श्रृंगार शब्‍द सही तरीके से टाईप नहीं हो रहा है

9,206 views
Skip to first unread message

Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 10, 2009, 3:45:44 AM9/10/09
to technic...@googlegroups.com

साथियों ,
यूनिकोड मंगल फॉण्‍ट में श्रृंगार शब्‍द सही तरीके से टाईप नहीं हो रहा है। किसी के पास कोई युक्ति है क्‍या ?

नीरज शर्मा
--

http://www.shrinathjee.blogspot.com




narayan prasad

unread,
Sep 10, 2009, 7:08:26 AM9/10/09
to technic...@googlegroups.com
"श्रृंगार" शब्द ही गलत है ।

१० सितम्बर २००९ १:१५ PM को, Neeraj Sharmaa <shrin...@gmail.com> ने लिखा:

Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 10, 2009, 7:32:50 AM9/10/09
to technic...@googlegroups.com
अरे में भी तो वही कह रहा हूँ मंगल में सही टाईप होता ही नहीं है।

2009/9/10 narayan prasad <hin...@gmail.com>

narayan prasad

unread,
Sep 10, 2009, 8:34:04 AM9/10/09
to technic...@googlegroups.com
शृंगार
 
श तीन तरह से लिखे जाते हैं । इसलिए शृंगार भी तीन तरह से लिखे जा सकते हैं । शायद आपका भ्रम यह है कि शृंगार में शकार वैसा क्यों नहीं दिखता जैसा श्र में बिना रकार की मात्रा के साथ दिखता है ।
इस पर कई बार बहस हो चुकी है । विशेष के लिए हरिराम जी के ब्लॉग पर जाकर देखें और इस चर्चा को यहाँ ही समाप्त समझें ।
---नारायण प्रसाद

१० सितम्बर २००९ ५:०२ PM को, Neeraj Sharmaa <shrin...@gmail.com> ने लिखा:

Dr. Durgaprasad Agrawal

unread,
Sep 10, 2009, 7:55:53 AM9/10/09
to technic...@googlegroups.com
Please type it like this: shRingaar

१० सितम्बर २००९ १:१५ PM को, Neeraj Sharmaa <shrin...@gmail.com> ने लिखा:





--

Please read

My blog 'Jog Likhee'
at
http://dpagrawal.blogspot.com

Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 11, 2009, 2:52:31 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
ये लिजिये अग्रवाल जी के तरीके से भी लिख दिया shRingaar श्रृंगार (जीमेल में फोनेटिक टाईपिंग सुविधा हिन्‍दी के लिये उपलब्‍ध है)

और
भूपेन्‍द्रसिंह जी चूँडावत जी के तरीके से भी

श्रंगार श ्र ं गा र

हा हा हा मजेदार यह है कि यूनिकोड में अभी भी एकरूपता नहीं है और बरसों से हमारे दिमाग में श्र जो जमा हुआ है उसे हम श ्र नहीं मान सकते हैं भले ही वह तकनीकी रूप से सही भी हो सकता हो !!!!

2009/9/10 Dr. Durgaprasad Agrawal <dpagr...@gmail.com>

Lotic Technologies

unread,
Sep 11, 2009, 3:14:19 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
नीरज जी क्या आप श्रृंगार शब्द को किसी और फोण्ट में लिखेगें जिससे मैं भी जान सकू कि सही शब्द क्या हैं । मेरी हिन्दी कुछ कमजोर हैं । इसलिये मैं इस पत्राचार को समझ नही पा रहा हूँ ॥

हरमिंदर सिंह

2009/9/11 Neeraj Sharmaa <shrin...@gmail.com>



--
Harminder Singh
Lotic Technologies
www.lotictech.com
9211256505


This e-mail may contain confidential and privileged material for the sole use of the intended recipient. Any review, use, distribution or disclosure by others is strictly prohibited. If you are not the intended recipient (or authorized to receive for the recipient), please contact the sender by reply e-mail and delete all copies of this message.

narayan prasad

unread,
Sep 11, 2009, 3:57:39 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com

नीरज शर्मा जी,

    मेरे पहले सन्देश पर आपने कुछ ध्यान नहीं दिया । इससे स्पष्ट होता है कि आपको देवनागरी वर्णमाला का पूर्ण ज्ञान नहीं है । देवनागरी "श"  सम्बन्धी लेख पहले यहाँ देख लें और फिर कुछ आगे लिखें ।

http://hariraama.blogspot.com/2007/10/secrets-of-devanaagarii-sh.html
 
   अशुद्ध शब्द श्रृंगार की वर्तनी इस प्रकार है -
  श्रृंगार = श + ् + र + ृ + ं + ग + ा + र
 
शुद्ध रूप से लिखने के लिए इस तरह टाइप करना चाहिए (ठीक से समझने के लिए बीच में एक-एक रिक्त स्थान डाल दिया गया है) -
   श ृ ं ग ा र
इससे "शृंगार" शब्द बनता है जो बिलकुल शुद्ध है । श वर्ण तीन तरह से लिखा जाता है । इसलिए शृंगार शब्द भी तीन रूपों में लिखा जा सकता है । उपलब्ध तकनीकी सुविधा सीमित है जिसके कारण अन्य दो रूपों को टेक्स्ट रूप में संगणक पर प्रदर्शित करना संभव नहीं है । चित्र रूप में उपर्युक्त लेख में आप देख सकते हैं ।

---नारायण प्रसाद

११ सितम्बर २००९ १२:२२ PM को, Neeraj Sharmaa <shrin...@gmail.com> ने लिखा:

Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 11, 2009, 4:33:28 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
प्रसाद जी लगता है आपको अपने ज्ञान का बहुत घमण्‍ड है आप भी मेरे संदेश को ध्‍यान से पढिये। मैं उस शब्‍द को सही तरीके से मेरे पास उपलब्‍ध फॉण्‍ट से लिख नहीं पा रहा हूँ इसिलिये इस फोरम में जानकारी चाही थी कि किसी के पास कोई युक्ति हो तो बतावें।

2009/9/11 narayan prasad <hin...@gmail.com>

Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 11, 2009, 4:46:42 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
हो सकता है मुझे जानकारी नहीं हो और नहीं है इसिलिये इस फोरम में पूछा है।

2009/9/11 Neeraj Sharmaa <shrin...@gmail.com>
प्रसाद जी लगता है आपको अपने ज्ञान का बहुत घमण्‍ड है आप भी मेरे संदेश को ध्‍यान से पढिये। मैं उस शब्‍द को सही तरीके से मेरे पास उपलब्‍ध फॉण्‍ट से लिख नहीं पा रहा हूँ इसिलिये इस फोरम में जानकारी चाही थी कि किसी के पास कोई युक्ति हो तो बतावें।

narayan prasad

unread,
Sep 11, 2009, 5:02:33 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
किसी बात की जानकारी नहीं होने पर पूछना कोई शर्म की बात नहीं । मैंने जानकारी दे दी है । हरिराम जी के ब्लॉग पर सम्बन्धित लेख की कड़ी दे दी है । उसे कृपया एक बार देख जाएँ । मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपकी शंका का समाधान हो जायगा ।
 
पहले भी इस विषय पर चर्चा हो चुकी है ।

---नारायण प्रसाद

११ सितम्बर २००९ २:१६ PM को, Neeraj Sharmaa <shrin...@gmail.com> ने लिखा:

Anunad Singh

unread,
Sep 11, 2009, 5:28:10 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
"हा हा हा मजेदार यह है कि यूनिकोड में अभी भी एकरूपता नहीं है और बरसों
से हमारे दिमाग में श्र जो जमा हुआ है उसे हम श ्र नहीं मान सकते हैं भले
ही वह तकनीकी रूप से सही भी हो सकता हो !!!!"


एक ही वाक्य में कितने चीजों का घालमेल हो गया है, देखिये -
१) जो मुद्दा चर्चा में है उससे यूनिकोड का कोई सम्बन्ध नहीं है।
(यूनिकोड में एकरूपता का आपका मतलब क्या है?)

२) श्र = श् + र --> इसमें मानने, न मानने वाली बात क्यों आ रही है?

३) अपकी समस्या थी कि आप जिस हिन्दी सम्पादित्र का प्रयोग करके देवनागरी
लिखते हैं उसमें 'श्रृंगार' कैसे लिखा जाय? इसमें दो प्रश्न उठ खड़े
होते हैं -

(क) क्या आप 'श्रृंगार' ही लिखना चाहते हैं (क्योंकि वर्तनी की
दृष्टि से यह गलत है; इसके स्थान पर 'शृंगार' सही है)

(ख) यदि 'शृंगार' टाइप करना चाहते हैं तो क्या-क्या किस क्रम में
दबायें; यदि 'श्रृंगार' (गलत ही) लिखना चाहते हैं तो क्या करना होगा?

(४) हा हा हा - ये हंसी वाला है या शोक वाला (हा हन्त!) ?


सही यह रहा होता कि प्रश्न पूछते समय ही सम्पूर्ण जानकारी देकर प्रश्न
पूछा जाता; जैसे-
१) मेरे कम्प्यूटर पर अमुक आपरेटिंग सिस्टम है,
२) मैं हिन्दी लिखने के लिये अमुक सम्पादित्र प्रयोग करता हूँ,
३) मैं अमुक शब्द लिखना चाहता हूँ किन्तु नहीं लिख पा रहा हूँ।
४) अमुक-अमुक कुंजियाँ दबाने पर मुझे 'यह' मिल रहा है जो मुझे गलत लग
रहा है, आदि

Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 11, 2009, 5:32:03 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
आप लोगों में से कोई मंगल फॉण्‍ट का प्रयोग कर रहा होता तो इतनी समस्‍या मेरे ख्‍याल से नहीं आती लकीर से फकीर क्‍यो बन रहे हैं समझ में नहीं आ रहा है।

2009/9/11 Anunad Singh <anu...@gmail.com>

Anunad Singh

unread,
Sep 11, 2009, 5:37:40 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
मुझे लगता है कि अधिकांश लोग यहाँ 'मंगल' फाण्ट ही प्रयोग कर रहे हैं।
आपकी समस्या वस्तुत: फाण्ट की समस्या नहीं है।

आप अपनी समस्या को पुन: परिभाषित कीजिये।

Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 11, 2009, 5:40:42 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
अब आप ही मुझे मंगल फॉण्‍ट से सही  शब्‍द लिख कर भेज दिजिये। किस्‍सा खत्‍म।

2009/9/11 Anunad Singh <anu...@gmail.com>

मुझे लगता है कि  अधिकांश लोग यहाँ 'मंगल'  फाण्ट  ही प्रयोग कर रहे हैं।
 आपकी समस्या वस्तुत:  फाण्ट की समस्या नहीं है।

आप अपनी समस्या को पुन: परिभाषित कीजिये।


Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 11, 2009, 5:41:41 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
शर्त यही है कि वह श्र जैसा दिखे।

2009/9/11 Neeraj Sharmaa <shrin...@gmail.com>

Ravishankar Shrivastava

unread,
Sep 11, 2009, 5:49:54 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
On 9/11/2009 2:03 PM, Neeraj Sharmaa wrote:
> प्रसाद जी लगता है आपको अपने ज्ञान का बहुत घमण्‍ड है आप भी मेरे संदेश को ध्‍यान से
> पढिये। मैं उस शब्‍द को सही तरीके से मेरे पास उपलब्‍ध फॉण्‍ट से लिख नहीं पा रहा हूँ
> इसिलिये इस फोरम में जानकारी चाही थी कि किसी के पास कोई युक्ति हो तो बतावें।
नीरज जी,
हाँ मुझे नारायण जी के ज्ञान व उनके कार्यों पर घमण्ड है. परंतु आप अपनी जुबान पर लगाम
रखें. आइंदा इस तरह की (व्यक्तिगत छींटाकसी वाली) भाषा प्रयोग करने पर आपको (या
किसी और को भी) सदा के लिए इस फोरम से बैन कर दिया जाएगा.

रवि

Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 11, 2009, 5:53:07 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
कल करते हो तो आज और अभी कर सकते हैं।

2009/9/11 Ravishankar Shrivastava <ravir...@gmail.com>

Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 11, 2009, 5:58:27 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
धन्‍यवाद

2009/9/11 Neeraj Sharmaa <shrin...@gmail.com>

Anunad Singh

unread,
Sep 11, 2009, 5:58:52 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
चलिये एक बार और कोशिश करते हैं।

सही शब्द 'शृंगार' है।

'श्रृंगार' गलत है।

अब दोनो लिख दिये हैं। किन्तु मेरे लिखने से क्या होता है? आप कैसे
लिखेंगे? पहले यह बताइये कि हिन्दी लिखने के लिये कौन सा सॉफ्टवेयर
प्रयोग करते हैं?

Neeraj Sharmaa

unread,
Sep 11, 2009, 6:01:03 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
मैं मंगल फॉण्‍ट का प्रयोग करके (मंगल आवश्‍यक एवं अनिवार्य नहीं है, मुझे यूनिकोड फॉण्‍ट चाहिये।) श्र की तरह दिखने वाला ही चाहता हूँ।

2009/9/11 Anunad Singh <anu...@gmail.com>
चलिये एक बार और कोशिश करते हैं।

Ravishankar Shrivastava

unread,
Sep 11, 2009, 6:04:48 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
On 9/11/2009 3:23 PM, Neeraj Sharmaa wrote:
> कल करते हो तो आज और अभी कर सकते हैं।

सदस्य प्रतिबंधित. ये कोई तरीका नहीं है सार्वजनिक फोरम में बातचीत का.
रवि

Anunad Singh

unread,
Sep 11, 2009, 6:07:54 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
हिन्दी लिखने के लिये कोई बरह प्रयोग करता है; कोई कैफे हिन्दी, कोई
तख्ती, कोई हिन्दीट्रान्स; कोई गमभन, कोई ट्रान्सलिटरेटर, कोई गूगल
का इंडिक ट्रांसलिटरेशन, कोई क्विलपैड, कोई कई प्रकार की आईएमई
में से कोई एक, कोई फायरफाक्स का ऐड-आन .....


हिन्दी लिखने के लिये आप क्या उपयोग में लाते हैं?

Kakesh Kumar

unread,
Sep 11, 2009, 7:04:53 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
धन्यवाद. ऐसे सदस्यों को बैन ही कर देना चाहिये जो एक फोरम की मर्यादा बनाये नहीं रख
सकते।

काकेश


--
धन्यवाद सहित
सादर

काकेश
http://kakesh.com

Anand D

unread,
Sep 11, 2009, 7:56:47 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
नीरज जी,

आपका मंतव्‍य समझ में आ गया। आप श्रृंगार (जो शुद्ध नहीं है) को उसे शुद्ध रूप में (बिना क्र प्र का ्र लगाए) लिखना चाह रहे हैं जो मंगल या एरियल यूनकोड में संभव नहीं है। (यह पिछली कई चर्चाओं में स्‍पष्ट हो चुका है और आपको प्रेषित हरीराम जी के आलेख में भी है, नीरज जी से आग्रह है कि वह पूरा आलेख पढ़ें, विशेषकर प्रश्‍न उत्तर वाला भाग, उसमें स्‍पष्ट अक्षरों में लिखा है कि मंगल में शृ का वैकल्पिक रूप फिलहाल नहीं है)। आप कहते हैं :  

"मैं मंगल फॉण्‍ट का प्रयोग करके (मंगल आवश्‍यक एवं अनिवार्य नहीं है, मुझे यूनिकोड फॉण्‍ट चाहिये।) श्र की तरह दिखने वाला ही चाहता हूँ।"

आपकी समस्‍या का एक हल प्रस्‍तुत है। संस्‍कृत 2003 फ़ॉन्‍ट में शृंगार आपको इच्छित रूप में मिलेगा। यह फ़ॉन्‍ट निम्‍न लिंक पर उपलब्‍ध है :
 
http://devanaagarii.net/fonts/

सीधे-सीधे शृंगार लिखें, और जैसा फ़ॉन्‍ट बदलकर संस्‍कृत 2003 कर दें।

यह पूरा प्रसंग संवादहीनता का है। नीरज जी को मामला आगे खीचने से पहले एक बार हरीराम जी का आलेख पढ़ लेना चाहिए था। मैं ग्रुप के मॉडरेटर से अनुरोध करूँगा कि वे श्री नीरज जी की सदस्‍यता बहाल रखें। कभी-कभी भावावेश में गड़बड़ी हो जाती है। इसे अनदेखा कर देना चाहिए।

-  आनंद

 

2009/9/11 Kakesh Kumar <kakes...@gmail.com>

Lotic Technologies

unread,
Sep 11, 2009, 8:04:06 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
hello everybody,

You have banned Mr. Neeraj Sharma, but i feel it is not good thing to do. I was watching the complete correspondence of this subjects. Actually the problem started from the question itself, even i have also put my comments on that topic.
Mr. Neeraj could not able to type श्रृंगार on his PC, he thought that in Mangal font this not could be written. So he put his question like that, but most of the forum members think that he does not know to type it. The problem starts there.
Most of the member may not agree with me but there was misunderstanding in forum on the question including me. But as i got suspicious on the language  everyone else could find it out.
The language use after ward was not up to the mark but we could all condemn it and get a apology from Mr. Neeraj, but now both Mr. Neeraj and Mr. Narayan Parshad both have to apologize for the issue, and you are requested to take Mr. Neeraj back in the forum, as i feel forum is like family where we all are gather to learn or help others in Hindi. Thats what he wanted from us some help.

I hope you all think this with open heart and take the discussion

2009/9/11 Kakesh Kumar <kakes...@gmail.com>

Hariram

unread,
Sep 11, 2009, 8:53:49 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
नीरज जी, अनुनाद जी, नारायण जी एवं सभी बन्धुओ!
 
माफ कीजिएगा, मैं कुछ दिनों से ईमेल नहीं देख पाया, नहीं तो बात इतनी आगे ही नहीं बढ़ती। नीरज की समस्या बिल्कुल सही है, जो हम सभी की भी है।
 
मंगल फोंट में कई प्रकार की रेण्डरिंग की समस्याएँ हैं। 'शृ' संयुक्ताक्षर के पुरानेवाले रूप का glyph इसमें नहीं है। कई अन्य संयुक्ताक्षरों के ग्लीफ भी नहीं हैं। यह फोंट मुख्यतया सीस्टम की आन्तरिक प्रोसेसिंग के लिए बनाया गया है, पारम्परिक रूप में रेण्डरिंग को इसमें कम महत्व दिया गया है।
यदि आपको प्राचीन रूप में 'शृ' लिखना है तो कृपया अन्य युनिकोड समर्थित ओपेन टाइप फोंट्स का प्रयोग करके देखें।
 
स्व. प्रो. आर.के. जोशी जी द्वारा निर्मित यह मंगल फोंट माईक्रोसॉफ्ट का कॉपीराइट है। इसमें कुछ सुधार करना हो तो माईक्रोसॉफ्ट से सम्पर्क करें।
 
लगभग 150 प्रकार के विभिन्न शैलियों वाले युनिकोड समर्थित ओपेन टाइप हिन्दी फोंट भारत सरकार ने निःशुल्क उपलब्ध कराए हैं। यहाँ से डाउनलोड करें--
 
 
पुनश्च :
 
चूँकि मंगल माइक्रोसॉफ्ट विण्डोज के साथ अन्तःनिर्मित रूप से आता है, सभी कम्प्यूटरों में स्वतः उपलब्ध होता है तथा सभी अनुप्रयोगों में default रूप में में हिन्दी पाठ इसी फोंट में प्रकट होता है। यदि आप चाहते हैं कि आपका ब्राउजर में default हिन्दी फोंट मंगल के वजाए कुछ अन्य सेट हो तो उसकी प्रक्रिया यह है --
 
यदि आप IE6 का प्रयोग कर रहे हैं तो
 
click on menu -- tools-->Internet options...-->
 
अन्ततः अपनी चुनी हुई भाषा के default फोंट को बदल सकते हैं, अपने पी.सी. में इन्स्टाल किए हुए किसी अन्य फोंट को सेट कर सकते हैं । (Details बाद में दे पाऊँगा। अभी कुछ तकनीकी समस्या है।)
 
इससे आपको अपने ब्राउजर में प्राप्त हिन्दी ईमेल भी आपके इच्छित फोंट में प्रकट होगी।
 
बेहतर तो यही होता कि भारत सरकार एक सही हिन्दी फोंट बनवाकर सभी आपरेटिंग सीस्टम निर्माताओं को देती इस शर्त के साथ कि यह सभी में default रूप में अनिवार्यतः उपलब्ध हो।
 
 

--
हरिराम
प्रगत भारत http://hariraama.blogspot.com

अजित वडनेरकर

unread,
Sep 11, 2009, 8:57:40 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com

सम्मान्य हरिरामजी,

इस जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

आभार 

--
शुभकामनाओं सहित
अजित
http://shabdavali.blogspot.com/

Suyash Suprabh

unread,
Sep 11, 2009, 9:31:18 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
श्रृंगार में 'श्रृ' का सही रूप निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है :

कई बार प्रयोग के आधार पर अशुद्ध रूप को ही मानक मान लिया जाता है। अगर समय रहते 'श्र' के सही रूप को टाइप करना संभव नहीं हो पाया तो भविष्य में इसे ही मानक रूप मान लेने की आशंका है। 

पत्र-पत्रिकाओं में 'शृ' के प्रयोग के अधिक उदाहरण नहीं मिलते हैं। इंटरनेट पर 'शृ' के प्रयोग के कुछ उदाहरण दिखते हैं। अब समस्या यह है कि इंटरनेट पर प्रयोग की जा रही अशुद्ध वर्तनी से प्रभावित होकर पत्र-पत्रिकाओं में भी श्रृंगार' जैसी अशुद्ध वर्तनी का प्रयोग होने लगा है। 

सादर,

सुयश
हिदी और अनुवाद पर मेरा ब्लॉग : http://anuvaadkiduniya.blogspot.com   
 
2009/9/11 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>



--
Suyash Suprabh
Freelance Translator, Proofreader & Editor
Hindi, English, German & Italian

E-mail: translate...@gmail.com
           suyash....@gmail.com

Blog: (in Hindi) http://anuvaadkiduniya.blogspot.com

Profile: http://www.proz.com/translator/76675

Lotic Technologies

unread,
Sep 11, 2009, 9:38:01 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
अगर आप लोगों ने नीरज जी को फोरम से निकाल दिया हैं तो यह सुझाव किस लिये दिये जा रहे हैं । जिसने यह प्रश्न किया था वह तो है नही ?



2009/9/11 Suyash Suprabh <translate...@gmail.com>

रावेंद्रकुमार रवि

unread,
Sep 11, 2009, 9:43:04 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
जो भी हुआ हो, पर यह वार्ता जानकारीपूर्ण रही!

सभी साथियों से विनम्र अनुरोध है कि सार्वजनिक रूप से किए जा रहे ऐसे
वार्तालाप में मर्यादित होकर ही प्रतिभाग करना चाहिए!

हमें समूह के वरिष्ठ साथियों से कुछ पाना या सीखना है, तो उनके साथ
नम्रता से पेश आना अनिवार्य है!

अंतरजाल पर आनेवाले हर नए व्यक्ति को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है!

यह बात पूर्णत: स्पष्ट हो चुकी है कि मंगल फॉण्ट की सहायता से Shringaar
की देवनागरी वर्तनी का जाना-पहचाना पुराना रूप टंकित करना संभव नहीं है!
ग़लत वर्तनी "श्रृंगार" लिखने से अच्छा तो यही है कि "शृंगार" लिखा जाए,
जो पूर्णत: सही है!

अब ऐसा हठ करने से क्या लाभ -
मैया मैं तो चंद्र खिलौना लेहौं ... ... .


--
शुभकामनाओं के साथ -
आपका
रावेंद्रकुमार रवि
http://saraspaayas.blogspot.com/

रावेंद्रकुमार रवि

unread,
Sep 11, 2009, 10:00:28 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
सुयश जी,
आपके द्वारा दिए गए लिंक -

http://tinyurl.com/law4b4

पर क्लिक् करने के बाद मैंने जो देखा, वह मेरे लिए आश्चर्यजनक था!

इस सही रूप को JPG फ़ाइल के रूप में संलग्न करके मैंने समूह के साथियों
से इसे टंकित करने के कमांड पूछे थे! यह एक बहुत सही तरीक़ा लगा था मुझे,
पर तब किसी एक भी साथी ने इस पर चर्चा करने की चेष्टा तक नहीं की थी!

मुझे ख़ुशी इस बात की है कि अब यह सही जगह पर रहकर सबका मारगदर्शन कर रहा है!

इसे इस सही जगह पर पहुँचानेवाले (?) का मैं हृदय से आभारी हूँ!

सुयश जी को बहुत-बहुत धन्यवाद!

रावेंद्रकुमार रवि

unread,
Sep 11, 2009, 10:04:28 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
मेरे पिछले मेल में "मारगदर्शन" को "मार्गदर्शन" पढ़ा जाए!

Anunad Singh

unread,
Sep 11, 2009, 11:15:13 AM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
नीरज शर्मा का व्यवहार मर्यादा से बाहर था। उसके लिये उन्हें इस समूह पर
प्रतिबन्धित किया गया। प्रतिबन्ध की यह कार्यवाही हर तरह से उचित है
क्योंकि इसके लिये चेतावनी देने के बाद ही यह कठोर कदम उठाया गया।

लेकिन मेरा निवेदन है कि उनको सदा के लिये निकालना जरूरत से ज्यादा
दण्ड हो जायेगा। उन्हें एक सप्ताह के बाद फिर से इस समूह की चर्चाओं
में भाग लेने दिया जाय।

रावेंद्रकुमार रवि

unread,
Sep 11, 2009, 12:28:56 PM9/11/09
to technic...@googlegroups.com
कई साथी नीरज जी की तरफदारी कर रहे हैं,
जो बहुत अच्छी बात है,
लेकिन नीरज जी को भी तो कुछ अच्छा दर्शाना चाहिए!

क्षमा याचना के दो बोल,
"प्यार के दो बोल" के अंतर्गत ही आते हैं!

सुरेश कुमार शुक्ल

unread,
Sep 13, 2009, 11:20:28 AM9/13/09
to technic...@googlegroups.com
माननीय सदस्यों,

किसी किसी प्रश्नकर्ता की अपेक्षा बहुत ज्यादा हो जाती है और यह सोचते
हैं कि लोग काफी मेहनत कर के उनके प्रश्न को समझें और समाधान करें।

यह गलती मैंने भी यदा-कदा की है और गलती महसूस होने पर (कई बार कई दिन
बाद) दिल ही दिल में क्षमा प्रार्थी रहता हूँ।

"क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात,
का रहीम हरि को घट्यो जो भृगु मारी लात"

मेरी प्रार्थना है कि हमेशा के लिए प्रतिबंध ना लगाया जाए।

आपका,
सुरेश

Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages