ग्रेटर नोएडा। जेपी ग्रुप द्वारा बनाया जा रहा यमुना एक्सप्रेसवे देश का
सबसे आधुनिक हाइवे होगा। सड़क निर्माण में आठ परतें बिछाई जा रही हैं और
मानकर चला जा रहा है कि अगले 50 वर्ष तक हाइवे जैसा का तैसा बना रहेगा।
यही नहीं ग्रेटर नोएडा से आगरा तक करार में मात्र 80 ओवरब्रिज/अंडरपास
बनाने थे, लेकिन लोगों की सहुलियतों के चलते इनकी संख्या 250 कर दी गई
है।
निर्माण एजेंसी सूत्र के अनुसार ग्रेटर नोएडा से लेकर जेवर तक 40
किलोमीटर और आगरा से लेकर मथुरा 60 किलोमीटर का रास्ता दिसंबर 2009 तक
चालू कर दिया जाएगा। चंूकि पुलों के निर्माण में जल्दीबाजी नहीं की जा
सकती है, इसलिए जिस स्थान पर पुल बन रहे हैं वहां पर वाहनों के लिए
सर्विस रोड का रास्ता तैयार कर लिया गया है। सड़क निर्माण में आठ परतों
का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो भारत में अभी प्रयोग नहीं हुआ है और
ग्रुप ने विश्व की बेहतरीन तकनीकी का प्रयोग किया है। यही कारण है कि जब
योजना तैयार हुई थी तो इसका खर्च 2500 करोड़ रुपये था, लेकिन अब बढ़कर
9900 करोड़ रुपये हो गया है।
क्वालिटी से समझौता नहीं
सूत्रों ने बताया कि ग्रुप के लिए अग्नि परीक्षा है। कॉमनवेल्थ गेम्स तक
रोड चालू होना है। विदेशी मेहमान जब दिल्ली के रास्ते से यमुना हाइवे
होते हुए आगरा ताजमहल देखने जाएंगे तो वह देश की सबसे बेहतरीन सड़क को
देखेंगे। जमीन से सड़क ऊंची बनाई जा रही है ताकि भविष्य में कोई दिक्कत न
हो।
पैकेज में बांटकर आधुनिक तकनीकी का प्रयोग
ग्रेटर नोएडा से लेकर आगरा तक 16 भागों में बांटकर 55-55 किलोमीटर के तीन
पैकेज बनाए गए हैं। प्रत्येक पैकेज में इंजीनियरों की टीम काम कर रही है।
कुल 1193 गांव की जमीन लेकर 2.57 लाख हेक्टेयर जमीन पर पूरा यमुना
प्राधिकरण विकास कराएगा। यमुना नदी और जीटी रोड के बीच करीब 15 किलोमीटर
चौड़ाई में विभिन्न परियोजनाएं लाई जाएंगी।
खर्च टोल टैक्स वसूलकर निकलेगा
जेपी ग्रुप भारी भरकम राशि खर्च करके हाइवे तैयार कर रहा है। इसका खर्च
36 साल तक टोल टैक्स लेकर वसूला जाएगा। इसके अलावा हाइवे निर्माण के एवज
में जगनपुर-मिर्जापुर में 500-500 हेक्टेयर और नोएडा में 1000 हेक्टेयर
जमीन भी दी गई है। जिसमें ग्रुप अपनी मर्जी से योजनाएं ला रहा है। इसके
अलावा हाइवे पर स्थित फार्मूला वन का निर्माण भी जेपी ग्रुप ही कर रहा
है। प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण भी ग्रुप ही करेगा।
2013 तक ही पूरा हो सकेगा निर्माण
भले ही हाइवे अक्तूबर 2010 से आंशिक रूप से चालू कर दिया जाए लेकिन पूर्ण
रूप से तैयार होने में 2013 लग जाएगा। इसके पीछे कारण है कि विभिन्न
स्थानों पर पुलों का निर्माण जल्दीबाजी में नहीं किया जा सकता है। ग्रुप
चाहता है कि हाइवे बनने के बाद 36 साल तक उसे दोबारा से कुछ न करना पड़े।
प्रयास किया जा रहा है कि 165 किलोमीटर लंबे हाइवे के पास पडऩे वाले गांव
वासियों को इधर-उधर जाने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
हाइवे पर नहीं होगा कोई कट
ग्रेटर नोएडा से आगरा तक रास्ते में कोई कट नहीं होगा। छह लेन वाली 100
मीटर चौड़ी सड़क पर वाहनों की रफ्तार 150 किलोमीटर तक होगी। इस बात का भी
ख्याल रखा गया है कि हाइवे पर ’यादा मोड़ न हों, समतल हो, ऊंचा-नीचा न
हो।