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प्र, क्र, ख्र, ग्र, त्र स्र को स्पष्ट रूप से लिखें तो यों होना चाहिए था--
प्र क्र ख्र ग्र त्र स्र
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यदि किसी को पता हो तो कृपया बताएँ।
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एक कदम और आगे बढ़ें तो आपका वह सुझाव याद आ रहा है कि हिन्दी को कुछ इस रूप मे ंलिखें।
प्रचार = प् र् अ च् आ र् अकुछ इस तरह जैसे विण्डोज ९८ (या बिना हिन्दी स्क्रिप्ट प्रोसैसिंग समर्थन वाले किसी और ओऍस) में हिन्दी फॉण्ट डालने पर हिन्दी दिखती थी। यह तो रोमनागरी पढ़ने जैसा ही दुर्गम हो जायेगा।
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नहीं शर्मा जी हलन्त नहीं हटा सकते, फिर आधे-पूरे का भेद कैसे करेंगे। 'पआ' है या 'पा' है कैसे पता चलेगा।29 दिसम्बर 2012 5:10 pm को, Pk Sharma <pksharm...@gmail.com> ने लिखा:
--2012/12/29 ePandit | ई-पण्डित <sharma...@gmail.com>
एक कदम और आगे बढ़ें तो आपका वह सुझाव याद आ रहा है कि हिन्दी को कुछ इस रूप मे ंलिखें।प्रचार = प् र् अ च् आ र् अकुछ इस तरह जैसे विण्डोज ९८ (या बिना हिन्दी स्क्रिप्ट प्रोसैसिंग समर्थन वाले किसी और ओऍस) में हिन्दी फॉण्ट डालने पर हिन्दी दिखती थी। यह तो रोमनागरी पढ़ने जैसा ही दुर्गम हो जायेगा।अरे वाह !हमारे विद्वानों ने तो यह विधि बना ही रखी है !!बस हर व्यञ्जन के नीचे के हल् को हटाने से ही काम बन जायेगा !!!टंकित शैली ईतनी बुरी भी नहीं दिखती - अपितु सुन्दर ही दिखती है :-)देखें ;परअचआरp r a c a r (c=च)बस आदत डालनी होगे\ r / r (आशुलिपि) में तो अधिक विचित्र लगता है !
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Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
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If u can't beat them, join them.
ePandit: http://epandit.shrish.in/
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नहीं शर्मा जी हलन्त नहीं हटा सकते, फिर आधे-पूरे का भेद कैसे करेंगे। 'पआ' है या 'पा' है कैसे पता चलेगा।
एक कदम और आगे बढ़ें तो आपका वह सुझाव याद आ रहा है कि हिन्दी को कुछ इस रूप मे ंलिखें।
यदि हल्-चिह्न हटाना ही हो
तो शिरोरेखा भी साथ में हटानी चाहिये
इंग्लिश की तरह pa(प=पअ) pA (पा=पआ)पर = पअरअ = paraपार = पआरअ = pAra or paaraप्यार = पयआरअ =pyAra or pyaarasure is a bit wierd ;-)
दुःख की बात है - भारतीय विद्वान भी इस रहस्य को समझ नहीं पाते...अपने परम्परागत अभ्यास से जरा-सा इतर हटकर, या अपना दृष्टिकोण जरा-सा बदलकर जाँचने/परखने का भी प्रयास नहीं करते...
यह केवल कम्प्यूटर की आन्तरिक प्रोसेसिंग हेतु तथा तीव्र इनपुट (डैटा एंट्री) के लिए है... रेण्डरिंग तो वर्तमान परम्परागत रूप में जैसे होती है, वैसे ही होगी...
शर्मा जी,कृपया मेरे सन्देश को ध्यान से पढ़ें-- यह विधि केवल आन्तरिक प्रोसेसिंग के लिए है,युनिकोड में यदिक् ख् ग् से लेकर ह् तक को एक कोड नम्बर दिया जाए, तभी सम्भव होगा...शुद्ध रूप यों होना चाहिए --
ल्एइन्अ ईस्अ त्अर्अह्अ ....
हलन्त को हटाइए नहीं, हलन्त हट गया तो 'अ' स्वर स्वतः जुड़ जाता है...
हलन्त नहीं लगाएँ तो यह पढ़ा जाएगा...लअएकअइनअअ ईसअअ तअअरअअहअअ...2012/12/29 Pk Sharma <pksharm...@gmail.com>
लेकिन इस तरह ही खेल खेल में यह विधि वास्तविकता का रूप ले लेगीलएकइनअ ईसअ तअरअहअ हई खएलअ खएलअ मएअं यअहअ वइधइवआसतवइकअतआ कआ रऊपअ लए लएगई
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2012/12/29 Hariraam <hari...@gmail.com>oops ..यह केवल कम्प्यूटर की आन्तरिक प्रोसेसिंग हेतु तथा तीव्र इनपुट (डैटा एंट्री) के लिए है... रेण्डरिंग तो वर्तमान परम्परागत रूप में जैसे होती है, वैसे ही होगी...टंकन एक विधि सेदीखेगा पुरानी विधि से ??
टंकन करना होगा - परअदईपअदीखेगा - प्रदीपअयी ययी यो जीये तो बहुत गड़ बढ़ जीअहम् एकम् विधिम् स्विकारम् करोमी
द्वि विधिम् गड़बड़म् अस्ति !क्षमा कुरु गुरु श्री !!--
now use indian languages on pc more easily with :
www.SimpleKeyboard.In
IT'S EASY !! IT'S FREE !!!
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2012/12/29 Pk Sharma <pksharm...@gmail.com>2012/12/29 Hariraam <hari...@gmail.com>oops ..यह केवल कम्प्यूटर की आन्तरिक प्रोसेसिंग हेतु तथा तीव्र इनपुट (डैटा एंट्री) के लिए है... रेण्डरिंग तो वर्तमान परम्परागत रूप में जैसे होती है, वैसे ही होगी...टंकन एक विधि सेदीखेगा पुरानी विधि से ??
जी नहीं, आप जिस भी रूप में देखना चाहेंगे देख पायेंगे.
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अच्छा, आपका आशय आन्तरिक भण्डारण हेतु था। हाँ निश्चित ही यह देवनागरी की मूल संरचना के अनुकूल है और आपके बताये अनुसार इससे देवनागरी की कम्प्यूटिंग सरल होती लेकिन जैसा कि आप स्वयं ही पहले कई बार बता चुके हैं कि यूनिकोड एक बार जैसा बन गया, वह (गलत होने के बावजूद) बदला नहीं जा सकता फिर ऐसा 'काश!' करके क्या लाभ?
यदि कोई रास्ता आपको सूझता है तो वह बतायें।
29 दिसम्बर 2012 5:53 pm को, Hariraam <hari...@gmail.com> ने लिखा:
श्रीश जी,
'दुर्गम' नहीं बल्कि 'ज्यादा-सुगम' होगा...