नीरज शर्मा जी,
---नारायण प्रसाद
प्रसाद जी लगता है आपको अपने ज्ञान का बहुत घमण्ड है आप भी मेरे संदेश को ध्यान से पढिये। मैं उस शब्द को सही तरीके से मेरे पास उपलब्ध फॉण्ट से लिख नहीं पा रहा हूँ इसिलिये इस फोरम में जानकारी चाही थी कि किसी के पास कोई युक्ति हो तो बतावें।
एक ही वाक्य में कितने चीजों का घालमेल हो गया है, देखिये -
१) जो मुद्दा चर्चा में है उससे यूनिकोड का कोई सम्बन्ध नहीं है।
(यूनिकोड में एकरूपता का आपका मतलब क्या है?)
२) श्र = श् + र --> इसमें मानने, न मानने वाली बात क्यों आ रही है?
३) अपकी समस्या थी कि आप जिस हिन्दी सम्पादित्र का प्रयोग करके देवनागरी
लिखते हैं उसमें 'श्रृंगार' कैसे लिखा जाय? इसमें दो प्रश्न उठ खड़े
होते हैं -
(क) क्या आप 'श्रृंगार' ही लिखना चाहते हैं (क्योंकि वर्तनी की
दृष्टि से यह गलत है; इसके स्थान पर 'शृंगार' सही है)
(ख) यदि 'शृंगार' टाइप करना चाहते हैं तो क्या-क्या किस क्रम में
दबायें; यदि 'श्रृंगार' (गलत ही) लिखना चाहते हैं तो क्या करना होगा?
(४) हा हा हा - ये हंसी वाला है या शोक वाला (हा हन्त!) ?
सही यह रहा होता कि प्रश्न पूछते समय ही सम्पूर्ण जानकारी देकर प्रश्न
पूछा जाता; जैसे-
१) मेरे कम्प्यूटर पर अमुक आपरेटिंग सिस्टम है,
२) मैं हिन्दी लिखने के लिये अमुक सम्पादित्र प्रयोग करता हूँ,
३) मैं अमुक शब्द लिखना चाहता हूँ किन्तु नहीं लिख पा रहा हूँ।
४) अमुक-अमुक कुंजियाँ दबाने पर मुझे 'यह' मिल रहा है जो मुझे गलत लग
रहा है, आदि
आप अपनी समस्या को पुन: परिभाषित कीजिये।
मुझे लगता है कि अधिकांश लोग यहाँ 'मंगल' फाण्ट ही प्रयोग कर रहे हैं।
आपकी समस्या वस्तुत: फाण्ट की समस्या नहीं है।
आप अपनी समस्या को पुन: परिभाषित कीजिये।
रवि
सही शब्द 'शृंगार' है।
'श्रृंगार' गलत है।
अब दोनो लिख दिये हैं। किन्तु मेरे लिखने से क्या होता है? आप कैसे
लिखेंगे? पहले यह बताइये कि हिन्दी लिखने के लिये कौन सा सॉफ्टवेयर
प्रयोग करते हैं?
सदस्य प्रतिबंधित. ये कोई तरीका नहीं है सार्वजनिक फोरम में बातचीत का.
रवि
हिन्दी लिखने के लिये आप क्या उपयोग में लाते हैं?
काकेश
--
धन्यवाद सहित
सादर
काकेश
http://kakesh.com
सम्मान्य हरिरामजी,
इस जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
आभार
सभी साथियों से विनम्र अनुरोध है कि सार्वजनिक रूप से किए जा रहे ऐसे
वार्तालाप में मर्यादित होकर ही प्रतिभाग करना चाहिए!
हमें समूह के वरिष्ठ साथियों से कुछ पाना या सीखना है, तो उनके साथ
नम्रता से पेश आना अनिवार्य है!
अंतरजाल पर आनेवाले हर नए व्यक्ति को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है!
यह बात पूर्णत: स्पष्ट हो चुकी है कि मंगल फॉण्ट की सहायता से Shringaar
की देवनागरी वर्तनी का जाना-पहचाना पुराना रूप टंकित करना संभव नहीं है!
ग़लत वर्तनी "श्रृंगार" लिखने से अच्छा तो यही है कि "शृंगार" लिखा जाए,
जो पूर्णत: सही है!
अब ऐसा हठ करने से क्या लाभ -
मैया मैं तो चंद्र खिलौना लेहौं ... ... .
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शुभकामनाओं के साथ -
आपका
रावेंद्रकुमार रवि
http://saraspaayas.blogspot.com/
पर क्लिक् करने के बाद मैंने जो देखा, वह मेरे लिए आश्चर्यजनक था!
इस सही रूप को JPG फ़ाइल के रूप में संलग्न करके मैंने समूह के साथियों
से इसे टंकित करने के कमांड पूछे थे! यह एक बहुत सही तरीक़ा लगा था मुझे,
पर तब किसी एक भी साथी ने इस पर चर्चा करने की चेष्टा तक नहीं की थी!
मुझे ख़ुशी इस बात की है कि अब यह सही जगह पर रहकर सबका मारगदर्शन कर रहा है!
इसे इस सही जगह पर पहुँचानेवाले (?) का मैं हृदय से आभारी हूँ!
सुयश जी को बहुत-बहुत धन्यवाद!
लेकिन मेरा निवेदन है कि उनको सदा के लिये निकालना जरूरत से ज्यादा
दण्ड हो जायेगा। उन्हें एक सप्ताह के बाद फिर से इस समूह की चर्चाओं
में भाग लेने दिया जाय।
क्षमा याचना के दो बोल,
"प्यार के दो बोल" के अंतर्गत ही आते हैं!
किसी किसी प्रश्नकर्ता की अपेक्षा बहुत ज्यादा हो जाती है और यह सोचते
हैं कि लोग काफी मेहनत कर के उनके प्रश्न को समझें और समाधान करें।
यह गलती मैंने भी यदा-कदा की है और गलती महसूस होने पर (कई बार कई दिन
बाद) दिल ही दिल में क्षमा प्रार्थी रहता हूँ।
"क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात,
का रहीम हरि को घट्यो जो भृगु मारी लात"
मेरी प्रार्थना है कि हमेशा के लिए प्रतिबंध ना लगाया जाए।
आपका,
सुरेश