Fwd: घर आया वो मर्ज तो जिंदगी हुई कर्ज

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narhari gaikwad

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Nov 20, 2009, 8:20:13 AM11/20/09
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राग दरबारी. हे मूर्ख, उक्त संबोधन प्रदान करते हुए मुझे अशिष्टता का अनुभव हो रहा है, किंतु मैं क्या करूं, झूठ बोलना ऐसे समय उचित नहीं है। इसे तू मेरी महानता भी समझ सकता है। महानता इसलिए कि मैं तुझे चेता रहा हूं, जबकि मुझे किसी ने विपत्ति में आगाह नहीं किया था।

अरे, सावन के अंधे! तुझे हरियाली ही हरियाली नजर आ रही है। तुझे हरियाली के पीछे छुपा पतझड़ नहीं दिख रहा है। यह संसार चार दिनों का मेला है। तू इसे भली-भांति जी ले। अरे तू इस दुनिया में अकेला आया है, अकेला ही जाएगा। मुझे तो यह समझ में नहीं आता कि तू क्यों अपनी स्वतंत्र जिंदगी को बंधन में बांध रहा है। अरे, जरा अपने वर्तमान के बारे में सोच, तू रात को देर से घर आता है, कोई कुछ नहीं कहता। तू सदैव चौराहों पर जमी महफिलों का हीरो रहता है। पान की दुकानों के खाते तेरे शौक के कारण दिनोदिन स्वस्थ होते जा रहे हैं। तू इनका त्याग कर सकेगा?

पहला दिन पहला शो देखने वाले नौजवान! तू पिक्चरों के लिए तरस जाएगा। तू कहीं का नहीं रहेगा। वेटर को दिलेरी से टिप देने वाले ‘धन्ना सेठ’! तुझे पता नहीं है, शादी तुझे टिप लेने वाली हालत में पहुंचा सकती है। तू, अपने दस-पंद्रह हजार के फिक्स-डिपॉजिट पर मुग्ध हो रहा है। तू नहीं जानता कि गृहस्थ संसार के भवसागर में ये रकम एक बूंद से अधिक नहीं है। हिंदी साहित्य में सानुग्रह उत्तीर्ण होने वाले छात्र! इस रकम से तेरे सपनों की मलिका की आंखों का सुरमा भी नहीं आएगा। तुझे पता नहीं कि मेकअप पर कितना भारी व्यय होता है। तू सरकार की आर्थिक नीतियों का अनुसरण मत कर। बीवी के मेकअप को दुरुस्त करने के चक्कर में अपने चेहरे पर उधार की कालिख मत पोत। यह सीमाहीन श्रंगार तेरे बजट का सत्यानाश कर देगा।

तू जिन हाथों में टेनिस का रैकेट लिए इतराता हुआ गलियों में निकलता है। तू सोच, जब कल को इन्हीं गलियों से निकलते वक्त तेरे हाथ में परचूनी का सामान व सब्जी का थैला होगा तो वे तथाकथित विश्व सुंदरियां, जिन पर तू चमचमाते कपड़े व टेनिस के रैकेट का रौब गालिब करता था, जिनके लिए तूने सैकड़ों लीटर पेट्रोल की आहुति दी थी, उनके समक्ष साइकिल पर मिट्टी के तेल का कनस्तर लिए तू कैसा लगेगा।

सुबह के नौ-दस बजे उठने वाले कुंभकर्ण! अब तेरी रातों की नींद हराम होने वाली है। जरा संभल जा। शादी के बाद जब तेरे बच्चे हो जाएंगे और अनवरत स्वर तुझे न चाहते हुए भी सुनने पड़ेंगे तो याद आएगा कि मैंने भी कुछ कहा था।

ये घूमना-फिरना, जो तुझे अत्यधिक सुखद प्रतीत हो रहा है, इतिहास बनकर रह जाएगा। स्कूटर की दिशाएं रेस्टोरेंट के स्थान पर नर्सिग होम तक सिमटकर रह जाएंगी। सिनेमा के लिए टिकट की लाइन तोड़ने वाले अभागे प्राणी, तू बच्चों के डॉक्टर की लाइन में लग-लगकर थक जाएगा। राजनीति, कला व साहित्य पर विस्तृत चर्चा करके सभी समस्याओं का हल चुटकी में निकालने वाले प्राणी! तेरा ज्ञान दर्शन तक सिमटकर रह जाएगा। तुझे ज्ञान प्राप्त होगा पर तब तक कुछ नहीं बचेगा रे।

अत: जागना है तो अभी जाग, बाद में कुछ नहीं होगा। पर मैं जानता हूं तू नहीं मानेगा। एक राज की बात बताऊं, मैंने तुझसे झूठ कहा था कि किसी ने मुझे नहीं चेताया था। जब मेरी शादी हुई थी, तब कुछ अनुभवी लोगों ने मुझे भी सावधान किया था। किंतु मैंने उनका कहा नहीं माना और आज.. आज के लिए तुझे क्या लिखूं। वो तो जब तुझ पर गुजरेगी, तब तू ही जानेगा। इतना समझाने के बाद तेरे भविष्य के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करने के अलावा मेरे पास है ही क्या। ईश्वर तेरे सुख की आत्मा को शांति प्रदान करें।



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Narhari Gaikwad
Web Designer
Indore, INDIA
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Paulo Diovani

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Nov 20, 2009, 8:52:18 AM11/20/09
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English, please.

Anuj Kanojia

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Nov 20, 2009, 12:21:13 PM11/20/09
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hehhehehe... What's going on in css-design group... :D

2009/11/20 Paulo Diovani <pa...@diovani.com>

English, please.

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-Thanks
Anuj Kanojia.

Артем Волхонский

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Nov 21, 2009, 6:46:25 AM11/21/09
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Please speak albanian ;)
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