लखनऊ। मायाराज में जिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार
से अनुमति दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने कई बार पत्र लिखे। उस प्रोजेक्ट
को नई सरकार ने निरस्त कर दिया है। अब उसकी योजना पीपीपी प्रोजेक्ट के
आधार पर आगरा व मथुरा के बीच नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की हैै।
इसके लिए जमीन तलाशने का काम शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री अखिलेश के लिए
आगरा एयरपोर्ट बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट है।नई सरक ार ने कुशीनगर एयरपोर्ट के
प्रस्तावित लागत घटा कर 600 करोड़ से घटाकर लगभग आधी कर दी है।
असल में ग्रेटर नोएडा के नजदीक जेवर एयरपोर्ट बनाने के मायावती के
प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी। हालांकि बसपा महासचिव सतीश
चंद्र मिश्र के नेतृत्व में पार्टी सांसदों ने संसद में इससे संबंधित
मुद्दा कई बार उठाया और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर दबाव बनाया।
लेकिन बात नहीं बनीं। नागरिक उड्डययन मंत्रालय के मुताबिक डेढ़ सौ किमी
के दायरे में दो इंटरनेशनल एयरपोर्ट नहीं हो सकते हैैं।
दिल्ली का इंदिरागांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक होने के कारण जेवर के
प्रोजेक्ट को अनुमति नहीं मिली। अब माना जा रहा है कि आगरा के प्रस्तावित
एयरपोर्ट को मंजूरी मिल जाएगी। औद्योगिक विकास आयुक्त अनिल कु मार गुप्ता
ने कहा कि जेवर के प्रोजेक्ट का औचित्य नहीं पाया गया इसलिए शासन ने इसे
प्रोजेक्ट को रद करने का निर्णय लिया है। दूसरी तरफ औद्योगिक विकास विभाग
ने खनन विभाग में ई-टेंडरिंग के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। पिछली
सरकार ने ई-टेंडरिंग शुरू तो की थी लेकिन कुछ समय बाद इसे निरस्त कर दिया
गया था।
•कुशीनगर व आगरा के इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पर ही जोर
•आगरा-मथुरा के बीच एयरपोर्ट के लिए जमीन तलाशने का काम शुरू
जेवर के प्रोजेक्ट का औचित्य नहीं पाया गया इसलिए शासन ने इसे प्रोजेक्ट
को रद करने का निर्णय लिया है। दूसरी तरफ औद्योगिक विकास विभाग ने खनन
विभाग में ई-टेंडरिंग के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। पिछली सरकार ने
ई-टेंडरिंग शुरू तो की थी लेकिन कुछ समय बाद इसे निरस्त कर दिया गया था।
-अनिल कुमार गुप्ता, औद्योगिक विकास आयुक्त
कहां तक पहुंचा था प्रोजेक्ट
1993 में जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया
35 गांवों की जमीन ली जानी थी, एक दर्जन गांवों को स्थानांतरित करना था
यमुना प्राधिकरण ने जमीन चिह्नित कर ली थी और अपने मैप में भी इसे
दर्शाया
एयरपोर्ट के लिए सर्वे का काम हो चुका था
लखनऊ/ग्रेटर नोएडा ग्रेटर नोएडा के जेवर इलाके में प्रस्तावित
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अब नहीं बनेगा। राज्य सरकार ने परियोजना को रद
कर दिया है। यह जानकारी सोमवार को यहां अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास
आयुक्त अनिल कुमार गुप्ता ने दी। उन्होंने बताया कि जेवर हवाई अड्डा
परियोजना सात वर्ष से खटाई में पड़ी थी। प्रस्तावित परियोजना के नई
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के 150 किमी के दायरे
में होने के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल रही थी। परियोजना के सभी पहलुओं पर
विचार करने के बाद सरकार ने इसे रद करने का फैसला किया है। वहीं कुशीनगर
में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना को मुख्यमंत्री अखिलेश
यादव की मंजूरी मिलने के बाद उसके बारे में एक्सप्रेशन ऑफ इन्टरेस्ट
आमंत्रित किया जा रहा है।
-Dainik Jagran
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फैसले से टूटी क्षेत्रवासियों की आस
ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : प्रदेश सरकार द्वारा जेवर एयरपोर्ट के निर्माण
का प्रस्ताव रद किए जाने के फैसले से जनपद के लोग निराश हैं। सरकार के इस
फैसले से यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में पूंजी निवेश और विकास कार्यो पर भी
असर पड़ सकता है। जेवर तक मेट्रो की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को भी झटका
लगा है। लोग इस फैसले के लिए प्रदेश सरकार के बजाय केंद्र को अधिक
जिम्मेदार मान रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार एयरपोर्ट के
प्रस्ताव को लंबे समय तक नहीं लटकाना चाहिए था।
गौरतलब है कि बसपा सरकार ने 2001 में जेवर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की
नींव रखते हुए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन सरकार ने यह कहते
हुए अड़ंगा लगा दिया कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के 150 किलोमीटर
के दायरे में दूसरा एयरपोर्ट नहीं बन सकता। पिछले तीन सालों से यह मामला
मंत्रिमंडल समूह के पास विचाराधीन था। बसपा सरकार ने एयरपोर्ट के
प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने की तमाम कोशिश की। सोमवार को प्रदेश सरकार ने
जेवर एयरपोर्ट के प्रस्ताव को यह कहकर रद कर दिया कि केंद्र से इसकी
मंजूरी नहीं मिल रही है। सरकार अब आगरा और मथुरा के बीच जमीन तलाश रही
है। जानकारों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से नोएडा व ग्रेटर नोएडा
के विकास पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली नजदीक होने की वजह से यहां पहले
की तरह पूंजी निवेश होता रहेगा, लेकिन यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास
प्राधिकरण पर प्रस्ताव रद होने से गहरा असर पड़ेगा। क्षेत्र में पूंजी
निवेश की संभावनाओं को भी झटका लगा है। संपत्ति के कारोबार से जुड़े गोपाल
सिंह का कहना है कि एयरपोर्ट की वजह से जेवर तक मेट्रो के भी जाने की
संभावना थी, लेकिन अब मेट्रो के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। प्रस्ताव रद
होने से अब शहर में मेट्रो की संभावना भी क्षीण हो गई है। निवेशक अशोक
पालीवाल का कहना है कि जेवर एयरपोर्ट का प्रस्ताव रद होने के लिए केंद्र
सरकार अधिक जिम्मेदार है। सरकार लंबे समय तक प्रस्ताव को न अटकाती, तो अब
हवाई अड्डे को मंजूरी मिल जाती। इससे निसंदेह क्षेत्र के विकास पर असर
पड़ेगा।
मुकेश शर्मा का कहना है कि जेवर में एयरपोर्ट बनने की संभावना के चलते ही
लोग यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में अधिक पूंजी निवेश कर रहे थे। एयरपोर्ट
का प्रस्ताव रद होने से झटका लगा है। लोग अब उतना पूंजी निवेश नहीं
करेंगे।
-dainik Jagran
ग्रेटर नोएडा। केंद्र सरकार ने जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रस्ताव
को रद्द करके दोहरी मार की है। पहले ही ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण
विभिन्न परेशानियों से जूझ रहे थे। प्रस्तावित प्रोजेक्ट के चलते ही
एनसीआर के लोगों ने जेवर के आसपास जमीन भी खरीद ली थी। लेकिन, जैसे ही
प्रस्ताव रद्द हुआ, रातों-रात दाम नीचे आ गिरे हैं। इसका असर अन्य
प्रस्तावित मेगा प्रोजेक्टों पर भी पड़ने की आशंका है।
पहले चरण को लगा झटका
यमुना प्राधिकरण ने ग्रेनो से लेकर आगरा तक तीन चरण में विकास तय किया
है। पहला चरण ग्रेनो-जेवर, दूसरा जेवर-मथुरा और तीसरा मथुरा-आगरा है।
फिलहाल पहले चरण में 58,000 हेक्टेयर जमीन पर प्रोजेक्ट लाए जा रहे हैं,
जिसमें जेवर के पास एयरपोर्ट प्रस्तावित था।
कैसे बसेगा लंदन जैसा शहर
प्राधिकरण ने वर्ष-2009 में 21 हजार प्लाट आवंटित किए थे, जिसमें तीन सौ
से लेकर चार हजार वर्ग मीटर के प्लाट शामिल थे। योजना के पास से ही यमुना
एक्सप्रेस-वे जा रहा है। साथ ही कुछ ही दूरी पर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट
का प्रस्ताव था। जो प्लाट आवंटित किए गए वहां एनसीआर का वीआईपी रहेंगे।
विशेषकर उद्योगपतियों के लिए तो सोने पर सुहागा जैसी स्थिति का अनुमान
था।
प्राधिकरण को बड़ा नुकसान
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण मिलकर ही योजना को आगे बढ़ा रहे
थे। क्षेत्र में दर्जनों मल्टीनेशनल कंपनियों समेत करीब सात हजार
कंपनियां हैं। विदेशों में निर्यात होने वाले उत्पादों के लिए विशेष
व्यवस्था की तैयारी थी। सीधे कंटेनर से माल एयरपोर्ट पर जाता। और वहां से
उन्हें विदेशों भेजने की योजना थी।
सरकार और प्राधिकरण की थी तैयारी
पिछली सरकार ने जेवर एयरपोर्ट के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी थी। हर दिन
यमुना प्राधिकरण से तैयारी को लेकर बात होती थी। कुल 35 गांवों की जमीन
इसके लिए थी। जमीन अधिग्रहण से लेकर लोगों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने,
विशेष कमेटी बनाने, सर्वे समेत तैयारी होती रहती थी। इसके लिए सरकार ने
यम ुना के सीईओ को एयरपोर्ट का पदेन सीईओ भी घोषित कर दिया था। प्रदेश के
औद्योगिक विकास आयुक्त इसके प्रमुख थे।
जमीन के भाव आसमान पर
प्राधिकरण से मुआवजा मिलने के बाद किसानों ने सबसे ज्यादा जमीन खरीदने का
ही काम किया। जेवर में अभी अधिग्रहण नहीं हो रहा है, लिहाजा किसानों को
मुआवजे से अधिक राशि का ऑफर मिला तो उन्होंने देरी नहीं की। विशेषकर जिस
स्थान पर जमीन चिह्नित की गई थी उसके आसपास मौजूदा समय में जमीन ढूंढे
नहीं मिल रही है।
नोएडा के आधे हिस्से से ज्यादा थी जमीन
यमुना प्राधिकरण ने प्रस्तावित जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए 10 हजार
हेक्टेयर जमीन चिह्नित की हुई है। इसमें नोएडा की कुल 16,416 हेक्टेयर
जमीन है। योजना थी कि परिसर में जहाजों की मरम्मत का काम भी हो। दिल्ली
का एयरपोर्ट 5106.43 एकड़ में और मुंबई का 1875 एकड़ में बना है।
प्रोजेक्ट में निजी कंपनी और तीनों प्राधिकरण का हिस्सा तय होना था।
एयरपोर्ट बनता तो होती सुविधा
नोएडा, ग्रेनो, गाजियाबाद, बुलंदशहर के लोग इंतजार कर रहे थे कि अगर जेवर
में एयरपोर्ट बन जाता है तो वह दिल्ली तक क्यों जाएंगे। एयरपोर्ट पहुंचने
तक यमुना हाइवे तैयार भी किया जा चुका है, लेकिन अब अगर हवाई यात्रा करनी
है तो दिल्ली ही जाना होगा। अनुमान लगाया गया था कि दिल्ली जितनी ही
भविष्य में यहां पर आबादी हो जाएगी।
किस्मत दगा दे गई
अमूमन मुआवजे के बदले जहां भी जमीन खरीदी, उससे लाभ हुआ। कई दोस्तों ने
जेवर में जमीन खरीदी। प्रेरित होकर मैने काफी जमीन खरीद ली। अब पैसा
निकालना मुश्किल होगा। -रनवीर (घरबरा)
एयरपोर्ट के लिए आगरा ही मुफीद
आगरा। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रस्ताव निरस्त होने के बाद कुशीनगर
के साथ आगरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाए जाने के प्रस्ताव से आगरा की
उम्मीदें बंधी है। सालों से आगरा में एयरपोर्ट की मांग कर रहे आगराराइट्स
के लिए यह सुखद संकेत है। वहीं आगरा-मथुरा के बीच एयरपोर्ट बनाए जाने में
आगरा की संभावनाएं काफी बलवती भी हैं। भौगोलिक स्थितियों के मद्देनजर
आगरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट अधिक मुफीद रहेगा।
प्रस्ताव की प्रमुख बातें
मैने तो पूरी पूंजी लगा दी
मैं व्यापारी हूं। जीवनभर में जो भी कमाया था वह ये सोचकर लगाया था कि
भविष्य में एयरपोर्ट बनेगा तो पूरा पैसा कई गुना हो जाएगा। लेकिन अब
एयरपोर्ट योजना के रद्द हो जाने से अरमानों पर पानी ही फिर गया।
-दयानंद भाटी (दादरी)
लगता है कि गलती कर दी
किसान इतना समझदार नहीं होता कि वह कोई व्यवसाय करे। बस, इतना जरूर था कि
गांव की जमीन गई तो उसके बदले में जेवर में जमीन खरीद ली। ग्रेनो और जेवर
में बराबर दामों में मिली थी जमीन।
-
संजय मावी (बिरौंड़ी)
200
में प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव बनाया था
में ही प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा गया
सांसद सुरेंद्र सिंह नागर ने संसद में कई बार प्रश्न उठाया
मुआवजे का पैसा फंस गया
गांव में जमीन जाने के बाद जो भी पैसा था उससे जेवर के पास खेत खरीद लिए
थे। किसानों ने काफी ऊंचे दामों पर जमीन दी थी। होड़ में जाकर फंस गए। अब
उस दिन को कोस रहे हैं जब वहां जमीन लेने का फैसला किया था।
-नरेंद्र (डाढ़ा)
अब नहीं है खरीददार
ग्रेटर नोएडा के लोग यही कर रहे हैं। मुआवजा मिलते ही जमीन खरीद लेते
हैं। पिछले दिनों ढाई गुना कीमत पर जमीन बिक रही थी, मंगलवार को मुआवजे
के बराबर भी खरीददार नहीं मिला।
-अशोक कुमार (ग्रेटर नोएडा)
-Amar Ujala
2012/5/9 pk gogia <pk.g...@gmail.com>:
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जेवर में अब नहीं बनेगा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, प्रस्ताव रदलखनऊ। मायाराज में जिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार
से अनुमति दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने कई बार पत्र लिखे। उस प्रोजेक्ट
को नई सरकार ने निरस्त कर दिया है। अब उसकी योजना पीपीपी प्रोजेक्ट के
आधार पर आगरा व मथुरा के बीच नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की हैै।इसके लिए जमीन तलाशने का काम शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री अखिलेश के लिए
आगरा एयरपोर्ट बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट है।नई सरक ार ने कुशीनगर एयरपोर्ट के
प्रस्तावित लागत घटा कर 600 करोड़ से घटाकर लगभग आधी कर दी है।असल में ग्रेटर नोएडा के नजदीक जेवर एयरपोर्ट बनाने के मायावती के
प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी। हालांकि बसपा महासचिव सतीश
चंद्र मिश्र के नेतृत्व में पार्टी सांसदों ने संसद में इससे संबंधित
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लेकिन बात नहीं बनीं। नागरिक उड्डययन मंत्रालय के मुताबिक डेढ़ सौ किमी
के दायरे में दो इंटरनेशनल एयरपोर्ट नहीं हो सकते हैैं।दिल्ली का इंदिरागांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक होने के कारण जेवर के
प्रोजेक्ट को अनुमति नहीं मिली। अब माना जा रहा है कि आगरा के प्रस्तावित
एयरपोर्ट को मंजूरी मिल जाएगी। औद्योगिक विकास आयुक्त अनिल कु मार गुप्ता
ने कहा कि जेवर के प्रोजेक्ट का औचित्य नहीं पाया गया इसलिए शासन ने इसे
प्रोजेक्ट को रद करने का निर्णय लिया है। दूसरी तरफ औद्योगिक विकास विभाग
ने खनन विभाग में ई-टेंडरिंग के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। पिछली
सरकार ने ई-टेंडरिंग शुरू तो की थी लेकिन कुछ समय बाद इसे निरस्त कर दिया
गया था।•कुशीनगर व आगरा के इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पर ही जोर
•आगरा-मथुरा के बीच एयरपोर्ट के लिए जमीन तलाशने का काम शुरूजेवर के प्रोजेक्ट का औचित्य नहीं पाया गया इसलिए शासन ने इसे प्रोजेक्ट
को रद करने का निर्णय लिया है। दूसरी तरफ औद्योगिक विकास विभाग ने खनन
विभाग में ई-टेंडरिंग के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। पिछली सरकार ने
ई-टेंडरिंग शुरू तो की थी लेकिन कुछ समय बाद इसे निरस्त कर दिया गया था।
-अनिल कुमार गुप्ता, औद्योगिक विकास आयुक्त
कहां तक पहुंचा था प्रोजेक्ट
1993 में जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया
35 गांवों की जमीन ली जानी थी, एक दर्जन गांवों को स्थानांतरित करना था
यमुना प्राधिकरण ने जमीन चिह्नित कर ली थी और अपने मैप में भी इसे
दर्शाया
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2012/5/10 kishan singh <youc...@gmail.com>: