Anunad Singh
unread,Mar 23, 2011, 2:52:45 AM3/23/11Sign in to reply to author
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वोहरा जी,
आपने यह नहीं लिखा कि चलाने पर क्या हो रहा है या क्या आ रहा है। क्या कुछ भी नहीं होते दिखा? क्या आपने फायरफॉक्स में इसे चलाया?
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मैं इसका यूनिकोडित रूप का कुछ अंश यहाँ नीचे दे रहा हूँ।
अन्य बैंक वित्तीय और गैर-वित्तीय सहायक संस्थाएं:
निवेशों को दीर्घावधि निवेश और वर्तमान निवेशों के रुप में वर्गीकृत किया जाता हैं और शासी प्राधिकरण और इंस्टिट्यूट औफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान द्वारा जारी निवेशों के लेखांकन लिए लेखा मानक (13 के रुप में) के अनुसार मूल्यांकित किया जाता है.
जीवन बीमा संयुक्त उद्यम:
बीमा अधिनियम, 1938, आईआरडीए (निवेश) विनियम, 2000 और आईआरडीए द्वारा इस संदर्भ में समय समय पर जारी विभिन्न अन्य परिपत्रों / अधिसूचनाओंं के अनुसार निवेश किए जाते हैं.
निवेशों को खरीद की तारीख को लागत पर दर्ज किया जाता है जिसमें उपचित ब्याज को छोड़ कर दलाली और कर, यदि कोई हों, शामिल किए जाते हैं.
वर्गीकरण:
तुलन पत्र की तारीख से बारह महीने के भीतर परिपक्व होने वाले निवेश और तुलन पत्र की तारीख से बारह महीनों में निपटाने के विशेष इरादे से किए गए निवेशों को अल्पकालिक निवेश के रुप में वर्गीकृत किया जाता हैं.
अल्पकालिक निवेशों के अलावा अन्य निवेशों को दीर्घकालिक निवेशों के रुप में वर्गीकृत किया जाता हैं.
मूल्यांकन- शेयरधारकों के निवेश और गैर-संबद्ध पौलिसीधारकों के निवेश
सभी ऋण प्रतिभूतियों को 'परिपक्वता तक धारित ' माना जाता है और तदनुसार परंपरागत लागत अंकित की जाती हैं जो सीधी रेखा के आधार पर परिपक्वता / धारिता अवधि के दौरान या राजस्व खाते या लाभ-हानि लेखे में प्रीमियम के परिशोधन अथवा छूट पर वृद्धि के अधीन है.
तुलन पत्र की तारीख को सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों को उनके उचित मूल्य पर अंकित किया जाता है जो नेशनल स्टौक एक्सचेंज ('एनएसई') पर अंतिम मूल्य (जो प्रतिभूतियां एनएसई में सूचीबद्ध नहीं हैं, उनके मामले में बौम्बे स्टौक एक्सचेंज ('बीएसई) पर अंतिम मूल्य )
होते हैं. म्यूचुअल फंड यूनिटों को तुलन पत्र की तारीख को पिछले दिन के शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य पर मूल्यांकित किया जाता है. सूचीबद्धता की प्रतीक्षा में इक्विटी शेयरों को परंपरागत मूल्य पर अंकित किया जाता है जो इस तरह के निवेश मूल्य के प्रत्येक निवेश के लिए अलग से निर्धारित किया गया है और जो मूल्य में कमी,यदि कोई हो, के लिए प्रावधान के अधीन है.
सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और म्युचुअल फंड यूनिट के न लिए गए लाभ / हानि के कारण हुए परिवर्तन को 'उचित मूल्य परिवर्तन खाते' में लिया जाता है और तुलनपत्र में आगे ले जाया जाता है.
7 डेरिवेटिव लेन देन:
बैंक:
(i) `बचाव'(हेज) के रुप में नामित लेनदेनों में :
क. डेरिवेटिव लेनदेनों पर भुगतानयोग्य/प्राप्य निवल ब्याज की गणना उपचय आधार पर की जाती है.
ख. हेज स्वैपों के अवधिपूर्व समाप्त होने पर किसी लाभ/हानि को स्वैप की शेष अनुबंधित अवधि या आस्ति/देयता की शेष अवधि, जो भी कम हो; के आधार पर तय किया जाता है.
ग. अंतर्निहित देयता में परिवर्तन से हेज लेनेदेनों को पुन: अभिनामित करने की गणना के लिए इसे एक हेज की समाप्ति और दूसरे का अर्जन माना जाता है.
घ. हेज करारों को तब तक बाजार मूल्य के अनुसार अंकित नहीं किया जाता है जब तक कि उसके अंतर्निहित को भी बाजार मूल्य ¨ेअनुसार अंकित नहीं किया जाता. बाजार मूल्य को बही में अंकित करने के मामले को हेज करारों के बाजार मूल्य में परिवर्तनों को लाभ एवं हानि खाते में दर्ज किया जाता है.
(ii) `क्रय-विक्रय' के रुप में नामित लेनदेनों में :
बकाया डेरिवेटिव लेनदेनों में, जिन्हें क्रय-विक्रय के लिए नामित किया गया है, ब्याज दर स्वैप, परस्परमुद्रा स्वैप, परस्परमुद्रा विकल्प एवं वायदा दर करार शामिल हैं; की उनके उचित मूल्य पर गणना की जाती है. इसके फलस्वरुप हुए लाभ/हानि को लाभ एवं हानि खाते में दिखाया जाता है. औप्शनों पर प्रीमियम को तुलन-पत्र की मद के रुप में दर्ज किया जाता है और इसे परिपक्वता/निरस्त होने पर लाभ-हानि लेखे में अंतरित कर दिया जाता है.
8.अचल आस्तियां एवं मूल्यह्रास:
बैंक:
अचल आस्तियों को जहां कहीं पुनर्मूल्यांकित किया गया हो, के अलावा परंपरागत लागत (संस्थापन लागत सहित) पर लिया जाता है. पुनर्मूल्यांकन पर यदि कोई वृद्धि हुई हो तो उसे `पुनर्मूल्यांकन रिजर्व' खाते में जमा किया जाता है. पुनर्मूल्यांकित आस्तियों के संबंध में पुनर्मूूल्यांकन के फलस्वरुप हुए अतिरिक्त मूल्य ह्रास को पुनर्मूल्यांकन रिजर्व से लाभ -
हानि लेखे में अंतरित कर दिया जाता है.
5000 रुपये से कम लागत की पृथक अचल आस्तियों पर उनके अर्जन के वर्ष में पूर्ण मूल्य ह्रास लगा दिया जाता है.
मूल्यह्रास परिवर्धन की तारीख से सीधी रेखा पद्धति (एसएलएम) द्वारा लगाया जाता है. कंपनी अधिनियम, 1956 की अनुसूची XIV में दी गयी मूल्यह्रास की दरों को न्यूनतम दरें माना जाता है. यदि प्रबंधन के अनुमान के अनुसार किसी आस्ति को अर्जित करते समय उस अचल आस्ति के अनुमानित जीवन काल या बाद में समीक्षा करने पर उसका शेष उपयोगी जीवनकाल कम हो जाता है तो प्रबंधन द्वारा उपयोगी जीवनकाल/बाकी उपयोगी जीवनकाल के अनुमान के आधार पर मूल्यह्रास की ऊंंची दर लगायी जाती है. इस नीति के चलते मूल्यह्रास का प्रावधान निम्नलिखित दरों के अनुसार किया गया है :