ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेस वे के संस्थागत आवंटी चाहकर भी अपने भूखंड
की रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे। उन्हें आवंटन पत्र मिले छह माह पूरे होने
वाले हैं। छह माह के अंदर रजिस्ट्री न होने पर आवंटियों को जिलाधिकारी के
सर्किल रेट पर रजिस्ट्री करानी पड़ेगी, इससे स्टांप खर्च तीन गुना बढ़
जाएगा।
यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने एक्सप्रेस-वे के किनारे
दो विश्वविद्यालय समेत विभिन्न शिक्षण संस्थाओं को करीब तीन दर्जन प्लॉट
आवंटित किए हैं। नियम है कि भूखंड आवंटन के छह माह के अंदर रजिस्ट्री
करानी होगी। छह माह के अंदर रजिस्ट्री कराने पर प्राधिकरण के आवंटन दर पर
स्टांप शुल्क देना पड़ता है। इसके बाद रजिस्ट्री कराने पर जिलाधिकारी के
सर्किल रेट पर स्टांप शुल्क देना पड़ता है। इससे तीन गुणा स्टांप शुल्क
बढ़ जाएगा। प्लॉटों की रजिस्ट्री होने से यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण
को आवंटियों से करीब सौ करोड़ रुपये मिलने हैं। बीस व 24 सितंबर तक
आवंटियों को आवंटन पत्र दिए छह माह पूरे हो जाएंगे। जिन गांवों की जमीन
प्राधिकरण ने आवंटित किया है, उनके किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ
हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता,
भूखंड की रजिस्ट्री कराई नहीं जा सकती। इसे लेकर प्राधिकरण विधिक राय ले
रहा है।
अधिग्रहण के विरोध के बीच जमीन देने वाले भी कम नही
ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में
पिछले एक वर्ष से जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आंदोलन चल रहा
है। किसान प्राधिकरण पर जबरन जमीन अधिग्रहण का आरोप लगा रहे हैं। भट्टा-
पारसौल समेत कई जगह प्रशासन व किसानों के बीच टकराव हो चुका है। दूसरी
तरफ यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के मूंजखेड़ा, मिर्जापुर, रूस्तमपुर,
रबूपुरा, अच्छेजा बुजुर्ग, ऊंची दनकौर, अट्टा गुजरान व ग्रेटर नोएडा
क्षेत्र के पल्ला, जुनपत, जारचा, धीर खेड़ा, खटाना, धनुबास, पाली, खोदना
आदि गांवों के करीब एक हजार किसान प्राधिकरण को करार नियमावली के तहत
अपनी जमीन दे चुके हैं। इन किसानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया,
बल्कि किसानों ने प्राधिकरण के पक्ष में सीधी रजिस्ट्री की है। सूत्रों
के अनुसार, करार नियमावली के तहत जमीन की रजिस्ट्री का प्रावधान है।
इसमें समय की बचत होती है और किसानों को जल्दी पैसा मिल जाता है।
सीईओ से मिले किसान
नोएडा एक्सटेंशन के पतवाड़ी, बिसरख, हैबतपुर व इटेड़ा गांव के किसानों ने
सोमवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन से मुलाकात की।
किसानों ने कहा कि वे हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिकाओं को वापस ले
लेंगे, लेकिन पहले प्राधिकरण को किसानों की आबादी छोड़ने का शपथ पत्र
देना होगा।
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_8235946.html
On Sep 20, 7:43 am, Harpreet Singh Guller <harpreetsg.de...@gmail.com>
wrote: