जनरल पावर ऑफ अटार्नी की कानूनी वैधता नहीं
नई दिल्ली।
Story Update : Thursday, October 13, 2011 1:32 AM
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा है कि जनरल पॉवर ऑफ
अटॉर्नी के तहत अचल संपत्ति को बेचने के लेनदेन या हस्तांतरण की कोई
कानूनी वैधता नहीं है। अचल संपत्ति को सिर्फ रजिस्टर्ड डीड के जरिये ही
बेचा या हस्तांतरित किया जा सकता है।
सरकारी खजाने को काफी नुकसान हो रहा
जस्टिस आरवी रविंद्रन, जस्टिस एके पटनायक व जस्टिस एचएल गोखले की बेंच ने
राज्य सरकारों को स्टांप ड्यूटी की दरों को कम करने के लिए भी कहा है
ताकि संपत्ति की तय से कम कीमत पर खरीद-फरोख्त न की जाए और निजी हितों के
चलते काले धन के लेनदेन को बढ़ावा न मिले। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि
स्टांप की बढ़ी दरों के चलते सामान्य पॉवर ऑफ अटॉर्नी, सेल एग्रीमेंट और
वसीयत आदि का चलन बढ़ा है। इससे सरकारी खजाने को काफी नुकसान हो रहा है।
सामान्य पावर ऑफ अटार्नी, सेल एग्रीमेंट या वसीयत करार की ऐसी प्रकृति है
जिससे मालिकाना हक का दावा नहीं किया जा सकता। अचल संपत्ति के हस्तांतरण
में इस व्यवस्था को वैध नहीं माना जा सकता। ऐसे लेनदेन पर भरोसा नहीं
किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सूरज लैंप एंड इंडस्ट्रीज की ओर
से दायर अपील पर दिया है जिसमें मालिकाना हक विवाद में हरियाणा सरकार की
ओर से उठाए गए कदमों को चुनौती दी गई थी।
अमर उजाला ब्यूरो
http://www.amarujala.com/national/nat-General-power-of-attorney-is-not-the-legal-validity-17201.html