एक्सप्रेस वे पर सर्दी में भी पसीने

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umesh

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Nov 26, 2009, 10:54:34 PM11/26/09
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http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_5964788.html
आगरा । यमुना एक्सप्रेस वे प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का ड्रीम
प्रोजेक्ट है। परंतु यह सपना अभी अधूरा दिखायी देता है। स्थिति यह है कि
एक्सप्रेस वे और सिटी के लिए करीब 700 हेक्टेअर भूमि अधिग्रहीत कर ली गयी
है लेकिन किसान इसका कब्जा देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में तीन सौ करोड़
रुपये की मुआवजा राशि झोली में होने के बाद भी कार्य की गति धीमी हो चुकी
है। करीब 500 किसानों ने अधिग्रहण के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की
है। अधिकांश को स्टे भी मिल चुका है। जो अब सर्दी में भी अधिकारियों के
पसीने छुड़ाता दिखायी दे रहा है।

नोएडा से आगरा तक प्रस्तावित फर्राटा मार्ग यमुना एक्सप्रेस वे के
निर्माण को 159.3 हेक्टेअर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। एत्मादपुर
तहसील में ही इसी प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य कार्यो के तहत फैसिलिटी सेण्टर
के लिए 8.5 हेक्टेअर, इण्टरचेंज के लिए 21.88 हेक्टेअर, टोल प्लाजा के
लिए 22.05 हेक्टेअर भूमि अधिग्रहीत हुई है। इसमें से करीब 80 फीसदी जमीन
का कब्जा मिल चुका है और किसानों को उसका मुआवजा वितरित हो गया है। इण्टर
चेंज और टोल प्लाजा निर्माण में जमीन के भौतिक कब्जे और मुआवजे की प्रगति
20 फीसदी तक पहुंचा पायी है। एक्सप्रेस सिटी के लिए लैण्ड फॉर डेवलपमेंट
के तहत 491.125 हेक्टेअर भूामि का अधिग्रहण हो चुका है लेकिन भौतिक कब्जा
सिर्फ 26 हेक्टेअर जमीन का ही मिल सका है। इस कारण एक्सप्रेस सिटी के लिए
प्रस्तावित मुआवजा धनराशि 223 करोड़ में से अभी 151.59 करोड़ वितरित होना
बाकी है। प्रशासन ने करीब 446 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से जमीन का
मुआवजा तय किया है। जिसे किसानों ने कम मानते हुए अधिग्रहण के खिलाफ
हाईकोर्ट में याचिका की हैं। करीब पांच सौ किसानों द्वारा परस्पर मिलकर
25 याचिकाएं उच्च न्यायालय में दाखिल की गयी हैं। इनमें 20 याचिकाएं
एक्सप्रेस सिटी को लेकर हैं तो दो एक्सप्रेस वे और अन्य कार्यो की जमीन
के खिलाफ हैं। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक सिटी के लिए लैण्ड फॉर
डवलपमेंट में अधिग्रहीत 491 हेक्टेअर भूमि में से 185 हेक्टेअर भूमि पर
हाईकोर्ट का स्टे है। कुछ किसान ऐसे हैं, जिनकी याचिका पर अभी न्यायालय
ने कोई स्टे जारी नहीं किया। इन याचिकाओं में शासन और प्रशासन के साथ
जेपी ग्रुप को भी हाईकोर्ट में पार्टी बनाया है। इन प्रकरणों में उच्च
न्यायालय के समक्ष प्रति शपथ पत्र दाखिल कराने को एडीएम भूमि अध्याप्ति
वीके सिंह एक सप्ताह तक इलाहाबाद में डेरा जमाए रहे। शासन के निर्देश पर
सभी स्थगनादेश को वापस कराने के लिए प्रबल पैरवी की जा रही है।

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