शिरोरेखा रहित देवनागरी वर्ण - फ़ॉन्ट

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Pk Sharma

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Dec 29, 2012, 12:42:36 PM12/29/12
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
पहला प्रयास  ; 

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Pk Sharma

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Dec 29, 2012, 11:06:19 PM12/29/12
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)

pk sharma

unread,
Dec 29, 2012, 11:08:47 PM12/29/12
to technic...@googlegroups.com
see if you can spot the (intentional) mistakes ;-)



On Saturday, 29 December 2012 20:06:19 UTC-8, pk sharma wrote:
test text :

Vineet Chaitanya

unread,
Dec 30, 2012, 12:20:33 AM12/30/12
to technic...@googlegroups.com
मेरे विचार से:

गलत          सही
अ + अं ==> अं
ओ + अं ==> ओं

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Pk Sharma

unread,
Dec 30, 2012, 12:37:20 AM12/30/12
to technic...@googlegroups.com
विनीतजी

ओं  कोई वर्ण नहीं है
नया वर्ण यदि बनान हो तो फिर इं ईं उं ऊं  एं ऐं  ओं औं ऋं  ॠं 
तथा 
कं से ज्ञं तक सारे बनाने पड़ेंगे ना ?

यही संयुक्ताक्षरों की समस्या से तो बचने की बात हो रही है !


--
 
 

Pk Sharma

unread,
Dec 30, 2012, 12:42:22 AM12/30/12
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
फ़ॉन्ट यहाँ है : -


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Yashwant Gehlot

unread,
Dec 30, 2012, 12:53:36 AM12/30/12
to technic...@googlegroups.com
मैं अभी तक यह सोच रहा था कि यहां सारा विचार-विमर्श यूनीकोड फॉन्ट बनाने के लिए हो रहा है. 
यह जानना रोचक होगा कि समूह के सदस्य इसका किस तरह उपयोग करते हैं/कर पाते हैं. 
फॉन्ट चुनने के बाद एफ कुंजी दबाने पर फिर से टाइम्स न्यू रोमन हो रहा है.

यशवंत

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Yashwant Gehlot

Pk Sharma

unread,
Dec 30, 2012, 12:58:36 AM12/30/12
to technic...@googlegroups.com
फ़ॉन्ट का दोष नहीं है
कौन सी विन्डोज़ है ?
कौन सा ऍप्लिकेशन है ?

मैनथे ३२ बिट विन्डोज़ ७ में वर्डपॅड 
पर इस फ़ॉन्ट से लिखा था


2012/12/29 Yashwant Gehlot <yge...@gmail.com>

--
 
 

Pk Sharma

unread,
Dec 30, 2012, 1:04:39 AM12/30/12
to technic...@googlegroups.com
इसे सेव कर के काम में लगा कर देखें : -


वर्ड पॅड में खोलें | ऍम ऍस वर्ड के किसी किसी संसकरण में गड़ बड़ी होती है |


2012/12/29 Yashwant Gehlot <yge...@gmail.com>

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Pk Sharma

unread,
Dec 30, 2012, 1:22:32 AM12/30/12
to technic...@googlegroups.com


2012/12/29 Yashwant Gehlot <yge...@gmail.com>

मैं अभी तक यह सोच रहा था कि यहां सारा विचार-विमर्श यूनीकोड फॉन्ट बनाने के लिए हो रहा है. 

हरिराम जी का महा प्रयास यही है |
मेरे विचार से यह काफ़ी कठिन कार्य है |
काफ़ी समय लगेगा |
अन्ततः सफल हो सकता है |
हमारा समर्थन तो है ही |
ओर भी लोगों का सहयोग / समर्थन / रज़ामन्दी की सख्त ज़रूरत होगी |
यूनीकोड कॉसॉरटियम में उच्च श्रेणी की सदस्यता आवश्यक होगी |
कोडपॉइन्ट तो यू-०९०० हॅक्स की तरह ही बनाये जा सकेंगे |
यह आशा करते हुए चलना होगा कि  यूनीकोड कॉसॉरटिय वाले या
उसे प्रभावित करने वाले अड़चन / विरोध / अवरोध न करें |
और विदेशी कम्पनियाँ इस प्रयास को मार डालने मे सफल न हो पायें |
और व्यवसायिक लाभ / हानि ईस उचित कदम को रोक ना पायें |

फिर भी - आईए   करें !!!


Vineet Chaitanya

unread,
Dec 30, 2012, 1:28:34 AM12/30/12
to technic...@googlegroups.com


2012/12/30 Pk Sharma <pksharm...@gmail.com>

विनीतजी

ओं  कोई वर्ण नहीं है
नया वर्ण यदि बनान हो तो फिर इं ईं उं ऊं  एं ऐं  ओं औं ऋं  ॠं 
तथा 
कं से ज्ञं तक सारे बनाने पड़ेंगे ना ?

   केवल स्वरों के लिये बनाने पडेंगे. अनुनासिक स्वर व्याकरण सम्मत हैं.

यही संयुक्ताक्षरों की समस्या से तो बचने की बात हो रही है !


On 29 December 2012 21:20, Vineet Chaitanya <v...@iiit.ac.in> wrote:
मेरे विचार से:

गलत          सही
अ + अं ==> अं
ओ + अं ==> ओं


On Sun, Dec 30, 2012 at 9:38 AM, pk sharma <pksharm...@gmail.com> wrote:
see if you can spot the (intentional) mistakes ;-)



On Saturday, 29 December 2012 20:06:19 UTC-8, pk sharma wrote:
test text :

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Pk Sharma

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Dec 30, 2012, 1:28:53 AM12/30/12
to technic...@googlegroups.com
2012/12/29 Yashwant Gehlot <yge...@gmail.com>
यह जानना रोचक होगा कि समूह के सदस्य इसका किस तरह उपयोग करते हैं/कर पाते हैं. 
यशवंत

अपनी अपनी ढपली बजाना बजाना छोड़ कर यदि 
गुरु श्री हरिराम जी के सुझावों को लागू करने में मदद
करेंगे    निश्पक्षता के साथ 
तो ...
शायद ...
हर सदस्य ही इसे सरलता से अपनाया जाने वाला कल्याणकारी
विधि पायेगा ! 

Vineet Chaitanya

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Dec 30, 2012, 1:40:43 AM12/30/12
to technic...@googlegroups.com
  मुझसे एक भूल हो गयी.
   वास्तव में टंकण = ट्+ ङ् +क् + अ + ण् + अ
  अतः यहाँ कोई अनुनासि स्वर नहीं चाहिये.

  किन्तु
    "अक्षरों" वास्तव में "अक्षरोँ" है इसमें "ओँ" अन्त में है जिसको साधारणतया "ओं" लिखा जाता है.

अनुनासिक स्वर चन्द्रबिन्दु से दिखाये जाने चाहिये.
2012/12/30 Vineet Chaitanya <v...@iiit.ac.in>

Pk Sharma

unread,
Dec 30, 2012, 1:43:11 AM12/30/12
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2012/12/29 Vineet Chaitanya <v...@iiit.ac.in>

   केवल स्वरों के लिये बनाने पडेंगे. अनुनासिक स्वर व्याकरण सम्मत हैं. 

यह है तो सही बात      परन्तु मात्राएँ भी तो व्याकरण सम्मत है | 
यहाँ एहम मुद्दा यह है कि वर्णों को जोड़ कर संयुक्ताक्षर बनाने की 
विधि से हट कर पॄथक पृथक वर्णों द्वारा ही गणक में ऍन्ट्री की जाय !
और फिर उस तरह की लिखाई / छपाई  को  भी पढ़ने की विधि को अपनाया जाय |

स्वरों से अनुस्वार को जोड़ कर अनुनासिक स्वर का नव निर्माण करना
पुरानी समस्या से छुटकारा पाने के बाद एक नयी समस्या को जन्म देगा |

ईससे बच पाएँ तो अच्छा !

Pk Sharma

unread,
Dec 30, 2012, 1:52:20 AM12/30/12
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2012/12/29 Vineet Chaitanya <v...@iiit.ac.in>

  किन्तु
    "अक्षरों" वास्तव में "अक्षरोँ" है इसमें "ओँ" अन्त में है जिसको साधारणतया "ओं" लिखा जाता है.

ओं        एवम्     ओँ का काम 
ओ अं    एवम्    ओ अँ  से सरलता से चल जायेगा

सरलीकरण ही लक्ष्य हो तो अच्छा रहेगा |
बाकी आप जैसे ज्ञानियों को कुछ कहना तो
सूर्य को प्रदीप दिखा कर शर्मा जाना है      ;-) 



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Hariraam

unread,
Dec 30, 2012, 7:47:08 AM12/30/12
to technic...@googlegroups.com
मेरा अनुभव है कि ... फ्रोण्ट एण्ड में कोई भी परिवर्तन आम जनता स्वीकार नहीं कर पाएगी।

हमें परम्परागत रूप में देवनागरी में जैसे लिखा जाता है, उसमें कोई भी परिवर्तन किए बिना ही 
केवल कम्प्यूटर की अन्दरुनी प्रोसेसिंग के लिए कुछ सरल तकनीकी विकसित करनी होगी।

आम जनता में किसी परिवर्तन को प्रचलित होने में चार पीढ़ियों का अर्थात् लगभग 100 वर्ष का समय लगता है। किन्तु हमारा जीवन... शायद हम सौ घण्टे भी सही रीति समय दान नहीं कर पाएँगे...

-- हरिराम

2012/12/30 Vineet Chaitanya <v...@iiit.ac.in>
शर्माजी,
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