बुन्देली में जल का महत्व

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Nai Azadi

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Jun 13, 2010, 11:08:41 PM6/13/10
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बुन्देली में जल का महत्व

Author: 
डॉ ओमप्रकाश चौबे, सुरेश मालवीय
अनादिकाल से मनुष्य के जीवन में नदियों का महत्व रहा है। विश्व की प्रमुख संस्कृतियाँ नदियों के किनारे विकसित हुई हैं। भारत में सिन्धु घाटी की सभ्यता इसका प्रमाण है। इसके अलावा भारत का प्राचीन सांस्कृतिक इतिहास भी गंगा, यमुना, सरस्वती और नर्मदा तट का इतिहास है। ऐसा माना जाता है कि सरस्वती नदी के तट पर वेदों की ऋचायें रची गईं, तमसा नदी के तट पर क्रौंच-वध की घटना ने रामायण संस्कृति को जन्म दिया। आश्रम संस्कृति की सार्थकता एवं रमणीयता नदियों के किनारे पनपी और नागर सभ्यता का वैभव नदियों के किनारे ही बढ़ा। बड़े से बड़े धार्मिक अनुष्ठान के अवसर पर सभी नदियों का स्मरण करने की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है।

गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेSस्मिन सन्निधं कुरू।।


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सिराज केसर
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