चंबल में घड़ियालों के खेलते बच्चेवन्यजीव प्रेमियों के लिए चंबल सेंचुरी क्षेत्र से एक बड़ी खुशखबरी आई है। चंबल के किनारों पर नए मेहमानों यानी घड़ियालों के सैकड़ों बच्चों की तादात देखने को मिल रही है। देश-विदेश के वन्यजीव प्रेमियों के खुशी का पारावार नहीं है। पर दुख की बात यह है कि लापरवाही और शिकार की वजह से चंबल सेंचुरी में घड़ियालों के सैकडों बच्चों की जान मुश्किल में है।
इन बच्चों को दो-दो यमराजों का मुकाबला करना पड़ रहा है एक यमराज शिकारी हैं तो दूसरा यमराज लापरवाह और भ्रष्ट सेंचुरीकर्मी। चंबल नदी के किनारे छोटे-छोटे से पानी के पांडों में घड़ियालों के बच्चे अपनी जान के लिये संघर्ष करते हुये नजर आ रहे हैं क्योंकि सेंचुरी अधिकारियों की लापरवाही के चलते इन बच्चों के भविष्य पर अंधकार ही मड़राता हुआ दिख रहा है।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश राज्य में सेंचुरी का संचालन होता है जिसके मुताबिक चंबल नदी में घड़ियालों, मगर, डाल्फिन, कछुये के अलावा करीब दौ सौ से अधिक प्रजाति के वन्य जीवों का संरक्षण मिला हुआ है