समझें नियम:
कुछ लोग भ्रम फैलाते हैं कि रात 10 बजे के बाद धीमी आवाज में लाउडस्पीकर बजाया जा सकता है जबकि यह सरासर झूठ है। शादी-विवाह हो या धार्मिक कार्यक्रम, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पटाखा, डीजे, बैंड, मशीन, हार्न, लाउडस्पीकर आदि को पूरी तरह से,100% स्विच ऑफ करने का नियम है और दिन के दौरान आवाज को धीमा रखने का कानूनी प्रावधान है। दिन के दौरान, सीमित घंटे के लिए लाउडस्पीकर बजाने के लिए भी मजिस्ट्रेट और स्थानीय थाने से अग्रिम में लिखित अनुमति (Permission Letter) लेनी पड़ती है। बिना लिखित अनुमति के या फिर अनुमति के बाद भी डेसीबल सीमा या समय सीमा का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 (Environment Protection Act-1986) के तहत मुकदमा किया जा सकता है। ध्वनि प्रदूषण (विनियमन व नियंत्रण) नियम- 2000 - Noise Pollution (Regulation and Control) Rules-2000 के अनुसार, शोर को कंट्रोल करने के लिए पुलिस को असीमित शक्तियां दी गयी हैं। दिन हो या रात, स्कूल-अस्पताल-कचहरी-पूजा स्थलों या अन्य नोटिफाइड स्थलों के 100 मीटर के दायरे में कोई भी शोर, यहाँ तक कि स्कूटर/बाइक का हार्न बजाना भी जुर्म है। किसी भी शहर या गाँव में कोई ऐसा स्थान नहीं है जहाँ पर स्कूल-अस्पताल-कचहरी-पूजा स्थल आदि न हों, लिहाजा दिन हो या रात, सड़क पर बैंड-बाजा, पटाखा, डी.जे. या लाउडस्पीकर बजाना बिल्कुल गलत है। दोषियों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम -1986 के तहत मुकदमा होने पर 1 लाख रुपये तक जुर्माना या 5 वर्ष तक की जेल या एक साथ दोनों सजा हो सकती है।
(चेतन उपाध्याय)
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