हिन्दी (देवनागरी) कुंजीपटल कैसा हो?

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Anunad Singh

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Apr 15, 2011, 2:20:36 AM4/15/11
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
आज हम तरह-तरह के कम्प्यूटर (डेस्कटॉप, लैपटॉप, पामटॉप) और मोबाइल आदि प्रयोग कर रहे हैं। इनमें इन्पुट देने के लिये  विभिन्न तरीके सम्भव हैं - कुंजीपटल, बोलकर, मूस के द्वारा, टचस्क्रीन आदि) । किन्तु इनमें कुंजीपटल (कीबोर्ड)  अब भी सर्वाधिक प्रचलित और उपयुक्त बना हुआ है।

सॉफ्टवेयर की सुलभता और उसमें निहित लचीलापन  ने  अब यह सम्भव कर दिया है कि कुंजीपटल  'हार्डवेयर' होते हुए भी बिलकुल 'सॉफ्ट'  हो गया है। अब आप  प्रचलित हार्डवेयर (कीबोर्ड)  को भी जैसा चाहें वैसा बना सकते हैं। भूल जाइये कि उनकी कुंजियों पर क्या छपा है।

अपने इस समूह में  कुंजीपटल पर चर्चा हुई है किन्तु  विस्तार से  सदिश (डाइरेक्टेड)  चर्चा नहीं हुई।  देवनागरी लिखने के लिये कोई इंस्क्रिप्ट प्रयोग कर रहा है तो कोई ध्वन्यात्मक (फोनेटिक) कुंजीपटल तो कोई रेमिंग्टन । ध्वन्यात्मक में भी कई  जातियाँ हैं।

सर्वविदित है कि  QWERTY कुंजीपटल  बहुत पुरानी डिजाइन है। यह इस बात को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया था कि टाइप करते समय लोगों की गति  इतनी अधिक न हो जाय कि टाइपराइटर  को उसे अनुसरण करने में दिक्कत आये। आज स्थिति उल्टी है। आप कितना तेज भी हाँथ चलायें कम्प्यूटर आपसे तेज चलेगा।  इसके बावजूद भी  क्वेर्टी कुंजीपटल  चला जा रहा है क्योंकि लोग उसके ही अभ्यस्त हो चुके हैं और नये को आजमाना ही  नहीं चाहते।  कई लोगों ने बेहतर कुंजीपटल  बनाये हैं किन्तु वे प्रचलन में नहीं आ पा रहे हैं।

हिन्दी की स्थिति अलग है।  सौभाग्य या दुर्भाग्य से  इसमें इतनी जड़ता नहीं है कि लोग  किसी गलत डिजाइन से ही चिपके हों। इंस्क्रिप्ट को भारतीय लिपियों के लिये मानक माना गया है। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या इंस्क्रिप्ट की डिजाइन वर्तमान तथ्यों को ध्यान में रखकर की गयी है?  क्या हम कोई अन्य  डिजाइने प्रस्तावित कर सकते हैं जिनमें कई बेहतर बातें हों?
ध्यान रखिये कि अब यह सम्भव है कि आप जैसा कीबोर्ड चाहते हैं आपके वर्तमान कीबोर्ड को ही  केवल सॉफ्टवेयर बदलकर वैसा बनाना सम्भव है । इसलिये यह प्रश्न अधिक प्रासंगिक और सामयिक हो जाता है।

-- अनुनाद सिंह

V S Rawat

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Apr 15, 2011, 3:14:29 AM4/15/11
to technic...@googlegroups.com
On 4/15/2011 11:50 AM India Time, _Anunad Singh_ wrote:

> इसके बावजूद भी क्वेर्टी कुंजीपटल
> चला जा रहा है क्योंकि लोग उसके ही अभ्यस्त हो चुके हैं और नये को आजमाना ही नहीं
> चाहते।

नहीं, अनुनाद जी। यह बहुत महत्वपूर्ण बिंदु है कि कोई उसी कुंजीपटल का उपयोग करता है
जिस पर उसके हाथ अभ्यस्त हो चुके हैं, और किसी अक्षर को देखते या सोचते ही, मस्तिष्क के
उपयोग के बिना ही, उसकी अँगुलियाँ अपने आप ही चल कर उस अक्षर को टाइप कर देती हैं।

नए कुंजीपटल की बात तो दूर, अगर कीबोर्ड की हार्डवेयर में भी ज़रा सा भी परिवर्तन
होता है जिसके कारण हाथ या अँगुलियों को उन अभ्यस्त स्थानों पर कुंजी नहीं मिलती है,
तो बहुत विक्षोभ होता है। अँगुली गलत कुंजी दबाती है, और जब तक हम देखते और समझते हैं
कि गलत अक्षर टाइप हो गया है, तब तक हमारी टाइपिंग की गति के अनुसार कई और
अक्षर टाइप कर चुके होते हैं, और फिर उन अक्षरों को मिटा कर नए अक्षरों को टाइप
करता है, उससे काम की गति बहुत कम हो जाती है और दिमाग में अंसंतुष्टि आती है।

इसलिए यह बहुत व्यवहारिक समस्या है कि कीबोर्ड पर कुंजियाँ उसी स्थान पर मिलें और वो
कुंजी वही टाइप करे जिसके हम अभ्यस्त हैं.

रावत

Anunad Singh

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Apr 15, 2011, 3:32:51 AM4/15/11
to technic...@googlegroups.com
रावत जी,
मैं अभ्यस्त हुए हाथों की गति जानता और समझता हूँ।  मैं उन्हें नया कुंजीपटल देने के पक्ष में नहीं हूँ। किन्तु लोग बदलते हैं; नयी पीढी आती है ; बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो किसी कुंजी विशेष से बंधे या अभ्यस्त नहीं हैं।
अच्छाई यह है कि अब बहुत से विकल्प उपलब्ध हैं।   प्रश्न यह भी है कि क्या अब कुंजीपटल के मानकीकरण  की कोई जरूरत रह गयी है? क्या इसके कोई मायने भी हैं?

-- अनुनाद
---------------------------------------------

१५ अप्रैल २०११ १२:४४ अपराह्न को, V S Rawat <vsr...@gmail.com> ने लिखा:

--
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V S Rawat

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Apr 15, 2011, 8:20:44 AM4/15/11
to technic...@googlegroups.com

On 4/15/2011 1:02 PM India Time, _Anunad Singh_ wrote:

> रावत जी,
> मैं अभ्यस्त हुए हाथों की गति जानता और समझता हूँ। मैं उन्हें नया कुंजीपटल देने के पक्ष में
> नहीं हूँ। किन्तु लोग बदलते हैं; नयी पीढी आती है ; बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो किसी कुंजी
> विशेष से बंधे या अभ्यस्त नहीं हैं।
> अच्छाई यह है कि अब बहुत से विकल्प उपलब्ध हैं। प्रश्न यह भी है कि क्या अब कुंजीपटल
> के मानकीकरण की कोई जरूरत रह गयी है? क्या इसके कोई मायने भी हैं?

जी हाँ, कुंजीपटल के मानकीकरण की अब तो और भी अधिक जरूरत हो गई है, क्योंकि मान
लीजिए कि मैं अपने घर पर एक कुंजीपटल का उपयोग करता हूँ, और मैं अपना कम्प्यूटर खराब
होने पर किसी साइबर में या किसी मित्र के यहाँ जाता हूँ, तो मैं पाता हूँ कि वहाँ कोई
दूसरा कुंजीपटल है जिस पर मैं अक्षर ढूँढते ही रह जाता हूँ और काम नहीं कर पाता हूँ।

जैसा अंग्रेजी के कुंजीपटल के लिए है, कि हम हर जगह एक ही कीबोर्ड पाते हैं और उसका
फटाफट उपयोग कर लेते हैं, वैसा ही हिंदी या किसी भी अन्य भारतीय या विदेशी भाषा के
लिए होना पड़ेगा कि हर भाषा के लिए एक विशिष्ट कुंजीपटल हो जो हर स्थान पर उपयोग
के लिए उपलब्ध हो, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान पर समस्या का अनुभव न करे।

मैंने तो कई बार अपना पासवर्ड हिन्दी में लिखने का सोचा, जिसको अंग्रेज़ी भाषी तो फिर
हैक नहीं कर पाते, लेकिन फिर पाया कि अगर मुझे अपने पीसी के अलावा किसी जगह पर
पीसी पर पासवर्ड टाइप करना पड़ा तो वहाँ पर तो मैं अपना कुंजीपटल नहीं पा पाउँगा
और फिर तो मैं इसे टाइप भी नहीं कर पाउँगा।

ज्यादा विकल्प भी समस्या देंगे कि किसी साइबर पर कोई विकल्प लागू है, दूसरे साइबर पर
कोई और, और आजकल तो साइबरों पर सॉफ़्टवेयर सिक्योरिटी इतनी मज़बूत हो गई है कि
यूज़र कोई नया प्रोग्राम इन्स्टॉल ही नहीं कर पाता इसलिए हम अपना मनचाहा कीबोर्ड
इन्स्टॉल भी नहीं कर सकते हैं।

रावत

>
> -- अनुनाद
> ---------------------------------------------
>
> १५ अप्रैल २०११ १२:४४ अपराह्न को, V S Rawat <vsr...@gmail.com

> <mailto:vsr...@gmail.com>> ने लिखा:

ePandit | ई-पण्डित

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Apr 15, 2011, 9:57:03 AM4/15/11
to technic...@googlegroups.com
यह इस बात को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया था कि टाइप करते समय लोगों की गति  इतनी अधिक न हो जाय कि टाइपराइटर  को उसे अनुसरण करने में दिक्कत आये।

ऐसी समस्या मुझे फोनेटिक में आती थी, मैं बरह आइऍमई प्रयोग करता था। मैं अंग्रेजी की क्वर्टी टच टाइपिंग जानता था जिससे हिन्दी में भी फोनेटिक से टच टाइपिंग द्वारा लिखता था। अब ये होता था कि जब मैं बहुत तेज लिखता था तो बरह आइऍमई का ट्राँसलिट्रेटर उतनी जल्दी काम न कर पाता था। परिणामस्वरुप शब्द गलत बन जाते थे, उदाहरण के लिये "है" (hai) का "हअइ" टाइप।

इसके बावजूद भी  क्वेर्टी कुंजीपटल  चला जा रहा है क्योंकि लोग उसके ही अभ्यस्त हो चुके हैं और नये को आजमाना ही  नहीं चाहते।  कई लोगों ने बेहतर कुंजीपटल  बनाये हैं किन्तु वे प्रचलन में नहीं आ पा रहे हैं।

अंग्रेजी के दो और कीबोर्ड चर्चित हुये जिनमें एक है DVORAK दूसरे का नाम याद नहीं आ रहा। अंग्रेजी में सर्वाधिक गति का रिकॉर्ड DVORAK पर ही है। फिर भी क्वर्टी के प्रचलित हो जाने के कारण यह मानक नहीं बन पाया। 




१५ अप्रैल २०११ ११:५० पूर्वाह्न को, Anunad Singh <anu...@gmail.com> ने लिखा:

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ePandit | ई-पण्डित

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Apr 15, 2011, 10:01:23 AM4/15/11
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जैसा अंग्रेजी के कुंजीपटल के लिए है, कि हम हर जगह एक ही कीबोर्ड पाते हैं और उसका फटाफट उपयोग कर लेते हैं, वैसा ही हिंदी या किसी भी अन्य भारतीय या विदेशी भाषा के लिए होना पड़ेगा कि हर भाषा के लिए एक विशिष्ट कुंजीपटल हो जो हर स्थान पर उपयोग के लिए उपलब्ध हो, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान पर समस्या का अनुभव न करे।

रावत जी हिन्दी सहित ब्राह्मी लिपि से निकली १२ भारतीय भाषा लिपियों हेतु मानक कीबोर्ड इन्स्क्रिप्ट है। यह हर ऑपरेटिंग सिस्टम में इनबिल्ट आता है, इसका लेआउट सभी जगह समान होता है तथा यह सभी १२ भारतीय भाषाओं के लिये एक जैसा है यानि मैं यदि इन्स्क्रिप्ट में हिन्दी टाइप करना जानता हूँ तो बंगाली, तमिल आदि भी टाइप कर सकता हूँ भले ही मुझे उन लिपियों का ज्ञान न हो।

१५ अप्रैल २०११ ५:५० अपराह्न को, V S Rawat <vsr...@gmail.com> ने लिखा:
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ePandit | ई-पण्डित

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Apr 15, 2011, 10:35:49 AM4/15/11
to technic...@googlegroups.com
अनुनाद जी आगामी ३० अप्रैल को हिन्दी ब्लॉगिंग के बारे में प्रकाशित होने वाली किताब में हिन्दी टाइपिंग सम्बन्धी मेरा लेख है जिसमें विभिन्न कीबोर्डों की तुलना की गयी है।

हिन्दी के पच्चीसों कीबोर्डों ने स्थिति को बहुत भ्रामक बना दिया है। हिन्दी का मानक कीबोर्ड (इन्स्क्रिप्ट) होते हुये भी लोग फोनेटिक के लुभावने मायाजाल में फंसकर हमेशा उसी दोषपूर्ण पद्धति से चिपके रहते हैं।

इस बारे में बालेन्दु जी का यह लेख पठनीय है।
 
मैं जानना चाहता हूँ कि क्या इंस्क्रिप्ट की डिजाइन वर्तमान तथ्यों को ध्यान में रखकर की गयी है?  क्या हम कोई अन्य  डिजाइने प्रस्तावित कर सकते हैं जिनमें कई बेहतर बातें हों? 

इन्स्क्रिप्ट कीबोर्ड को काफी शोध के उपरान्त तैयार किया गया था। उस समय सीडैक में बहुत अच्छे वैज्ञानिक थे, आज के जैसा हिसाब नहीं था कि कोई काम की चीज बनती ही नहीं।

सरकार ने इतना अच्छा कीबोर्ड तो बनाया लेकिन उसका मानक रुप में प्रयोग अनिवार्य बनाने तथा प्रचार-प्रसार नहीं किया जिस कारण अधिकतर जनता आज भी फोनेटिक टाइपिंग टूलों के जंजाल में फंसी है।

मैं काफी समय से इस बारे कोशिश कर रहा हूँ, विकिपीडिया पर अंग्रेजी और हिन्दी में लिखा, अपने चिट्ठे पर लिखा, इन्स्क्रिप्ट कीबोर्ड के प्रचार हेतु InScript Users' Group बनाया है। आगे भी इस पर काफी कुछ लिखने की योजना है ताकि लोगों के मन से इन्स्क्रिप्ट फोबिया निकले तथा सभी लोग इसे अपनायें। 

बहुत से लोग हमेशा औरों से सुनते हैं कि इन्स्क्रिप्ट बहुत अच्छा है, पर कभी इसे सीखने के लिये कुछ समय नहीं देते। आज तक हिन्दी चिट्ठाजगत के जिस भी व्यक्ति ने एक बार इरादा कर इन्स्क्रिप्ट सीखा यही कहा कि इन्स्क्रिप्ट सर्वश्रेष्ठ है। इन्स्क्रिप्ट पर आने के बाद बन्दा कहीं और नहीं जाता। एक भी उदाहरण ऐसा नहीं है। जबकि फोनेटिक तथा रेमिंगटन से इन्स्क्रिप्ट पर आने वाले बहुत लोग हैं।

मैंने विद्यार्थी जीवन में कुछ समय रेमिंगटन टाइपराइटर पर टाइपिंग सीखी थी कोई तीन महीने लगे और अगले छह महीने में भूल भी गया। सालों बाद नेट पर हिन्दी फोनेटिक से लिखनी शुरु की, अंग्रेजी क्वर्टी जानने के कारण फोनेटिक औजारों से भी बिना देखे टाइप कर लेता था लेकिन अनेक समस्यायें आयीं तथा मन कभी संतुष्ट न हुआ।

इन्स्क्रिप्ट सीखने के बारे सोचता था कि अंग्रेजी और हिन्दी की अलग-अलग टाइपिंग सीखने से दिक्कत तो न होगी। कई शंकायें मन में थी, अन्ततः मैंने सीखने का निर्णय लिय़ा।

एक उदाहरण देना चाहूँगा, एक वैष्णव सज्जन कृष्ण भक्ति की श्रेष्ठता बताते हुये मुझसे बोले कि वैष्णव केवल कृष्ण के प्रति समर्पित रहते हैं जबकि दूसरे लोगों का मन स्थिर नहीं रहता, तमाम देवताओं पर भागता रहता है।

ठीक यही बात इन्स्क्रिप्ट के बारे में है, इन्स्क्रिप्ट प्रयोक्ता का मन किसी और कीबोर्ड या टाइपिंग टूल पर नहीं जाता। जबकि फोनेटिक प्रयोक्ता कभी ये टूल तो कभी वो टूल के चक्कर में रहते हैं, संतुष्टि कहीं नहीं मिलती।

इन्स्क्रिप्ट की खूबियाँ

  • यह सभी ऑपरेटिंग सिस्टमों में अन्तर्निर्मित आता है इसलिये किसी अलग टाइपिगं औजार को इंस्टाल करने की आवश्यकता नहीं। जहाँ चाहे जाओ वहाँ पहले से मौजूद मिलेगा।
  • सभी भारतीय भाषाओं हेतु एक कुञ्जीपटल विन्यास होने से एक भाषा हेतु टाइपिंग सीखने पर सभी भाषाओं हेतु आ जाती है। एक भाषा में सीखने से सभी के लिये आ जाता है।
  • इनस्क्रिप्ट टच टाइपिंग एवं साइट टाइपिंग दोनों प्रकार का कीबोर्ड है। साइट टाइपिंग हेतु हिन्दी इन्स्क्रिप्ट चिह्न मुद्रित भौतिक कीबोर्ड चाहिये जो कि केवल ३०० रुपये में उपलब्ध है अथवा इन्स्क्रिप्ट के स्टीकर मिलते हैं या फिर खुद छापे जा सकते हैं।
  • इन्स्क्रिप्ट सर्वाधिक गति वाली टाइपिंग है। इसमें सभी वर्तमान कीबोर्ड खाकों अथवा टाइपिंग औजारों से कम कुञ्जियाँ दबानी पड़ती हैं। आमतौर पर एक वर्ण के लिये एक कुञ्जी होने से समय कम लगता है।
  • इन्स्क्रिप्ट का कुञ्जीपटल विन्यास विशेष शोध द्वारा विशिष्ट क्रम में बनाया गया है जिससे इसे याद करना अत्यन्त सरल है। मात्र एक हफ्ते के अभ्यास से ही इन्स्क्रिप्ट में लिखना शुरु किया जा सकता है।
  • इन्स्क्रिप्ट में आमतौर पर एक वर्ण के लिये एक कुञ्जी होने से टाइपिंग की अशुद्धियाँ कम होती हैं।
  • इन्स्क्रिप्ट लेआउट में भारतीय लिपियों के सभी यूनिकोड मानकीकृत चिह्नों को शामिल किया गया है।
  • टचस्क्रीन डिवाइसों यथा टैबलेट पीसी तथा मोबाइल फोन आदि के लिये भी इनस्क्र्पिट कीबोर्ड पूर्णतया उपयुक्त है।

कुल मिलाकर इन्स्क्रिप्ट फॉण्ट, टाइपिंग टूल, ऑपरेटिंग सिस्टम, ऍन्कोडिंग, कम्प्यूटिंग डिवाइस (कम्प्यूटर, टैबलेट, फोन) सभी बन्धनों से मुक्त करता है।

टचस्क्रीन डिवाइसों हेतु इन्स्क्रिप्ट कीबोर्ड आधारित इनपुट का सर्वाधिक उपयुक्त कंसैप्ट कुछ समय (दो-तीन महीने) बाद प्रस्तुत करुँगा।
 
१५ अप्रैल २०११ ११:५० पूर्वाह्न को, Anunad Singh <anu...@gmail.com> ने लिखा:
आज हम तरह-तरह के कम्प्यूटर (डेस्कटॉप, लैपटॉप, पामटॉप) और मोबाइल आदि प्रयोग कर रहे हैं। इनमें इन्पुट देने के लिये  विभिन्न तरीके सम्भव हैं - कुंजीपटल, बोलकर, मूस के द्वारा, टचस्क्रीन आदि) । किन्तु इनमें कुंजीपटल (कीबोर्ड)  अब भी सर्वाधिक प्रचलित और उपयुक्त बना हुआ है।

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ePandit | ई-पण्डित

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Apr 15, 2011, 11:03:49 AM4/15/11
to technic...@googlegroups.com
इन्स्क्रिप्ट के डिजाइन सम्बन्धी यह शोध का लिंक कभी देखा था। आप भी देखें, वैसे मैंने पढ़ा नहीं, कुछ साइंटिफिक टाइप का है।

१५ अप्रैल २०११ ११:५० पूर्वाह्न को, Anunad Singh <anu...@gmail.com> ने लिखा:
आज हम तरह-तरह के कम्प्यूटर (डेस्कटॉप, लैपटॉप, पामटॉप) और मोबाइल आदि प्रयोग कर रहे हैं। इनमें इन्पुट देने के लिये  विभिन्न तरीके सम्भव हैं - कुंजीपटल, बोलकर, मूस के द्वारा, टचस्क्रीन आदि) । किन्तु इनमें कुंजीपटल (कीबोर्ड)  अब भी सर्वाधिक प्रचलित और उपयुक्त बना हुआ है।

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pks kolkata

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Apr 15, 2011, 12:41:19 PM4/15/11
to technic...@googlegroups.com
"अंग्रेजी के दो और कीबोर्ड चर्चित हुये जिनमें एक है DVORAK दूसरे का नाम याद नहीं आ रहा। अंग्रेजी में सर्वाधिक गति का रिकॉर्ड DVORAK पर ही है। फिर भी क्वर्टी के प्रचलित हो जाने के कारण यह मानक नहीं बन पाया। "
 
 
there have been many re-thinks even by english users on the alternative to qwerty
 
there needs to be serious re-think by indian useres on the alternative to inscript layout
 
there are different approaches to inputting hindi characters by touch screen/keypads
and there is a huge difference in the situation too (compared to the times of finalizing
the dvorak) .. technology has taken a huge leap .. multi touch screen based input and
also multi key-press based input too
 
like the FITALY method of touch input for fastest speeds of english input, and the DVORAK
method for keyboard based input, or the Cykey method of multiple keypress based inputs
are facts despite the long prevalence of qwerty, we need to also think seriously of better
alternatives to the inscript/phonetic
 
i feel 3 things are paramount for a new design/layout :
it should be EASY to :
1. understand (qwerty is a horror story even for the english speaking world)
2. remember (you just can't remember qwerty on the first or tenth attempt)
3. use (this comes from practice .. irrespective of what layout or method is used)
 
(sorry for english .. my hindi typing is still not fast enough ! layout final nahin kiya hai naa !)
 
 

pks kolkata

unread,
Apr 15, 2011, 12:51:56 PM4/15/11
to technic...@googlegroups.com
qwerty is a historical relic .. it has no reason nor any sense for being justified
 
dvorak was made by mr. dvorak of pc magazine .. as a natural solution based on
the frequency of english letters by analysing many texts
 
there has been no such study for hindi character, glyph or word frequencies
 
what may be valid for hindi may not be valid for nepali, marathi, bhojpuri, behari, or
orther dialects which also use devanaagarii
 
if, like inscript, a common layout is considered for all indian languages because
of their exact similarity of letters vowels and maatraas, then the study of frequency
of letters, glyphs, words has no meaning
 
english doesn't have grouping like devanaagarii has .. the svar, vyanjan, maatraa
concepts and the varga concepts .. that is the strength that we need to draw upon
to finalize a simple layout .. and to avoid the criminal injustice of qwerty by imposing
another confusing layout on the indian user
 
easy to understand, easy to remember, easy to use - that is how an indian keyboard should be
 
if we can learn inscript even after the qwerty .. we can learn a new layout even after inscript !
provided it is better of course !

2011/4/15 Anunad Singh <anu...@gmail.com>

Anunad Singh

unread,
Apr 16, 2011, 12:47:48 AM4/16/11
to technic...@googlegroups.com
रावत जी,

मैं  वस्तुतः  'हार्ड' कुंजीपटल की नहीं, 'सॉफ्ट' कुंजीपटल के मानकीकरण पर प्रश्न लगा रहा था। इंस्क्रिप्ट एक तरह से 'सॉफ्ट' कुंजीपटल है। इसके काम करने के लिये नेपथ्य में (बैकग्राउण्ड में)  एक प्रोग्राम काम कर रहा होता है।

मान लीजिये देवनागरी लिखने के लिये  आपने  'देवकुंज' नामक कोई कुंजीपटल  इजाद किया है  जो लोगों को इंस्क्रिप्ट  से भी अधिक उपयुक्त लगता है। किन्तु यह मानकीकृत नहीं है।  तो क्या हुआ?  यदि आपने या किसी और ने गूगल  इंडिक आईएमई  में प्रयुक्त हो सकने वाला  कोड बना दिया है जो सर्वसुलभ है। इसे आप अपने मित्र के पीसी पर भी पाएंगे। यदि नहीं है तो आप पांच मिनट में नेट से निकालकर उसकी पीसी पर स्थापित कर सकते हैं। और जो चीज उपयोगी होगी वह शीघ्र ही सर्वत्र फैल जायेगी।


-- अनुनाद सिंह
--------------------------------------

१५ अप्रैल २०११ ५:५० अपराह्न को, V S Rawat <vsr...@gmail.com> ने लिखा:

Anand D

unread,
Apr 16, 2011, 1:10:06 AM4/16/11
to technic...@googlegroups.com
इंस्क्रिप्‍ट में शिफ़्ट न होने का प्रमुख कारण यह है कि हम अपना कुछ काम
Kruti Dev 010 जैसे परंपरागत फांट में करते हैं जिनकी कुंजी रेमिंगटन के
मुताबिक सेट है, और कुछ काम यूनीकोड में, जिसके लिए Indic IME की मदद से
रेमिंगटन कीबोर्ड का उपयोग कर पाते हैं। इंस्क्रिप्‍ट में जाने का अर्थ
यह होगा कि Kruti Dev 010 जैसे फ़ांट में काम करने में पूरी तरह कट जाना।

यदि कोई ऐसा टूल बनाया जाए जिसे सक्रिय करने के बाद हम इंस्क्रिप्‍ट
कुंजी दबाने के बाद भी Kruti Dev 010 में टाइप मुमकिन हो सके। सीधे वर्ड
या किसी भी शब्‍द संसाधक में टाइप करना संभव हो। क्‍या ऐसा टूल बनाना
संभव है? जहाँ तक मेरी जानकारी है बालेंदु शर्मा दाधीच जी के माध्‍यम
सॉफ़्टवेयर में यह सुविधा मौजूद है, परंतु संभवत: इससे "माध्‍यम" में ही
काम किया जा सकता है, सीधे वर्ड या किसी अन्‍य शब्‍द संसाधक में नहीं।

जहाँ तक मेरी जानकारी है, ऐसा टूल बना नहीं है। यदि है, तो कृपया अवगत कराएँ।

- आनंद

2011/4/16 Anunad Singh <anu...@gmail.com>:

Anunad Singh

unread,
Apr 16, 2011, 1:58:26 AM4/16/11
to technic...@googlegroups.com
आनन्द जी,
आप पुराने फॉण्ट और उसके अनुसार कुंजीपटल की बात कर रहें हैं।  यह बनाना बिल्कुल सम्भव है। किन्तु सवाल यह है कि क्या यही बनाना उपयुक्त है या कुछ और। यह चर्चा तो सर्वोत्तम की खोज के लिये है।  सर्वोत्तम वह होगा जिसमें अन्य गुणों के अलावा निमन्लिखित गुण हों-

१) सामान्यतः उपलब्ध हार्डवेयर (कीबोर्ड)  में उसे लागू किया जा सके।
२) टाइप करने में सुविधा दे - मुख्यतः अधिकाधिक गति प्रदान कर सके।
३) 'लेआउट' को  समझना और याद करना  आसान हो।
४) देवनागरी के सभी चिह्न टाइप कर सके।

-- अनुनाद

---------------------------


१६ अप्रैल २०११ १०:४० पूर्वाह्न को, Anand D <anan...@gmail.com> ने लिखा:

V S Rawat

unread,
Apr 16, 2011, 3:05:40 AM4/16/11
to technic...@googlegroups.com
किसी कुंजीपटल का गूगल इंडिक आईएमई में प्रयुक्त हो सकने वाला कोड कैसे बनाया जाता
है, क्या यह जानकारी नेट पर किसी लिंक पर उपलब्ध है?

रावत

On 4/16/2011 10:17 AM India Time, _Anunad Singh_ wrote:

> रावत जी,
>
> मैं वस्तुतः 'हार्ड' कुंजीपटल की नहीं, 'सॉफ्ट' कुंजीपटल के मानकीकरण पर प्रश्न लगा
> रहा था। इंस्क्रिप्ट एक तरह से 'सॉफ्ट' कुंजीपटल है। इसके काम करने के लिये नेपथ्य में
> (बैकग्राउण्ड में) एक प्रोग्राम काम कर रहा होता है।
>
> मान लीजिये देवनागरी लिखने के लिये आपने 'देवकुंज' नामक कोई कुंजीपटल इजाद किया है
> जो लोगों को इंस्क्रिप्ट से भी अधिक उपयुक्त लगता है। किन्तु यह मानकीकृत नहीं है। तो
> क्या हुआ? यदि आपने या किसी और ने गूगल इंडिक आईएमई में प्रयुक्त हो सकने वाला
> कोड बना दिया है जो सर्वसुलभ है। इसे आप अपने मित्र के पीसी पर भी पाएंगे। यदि नहीं
> है तो आप पांच मिनट में नेट से निकालकर उसकी पीसी पर स्थापित कर सकते हैं। और जो
> चीज उपयोगी होगी वह शीघ्र ही सर्वत्र फैल जायेगी।
>
> -- अनुनाद सिंह
> --------------------------------------
>
> १५ अप्रैल २०११ ५:५० अपराह्न को, V S Rawat <vsr...@gmail.com

> <mailto:vsr...@gmail.com <mailto:vsr...@gmail.com>>> ने लिखा:

Anand D

unread,
Apr 16, 2011, 3:34:14 AM4/16/11
to technic...@googlegroups.com
अनुनाद जी,

इस संदर्भ में ई-पंडित जी द्वारा सुझाया गया लेख बहुत उपयोगी लग रहा है।
इस आलेख में एक वैकल्पिक कीबोर्ड भी सुझाया है। कृपया पढ़ें और अपनी राय
दें। इससे मार्गदर्शन लेकर आगे कार्य किया जा सकता है :

http://www.iitk.ac.in/kangal/papers/k2003004.pdf

साथ ही मेरी डिमांड पर भी गौर करें और यदि ऐसा औजार बन जाए तो कृपा होगी...

- आनंद


2011/4/16 V S Rawat <vsr...@gmail.com>:

Anunad Singh

unread,
Apr 16, 2011, 4:24:37 AM4/16/11
to technic...@googlegroups.com
आनन्द जी,
प्रथम दृष्ट्या यह लिंक इस चर्चा से सम्बन्धित है और मैं भी इसी प्रकार के गणितीय/वैज्ञानिक विश्लेषण  पर आधारित  देवनागरी कुंजीपटल की बात कर रहा था।  इसको  विस्तार से पढ़कर अपनी बाकी बात रखूँगा।

--अनुनाद
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