 में 1.86 गुणा कर दिया जा रहा है-- अंधेर नगरी चौपट राजा चल रहा है


बहुत लंबा संघर्ष है


सादर

2012/2/22 swati chadha <swv...@yahoo.co.in>
--
आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "राजभाषा कर्मी Rajbhasha Karmi" समूह की सदस्यता ली है.
इस समूह में पोस्ट करने के लिए, rajb...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.
इस समूह से सदस्यता समाप्त करने के लिए, rajbhasha+...@googlegroups.com को ईमेल करें.
और विकल्पों के लिए, http://groups.google.com/group/rajbhasha?hl=hi पर इस समूह पर जाएं.




--
डॉ. राजीव कुमार रावत,हिंदी अधिकारी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर-721302
09641049944,09564156315

ravi kumar das

unread,
Feb 25, 2012, 6:02:38 AM2/25/12
to rajb...@googlegroups.com
कनिष्ठ हिन्दी अनुवादको को नया संशोधित वेतनमान 6500-10500 लागू हो गया
है.

If you have a copy of this plse send me to my mail address.
benu...@yahoo.com or published in rajbhasha website. plse

thanks

On 2/22/12, swati chadha <swv...@yahoo.co.in> wrote:

swati chadha

unread,
Mar 16, 2012, 2:41:39 AM3/16/12
to राजभाषा कर्मी Rajbhasha Karmi
वित्त मंत्रालय के आदेश दिनांक 24-11-2008 को आप नेट पर सर्च कर सकते
है ....

On Feb 25, 4:02 pm, ravi kumar das <dasrav...@gmail.com> wrote:
> कनिष्ठ  हिन्दी अनुवादको को नया संशोधित वेतनमान 6500-10500 लागू हो गया
> है.
>
> If you have a copy of this plse send me to my mail address.

> benud...@yahoo.com or published in rajbhasha website. plse


>
> thanks
>
> On 2/22/12, swati chadha <swv...@yahoo.co.in> wrote:
>
>
>
>
>
>
>
> > कनिष्ठ हिन्दी अनुवादक का वेतनमान 6500-10500 के हिसाब से निर्धारित
> > करना ...
>
> > कनिष्ठ  हिन्दी अनुवादको को नया संशोधित वेतनमान 6500-10500 लागू हो गया
> > है और हमारे कार्यालय मे मंत्रालय से इस संबंध मे पत्र भी आ गया है कि इस
> > के अनुसार कार्रवाई कि जाए किन्तु हमारे अधिकारी का कहना है कि यह ऑर्डर
> > कोई काम का नहीं है और मेरा वेतन निर्धार्ण 5000 -8000 के हिसाब से ही
> > किया जा सकता है । उनका कहना है कि सीसीएस revised  रुल्स 2008 के हिसाब
> > से फ़िक्सेशन करते समय वही वेतनमान लिया जाना चाहिए , जो 1-1-2006 को
> > कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन था ....अतः 5000 *1.86 का गुना करके ही
> > वेतन निर्धार्ण  किया जा सकता है ॥उनके अनुसार यह upgradation का मामला
> > है और नियमानुसार 5000 से ही फिक्स किया जाना  चाहिए ॥जबकि मेरे अनुसार
> > वेतन निर्धारण 6500*1.86 के हिसाब से किया जना चाइए..कृपया बताए कि क्या
> > सही है और  यदि किसी का वेतन निर्धारण 6500*1.86 के हिसाब से किया गया है
> > तो कृपया सूचित करने कि कृपा करे
> > सादर
> > स्वाति
>
> > --
> > आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "राजभाषा कर्मी
> > Rajbhasha Karmi" समूह की सदस्यता ली है.
> > इस समूह में पोस्ट करने के लिए, rajb...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.
> > इस समूह से सदस्यता समाप्त करने के लिए,
> > rajbhasha+...@googlegroups.com को ईमेल करें.

> > और विकल्पों के लिए,http://groups.google.com/group/rajbhasha?hl=hiपर इस

swati chadha

unread,
Mar 16, 2012, 2:39:59 AM3/16/12
to राजभाषा कर्मी Rajbhasha Karmi
सादर नमस्कार
मैं national institute of technology में कार्यरत हूँ जो कि MHRD के
अंतर्गत आता है ॥ MHRD से यह पत्र आया था कि वित्त मंत्रालय के आदेश
दिनांक 24-11-2008 के अनुसार सम्पूर्ण देश मे हिन्दी अनुवादको के वेतनमान
मे समरूपता प्रदान की जाए ....किन्तु हमारे अधिकारी फ़िक्सेशन ही 5000 के
हिसाब से कर रहे है ...उनका कहना है कि इस आदेश से आपको कोई फायदा नहीं
होने वाला है ...उनका कहना है कि सीसीएस revised रुल्स 2008 के हिसाब से

फ़िक्सेशन करते समय वही वेतनमान लिया जाना चाहिए , जो 1-1-2006 को
कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन था ....अतः 5000 *1.86 का गुना करके ही
वेतन निर्धार्ण किया जा सकता है ॥उनके अनुसार यह upgradation का मामला
है और नियमानुसार 5000 से ही फिक्स किया जाना चाहिए ॥जबकि मेरे अनुसार
वेतन निर्धारण 6500*1.86 के हिसाब से किया जना चाहिए..

On Feb 23, 9:23 am, Madhukar Suryawanshi <sumadhuram...@gmail.com>
wrote:

> > और विकल्पों के लिए,http://groups.google.com/group/rajbhasha?hl=hiपर इस समूह पर जाएं.

Bhavesh Gupta

unread,
Mar 16, 2012, 9:21:27 AM3/16/12
to rajb...@googlegroups.com
मैं भवेश कुमार गुप्‍ता, कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (श्रम एवं रोजगार
मंत्रालय, भारत सरकार) के क्षेत्रीय कार्यालय, रॉंची में कार्यरत हूँ।
मैं विभागीय परीक्षा में सफल होने पर दिनांक 28/04/2008 को कनिष्‍ठ
हिंदी अनुवादक के पद पर कार्यग्रहण किया था। छठे वेतन आयोग के सिफारिशों
के अनुसार 01.01.2006 को कनिष्‍ठ हिंदी अनुवादक के वेतनमान में उन्‍नयन
कर इसे 5000--8000 से 6500--10500 एवं ग्रेड पे 4200 कर दिया गया और
व्‍यय विभाग, अनुपालन प्रकोष्‍ठ, वित्‍त मंत्रालय के ज्ञापन दिनांक 13
एवं 16 नवंबर, 2009 के अनुसार दिनांक 01.01.2006 को 6500--10500 वेतनमान
वाले पदों को 4600 ग्रेड पे दिया गया है पर मेरा कार्यालय यह मानने को
तैयार ही नहीं है कि कनिष्‍ठ हिंदी अनुवादक का ग्रेड पे 4600 है तथा इस
संबंध में स्‍पेसिफिक आदेश भी निकाला गया है कि कनिष्‍ठ हिंदी अनुवादकों
का ग्रेड पे 4200 है तथा मेरा वेतना निर्धारण कार्यग्रहण तिथि से 5000
गुणा 1.86 प्‍लस 4200 ग्रेड पे करके ही किया गया है जबकि मुझे 4600 ग्रेड
पे एवं 6500 गुणा 1.86 करके मेरा वेतन निर्धारण किया जाना चाहिए।
अभ्‍यावेदन देने से भी बात नहीं बन पाई है । इस मामले में कृपया मार्ग
निर्देश देने की कृपा करें। bhave...@gmail.com

> और विकल्पों के लिए, http://groups.google.com/group/rajbhasha?hl=hi पर इस

Raj Kumar Sharma

unread,
Mar 18, 2012, 2:41:47 PM3/18/12
to rajb...@googlegroups.com
  प्रिय बंधुओं 
पहले तो उक्त आदेशों को मानने को तैयार ही नहीं थे , अब जब कि आदेश स्पष्ट हैंफिर भी कुछ अकर्मण्य व् नालायक अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं आखिर कब तक ?बहुत से विभागों  में अब भी इन आदेशों का  कार्यान्वयन लंबित है|  बंधू चिंता नहीं करें जब सर्वोच्य न्यायालय का निर्णय आवेगा तब ये हाथ जोड़ कर आदेश करने को बाध्य होंगे.|   याद दिला दूं कि हिंदी अधिकारी के पद को ग्रुप ख़से ग्रुप क कादर्जा   उक्त विभागों के Heads  ने नही हमारी सेवा शर्तों ने, हमारे लिए निर्धारित अहर्ताओं के कारण,   वित्त मंत्रालय ने वेतन आयोग के सामने हमारे प्रयासों ने दिलाया है , जो कि वे अब भी हजम नहीं कर पा रहे हैं, मुझे पता है कि कुच्छ एक विभाग तो अब भी इस प्रयास में है कि इन्हें पूर्वत ग्रुप ख का दर्जा दिया जाए. जब कि उनका मंत्रालय बार बार कह चुका है कि यह संभव नहीं है. हिंदी अधिकारी  ग्रुप क की श्रेणी के अधिकारियोंके सामान  हैसियत रखते हैं. और अब ग्रुप क ही रहेंगे. यदि सही मैने में राजभाषा कार्यान्वयन कार्य किया जाना है सरकार राजभाषा नीति लागू करने कि इच्छुक होगी उस समय प्रत्येक विभाग में
निदेशक का भी पद होगा और अवस्यम्भावी है | 
मैं समझता हूँ आपकी शंका का समाधान हो जाना चाहिए.   
 शुभ कामनाओं सहित.
आर के शर्मा
8010113343
 
2012/3/16 swati chadha <swv...@yahoo.co.in>
और विकल्पों के लिए, http://groups.google.com/group/rajbhasha?hl=hi पर इस समूह पर जाएं.




--
Regards,
RK Sharma

tript sharma

unread,
Sep 26, 2012, 4:34:09 AM9/26/12
to rajb...@googlegroups.com
hindi adhikari ka varatman vatabman batane ki kripa kijiay

From: "amanve...@gmail.com" <amanve...@gmail.com>
To: rajb...@googlegroups.com
Sent: Monday, 24 September 2012, 22:10
Subject: Re: राजभाषा कर्मी Rajbhasha Karmi कनिष्ठ हिन्दी अनुवादक का वेतनमान 6500-10500 के हिसाब से निर्धारित करना ...

नमस्‍ते जी मैं आपका भतीजा अमन वर्मा कानपुर/अगरतला से
कृपया मुझे भी अपने संघर्ष में शामिल करें।
बृहस्पतिवार, 23 फरवरी 2012 7:17:50 am UTC+5:30 को, Dr.Rawat ने लिखा:
सादर

2012/2/22 swati chadha <swv...@yahoo.co.in>
इस समूह से सदस्यता समाप्त करने के लिए, rajbhasha+...@ googlegroups.com को ईमेल करें.
और विकल्पों के लिए, http://groups.google.com/ group/rajbhasha?hl=hi पर इस समूह पर जाएं.




--
डॉ. राजीव कुमार रावत,हिंदी अधिकारी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर-721302
09641049944,09564156315

--
आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "राजभाषा कर्मी Rajbhasha Karmi" समूह की सदस्यता ली है.
इस समूह में पोस्ट करने के लिए, rajb...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.
इस समूह से सदस्यता समाप्त करने के लिए, rajbhasha+...@googlegroups.com को ईमेल करें.
वेब पर इस चर्चा को देखने के लिए https://groups.google.com/d/msg/rajbhasha/-/aRybHpoxyyoJ पर जाएं.
अधिक विकल्‍पों के लिए, https://groups.google.com/groups/opt_out पर जाएं.
 
 


Dr Rajeev kumar Rawat

unread,
Sep 26, 2012, 5:44:38 AM9/26/12
to rajb...@googlegroups.com
साथियो निवेदन है कि थोड़ा सा स्वपरिचय के साथ
जानकारी साझा किया करें जिससे संदर्भ समझ में आ सके।

हिन्दी अधिकारी को केन्द्र सरकार में 5 तरह का वेतन दिया जा रहा है और विसंगतियों की भरमार है।

1) पीबी 2 में 9300--34800 ग्रेड पे 4200
2)                                ग्रेड पे 4600
3)                                 ग्रेड पे 4800
4) पीबी-2 में 15600-39100, ग्रेड पे- 5400 समूह ख अराजपत्रित अथवा राजपत्रित अधिकारी
5) पीबी-3 में 15600-39100 ग्रेड पे 5400 समूह क राजपत्रित अधिकारी अथवा अराजपत्रित अधिकारी

धन्यवाद

सादर

Dr Rajeev kumar Rawat

unread,
Sep 27, 2012, 12:34:51 AM9/27/12
to rajb...@googlegroups.com
स्वाति जी
अपने कार्यालय में प्राप्त पत्र की प्रतिलिप स्कैन कर के भेजने की 
व्यवस्था करें अथवा उस पत्र का फाइल नंबर दे। यह एक विवादास्पद
निर्णय है, हो सकता है यह पत्र आलोक सक्सेना के हस्ताक्षर से जारी 24 नवंबर और
27 नवंबर 2009 का वही पत्र होगा जो 6वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद आया था।
 यदि आपके कार्यालय में इससे भिन्न कोई पत्र आया है, तो कृपया भेजे।

सभी सदस्यगण कृपया अपने परिचय में 
कार्यालय एवं मंत्रालय परिचय तथा विधिक स्थित जैसे कार्यालय है,
मुख्यालय है, बैंक है , उपक्रम है, स्वायत्त संस्था है, सरकारी कंपनी है आदि का
उल्लेख अवश्य कर दिया करें। 

सादर

2012/9/24 <amanve...@gmail.com>
नमस्‍ते जी मैं आपका भतीजा अमन वर्मा कानपुर/अगरतला से
कृपया मुझे भी अपने संघर्ष में शामिल करें।
बृहस्पतिवार, 23 फरवरी 2012 7:17:50 am UTC+5:30 को, Dr.Rawat ने लिखा:
कृपया मंत्रालय से प्राप्त पत्र की स्कैन कापी
वेब पर इस चर्चा को देखने के लिए https://groups.google.com/d/msg/rajbhasha/-/aRybHpoxyyoJ पर जाएं.
अधिक विकल्‍पों के लिए, https://groups.google.com/groups/opt_out पर जाएं.
 
 

Dr Rajeev kumar Rawat

unread,
Sep 27, 2012, 12:37:01 AM9/27/12
to rajb...@googlegroups.com
प्रिय अमन

आपका स्वागत है इस मंच में और संघर्ष में।
भतीजा मत बनो भाई मैं बहुत ही गहरे टूटा और बिखरा
चाचा हूं सगे भतीजे भतीजियों से - इस लिए मित्र रुप में 
तुम्हारा स्वागत है भतीजा कतई नहीं।
मैं भी कानपुर फील्ड गन फैक्टरी आरमापुर में 5 वर्ष ऱहा हूं।
मिलते रहेंगे


सादर

2012/9/24 <amanve...@gmail.com>
नमस्‍ते जी मैं आपका भतीजा अमन वर्मा कानपुर/अगरतला से
कृपया मुझे भी अपने संघर्ष में शामिल करें।
बृहस्पतिवार, 23 फरवरी 2012 7:17:50 am UTC+5:30 को, Dr.Rawat ने लिखा:
कृपया मंत्रालय से प्राप्त पत्र की स्कैन कापी
वेब पर इस चर्चा को देखने के लिए https://groups.google.com/d/msg/rajbhasha/-/aRybHpoxyyoJ पर जाएं.
अधिक विकल्‍पों के लिए, https://groups.google.com/groups/opt_out पर जाएं.
 
 

Dr. Paritosh Malviya

unread,
Oct 8, 2012, 2:38:41 AM10/8/12
to rajb...@googlegroups.com
हर विभाग में अपनी- अपनी ढपली अपना अपना राग चल रहा है। डी आर डी ओ में कनिष्‍ठ अनुवादक,वरिष्‍ठ अनुवादक व हिंदी अधिकारी  को क्रमश: 4200,4600,5400 वेतन मिल रहा है। छठे वेतन आयोग के दौरान कनिष्‍ठ अनुवादकों का वेतनमान पुराने वेतनमान रु;5000-8000 से संशोधित करके रु 6500-10500 मान लिया गया था किंतु वेतन निर्धारण 5000-8000 के हिंसाब से ही किया गया। मुझे अब तक समझ नहीं आया कि जब कोई वित्‍तीय लाभ नहीं देना था तो पुराने वेतनमान को संशोधित करने का क्‍या तात्‍पर्य था।

 
2012/10/7 Aman verma, JHT <amanve...@gmail.com>
राजभाषा विभाग/अनुभाग से जुड़े सभी जनों को मेरा सादर नमस्‍कार
उपर लिखे पोस्‍टों से यह स्‍प्‍ष्‍ट नहीं होता कि वास्‍तव में हिंदी अनुवादकों का वर्तमान वेतन क्‍या है?  4200 अथवा 4600
वित्‍त मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन संख्‍या 1/1/2008 दिनांक 24,27 नवम्‍बर 2008 के अनुसार कनिष्‍ठ अनुवादकों का वेतन 4200 है कृपया आप सभी से अनुरोध है कि स्‍पष्ट रूप से बताने की कृपा करें कि वास्‍तविकता क्‍या है।
जय हिंद

--
आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "राजभाषा कर्मी Rajbhasha Karmi" समूह की सदस्यता ली है.
इस समूह में पोस्ट करने के लिए, rajb...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.
इस समूह से सदस्यता समाप्त करने के लिए, rajbhasha+...@googlegroups.com को ईमेल करें.
वेब पर इस चर्चा को देखने के लिए https://groups.google.com/d/msg/rajbhasha/-/Tu126-OV3w0J पर जाएं.

अधिक विकल्‍पों के लिए, https://groups.google.com/groups/opt_out पर जाएं.
 
 



--
Dr. Paritosh Malviya
Gwalior

Raj Kumar Sharma

unread,
Oct 8, 2012, 5:50:23 AM10/8/12
to rajb...@googlegroups.com
हिंदी पदों के साथ यही भेद भाव है जो कि न कभी खत्म हुआ है और न कभी
खत्म होगा, ऊंची कुर्सीयों पर
बैठे अधिकारीगण की राजभाषा के प्रति यही तो सोच है, रहते खाते-पीते भारत में हैं
सोचतेअपनीमातृभाषाओ(भारतीय भाषाओं) में किंतु लिखते India हैं.
] यही तो एक मात्र बिंदु है जिससे राजभाषा कराह रही है.

> *Dr. Paritosh Malviya*
> *Gwalior*


>
> --
> आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "राजभाषा कर्मी
> Rajbhasha Karmi" समूह की सदस्यता ली है.
> इस समूह में पोस्ट करने के लिए, rajb...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.
> इस समूह से सदस्यता समाप्त करने के लिए,
> rajbhasha+...@googlegroups.com को ईमेल करें.

> अधिक विकल्‍पों के लिए, https://groups.google.com/groups/opt_out पर जाएं.
>
>
>


--
Regards,
RK Sharma

ZONAL OFFICE KURNOOL

unread,
Oct 8, 2012, 10:04:02 AM10/8/12
to rajb...@googlegroups.com
महोदय
दुर्भाग्यवश हिन्दी का काम करने वालों को संगठन वाले गैर जरूरी व बोझ
समझते हैं इसलिए केवल हिन्दी संबन्धित कार्य करने पर वेतन व्यर्थ मे दिया जा
रहा है ऐसा प्रतीत होता है उनको ,इसलिए और विभागो का कार्य सोंप दिया जाता है
जिस से हिन्दी का कार्य ठंडे बस्ते में चला जाता है या फिर समय न मिल पाने की
वजह से अपने आप न चाहते हुए भी IGNORE हो जाता है
----- Original Message -----
From: "Raj Kumar Sharma" <rk.shar...@gmail.com>
To: <rajb...@googlegroups.com>
Sent: Monday, October 08, 2012 3:20 PM
Subject: Re: राजभाषा कर्मी Rajbhasha Karmi कनिष्ठ हिन्दी अनुवादक का वेतनमान
6500-10500 के हिसाब से निर्धारित करना ...


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Dr Rajeev kumar Rawat

unread,
Oct 8, 2012, 9:58:19 PM10/8/12
to rajb...@googlegroups.com
मित्रो,
आंध्र बैंक जोनल आफिस के मित्रों को सलाह है कि इस मंच पर हुए पुराने
कुछ विमर्श को देखें। 

आपके ही विभाग में कहीं श्री ओमप्रकाश शर्मा जी हैं 
जिन्होंने मुझे मरा हुआ, आत्मा मरी हुई, कायर. बुजदिल , हरामखोर, कमजोर,
का्मचोर, आदि आदि क्या क्या नहीं कहा था, बड़े ही क्रांतिकारी विचारों के सूरमा हैं,
जो किसी की भी धज्जियां उड़ा सकते हैं, मेरा तो उन्होंने इतना नाहक अपमान
किया है कि मैंने अपने 30 वर्ष की सरकारी सेवा में ऐसा घमंडी और बदतमीज
आदमी नहीं देखा जिसने अनायास ही अपरिचित हमपेशा के साथ इतनी शाब्दिक 
अभद्रता की हो- फिर भी यह सोच कर कि चलो एक ही परिवार की बात है, मैं शांत ही
रहा और उनसे हुआ पत्राचार मैंने मंच से न कर व्यक्तिगत ही किया है। उनकी एक
सहयोगी नीतू सिंह जी हैं जिनकी कविता भी पुरष्कृत हुई है, उन्होंने भी उपदेश
देते हुए एक कविता प्रेषित की थी, मैंने उसका भी बहुत विस्तृत जबाव उन्हें
बहुत सी परिस्थितियों का अपनी बुद्धि से विचार कर दिया था- किंतु उसके बाद
श्री ओमप्रकाश शर्मा जी एवं नीतू सिंह जी का कोई उत्तर नहीं आया, हो सकता 
है कि नीतू सिहं जी के देखने से पहले ही ओमप्रकाश शर्माजी ने वह मेल से
हटा दिया हो। खैर प्रसंगवश यह लिखा है और किसी मंशा से नहीं, यह बताने के
लिए ही कि हिन्दी वालों के साथ कितना बुरा व्यवहार होता है बाहर वाले ही नहीं
अपने घरवाले भी करते हैं। आप पता कर लीजिए कि वे कहां वरिष्ठ प्रबंधक राजभाषा
के रुप में पदस्थ हैं, कृपया उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करिए और उनकी शूरवीरता से लाभान्वित होइए ।

एक समस्या यह भी रही पहली पीढ़ी के लोग जो क्लर्क से, चपरासी से
लेबर से चमचागीरी करते करते हिन्दी अनुवादक अथवा हिन्दी अधिकारी बने थे , वह
हीनभावना से ग्रसित जमात थी इसलिए उस जमात ने हिन्दी के बजाय और कामों
को कर अपनी क्षमता दिखाने का सिलसिला शुरु किया और खुद ही हिन्दी के अलावा
सब कामों को महत्वपूर्ण, उच्च अधिकारियों की निगाह में कर दिया।  इसका
एक मनोवैज्ञानिक पक्ष भी है कि हिन्दी वालों को न तो संस्थान का मुख्य
धारा का प्राणी माना जाता है और न उनके हाथ में कोई सत्ता होती है, जिससे
उनके मन में अन्य समकक्ष कर्मचारियों अथवा अधिकारियों की तुलना
में एक हीन भावना होती है ष जहां अन्य कार्यालयों के बाबू, अधीक्षक, प्रभारियों, अधिकारियों
 के हस्ताक्षर से कार्यालय एवं विभाग चल रहा होता है वहीं हिन्दी वाले अपने आपको 
उपेक्षित महसूस करते हैं, अधिकार विहीन महसूस करते हैं- सत्ता सुख रस से वंचित होते हैं और सारी
परिस्थितियां हालात दुर्योगं एवं दुर्भावनावश ऐसे ही बनाए जाते हैं या ऐसे ही होते है- प्रमाण के लिए
आप देख लीजिए लगभग 99 प्रतिशत विभागों में राजभाषा विभाग किसी पुरानी बिल्डिगं में , 
पुराने स्टोर में , कैंटींन अथवा टायलेट के आसपास, मुख्यालय, मुख्य भवन से दूर मिलेंगे अन्य 
अधिकारियों की उतरन कंप्यूटर, फोटोकापी मशीन उपकरण, फर्नीचर आदि आपको
मिलेगा। और हमारे पास कोई ऐसा हथियार नहीं होता कि हम किसी को भी झुका सकें
रिपोर्ट सच्ची बना दो तब भी कुछ नहीं होना, तो हमने उच्चाधिकारियों को यह दिखाने
को कि देखो हम विभाग के नाम की इज्जत मुख्यालय में अथवा मंत्रालय में
खराब नहीं होने देना चाहते और कितना महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं इसलिए रिपोर्टें झूंठी बनाई
और भेज दीं- अब सभी विभागों के अधिकारियों को आदत पड़ गई है कि यह व्यर्थ का
काम है, सब निरीक्षण, समिति, नराकास  वाले भी सब ले देके सम्मान पाके आंख मूंद
कर चले जाएंगे- अब धीरे धीरे हर विभाग यह मानने लगा है कि हिन्दी अधिकारी 
अथवा राजभाषा विभाग का काम कुछ झूठी सच्ची रिपोर्टें भेजना, हिन्दी दिवस के
आसपास केटरर और टेंट हाउस टाइप के कुछ काम करना, पार्टी आदि करना, 
( एक  उच्चअधिकारी ने पूछा था 10 सितंबर को - हां भाई तुम्हारी हिन्दी की पार्टी
कब हो रही है)  कुछ मोहर बोर्ड आदि की हिन्दी करना आदि है, बाकी ये विल्कुल खाली हैं 
इन्हें क्यों बिठा के वेतन दिया जाए। मैने कई उच्चाधिकारियों से सुना है कि मजबूरी में 
इनकी भर्ती करनी पड़ती है जरुरत विल्कुल नहीं है। और लगभग सच भी यही है कोई भी 
विल्कुल सत्य रुप में देखना चाहे तो जाके किसी भी केन्द्रीय सरकारी कार्यालय में जाकर देख ले कितना काम मूल रुप से हिन्दी में होता है?

विषय को अतिविस्तार से बचाते हुए मैं अपने सभी मित्रों से यह निवेदन करना चाहूंगा
कि अब इस समस्या को समग्रता में देखने का प्रयास करें और इन बिंदुओं पर समाधान
तलाशने के लिए विमर्श करें-

1. यदि संस्थान में हिन्दी अधिकारी, अनुवादक, राजभाषा विभाग के प्रति सौतेला
व्यवहार होता है तो इसकी शिकायत कहां की जाए। हम तो राष्ट्रपति तक प्रतिवेदन
भेज चुके हैं आयुध निर्माणी बोर्ड के अंतर्गत फील्ड गन फैक्टरी कानपुर में रहते हुए।

2. यदि प्रवीण, प्राज्ञ उत्तीर्ण एवं लाभार्थी कर्मचारी हिन्दी में अपना कार्य नहीं करते हैं
तो क्यों न उन्हें कोई दंड के लिए अनुशंसा की जाए और उनसे बसूली की जाए।

3. जिन कार्यालयों में प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारी हैं उनके कार्यालय अधीक्षक अथवा प्रभारी
को सीधे चार्ज कैसे किया जाए कि वह अपने कर्मचारियों से हिन्दी में कार्य क्यों नहीं ले पा
रहा है।

4. कहां इस बात की शिकायत की जाए कि इस कार्यालय में हिन्दी के वार्षिक लक्ष्यों के आसपास 
भी कोई प्रगति नहीं है और हिन्दी अनुवादक को किसी और काम में लगा दिया गया है।

5. क्या हिन्दी अधिकारी, हिन्दी अनुवादक का कार्य झूंठी रिपोर्टें बनाना, राकास की मीटिंग करा देना,
लीपापोती का कार्यवृत्त बना देना, हिन्दी दिवस के आसपास लाख पचास हजार खर्चा करा देना, कवि
सम्मेलन करा देना, भाषण, लेख, निबंध, अंताक्षरी आदि प्रतियोगिताएं करा देना, पत्र-पत्रिकाएं 
निकालना आदि ही है और इनसे वास्तविक धरातल पर कितना लाभ हुआ है- यह काम की 
एक नई शाखा और खुल गई है- प्रयास यह था कि इस तरीके से यह काम की मूल धारा के रुप में
स्थापित होगी- हुआ उलटा जिसे हटाकर प्रतिस्थापित किया जाना था वह और मजबूत हो गई
और समानांतर एक काम की प्रशाखा नई बन गई कि अब ये और करो- जैसे बडीं नदी के किनारे
किनारे एक नाला चलाना- जो न 60 साल में नदी बन पाया पर अब उसे चलाते रहना भी एक
काम हो गया है।

6. हिन्दी को सत्ता प्रतिष्ठान से कैसे जोड़ा जाए।

7. राजभाषा को भी कुछ केजरीवाल जैसे सिरफिरे जुनूनी चाहिए। साथियो- अब याचना नहीं अब रण होना चाहिए।

मित्रो,  बात विवेक से विचार कर, विमर्श कर राह तलाशने की है, मेरा सभी वरिष्ठजनों से विनम्र आग्रह है
कि उपदेशात्मक, आदर्शात्मक अव्यवहारिक टिप्पणी से बचें और जो हमारी पीड़ा है, वास्तविकता है
उसे समझते हुए धरातल पर हमारा मार्गनिर्देशन करें, नेताओं की तरह लफ्फाजी नहीं- हमें रास्ता
तलाशना है - हम सब भटक गए हैं- मन से ईमानदार आदमी ही हिन्दी में सामान्यतया आता 
है जो ज्यादा बाबूगीरी की चालबाजियां एवं मक्कारियां नहीं जानता और उन्हें बुरी मानता है.
इसलिए उन्हें अपना नहीं पाता पर ताउम्र बदमाशियों का शिकार बनता रहता है।

शेष क्रमशः।
अगर कोई टिप्पणी व्यक्तिगत करनी हो मेरी लानत मलानत करनी हो मुझे धिक्कारना हो
तो अनुरोध है कि मंच के बजाए मेरे व्यक्तिगत मेल में करें- वह ज्यादा सार्थक होगी और मंच की
गरिमा भी बनी रहेगी। सब को अपने विचार व्यक्त करने का हक है। प्रसंगवश बता दूं कि इसमें मेरी
व्यक्तिगत कोई कुंठा नहीं है मेरा कार्यालय समस्त अतिआधुनिक उपकरणों से युक्त सुविधासंपन्न कार्यालय
है और निजी तौर पर मैं बहुत ही प्रसन्न एवं संतुष्ट अधिकारी हूं, किंतु जैसे राजकुमार होते हुए भी सिद्धार्थ
सच्चाई जानना चाहते थे ( आत्मप्रशंसा के लिए नहीं बस उदाहरण चुराया है) मैं अपने हिन्दी साथियों की
पीड़ा जानता हूं, और बहुत कुछ झेला है- इसलिए हम सब आपस में बात कर एक नीति बना सकें- ऐसा प्रयास करने का प्रयास है।



सादर,

2012/10/8 ZONAL OFFICE KURNOOL <ZO...@andhrabank.co.in>
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RK Sharma

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Raj Kumar Sharma

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Oct 9, 2012, 3:27:50 AM10/9/12
to rajb...@googlegroups.com
रावत जी की वेदना सही है,

रावत जी, आप शायद नही जानते कि जिस पद पर आपकी नियुक्ति फिल्ड गन
फैक्टरी कानपुर में हुई थी उसके और अन्य 105पदों के सृजन के लिए मुझे
कितना संघर्ष करना पडा था आयुध निर्माणी बोर्ड के सम्बंधित तथाकथित
उच्च अधिकारियों की इच्छा के विरुध्द जा कर तो कभी उनका कोप भाजन बनना
पडा,कभी स्वार्थी कहलाया तो कभी उद्दंड, किंतु हार नही मानी मैं अपने
लक्ष्य में लगा रहा यह मेरा आत्म विश्वास था कि हिंदी के पद अवश्य
सृजित होंगें और हकिकत में हुए, आज श्रेणी- क के पद हो गए हैं. जब कि
उच्चाधिकारी और मेरे अपने लोग कटाक्ष करते नही थकते थे कि यह आप
दिवास्वपन क्यों दिखा रहे हैं? कानपुर में नराकास सचिव के पद पर मेरे
कार्य करने के तरीके के बारे में आप और कानपुर के 160 कार्यालय गवाह हैं
यहां दोहराना समय गंवाना होगा, रावत जी जहां तक कार्यालयीन सुविधाओं
का प्रश्न है हिंदी अधिकारी तो क्या किसी निदेशक सेभीबेहतर सुविधाएं और
सम्मान मैनें एक कनिष्ट अनुवादक के पद पर रहते हुए प्राप्त
थीं,जिसका अधार क्या था वह राजभाषा हिंदी और केवल हिंदी ही थी यदि
मैं किसी अन्य पद पर कार्यरत होता तो शायद कुच्छ भी हासिल न होता.
परेशानियां मिली तो वह भी हमारे अकर्मण्य चापलूस,चमचे और भ्रष्ट हिंदी
कर्मियों द्वारा ही मिली. परंतु आज मुझे अपने कल से कोई गिला-शिकवा
नही. राजभाषा हिंदी ने मुझे परिवार के सदस्यों में एक चिकित्सक,
अनुवादक, एमबीए चार्टर्ड एकाउंटेंट और एक एमटेक कम्पुयूटर इंजीनियर दिए.
हिंदी से प्यार करता था और अंतिम समय तक करता रहूंगा.
बस आज इतना ही पर्याप्त है..

आर के शर्मा.

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> --
> डॉ. राजीव कुमार रावत,हिंदी अधिकारी
> भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर-721302
> 09641049944,09564156315
>

> --
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Dr Rajeev kumar Rawat

unread,
Oct 9, 2012, 3:48:47 AM10/9/12
to rajb...@googlegroups.com
sir 
regards

we are greatefull the efforts of you and your generation.

c u late


2012/10/9 Raj Kumar Sharma <rk.shar...@gmail.com>

Padma R

unread,
Oct 9, 2012, 5:43:22 AM10/9/12
to rajb...@googlegroups.com
dhanyavad aap ke anibhav ne hamen prabjavith kiya hai main bhi kuch
had tak nakarathmak bathe sunti hi is line mein kam shuru ki par unhi
supervisors ne mere kam ka tarika dekhkar muje aashirvad diya ki tum
jaroor aage badho padonnati milegi aour jab mein hindi adhikari bai to
ve bahuth hi khush huve kyonki group c se b mein aana sabhi ke liye
uthna aasan nahin hai our bhagvan ki krupa se mere liye acche officers
mile jo mujhe our mere kam ko pura gourav dethe the our de rahen hein
. aasha sabhi ke sath aisa hi ho
be positive even if your blood group is negative ...... like me
padma bangalore

ZONAL OFFICE KURNOOL

unread,
Oct 9, 2012, 3:56:33 AM10/9/12
to rajb...@googlegroups.com
आदरणीय डाक्टर रावत जी
                                  सर मैं श्री ओमप्रकाश शर्मा जी को 23 साल से जानता हूँ और उनकी हिन्दी के प्रति निष्ठा मैं बहुत भली प्रकार से जानता हूँ ,वो उन चंद लोगो मे से हैं जिन्होने अपने कार्यालय अध्यक्ष के खाली कार्यवृत्त लिखलाओ बगैर OLIC meeing किए कहने के बावजूद ऐसा करने से इंकार किया व मीटिंग करने पर ज़ोर देकर कार्यालय अध्यक्ष से पंगा लिया और फलस्वरूप उन्हे दूरस्थ तबादला(8 साल तक ) व कई अवसरों पर प्रमोशन न मिलने का दंड उठाना पड़ा बाकी मुझे आपके और उनके बीच हुए संवाद के बारे मे कुछ नहीं पता मैं यहाँ नया आया हूँ
----- Original Message -----
Sent: Tuesday, October 09, 2012 7:28 AM
Subject: Re: राजभाषा कर्मी Rajbhasha Karmi कनिष्ठ हिन्दी अनुवादक का वेतनमान 6500-10500 के हिसाब से निर्धारित करना ...

ZONAL OFFICE KURNOOL

unread,
Oct 9, 2012, 10:47:12 AM10/9/12
to rajb...@googlegroups.com
Dear padmaji
यही तो विडम्बना है की हिन्दी प्रसार मे सर्वाधिक विरोध
ज़्यादातर उन लोगो से मिलता है जिनकी मात्रभाषा हिन्दी है ,दक्षिण भारतीय लोग
ज्यादा खुली बाहों से हिन्दी का स्वागत करते हैं

----- Original Message -----
From: "Padma R" <rpadm...@gmail.com>
To: <rajb...@googlegroups.com>

Dr Rajeev kumar Rawat

unread,
Oct 9, 2012, 8:51:24 PM10/9/12
to rajb...@googlegroups.com
बंधुवर ( आंध्रा बैंक जोनल कार्यालय)

श्री शर्मा जी से व्यक्तिगत मेरा कोई टकराव नहीं है, और उनकी निष्ठा के प्रति मेरा नमन, आपसे
जानकर और उनके प्रति मन में श्रद्धा वृद्दि हुई है किंतु क्या उनका तरीका अनुकरणीय हो सकता है।
जीवन में प्रशंसनीय प्रसंग बहुत कम आते हैं किंतु व्यवहारिक तौर पर वे अनुकरणीय भी हों यह
संभव नहीं है। मैं उनकी वीरता, शौर्य, हिन्दी के प्रति समर्पण, साहस आदि सदगुणों के प्रति निश्चित ही
सम्मान व्यक्ति करता हूं परंतु साथ ही यह जानना चाहता हूं कि क्या सभी हिन्दी अधिकारी ऐसा कर सकते
हैं, क्या करना चाहिए और क्या हिन्दी अधिकारियों के बलबूते हिन्दी आ जाएगी, मेरा विचार इसके थोड़े से अलग कोण से है कि उस तंत्र की लाचारी को वीरता दी जाए जैसे नियम 12- जिससे व्यवस्थाप्रमुख में स्वयं खौफ आए न कि हिन्दी अधिकारी की खूंखारता से हिन्दी का काम चले। जो लोग झूंठे नियम बना रहे हैं, जिनके ऊपर  यह दायित्व है जो प्रमुख हैं, अधिकार संपन्न हैं उन्हें हिन्दी ऩियमों का खौफ पैदा होने की व्यवस्था होने से काम ज्यादा आसान होगा न कि हिन्दी अधिकारी के व्यक्तिगत इंकलाब का, क्योंकि अगर वह व्यक्ति चला गया तो स्थिति और बदतर हो जाती है।

 आशा है आप मेरी बात से सहमत हो सकेंगे। जैसे बैंक में मैनेजर कोई आ जाए 
लेकिन गबन करने से डरता है क्योंकि कानून ऐसा है न कि कैशियर अतिईमानदार है।
इसलिए मेरी मंशा हमेशा हिन्दी तंत्र को कैसे दृढ़ बनाया जाए- इस उद्देश्य से इसकी कमियां उजागर करने
की और झूंठे सत्ताधीषों के असत्य को उजागर करने की और जो वास्तविक दोषी है उनके दोष दिखाने की
और उंगली उठाने की रहती है जिससे व्यवस्था में बदलाव लाया जा सके।

 हिन्दी अधिकारी अगर बहुत वीर बन भी जाए तो क्या और कितने दिन कर लेगा, मैं रक्षा सेनाओं में भी रहा हूं, और इसलिए भी इतना सोचता हूं कि जिन लोगों के लिए हम बर्बाद हो जाते हैं. जीवन गंवाते हैं, वे कैसे ऐश करते हैं और वार्ता की मेज पर देश और स्वामिभान समर्पण कर देते हैं। इस लिए देश का सैनिक तो वीर होता ही है वीरता जहां जिन कलेजों में होनी चाहिए वहां कैसे पैदा हो यह मेरी चिंतन धारा का मूल है। हिन्दी अधिकारी तो जो भी करेगा वह हिन्दी के लिए ही होगा पर जब नियम है तो जिन्हे उसके तोड़ने का भय होना चाहिए वह भय कैसे पैदा किया जाए, इस पर एक व्यवस्था मिल जाए तो ज्यादा सफलता मिलेगी। और व्यवस्थाएं तो हैं - किंतु वह भ्रष्टाचार के शिकार हैं इसलिए बेअसर हो गए हैं। इस व्यवस्था को कैसे असरकारी बनाया जाए- मेरा विचार सभी से उसपर विमर्श करने का रहता है, इसलिए मैं अपनी , व्यवस्था की , हिन्दी अनुवादको, अधिकारियों, उपनिदेशक (कार्यान्वयन) आदि संस्थाओं की कमजोरी उजागर करता रहता हूं।

आदरणीय शर्मा जी बहुत अच्छे और फौलादी आदमी हैं लेकिन मेरी लाइन पर उन्होंने जो रुख अपनाया उसने आहत किया था ,फिर भी व्यक्तिगत कोई रोष नहीं हैं - बडे हैं, हम पेशा है इसलिए विना किसी
दुर्भावना के उनके प्रति सादर नमन करता हूं बस यही है कि दुःसाहस के अभाव का अर्थ कायरता नहीं है और दु-साहस का अनुकरण नहीं किया जा सकता। हिन्दी अधिकारी जो काम करते आ रहे हैं रस्मी हो गए हैं 
और इन कामों को मैं हिन्दी के लिए अहितकर मानता हूं-इनसे कोई भला नहीं होने वाला हिन्दी का- यह सब भी एक नौटंकी बन कर रह गया है और हम सब नौटंकी में प्रवीण होते जा रहे हैं , कहीं कहीं तो प्राज्ञ भी हो गए हैं ( मंत्रालय वाले जोहान्सबर्ग हो आए क्या भला कर आए हिन्दी का- मैं भी जाता तो क्या कर आता
बस विदेश घूम आता- वहां से लौटे एक मित्र ने बताया कि देखोजी हिन्दी का क्या होगा पता नहीं
पर मजा बहुत आया और यह सम्मेलन वम्मेलन कुछ नहीं - सममिलन था- एक जैसों का मिलना)।


आइए हम सब अपनी कमजोरियों , संस्थागत कमजोरियों को देखे और मैंने कुछ बिंदु पिछली पोस्ट मे उठाए हैं उन पर चर्चा चलाएं कि कैसे हिन्दी का कार्य संस्थाओं में स्वतः होने लगे जैसे अंग्रेजी में हो रहा है और संविधान की मूल भावना कैसे प्राप्त होगी ? 15 से 65 वर्ष होने को आ गए और कितनी सदियां लगेंगी।
संसद ने अनंत काल तक के लिए चादर तान कर सोने की व्यवस्था कर दी है, हर बार समय सीमा बढ़ जाती
है- तो क्या इस देश में कभी सरकार की भाषा हिन्दी हो पाएगी?

सबके प्रति नमन सहित। 


सादर.
 

2012/10/9 ZONAL OFFICE KURNOOL <ZO...@andhrabank.co.in>

--
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olcell

unread,
Oct 10, 2012, 12:33:59 AM10/10/12
to rajb...@googlegroups.com
प्रिय श्री रावत जी,
हिन्‍दी वाले हिन्‍दी के दुश्‍मन कभी नहीं हो सकते । अपवाद हो सकते हैं । विचारों में मतभेद हो सकता है । आपसे कोई शिकायत नहीं है, आपकी सोच से तकलीफ हुई थी। हमने ऐसा कुछ नहीं सोचा, न ही कहा जो आपने लिखा है । सभी हिन्‍दी प्रेमियों का हम दिल से आदर करते हैं । आपका भी । कृपया किसी भी बात को अन्‍यथा न लें और गरिमा बनाए रखें । हम सब एक ही देश के सिपाही हैं और एक ही युद्ध लड़ रहे हैं । यह आवश्‍यक नहीं कि किसी के भी विचारों से सभी शूरवीर सहमत हों । सकारात्‍मक बातों व विचारों की सकारात्‍मक प्रतिक्रिया होंती है । यदि हम सब सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखें तो निश्चित ही युद्ध जीतने में आसानी होगी । आईए, क्रोध का त्‍याग करें और सभी एक दूजे का हाथ थाम कर अपना अपना योगदान दें। सादर ।
- -  ओम प्रकाश शर्मा
     प्रभारी राजभाषा  

Vijay Prabhakar Nagarkar

unread,
Oct 10, 2012, 2:17:39 AM10/10/12
to rajb...@googlegroups.com, olc...@andhrabank.co.in
प्रिय बंधु
हिंदी के बारे में सभी प्रकार की टिप्पणियों का स्वागत है लेकिन एक बात हमेशा ध्यान में रखी जाए कि हमारा संघर्ष हिंदी के हित में होगा न आपसी व्यक्तिगत दोष आरोपों के हित में। हमारी  एकता और संघठन होना आवश्यक है अन्यथा हम आपस में संघर्ष करके कमजोर पड़ जाएंगे। हमारी कमजोरी को भी नजर अंदाज नहीं किया जाएगा लेकिन वाद विवाद में संयम और शालिनता होनी चाहिए। जो कमी है उसे स्वीकार करके विकास की ओर बढना होगा। 
आप सभी हिंदी के विद्वान और कर्मठ कार्यकर्ता है, आपका मार्गदर्शन नए लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। 



Arun Kumar Mandal

unread,
Oct 10, 2012, 3:37:15 AM10/10/12
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श्री विजय प्रभाकर जी यह सुझाव बहुत ही महत्वपूर्ण है. हमें आपसी वैर-भाव, द्वेष, कलह आदि को भूलकर हिंदी की प्रगति का रास्ता खोजना चाहिए. कैसे समृद्ध बनाया जाए, इसे सोचना चाहिए. हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए पहले स्वयं को और फिर हमारे अनुभाग को सबल बनाना होगा.
आपको बताते हुए मुझे खुशी हो रही है कि मैंने ्अक्तूबर, 2010 में दक्षिण मध्य रेलवे के सिकंदराबाद मंडल में वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी के रूप में कार्यग्रहण किया था. उस समय मेरे अनुभाग में 9 कर्मचारियों में से केवल 3 के पास कंप्यूटर थे, वे भी पी2 या पी3. खुलने में आधा घंटा लगता था. हमने अपने उच्च अधिकारियों को भरोसे में लेते हुए कार्य योजना बनाई, अनुमोदित हुआ और आज मेरे पास 10 कंप्यूटर हैं सभी I-5 or I-7. उच्च गति का डिजिटल प्रिंटर सह कॉपीयर है. कलर लेजर और Studio Printer है. सभी कंप्यूटरों में उच्च गति के नेट की सुविधा है. हमने सारे मंडल के कंप्यूटरों को रेलनेट के जरिए एक नेट वर्किंग में लाया और आज यह स्थिति है कि हमें न तो प्रिंट लेना पड़ता है, न किसी सेक्शन को भिजवाना पड़ता है, सब नेटवर्किंग से हो जाता है. हमारी अनुवाद क्षमता अब पहले से दोगुनी ही गयी है. समय की बहुत बचत हो रही है, पेपरलेस कार्यप्रणाली के चलते लेखन सामग्री की भी पर्याप्त मात्रा में हो रही है. हमारा लेखा विभाग बहुत खुश है और उन्होंने सभी विभागों से हिंदी अनुभाग का अनुकरण करने के लिए पत्र लिखा है.
मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि यदि हम कोई काम मन में ठान लें तो उसे पूरा करना असंभव नहीं है. कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.

दिनांक 29.09.2012 को संसदीय समिति ने हमारे कार्यालय का निरीक्षण किया. उनकी सिफारिश पर रेलवे बोर्ड ने मेरे अनुभाग को 25,000 रूपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया है.

धन्यवाद

अरुण कुमार मंडल
वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी
Arun Kumar Mandal
Sr.Rajbhasha Adhikari
Rly CUG:  09701371601
Res LN   04027155222
Off LN   04027820489


--- On Wed, 10/10/12, Vijay Prabhakar Nagarkar <vpnag...@gmail.com> wrote:

From: Vijay Prabhakar Nagarkar <vpnag...@gmail.com>
Subject: Re: राजभाषा कर्मी Rajbhasha Karmi कनिष्ठ हिन्दी अनुवादक का वेतनमान 6500-10500 के हिसाब से निर्धारित करना ...
--
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Dr Rajeev kumar Rawat

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Oct 10, 2012, 7:12:17 AM10/10/12
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महोदय
बात खत्म हो गई है। बड़े भाई का छोटे के सिर पर हाथ फेर देना ही निःशब्द सब कुछ खत्म कर देता है।
रहा सोच का तो मैं यह अवश्य कहूंगा कि हर आदमी की सोच उसके वातावरण की देन भी होती है , इसलिए सब की अलग अलग होती है,
जिसके हाथ खुले हुए दिखते हैं और चिल्ला रहा है किंतु चल नहीं पा रहा है तो कहीं उसके पांव बंधे होंगे जो चल नहीं  पा रहा है- उसे लताड़ना उसके लिए
समाधान नहीं हो सकता। पुनः विनम्र प्रणाम।

चलिेए। ऩई बात शुरु करते हैं। मैने पिछली पोस्ट में कुछ प्रश्न उठाए हैं सभी से निवेदन है कि उन पर विमर्श प्रारम्भ करें कि
कैसे हम इन परेशानियों ेसे पार पाएं?

सादर

2012/10/10 olcell <olc...@andhrabank.co.in>

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Dr Rajeev kumar Rawat

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Oct 10, 2012, 7:16:30 AM10/10/12
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बधाई श्रीमान
आपके प्रयास अनुकरणीय हैं

सादर


2012/10/10 Arun Kumar Mandal <akman...@yahoo.co.in>
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