यमुना प्राधिकरण ने बनाई भूखंड ट्रांसफर की नई नीति
Nov 28, 11:23 pm Printग्रेटर नोएडा, संवाददाता : यमुना एक्सप्रेस-वे
आवासीय योजना के आवंटियों के लिए एक और खुशखबरी है। प्राधिकरण ने भूखंडों
की रजिस्ट्री किए बिना ही दूसरी पार्टी के नाम उसका ट्रांसफर करने की
सुविधा को हरी झंडी दे दी है। इसकी एवज में प्राधिकरण मात्र ढाई प्रतिशत
ट्रांसफर शुल्क वसूलेगा। भूखंडों का ट्रांसफर खुलने से न केवल खरीद
फरोख्त में बेईमानी की आशंका समाप्त हो जाएगी। बल्कि आवंटी और खरीददार
दोनों को फायदा होगा। नोएडा व ग्रेटर नोएडा में प्रथम आवंटी को भूखंड की
रजिस्ट्री होने तक उसको दूसरी पार्टी के नाम ट्रांसफर करने का नियम नहीं
है।
यमुना प्राधिकरण ने सेक्टर 18 व 20 में तीन सौ से चार हजार वर्ग मीटर तक
के 21 हजार भूखंडों का आवंटन किया है। जिन लोगों के लाटरी में भूखंड नहीं
निकले है। वे अब बाजार से भूखंड खरीद रहे है। वर्तमान नियम के अनुसार
प्रथम आवंटी को भूखंड की रजिस्ट्री होने तक भूखंड को दूसरी पार्टी के नाम
ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। भूखंड की रजिस्ट्री प्राधिकरण द्वारा उस पर
कब्जा दिए जाने के बाद होती है। यमुना प्राधिकरण चार वर्ष बाद भूखंडों पर
आवंटियों को कब्जा देगा। यानि वर्तमान नियम के अनुसार प्रथम आवंटी चार
वर्ष बाद ही भूखंड को दूसरी पार्टी को बेच सकते थे। इस दौरान लोग जीपीए व
पट्टा प्रलेख के द्वारा खरीद फरोख्त करते है। इसमें बेईमानी होने की अधिक
संभावना रहती है। प्राधिकरण ने इन दिक्कतों को देखते हुए अपने यहां प्रथम
आवंटी को बिना रजिस्ट्री कराए ही दूसरी पार्टी के नाम भूखंड का ट्रांसफर
करने का नया नियम बनाया है। चेयरमैन ललित श्रीवास्तव के छुट्टी से लौटते
ही इसको लागू कर दिया जाएगा। इसकी एवज में प्राधिकरण आवंटियों से ढ़ाई
प्रतिशत का ट्रांसफर शुल्क वसूलेगा। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह
नियम एक निश्चित समय के लिए किया जाएगा। समय कितना होगा। यह चेयरमैन
निर्धारित करेंगे।