"क्षणभंगुर" "दिनभंगुर"

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V S Rawat

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Aug 5, 2016, 11:56:53 PM8/5/16
to th
हिन्दी भाषा में एक शब्द "क्षणभंगुर" होता है
जिसका मतलब है एक क्षण (पल भर) में टूट जाने वाला, मतलब कि अस्थायी।

अब फ़ेसबुक पर श्री अनूप शुक्ल जी एक नया शब्द लॉञ्च किया है
दिनभंगुर
इसका मतलब है एक क्षण में तो नहीं, पर एक दिन में टूट जाने वाला, मतलब कि
पूरी तरह अस्थायी नहीं, फिर भी अस्थायी।

:-)
(सन्दर्भ - नितिन पटेल का कल दिन भर गुजरात के मुख्यमंत्री बनने की बधाई
स्वीकार करते रहना, लेकिन रात में विजय रूपानी के मुख्यमंत्री बनने की घोषणा होना।)

अच्छी रचनात्मकता है।

इसी तरह से हम सभी को नए स्वाभाविक लगने वाले शब्दों को बनाते रहना चाहिए।
रावत

Dr Kavita Vachaknavee

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Aug 6, 2016, 8:47:55 PM8/6/16
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
क्षणभंगुर का अर्थ 'क्षण-भर रहने के बाद भंग हो जाने वाला' नहीं होता, अपितु 'जिसे नष्ट होने में क्षण-भर लगता है' होता है। आप उसे रहने की अवधि से माप रहे हैं जबकि यह नष्ट होने की अवधि का वाचक है। इसीलिए तो जीवन को क्षणभंगुर कहा गया, जो एक क्षण पहले तक था और अगले क्षण नहीं रहता। ब्रह्माण्ड की प्रत्येक वस्तु क्षणभंगुर है क्योंकि होने और न होने के बीच एक क्षण ही होता है। इसीलिए भाषाकार ने क्षणभंगुर के समक्ष कोई अन्य शब्द नहीं रचा। अन्यथा यदि अस्तित्व में रहने की अवधि के अनुसार रचा जाता तो जीवन को जीवनभंगुर कहा जाता।
तत्सम शब्दों के पीछे निहित शब्दार्थ के दर्शन व संरचना को समझना अनिवार्य होता है और इसका एक ही उपाय है, आर्ष विधि से संस्कृत का गहन अध्ययन। अन्यथा शब्दरचना के नाम पर भाषा से मखौल हो जाएगा।

शुभेच्छु
-कविता वाचक्नवी

V S Rawat

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Aug 7, 2016, 12:42:17 AM8/7/16
to technic...@googlegroups.com
"क्षणभंगुर" - 'जिसे नष्ट होने में क्षण-भर लगता है'

तो फिर "दिनभंगुर" का अर्थ 'जिसे नष्ट होने में एक दिन लगता है' निकला।

अब
1. 'क्षण-भर रहने के बाद स्वतः भंग हो जाने वाला'
2. 'एक दिन-भर रहने के बाद स्वतः भंग हो जाने वाला'

इनके लिए हिन्दी के क्या एकल हैं?

अगर नहीं है, तो ऐसी धारणाओं के लिए भी एकल शब्दों को लाए जाने की बनती है।

समस्या यही आती है, कि किसी व्यक्ति ने एक अच्छा शब्द लॉञ्च किया, जिससे एक
अर्थ निकलता है,
और उसकी आलोचना शुरू हो गई, कि यह ग़लत है, यह ठीक नहीं है, इससे हिन्दी का
मखौल बन जाएगा।

इसी नुक्ताचीनी के चलते हिन्दी का विकास नहीं हो पाता है। लोगों की
रचनात्मकता कुण्ठित कर दी जाती है। फिर वो मीनमेख निकाले जाने से बचने के
लिए नए शब्द लाना बन्द कर देते हैं।

अंग्रेज़ी में हज़ारों लाखों नए शब्द आते रहते हैं, मैंने एक बार भी किसी
अंग्रेज़ी विशेषज्ञ द्वारा आलोचना नहीं सुनी कि फलाना नया अंग्रेज़ी शब्द ग़लत है।

हमें सहिष्णु बनना चाहिए।

धन्यवाद।
रावत

V S Rawat

unread,
Aug 7, 2016, 12:46:38 AM8/7/16
to technic...@googlegroups.com
इसी तरह कल एक और शब्द पढ़ा जो कि एक राष्ट्रीय दैनिक अखबार में छपा था।

संघनिष्ठ - अर्थात जिसकी निष्ठा राष्ट्रीय स्वयम् सेवक संघ में रही है

(गुजरात के नए बने मुख्यमंत्री की गुणों की सूची देते हुए, एक तरह से उनके
ठेठ संघी होने का ज़िक़्र करते हुए)

अभी तक कर्तव्यनिष्ठ, सत्यनिष्ठ तो सुना था, लेकिन यह संघनिष्ठ पहली बार पढ़ा,
और अच्छा लगा, क्योंकि यह सटीक रूप से बताता है इसका जो मतलब है।
और यह शुद्ध हिन्दी का चिरकालिक शब्द लगता है। ऐसा लगता ही नहीं है कि आज
लॉञ्च हुआ है, लगता है कि शताब्दियों, सहस्त्राब्दियों से प्रचलन में होगा।

इस तरह की रचनात्मकता को मेरा सलाम।

धन्यवाद।
रावत

On 8/7/2016 6:17 AM, Dr Kavita Vachaknavee wrote:

प्रदीप पाराशर

unread,
Aug 7, 2016, 1:45:48 AM8/7/16
to technic...@googlegroups.com

रचनात्मकता का आधार ज्ञान व समझ दोनों ही होते हैं। शब्द निर्माण तथा प्रयोग के साथ मानक भी होते हैं जो किसी भी भाषा के कोश में उसकी प्रकृति के अनुकूल सम्मिलित किए जाते हैं। क्षणभंगुर की पैरोडी दिनभंगुर है इसी भाव से लिखा गया है। इसके लिए गंभीरता आरोप आलोचना तिरस्कार के स्थान पर कहिए आनंदम् तथा समूह सदस्यों को नमन।


--
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V S Rawat

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Aug 7, 2016, 2:30:59 AM8/7/16
to technic...@googlegroups.com
यही होता है हिन्दी में, या अधिकतर क्षेत्रों में।

कोई कुछ रचनात्मक काम करता है, और हर कोई उसकी बुराई करने लगता है,

ऐसे लोग ज़्यादा बुराई करते हैं जिन्होंने ख़ुद ज़िन्दग़ी में कोई रचनात्मक काम न किया हो,
क्योंकि दूसरे की रचनात्मकता देखकर उन्हें इनफ़ीरियॉरिटी कॉम्पलेक्स हो जाता है।

इस समूह के ज्ञानी सदस्य बताएँ कि आप लोगों ने आज तक हिन्दी के कौन से नए शब्द बनाए हैं?

धन्यवाद।
--
रावत

On 8/7/2016 10:26 AM, प्रदीप पाराशर wrote:
> रचनात्मकता का आधार ज्ञान व समझ दोनों ही होते हैं। शब्द निर्माण तथा प्रयोग के साथ
> मानक भी होते हैं जो किसी भी भाषा के कोश में उसकी प्रकृति के अनुकूल सम्मिलित किए जाते
> हैं। क्षणभंगुर की पैरोडी दिनभंगुर है इसी भाव से लिखा गया है। इसके लिए गंभीरता आरोप
> आलोचना तिरस्कार के स्थान पर कहिए आनंदम् तथा समूह सदस्यों को नमन।
>
>
> On Aug 7, 2016 10:12 AM, "V S Rawat" <vsr...@gmail.com
> technical-hin...@googlegroups.com
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>
> --
> आपको यह संदश इसलिए मिला है क्योंकि आपने Google समूह के "Scientific and
> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
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arunupadhyay30

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Aug 7, 2016, 3:55:39 AM8/7/16
to technic...@googlegroups.com
संघं शरणं गच्छामि।
संघवी (या सिंघवी? ) उपाधि।
संघातक = खतरनाक


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From: V S Rawat
Date:07/08/2016 10:16 (GMT+05:30)
Subject: Re: [technical-hindi] संघनिष्ठ - "क्षणभंगुर" "दिनभंगुर"

इसी तरह कल एक और शब्द पढ़ा जो कि एक राष्ट्रीय दैनिक अखबार में छपा था।

संघनिष्ठ - अर्थात जिसकी निष्ठा राष्ट्रीय स्वयम् सेवक संघ में रही है

(गुजरात के नए बने मुख्यमंत्री की गुणों की सूची देते हुए, एक तरह से उनके
ठेठ संघी होने का ज़िक़्र करते हुए)

अभी तक कर्तव्यनिष्ठ, सत्यनिष्ठ तो सुना था, लेकिन यह संघनिष्ठ पहली बार पढ़ा,
और अच्छा लगा, क्योंकि यह सटीक रूप से बताता है इसका जो मतलब है।
और यह शुद्ध हिन्दी का चिरकालिक शब्द लगता है। ऐसा लगता ही नहीं है कि आज
लॉञ्च हुआ है, लगता है कि शताब्दियों, सहस्त्राब्दियों से प्रचलन में होगा।

इस तरह की रचनात्मकता को मेरा सलाम।


धन्यवाद।
रावत

On 8/7/2016 6:17 AM, Dr Kavita Vachaknavee wrote:
> क्षणभंगुर का अर्थ 'क्षण-भर रहने के बाद भंग हो जाने वाला' नहीं होता, अपितु 'जिसे नष्ट होने में क्षण-भर लगता है' होता है। आप उसे रहने की अवधि से माप रहे हैं जबकि यह नष्ट होने की अवधि का वाचक है। इसीलिए तो जीवन को क्षणभंगुर कहा गया, जो एक क्षण पहले तक था और अगले क्षण नहीं रहता। ब्रह्माण्ड की प्रत्येक वस्तु क्षणभंगुर है क्योंकि होने और न होने के बीच एक क्षण ही होता है। इसीलिए भाषाकार ने क्षणभंगुर के समक्ष कोई अन्य शब्द नहीं रचा। अन्यथा यदि अस्तित्व में रहने की अवधि के अनुसार रचा जाता तो जीवन को जीवनभंगुर कहा जाता।
> तत्सम शब्दों के पीछे निहित शब्दार्थ के दर्शन व संरचना को समझना अनिवार्य होता है और इसका एक ही उपाय है, आर्ष विधि से संस्कृत का गहन अध्ययन। अन्यथा शब्दरचना के नाम पर भाषा से मखौल हो जाएगा।
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> शुभेच्छु
> -कविता वाचक्नवी
>
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Anunad Singh

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Aug 7, 2016, 8:03:00 AM8/7/16
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
रावत जी,

'संघ' का इतिहास  भारत के इतिहास जितना ही पुराना है।  इस देश में  और बहुत से संघ हैं।  (शायद इतने कि उनको गिनाना भी  सम्भव न  हो। )

अब दूसरे लोग क्या लिखें, आपने स्वयमेय यह दिखा दिया कि शब्दावली का निर्माण हर कोई करने लगे तो कैसी अराजकता फैलेगी।

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V S Rawat

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Aug 7, 2016, 12:02:52 PM8/7/16
to technic...@googlegroups.com
अंग्रेजी में शब्दों के मानकीकरण के लिए कोई संस्था नहीं है,

लोग आवश्यकतानुसार नए अंग्रेजी शब्द क्वाइन करते रहते हैं, जो शब्द
लोकप्रिय हो जाते हैं, वो चलते रहते हैं, बाकी भुला दिए जाते हैं।

आज तक किसी ने अंग्रेज़ी ग्रामर में अराजकता नहीं देखी।

हमारी चिन्ताएँ ही हमें प्रतिबन्धित करती हैं। इसे overcaring कहा जा सकता है।

रावत


On 8/7/2016 5:32 PM, Anunad Singh wrote:
> रावत जी,
>
> 'संघ' का इतिहास भारत के इतिहास जितना ही पुराना है। इस देश में और बहुत से संघ
> हैं। (शायद इतने कि उनको गिनाना भी सम्भव न हो। )
>
> अब दूसरे लोग क्या लिखें, आपने स्वयमेय यह दिखा दिया कि शब्दावली का निर्माण हर कोई
> करने लगे तो कैसी अराजकता फैलेगी।
>
> 2016-08-07 13:25 GMT+05:30 'arunupadhyay30' via Scientific and Technical
> Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी) <technic...@googlegroups.com
> <mailto:technic...@googlegroups.com>>:
> technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com> को ईमेल भेजें.
> अधिक विकल्‍पों के लिए, https://groups.google.com/d/optout
> <https://groups.google.com/d/optout> पर जाएं.
>
> --
> आपको यह संदश इसलिए मिला है क्योंकि आपने Google समूह के "Scientific and
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Anunad Singh

unread,
Aug 8, 2016, 1:34:42 AM8/8/16
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
यदि आप यह सोचते हैं कि अंग्रेजी अपने 'महान गुणों' के कारण विश्व में प्रसृत हुई है तो जरा गहराई से अध्ययन कीजिये। अंगरेज लोग अंग्रेजी के प्रसार के लिये सभी तरह के हथकण्डे अपना चुके हैं, अभी भी अपनाये  हुए हैं और आगे भी अपनायेंगे,  जिन्हें  हम 'गन्दा' कहते रहते हैं।

V S Rawat

unread,
Aug 8, 2016, 4:43:21 AM8/8/16
to technic...@googlegroups.com
वो गुण "या अवगुण" अग्रेज़ी या किसी भी भाषा के नहीं होते हैं,
जिन हथकण्डों का आप ज़िक़्र कर रहे हैं, वह भाषा का इस्तेमाल करने वालों के होते हैं,
उसमें भाषा की अच्छाई बुराई चित्र में नहीं आती।

यह सही है कि जिस क्षेत्र में जो लोग गए, वो अपनी भाषा साथ लेकर गए, और
वहाँ प्रचलित कर दी।
भारत में जहाँ अंग्रेज़ आए थे, वहाँ अंग्रेज़ी बढ़ी, जहाँ मुसलमान आए थे वहाँ
अरबी बढ़ी जिसने उर्दू का रूप ले लिया, जहाँ पुर्तगाली, फ़्रान्सीसी आए थे,
वहाँ उनकी भाषा आज भी चल रही है।

धन्यवाद।
रावत

On 8/8/2016 11:04 AM, Anunad Singh wrote:
> यदि आप यह सोचते हैं कि अंग्रेजी अपने 'महान गुणों' के कारण विश्व में प्रसृत हुई है तो जरा
> गहराई से अध्ययन कीजिये। अंगरेज लोग अंग्रेजी के प्रसार के लिये सभी तरह के हथकण्डे अपना
> चुके हैं, अभी भी अपनाये हुए हैं और आगे भी अपनायेंगे, जिन्हें हम 'गन्दा' कहते रहते हैं।
>
>
> 2016-08-07 21:32 GMT+05:30 V S Rawat <vsr...@gmail.com
> <mailto:vsr...@gmail.com>>:
>
> अंग्रेजी में शब्दों के मानकीकरण के लिए कोई संस्था नहीं है,
>
> लोग आवश्यकतानुसार नए अंग्रेजी शब्द क्वाइन करते रहते हैं, जो शब्द लोकप्रिय हो जाते
> हैं, वो चलते रहते हैं, बाकी भुला दिए जाते हैं।
>
> आज तक किसी ने अंग्रेज़ी ग्रामर में अराजकता नहीं देखी।
>
> हमारी चिन्ताएँ ही हमें प्रतिबन्धित करती हैं। इसे overcaring कहा जा सकता है।
>
> रावत
>

Madhusudan H Jhaveri

unread,
Aug 8, 2016, 5:49:42 PM8/8/16
to technic...@googlegroups.com
अंग्रेजी के अपने 'महान गुण' ?

मित्रों निम्न अंग्रेज़ी का उदाहरण देख लीजिए।
उसी प्रकार --



The Lord's Prayer
(Old English - Anglo-Saxon)

Fæder ure þu þe eart on heofonum;

Si þin nama gehalgod

to becume þin rice

gewurþe ðin willa

on eorðan swa swa on heofonum.

urne gedæghwamlican hlaf syle us todæg

and forgyf us ure gyltas

swa swa we forgyfað urum gyltendum

and ne gelæd þu us on costnunge

ac alys us of yfele soþlice

(note: the old english "þ" is pronounced "th")

कितना समझ पाए?

Read more: http://www.lords-prayer-words.com/lord_old_english_medieval.html#ixzz4GmLyj1Ai

केल्टिक भाषा भी ऐसी ही अनियंत्रित खिचडी बन चुकी थी।
{देवेंद्रनाथ शर्मा की पाठ्य पुस्तक --*भाषा विज्ञान की भूमिका* पृष्ठ (१४५-१४६)
देखकर अपना स्वतंत्र मत बनाइए।

डॉ. मधुसूदन








----- Original Message -----
From: Anunad Singh <anu...@gmail.com>
To: Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी) <technic...@googlegroups.com>
Sent: Mon, 08 Aug 2016 01:34:41 -0400 (EDT)
Subject: Re: [technical-hindi] संघनिष्ठ - "क्षणभंगुर" "दिनभंगुर"

--

आपको यह संदश इसलिए मिला है क्योंकि आपने Google समूह के "Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.

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ken

unread,
Aug 9, 2016, 3:13:20 PM8/9/16
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)

The Lord's Prayer 
(Old English - Anglo-Saxon)


Fæder ure þu þe eart on heofonum;

Si þin nama gehalgod

to becume þin rice

gewurþe ðin willa

on eorðan swa swa on heofonum.

urne gedæghwamlican hlaf syle us todæg

and forgyf us ure gyltas

swa swa we forgyfað urum gyltendum

and ne gelæd þu us on costnunge

ac alys us of yfele soþlice

(note: the old english "þ" is pronounced "th")


Translation of Old English Text

Father our thou that art in heavens

be thy name hallowed

come thy kingdom

be-done thy will

on earth as in heavens

our daily bread give us today

and forgive us our sins

as we forgive those-who-have-sinned-against-us

and not lead thou us into temptation

but deliver us from evil. truly


Spell able Respell: 

faadhar aauar dhaau dhaet aart in hevanz 

bi dhaai neim haelod 

kam dhaai kingdam 

bi-dan dhaai wil 

aan arth aez in hevanz 

aauar deili bred giv as tudei 

aend fargiv as aauar sinz 

aez wi fargiv dhoz-hu-haev-sind-agenst-as 

aend naat lid dhaau as intu temteishan 

bat dilivar as fram ival. truli


Diacritic respell:

fädhàr äuàr dhäu dhăt ärt in hevànz 

bi dhäi neim hălod 

kàm dhäi kingdàm 

bi-dàn dhäi wil 

än àrth ăz in hevànz 

äuàr deili bred giv às tudei 

ănd fàrgiv às äuàr sinz 

ăz wi fàrgiv dhoz-hu-hăv-sind-àgenst-às 

ănd nät lid dhäu às intu temteishàn 

bàt dilivàr às fràm ivàl. truli


Transliteration: 

ફાધર્ અર્ ધાઉ ધૅટ્ આર્ટ્ ઇન્ હેવન્ઝ્  

બિ ધાઇ નેઇમ્ હૅલોડ્ 

કમ્ ધાઇ કિન્ગ્ડમ્ 

બિ-ડન્ ધાઇ વિલ્ 

આન્ અર્થ્ ઍઝ્ ઇન્ હેવન્ઝ્ 

અર્ ડેઇલિ બ્રેડ્ ગિવ્ અસ્ ટુડેઇ 

ઍન્ડ્ ફર્ગિવ્ અસ્ અર્ સિન્ઝ્ 

ઍઝ્ વિ ફર્ગિવ્ ધોઝ્-હુ-હૅવ્-સિન્ડ્-અગેન્સ્ટ્-અસ્ 

ઍન્ડ્ નાટ્ લિડ્ ધાઉ અસ્ ઇન્ટુ ટેમ્ટેઇશન્ 

બટ્ ડિલિવર્ અસ્ ફ્રમ્ ઇવલ્. ટ્ર ઉલિ 


IPA:

ˈfɑðər ˈaʊər ðaʊ ðæt ɑrt ɪn ˈhɛvənz 

bi ðaɪ neɪm ˈhæloʊd 
kʌm ðaɪ ˈkɪŋdəm 
bi-dʌn ðaɪ wɪl 
ɑn ɜrθ æz ɪn ˈhɛvənz 
ˈaʊər ˈdeɪli brɛd gɪv ʌs tuˈdeɪ 
ænd fərˈgɪv ʌs ˈaʊər sɪnz 
æz wi fərˈgɪv ðoʊz-hu-hæv-sɪnd-əˈgɛnst-ʌs 
ænd nɑt lid ðaʊ ʌs ˈɪntu tɛmˈteɪʃən 
bʌt dɪˈlɪvər ʌs frʌm ˈivəlˈtruli 

Read more: The Lords Prayer in Old English(Anglo-Saxon)


The Lords Prayer in Old English(Anglo-Saxon)

V S Rawat

unread,
Aug 10, 2016, 1:32:10 AM8/10/16
to th
लेखकों में प्रकाशित होने की इच्छा के लिए "छपास" शब्द तो पहले ही आ गया था
और लेखकों में काफ़ी लोकप्रिय भी है।

अब पेश है,

प्रकाशक के लिए नया शब्द - छापक

फेसबुक से साभार
--
रावत

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