साथियो,सुरेन्द्र नाथ सांध्य कॉलेज कोलकाता में हिन्दी प्रोफेसर प्रेम शंकर त्रिपाठी जी कीआचार्य विष्णुकांत शास्त्री जी के परम प्रिय शिष्य रहे हैं।उनकी एक पुस्तकमानस अनुक्रमणिका है,रामचरित मानस अकारिद क्रम से है। सुधी जन उसका लाभ उठा सकते हैं।प्रो, त्रिपाठी कंप्यूटर तकनीक से अलग के साहित्यिक, आध्यात्मिक व्यक्ति हैं,कुमार सभा पुस्तकालय बड़ा बाजार उनकी पुस्तकेंछापता है एवं विपणन करता है।त्रिपाठी जी का संपर्क सूत्र है-9830613313क्या कुमार सभा एवं त्रिपाठी जी से संपर्क कर इस पुस्तक को आनलाइन किया जा सकता है,जिस किसी भी फांट मे ंवह किताब होगी, आशा है उसकी साफ्ट कॉपी कंप्यूटर में होगी और यदिउसे यूनीकोड में कनवर्ट किया जा सके तो अगला संस्करण यूनीकोड में प्रकाशित हो सकता हैऔर उसे नैट पर भी डाला जा सकता है।धार्मिक प्रवृत्ति के तकनीकी विशेषज्ञों की राय क्या है।सादर--2013/10/12 Nirmal Verma <nirmal...@gmail.com>
Dear Friends
Many many thanks to all of you for providing me information about ramcharitmanas.
With sincere regards
Nirmal Verma
On Oct 11, 2013 9:56 PM, "Shree Devi Kumar" <shree...@gmail.com> wrote:--Actually ramcharitmanas, dohaavali, kavitavali, vinaypatrika etc were encoded in iscii for a project under Ambaji and VineetJi at IIIT and converted to XDVNG font (1998-1999) and then to unicode (2000-2001) using ITRANS by me.The texts by Goswami Tulasidas were encoded in ISCII by a group of volunteers at Ratlam. The files were converted to ITRANS 5.21 encoding for creating this version.--2013/10/5 ePandit | ई-पण्डित <sharma...@gmail.com>
सालों पहले हिन्दी चिट्ठाकारों ने मिलकर रामचरितमानस को अन्तर्जाल पर उपलब्ध करवाया था। यह शायद इसके यूनिकोडकरण का पहला प्रयास रहा होगा। अब तो मेरे विचार से कई जगह होगी।
http://ramayan.wordpress.com/
29 अगस्त 2013 8:44 pm को, Nirmal Verma <nirmal...@gmail.com> ने लिखा:
Dear Friends
If anybody has Ramcharitmanas in hindi unicode then please send it over to me.
with regards
Nirmal Verma
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Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
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If u can't beat them, join them.
ePandit: http://epandit.shrish.in/--
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--Shree Devi Kumar
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भजन - कीर्तन - आरती @ http://bhajans.ramparivar.com
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डॉ. राजीव कुमार रावत,हिंदी अधिकारीभारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर-72130209641049944,09564156315--
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तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः। 6-41-23
ࡐ नमो विश्वगुप्ताय नमो विश्वपरायते। 3-114-26
ࡐ विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः। 13-149-16
अ[आ]नुपूर्व्येण वाक्यानि तीक्ष्णानि च मृदूनि च। 5-140-4
अ[आ]पृष्ठतापाज्जप्त्वा स परिवृत्य यतव्रतः। 5-144-30
अ[आ]प्लाव्य शुचयः सर्वे स्रग्विणः शुक्लवाससः। 5-195-2
अ[आ]श्विनेयौ नरव्याघ्रौ रूपेणाप्रतिमौ भुवि। 5-138-17
अ[इ]तो दुःखतरं किं नु यदहं मातु[त]रन्ततः। 5-72-13
अ[त]त्र त्वं निहतो राम मया शरशतार्दितः। 5-178-58
and
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