श्रवण जी,
इस समूह को तो लगता है बंद ही करना पड़ेगा। क्यों कि यहाँ कोई वार्ता के लिए नहीं आ रहा है। आप सीधे मेरे ईमेल पते पर या फिर तीसरा खंबा पर समस्या को मेल कर दिया करें।
मैं इन दिनों बाहर था। आज ही लौटा हूँ।
पैतृक संपत्ति के मामले को संपूर्ण तथ्यों के बिना समझ सकना कठिन है। आप बताएँ कि दावा किस ने किया, क्या किया। संपत्ति किस की थी और जिस की संपत्ति थी उस के उत्तराधिकारी कौन कौन थे? वसीयत में क्या लिखा है और अधीनस्थ न्यायालय का निर्णय क्या है तो उत्तर देना आसान होगा।
-दिनेश
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दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
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