Krishna Kumari
unread,Nov 18, 2012, 1:08:16 AM11/18/12Sign in to reply to author
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HARI OM.....PUJYA BAPUJI KI SATSANG SE...
1.
"""""""""""""'मानव तन पाकर जो भवसागर नहीं तरता वह क्या कुत्ता होकर
तरेगा? बिल्ला होकर तरेगा? गधा होकर तरेगा कि घोड़ा होकर तरेगा? इन
योनियों में तो डण्डे ही खाने हैं।
घोड़ा बन गये। दिन भर गाड़ी खींची। रात को गाड़ीवान् ने पौवा (दारू) पी
लिया, नशा कर लिया। चारा-पानी देना भूल गया। नशे में चूर होकर पड़ा रहा।
आप सारी रात तड़पते रहे बिना चारा-पानी के। कई रातें ऐसी गुजरती हैं। तब
किसको शिकायत करेंगे? कौन हमें सुनेगा? किसको डाँटेगे? मूक होकर सहन करना
ही पड़ेगा। रात को भूखामरी हुई, जन्तु काटे, दिन को कौओं की चोंचें खाओ,
गाड़ीवान् के चाबुक खाओ और गाड़ी खींचो। ऐसी एक नहीं 84 लाख योनियाँ हैं।
कभी पौधे बन गये। माली ने पानी नहीं दिया तो सूख रहे हैं। बरसाती पौधे
बने। वर्षा ऋतु गई तो मुरझा रहे हैं तब क्या करेंगे?"""""""""""
2.
"""""परमात्मा को नहीं पाना हो तो परमात्मा कोई भाजी, मूली, पालक, तरकारी
तो हैं नहीं कि बिगड़ जायेंगे। इस जन्म में उन्हें नहीं पायेंगे तो माया
की थप्पड़ें खा-खाकर दस जन्मों के बाद, दस हजार जन्मों के बाद, दस करोड़
जन्मों के बाद भी परमात्मा को तो पाना ही पड़ेगा, आत्मज्ञानी होना ही
पड़ेगा। जायेंगी कहाँ? अपने अन्तर्यामी परमात्मा का दीदार तो करना ही
पड़ेगा। दुःखों से छूटने का और कोई चारा नहीं। इसी जन्म में
आत्म-साक्षात्कार कर लो। सौभाग्य है हमारा, हमारे माता-पिता का, हमारे
पूरे परिवार का।""""""""
::: FROM ""अलख की और"" BOOK (PUJYA BAPUJI)
HARI OM