भारतीय लिपियों के पुराने फॉण्टों से छुटकारा पाने की सरल और व्यावहारिक विधि
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Anunad Singh
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Jan 29, 2011, 9:55:22 AM1/29/11
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यूनिकोड को आये हुए बहुत समय हो गया। गैर-रोमन लिपियों को इससे बहुत लाभ हुए और अभी बहुत लाभ होंगे।
हिन्दी में अब पुराने फाण्टों वाले जालस्थलों की संख्या काफी कम हो गयी है किन्तु अन्य ओड़िया, बंगला आदि भारतीय लिपियों में अधिकांश पुराने फाण्टों में ही हैं। कोई एक वर्ष पहले मैं ओड़िया का यूनिकोडित साइट खोज रहा था तो केवल ओडिया विकि ही यूनिकोडित मिली थी।
आइये सभी भारतीय लिपियों के पुराने फाण्टों के अन्मूलन की योजना पर विचार करें।
आवश्यक सॉफ्टवेयर औजार : १) फायरफॉक्स ब्राउजर २) फॉक्सरिप्लेस (FireFox) - फायरफॉक्स ब्राउजर का विस्तारक (ऐड-आन) ३) आईमैक्रोज (iMacros) - फायरफॉक्स ब्राउजर का अन्य विस्तारक (ऐड-आन)
कार्य योजना : हमने उपरोक्त तीनों प्रोग्रामों को प्रयोग करके कई फॉण्ट परिवर्तक बनाये हैं। इनकी चर्चा भी की गयी है। फॉक्सरिप्लेस के द्वारा फॉण्त परिवर्तक बनाना इतना सरल है कि कोई भी इसे आजमा सकता है। मुख्य बात यह है कि इसके परिणाम तुरन्त दिखने लगते हैं। आपने पता कर लिया कि पुराने फॉन्ट में 't' से 'त' होता है और इस सूचना को फॉक्सरिप्लेस में डाल दिया (यह बहुत आसान काम है) तो अगले ही चरण में आप उस फॉण्ट वाली साइट खोलेंगे तो उसमें t के स्थान पर 'त' दिखेगा और आपकी सफलता साफ नजर आयेगी। आप चाहें तो एक-एक करके या एकमुश्त परिवर्तन तालिका फाक्सरिप्लेस को बता दीजिये और देखिये क्या गुल खिलता है। पुराने फॉण्ट में कौन सा अक्षर यूनिकोड में क्या होगा ? - यह आप फॉण्ट में लिखी चीज तथा उसके संगत देवनागरी टेक्स्ट इन दोनो को ध्यान से देखकर समझ सकते हैं। अपने समूह के पास जितने भी फॉण्ट परिवर्तक हैं उनके लिये यह सारणी अपने पास पहले ही उपलब्ध है। अतः केवल अन्य फॉण्टॉं के लिये ही यह अतिरिक्त काम करना पड़ेगा।
हाँ थोड़ी-बहुत चर्चा और सहायता की जरूरत पड़ेगी - वह उन मात्राओं के लिये जिनकी स्थिति यूनिकोड एवं पुराने फॉण्ट में समान नहीं होती। उदाहरण के लिये 'छोटी इ की मात्रा' पुराने फान्टों में वर्न के पहले लगती है जबकि यूनिकोड के हिसाब से उसे व्यंजन के बाद आना चाहिये। इसी प्रकार 'आधा र' या रेफ पुराने फॉण्ट में व्यंजन और उस पर लगी मात्रा के बाद आता है जबकि यूनिकोड में उसे उस व्यंजन के पहले आना है। बंगला एवं अन्य भारतीय भाषाओं में भी इस तरह के स्थान परिवर्तन की जरूरत पड़ेगी। यह सब काम 'रेगुलर एक्सप्रेशन' के द्वारा होगा जो कि पूरी तरह से जाँच-परख लिये गये हैं। बस कॉपी-पेस्ट से काम चल जायेगा।
'आइमैक्रोज' (iMacros) की जरूरत फॉण्ट परिवर्तन के लिये नहीं है बल्कि हजारों पेजों को स्वचालित रूप से लोड करने एवं फॉक्सरिप्लेस द्वारा तुरन्त फॉण्त परिवर्तन के बाद उसे डाउनलोड करने के लिये है। इसके प्रयोग से बहुत सा श्रम बचेगा।
हिन्दी अधिकारियों से विशेष रूप से आग्रह है क्योंकि कुछ 'सरकारी साइटें' अब भी पुराने फॉण्ट में सामग्री परोस रहीं हैं। यदि हिन्दी अधिकारी कमर कसें तो एक सप्ताह में उनकी साइटें यूनिकोडित हो सकती हैं।
अन्तरजाल पर भारतीय भाषाओं के पुराने फाण्टों से मुक्ति का रास्ता बहुत आसान है; जाँचा-परखा है। केवल कुछ लोगों को 'कुछ कर दिखाने' के लिये कमर कसना है और कुछ समय देना है। इसमें यह अनिश्चितता नहीं है कि काम पूरा हो पायेगा कि नहीं। कोई प्रोग्रामिंग भी नहीं है। फॉण्ट परिवर्तन के कई तरीके हो सकते हैं जिसमें यह सबसे सरल और कारगर है।