शर्मा जी,
संस्कृत व्याकरण के चाहे बेसिक ज्ञान की बात हो या सम्पूर्ण ज्ञान की, अष्टाध्यायी के क्रम से ही संस्कृत व्याकरण का अध्ययन करना चाहिए - यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूँ । किसी प्रकार की कौमुदी (लघुसिद्धान्त कौमुदी, मध्यसिद्धान्त कौमुदी या वैयाकरणसिद्धान्त कौमुदी) से जीवन भर परिश्रम करने से भी संस्कृत व्याकरण ठीक से समझ में नहीं आयेगा ।
कृपया रामलाल कपूर ट्रस्ट (
http://rlktrust.org/) द्वारा प्रकाशित निम्नलिखित पुस्तकें मँगा लें -
(1) अष्टाध्यायी-भाष्य (प्रथमावृत्ति) - 3 खंडों में ।
(2) अष्टाध्यायीसूत्रपाठः (यतिबोधयुक्तः)
(3) धातुपाठः (धातुसूचीसहित)
(4) संस्कृत धातु कोष
(5) संस्कृत पठन-पाठन की अनुभूत सरलतम विधि (दो भागों में)
साथ ही कृष्णदास अकादमी, वाराणसी द्वारा प्रकाशित एवं पं॰ सत्यनारायण खण्डूड़ी द्वारा सम्पादित "अष्टाध्यायी-सूत्रपाठः" भी मँगा लें । यह मोतीलाल बनारसीदास से भी प्राप्त हो जायेगा ।
अष्टाध्यायी से कौन-कौन से सूत्रों का कैसे अध्ययन करना है, इसके लिए मैं मार्गदर्शन करूँगा ।
शुभकामनाओं सहित
भवदीय
नारायण प्रसाद