जस्टिस अल्तमस कबीर नीत बेंच के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत ने
तर्क दिया कि जनहित में सड़क बनाने के लिए राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण
अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचना जारी की। बाद में पता चला कि सड़क बनाने के
नाम पर यह जमीन टाउनशिप के लिए निजी कंपनी को दी जा रही है। उनके मुवç1कल
की 3.342 हे1टेयर भूमि इंटरचेंज लूप निर्माण के लिए अधिग्रहीत कर ली गई।
उन्होंने कहा कि सड़क और उससे संबंधित जरूरतों के लिए भूमि अधिग्रहीत करना
तो ठीक है, लेकिन किसानों से अतिरि1त जमीन अधिग्रहीत कर निजी कंपनी को
फायदा पहुंचाना गलत है। बेंच ने मामले में राज्य सरकार सहित तमाम पक्षों
से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
मामला 1या है ज् उप्र सरकार ने गौतमबुद्ध नगर से आगरा तक जाने वाले यमुना
ए1सप्रेस-वे पर पांच व्यावसायिक, औद्योगिक व रिहायशी टाउनशिप विकसित करने
का निर्णय लेते हुए इसके लिए 2003 में एक निजी कंपनी से अनुबंध किया था।
इसके बाद सड़क बनाने के नाम पर भूमि अधिग्रहण के लिए राज्य सरकार ने
अधिसूचनाएं जारी की थीं।