यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे बसेगी उद्योग नगरी

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Harpreet Singh Guller

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May 11, 2012, 10:18:56 AM5/11/12
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यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे बसेगी उद्योग नगरी
बहुराष्ट्रीय कंपनियों को शामिल करने पर हो रहा है विचार

ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण द्वारा बनाई गई जेवर एयरपोर्ट की योजना
ध्वस्त हो चुकी है। अफसर यह नहीं समझ पा रहे हैं कि विकास की राह में बनी
इस खाई को कैसे पाटा जाएगा। विचार-मंथन के बाद एक तरीका सूझा है कि क्यों
न चीन की तरह यमुना हाइवे के किनारे उद्योग स्‍थापित किए जाएं। यहां
सूचना प्रौद्योगिकी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बुलाया जाए, ताकि देश का
सबसे बड़ा कारखानों का केंद्र स्थापित हो सके। इस विचार और योजना के पीछे
का तर्क यह है कि देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मेड इन चाइना की जगह
मेड इन इंडिया उत्पादों का बोलबाला हो जाए। विकास की इस योजना में
पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा, जिससे उद्योग स्थापित होने पर
किसानों का विरोध नहीं होगा।

प्राधिकरण में दिखा गहरा असर
एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर प्रािध्‍ाकरण उत्साहित था। अधिकारी इसका
भविष्य उज्ज्वल मान रहे थे। यहां तक कि तैनाती की बात पर नोएडा और ग्रेनो
की जगह यमुना प्राधिकरण को वरीयता दी जा रही थी। एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से
जुड़े कर्मचारी और अधिकारियों के चेहरे पर इसके रद्द होने की मायूसी
झलकती देखी जा सकती है।

ग्रेनो से आगरा तक उम्मीद
यमुना प्राधिकरण एशिया का सबसे बड़ा प्राधिकरण है। इसका दायरा ग्रेटर
नोएडा से लेकर आगरा तक 165 किलोमीटर लंबा और यमुना नदी एवं जीटी रोड के
बीच 15 किलोमीटर चौड़ा है। प्राधिकरण के पास 2.57 लाख हेक्टेयर का जमीन
बैंक है। इसकी सीमा में कुल 1191 गांव आते हैं। अगर ग्रेनो से लेकर आगरा
तक हाइवे के किनारे उद्योग स्थापित किए जाएं तो मुमकिन है कि एयरपोर्ट
जाने के गम को भुलाया जा सकता है और देश में अलग मुकाम भी हासिल किया जा
सकता है।
उद्योगों को आमंत्रित किया जाएगा
यमुना प्राधिकरण की योजना है कि क्षेत्र के विकास के लिए देश के बड़े
औद्योगिक घरानों को आमंत्रित किया जाए। इसके लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं
को जुटाने की योजना पर विचार चल रहा है। प्राधिकरण के सीईओ/चेयरमैन के
मुताबिक जरूरत पड़ने पर कंपनियों को आमंत्रित करने के लिए प्राधिकरण की
टीम भी भेजी जा सकती है।

फिलहाल आवासीय योजना नहीं
यमुना प्राधिकरण ने सबसे पहले 21 हजार भूखंडो की आवासीय योजना निकाली थी।
इसके अलावा बिल्डरों को भी जमीन दी थी। जमीन न मिलते देख दो बिल्डरों ने
अपने प्रोजेक्ट वापस ले लिए। करीब दो दर्जन शैक्षिक संस्थानों को जमीन भी
दी गई है। अधिकारी मानते हैं कि निकट भविष्य में आवासीय योजनाओं के लिए
कोई गुंजाइश नहीं है। क्योंकि औद्योगिक प्राधिकरण है, इसलिए उद्योग ही
लगाने होंगे।

नए सिरे से करनी होगी प्लानिंग
ग्रेनो से आगरा तक 45 गांव के किसान इलाहाबाद हाईकोर्ट जा चुके हैं।
उन्होंने जमीन अधिग्रहण के तरीके को गलत बताया है। आवंटन तो हो गया लेकिन
अभी तक जमीन पर कब्जा नहीं हो सका है। इस पर अदालत का रुख काफी मायने
रखता है। कोर्ट का फैसला आने के बाद ही प्राधिकरण अगली कार्रवाई करना
चाहता है।

प्राधिकरण ने पहले चरण का खाका तैयार कर लिया था। जेवर तक की प्लानिंग
में एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को केंद्रित रखा गया था। यमुना के किनारे वाले
स्थान को पूरी तरह से हरित रखना और आसपास के वातावरण को खुशनुमा बनाने की
योजना थी। मगर अब मास्टर प्लान समेत सारी कवायद दोबारा करनी होगी। चूंकि
प्राधिकरण ने फिलहाल आवासीय और शैक्षिक संस्थानों को ही जमीन आवंटित की
है। उद्योगों की शुरुआत नहीं हुई।
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फिलहाल पहले चरण में भी विकास कार्य किए जा रहे
जेवर से लेकर मथुरा तक स्‍थापित होंगे उद्योग
मथुरा से आगरा तक होगा औद्योगिक विकास
2007 में यमुना प्राधिकरण ने जमीन आवंटन योजना पर काम शुरू किया था और
उसी समय चीन की एक्सप्रेसवे औद्योगिक नीति का अध्ययन किया गया। दरअसल चीन
में एक्सप्रेसवे के किनारे आवासीय योजनाओं की जगह विभिन्न प्रकार की बड़ी
औद्योगिक इकाइयों को पंक्तिबद्ध रूप से जमीन दी गई है। आवंटन के बाद सबसे
पहले उद्योगों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसी तर्ज
पर यमुना प्राधिकरण ने 2009 में उद्योग लगाने के लिए देश के कई औद्योगिक
घरानों से संपर्क किया और उन्हें क्षेत्र का मुआयना भी कराया। हालांकि
किन्ही कारणों से योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।

प्राधिकरण सीईओ/चेयरमैन रमा रमन के मुताबिक निश्चित तौर से प्राधिकरण के
सामने बड़ी चुनौती है। इससे उबरने का एक ही तरीका है कि उद्योग स्‍थापित
हों। जब रोजगार के साधन होंगे तो लोग भी रहना शुरू कर देंगे। सबकुछ एक ही
जगह पर उपलब्ध हो, ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
चीन की औद्योगिक नीति
क्या कहते हैं
प्राधिकरण अधिकारी

http://epaper.amarujala.com/

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