जीडी अग्रवाल का आमरण अनशन सातवें दिन भी जारी

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Nai Azadi

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Jul 26, 2010, 2:34:36 AM7/26/10
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जीडी अग्रवाल का आमरण अनशन सातवें दिन भी जारी

Source: 
इंडिया वाटर पोर्टल टीम



मातृ सदन, हरिद्वार। 26 जुलाई 2010। प्रख्यात पर्यावरणविद् और वैज्ञानिक प्रोफेसर जीडी अग्रवाल जी का आमरण अनशन आज सातवें दिन भी जारी है। प्रो. जीडी अग्रवाल जी का छोटा सा संकल्प है कि ‘गंगोत्री से लेकर धरासू तक 130 किलोमीटर गंगा को उसी रुप में रहने दो। ताकि आने वाला पीढ़ी इस गंगा को देख के समझे कि यही गंगा हमारे भारतवर्ष में बहती थी।‘ आज सरकार उसे भी नष्ट करने पर तुली है। इस संकल्प के साथ वे दो बार और अनशन कर चुके हैं। 

स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि गंगा भारती संस्कृति का आधार और विश्व के आस्था का केन्द्र है। लोहारी नागपाला को हम किसी कीमत पर बनने नहीं देंगे। संत समिति और गंगा महासभा सरकारों के इस प्रयास का पुरजोर विरोध करेंगे। 



दीना का प्रेमवन

वेब/संगठन: 
raviwar com
Source: 
रोली शिवहरे और प्रशांत दुबे रीवा से लौटकर

उसे यह नहीं मालूम है कि कोपेनहेगन में गरम हो रही धरती का ताप कम करने के लिये कवायद चली। उसे यह भी नहीं मालूम कि दुनिया भर से जंगल कम हो रहा है और उसे बचाने व नये सिरे से बसाने के प्रयास चल रहे हैं। उसे यह भी नहीं मालूम कि यदि जंगल बच भी गया तो उस पर कंपनियों की नज़र गड़ी है।

उसे मालूम है तो इतना कि पेड़ कैसे लगाये जायें और उन्हें कैसे बचाया जाये। पेड़ बचाने की धुन भी ऐसी कि एक छोटा जंगल ही लगा डाला। उसे नागर समाज की वन की परिभाषा भी नहीं मालूम लेकिन उसने बसा दिया ‘प्रेम वन’। दीना ने वन क्यों लगाया ? इस पर मंद-मंद मुस्कराते हुये बड़े ही दार्शनिक अंदाज में वे कहते हैं “ जीवन में किसी न किसी से तो मोहब्बत होती ही है, मैंने पेड़ों से मोहब्बत कर ली।” दीना ने तभी तो इस वन का नाम रखा है ‘प्रेमवन ’। 



गोमुख से गंगासागर तक पदयात्रा पर एक संन्यासी


Author: 
चौथी दुनिया
आचार्य नीरजआचार्य नीरजयदि यह पदयात्रा किसी नेता या अभिनेता की होती अथवा कोई रथयात्रा हो रही होती तो मीडिया इसकी पल-पल की जानकारी दे रहा होता, किंतु यह यात्रा एक संन्यासी कर रहा है, लिहाजा इसकी कहीं चर्चा नहीं हो रही, गोमुख से गंगासागर तक किनारे-किनारे पूरे ढाई हज़ार किलोमीटर लंबे मार्ग पर सर्दी, लू के थपेड़ों और बरसात के बीच इस संन्यासी की पदयात्रा गंगा की निर्मलता के लिए हो रही है। वह भी ऐसे मार्ग पर, जो कभी पारंपरिक यात्रा पथ नहीं रहा। कई स्थानों पर तो दूर-दूर तक सड़क ही नहीं है। 

उत्तर भारत की जीवन रेखा मानी जाने वाली गंगा नदी इन दिनों दोहरी मार झेल पही है। एक और व


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सिराज केसर
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