Appeal to CM of UP to control NP - Satya Foundation.

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melroy fernandes

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Jun 20, 2023, 2:07:15 AM6/20/23
to Volumekamkar6 On Behalf of Melroy Fernandes
----- Forwarded message -----
From: Satya Foundation <satyafoun...@gmail.com>
Sent: Monday, 19 June, 2023 at 06:50:07 pm IST
Subject: सड़क पर डी.जे. और मस्जिद-मंदिर के लाउडस्पीकर पर प्रभावी नियंत्रण हेतु मुख्यमंत्री, श्री योगी आदित्यनाथ जी को पत्र



इण्डियन सोसायटी एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत; पंजीकरण संख्या : 741 / 2000        
    सत्या फाउण्डेशन  
डाक का पता: बी-14, विराट विला एपार्टमेण्ट, हर्ष गैस के पास, महमूरगंज, वाराणसी
    ई-मेल: satyafoun...@gmail.com   मोबाइल: 9212735622  


दिनांक: 19-06-2023 

सेवा में 
श्री योगी आदित्यनाथ जी 
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश 

परम आदरणीय श्री योगी आदित्यनाथ जी,

सादर प्रणाम। आशा करता हूँ कि आप स्वस्थ और प्रसन्न होंगे। आपको बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारी संस्था 'सत्या फाउंडेशन' द्वारा ध्वनि प्रदूषण के विविध आयामों और कानूनी रोकथाम को लेकर वर्ष 2008 से लगातार अभियान चलाया जा रहा है।  इसके लिए हमने कभी भी सरकार या कारपोरेट या विदेश से कोई धन नहीं लिया है। हमने ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों की शिक्षण संस्थाओं, पुलिस लाइन्स और पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में कार्यशालाओं और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया है और शोर से परेशान आम जनता के लिए 'सत्या फाउंडेशन' द्वारा निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर 9212735622 का संचालन भी किया जाता है।  साथ ही हिन्दू और मुस्लिम - दोनों ही प्रमुख धर्मों के शोर के खिलाफ ढेरों मुकदमे दर्ज कराये हैं।  

महोदय, आपको याद दिलाना चाहूँगा कि किसी ज़माने में जब आप गोरखपुर के सांसद थे तो आपने कहा था कि ये तुष्टीकरण करने वाली सरकारें, ध्वनि प्रदूषण कानून का क्या पालन करायेंगी? फिर एक समय ऐसा आया जब आपने शोर पर ऐतिहासिक लगाम लगाई और देश के सभी मीडिया में आपके कार्यों की खुल कर सराहना हुई और फिर अप्रैल, 2022 में भारत देश के सबसे बड़े समाचार चैनल दूरदर्शन समाचार पर 1 घंटे के प्राइम टाइम शो में मुझे 'सत्या फाउंडेशन' के सचिव के रूप में बोलने का मौक़ा मिला और हमने मस्जिद और अन्य धार्मिक स्थलों में शोर पर सम्पूर्ण नियंत्रण के लिए योगी मॉडल की खुल कर तारीफ की मगर सनद रहे कि 2017 में सत्ता में आने से लेकर जून 2023 के बीच (बस अप्रैल और मई 2022 के उन कुछ सप्ताहों को छोड़ कर), मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों का शोर वैसे ही जारी है और पहले की सरकारों की तरह सड़कों, लानों और गांवों में, कानफाडू शोर जारी है और अब कुछ ही दिन बाद सनातन धर्म को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे ढोल, शहनाई और मजीरा की बजाय, 1 स्पीकर बाक्स वाला डी.जे., सावन में पूरे 1 महीने तक उत्तर प्रदेश की जनता को 24 घंटे, दिन-रात, प्रताड़ित करेगा। सड़कों के किनारे स्थित घरों और दुकानों के खिड़की-दरवाजे हिलेंगे। शायद आपको न पता हो मगर जब डी.जे. वाला धार्मिक जूलूस सड़क पर चलता है तो सड़कों के किनारे स्थित अस्पतालों के मरीज और उनके परिजनों द्वारा सरकार और सिस्टम के खिलाफ जिन (अप) शब्दों का प्रयोग किया जाता है, उसे यहाँ लिख पाना असंभव है।

महोदय, जब ध्वनि प्रदूषण कानून में यह बात जोड़ी जा चुकी है कि शोर को रोकने का कार्य पुलिस भी कर सकती है तो ये बात भी समझ से परे है कि कानून के रखवाले के रूप में आप अपने सभी थानेदारों और चौकी प्रभारियों को डेसीबल मीटर से लैस क्यों नहीं करते? रात 10 से सुबह 6 के बीच 100% स्विच आफ का कानून है मगर दिन के लिए भी डेसीबल सीमा है। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि 1 स्पीकर बाक्स वाला डी.जे. भी सीमा से बहुत अधिक शोर कर सकता है और ऐसा होने पर बवाल होना तय है और यह सब बातें मीडिया के माध्यम से आये दिन सामने आ रही हैं।

मुख्यमंत्री महोदय, सुप्रीम कोर्ट ने डी.जे. को जो अनुमति दी है वह सशर्त अनुमति दी है। एक निश्चित सीमा से ऊपर वाला डी.जे. केवल साउंड प्रूफ सभागार में ही बजाया जा सकता है। कानून यह भी कहता है कि दिन हो या रात - आप शांत क्षेत्र (Silence Zone) यानी अस्पताल, स्कूल, कचहरी और पूजा-इबादत स्थलों के 100 मीटर के दायरे में बैंड-बाजा, पटाखा, डी.जे., लाउडस्पीकर, ट्रक-बस, स्कूटर- मोटरसाईकिल - स्कूटी का हार्न आदि भी नहीं बजा सकते। शांत क्षेत्र (Silence Zone) में यह सब 100% प्रतिबंधित है और दोषी के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम- 1986 के अंतर्गत मुकदमा और 1 लाख रूपये तक का जुर्माना या 5 साल तक की जेल या एक साथ दोनों सजा हो सकती है। माननीय मुख्यमंत्री जी, अब जरा आप ही सोच कर बताइये कि ऐसी कौन सी सड़क है जिसके 100 मीटर के दायरे में अस्पताल-नर्सिंग होम / स्कूल-कालेज-विश्वविद्यालय/ कचहरी/मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा-गिरिजाघर (Silence Zone) नहीं हो? तो फिर सड़क पर धार्मिक जुलूस में शोर शराबा करके आम जन जीवन को खतरे में डालने वाली तालिबानी संस्कृति पर आप पूर्ण विराम क्यों नहीं लगाते ?

आदरणीय मुख्यमंत्री जी, यह भी बताना चाहूँगा कि धार्मिक स्थलों के अंदर लाउडस्पीकर पर नियंत्रण को लेकर आपकी मशीनरी बिल्कुल गंभीर नहीं है और कानून की मनमाने ढंग से व्याख्या की जा रही है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार किसी भी मस्जिद-मंदिर या धार्मिक स्थल में रात 10 से सुबह 6 के बीच, लाउडस्पीकर को 100% स्विच आफ करने का कानून है और दिन के दौरान यानी सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच भी लाउडस्पीकर की ध्वनि धार्मिक स्थल के अंदर तक ही सीमित रहना चाहिए। दिन के दौरान भी स्पीकर की ध्वनि को धार्मिक स्थल के भीतर सीमित रखने के लिए माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनवरी 2012 में आदेश दिया है कि लाउडस्पीकर की ऊंचाई जमीन से अधिकतम 8 फ़ीट ही हो सकती है और स्पीकर बॉक्स का मुंह अंदर की तरफ होना चाहिए। महोदय, 'सत्या फाउंडेशन' का आपसे आग्रह है कि व्यापक जन हित में उक्त आदेश को पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाये।

मुख्यमंत्री महोदय, मजहब नहीं सिखाता लाउडस्पीकर बजाना। डी.जे. और लाउडस्पीकर आने से पहले भी धर्म था और आगे भी पारम्परिक वाद्य यंत्रों के उपयोग से हमारा धर्म और ज्यादा मजबूत होता रहेगा। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में शोर के खिलाफ जो ऐतिहासिक फैसला दिया था, उसके मूल में वह बलात्कार पीड़िता थी जिसके घर के पास बज रहे तेज लाउडस्पीकर के शोर में उस पीड़िता की चीख की आवाज दब गयी थी। महोदय, शादी विवाह, धार्मिक कार्यक्रम और धार्मिक जुलूस में तेज ध्वनि प्रदूषण के चलते हिंसा और प्रतिहिंसा में आये दिन होने वाले बवाल और हत्याओं के प्रदेश, उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में आम जनता के बीच जाकर लोगों को समझाना चाहिए कि धर्म और परम्परा की आड़ में तेज शोर के चलते धर्म की गरिमा खंडित और धूल धूसरित हो रही है। आपको जनता के बीच जाकर समझाना चाहिए कि कोई भी धर्म, खिड़की-दरवाजे हिलवा कर लोगों में अनिद्रा, बेचैनी, भय, हिंसा-प्रतिहिंसा और हत्या कराने वाले डी.जे. और स्पीकर की वकालत नहीं कर सकता। यह तो धर्म की आड़ में घोर पाप है जिसे रोक कर पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे ढोल, शहनाई और मजीरा के साथ बरात या धार्मिक जुलूस निकालने से सनातन धर्म और सनातन संस्कृति का झंडा बेहतर ढंग से पूरे उत्तर प्रदेश में लहराएगा।

आशा ही नहीं बल्कि अपितु पूर्ण विश्वास है कि आप हमारे पत्र में लिखी हुई बातों को सकारात्मक रूप से लेते हुए उचित कार्यवाही और दिशा निर्देश जारी करते हुए आम जनता को राहत देने का कार्य करेंगे।

(चेतन उपाध्याय)                 
संस्थापक सचिव
'सत्या फाउण्डेशन'
9212735622
Twitter: @chetanupadhyaya
Facebook Page: Chetan Upadhyaya 
YouTube: Satya Foundation Varanasi




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