शिरोरेखा रहित हिन्दी

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Pk Sharma

unread,
Dec 26, 2012, 10:06:02 PM12/26/12
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
"मैं तो पिछले 25-40 साल से हस्तलिखित हिन्दी में शिरोरेखा नहीं लगाता
हूँ, जब तक कहीं प्रस्तुत न करना हो, और आज तक किसी को पढ़ने में समस्या
नहीं आई।"
- रावत

क्या कोई ऐसा फ़ॉन्ट भी है ?

--





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V S Rawat

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Dec 26, 2012, 10:38:05 PM12/26/12
to technic...@googlegroups.com
मुझे तो नहीं मिला।

इस समूह में विशेषज्ञ इस दिशा में काम करें और शिरोरेखा विहीन देवनागरी
फ़ॉन्ट विकसित करना चाहें, तो भाषा का एक नया-सरल रूप देखने को मिलेगा। जो
लोग फ़ॉन्ट निर्माण पर काम करते है उनके लिए शिरोरेखा को हटाना ज़्यादा
मुश्किल या ज़्यादा समय लेने वाला नहीं होगा।

मैं इतना ज़रूर कह सकता हूँ कि मेरी शिरोरेखा विहीन हस्तिलिखित हिन्दी में
मुझे कभी किसी अक्षर को पहचानने में भ्रम नहीं हुआ था। और पढ़ने में बहुत
साफ़ लगता था।

--
रावत

2012/12/27 Pk Sharma <pksharm...@gmail.com>:

V S Rawat

unread,
Dec 26, 2012, 10:58:47 PM12/26/12
to technic...@googlegroups.com
एक संबंधित जानकारी के लिए पोस्ट को ख़ुद ही आगे बढ़ा रहा हूँ। क्षमा।
 
 
उपरोक्त पेज पर सेरिफ और सैन्स सेरिफ़ के बारे में जानकारी पर एक नज़र डालें।
 
"सेरिफ" अंग्रेजी अक्षरों के अंत में डाले गए एक खड़े या पड़े प्रोजेक्शन को कहते हैं।
 
कुछ अंग्रेज़ी फ़ॉन्टों जैसे Arial या Comic Sans MS में सैरिफ़ नहीं होता है,
ABCDEFGHIJKLMNOPQRSTUVWXYZ
 
जबकि Times New Roman या Courier New में सैरिफ़ होता है।
ABCDEFGHIJKLMNOPQRSTUVWXYZ
ऊपर A पर एकदम नीचे, दोनों पैरों पर जो लंबी पड़ी डंडियाँ हैं
या E पर सारे कोनों पर जो खड़ी या पड़ी डंडियाँ हैं,
उसे सैरिफ़ कहते हैं।
 
इस फ़ीचर वाले अंग्रेज़ी फ़ॉन्टों को सैरिफ़ कहते हैं।
जबकि इस फ़ीचर से विहीन अंग्रेज़ी फ़ॉन्टों को सैन्स-सैरिफ़ कहते हैं। (सैन = छोड़ दिया, हटा दिया)
 
कहना यह चाहता था कि हम अधिकांश भारतीय लिपियों के लिए भी इसी तरह का सैन्स-शिरोरेखा संस्करण के फ़ॉन्ट को ईजाद कर सकते हैं।
जितना कम लिखा जाएगा, उतना अधिक आसानी होगी लोगों को मूल अक्षर मात्राओं को पहचानने में।
 
निवेदन है कि समूह के फ़ॉन्ट निर्माता कम-से-कम कुछ अक्षरों का तो सैन्स-शिरोरेखा संस्करण प्रस्तुत करें जिससे बाकी सदस्य अपने विचार दे सकें कि क्या यह सरल और उपयोगी दिख रहा है, ताकि इस दिशा में आगे काम करने के बारे में तय किया जा सके।
 
वैसे अंग्रेज़ी में फ़ॉन्ट निर्माताओं ने ढंग से काम नहीं किया (हा हा हा), तभी सैरिफ़ को हटाने के चक्कर में अंग्रेजी अक्षरों को एक जैसा बना गए जैसे
I यह बड़ा आई है
l जबकि यह छोटा एल है
 
दोनों को अलग अलग पहचानना असंभव है। यह फ़ॉन्ट निर्माण की त्रुटि है। इसके लिए मुझे जाने कितनी बात वर्ड में केस चेन्ज करके देखना पड़ता है कि यह कौन सा अक्षर है।
 
--
रावत
 
2012/12/27 V S Rawat <vsr...@gmail.com>:

Hariraam

unread,
Dec 27, 2012, 12:26:49 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
शिरोरेखा देवनागरी की ध्वनिवैज्ञानिक अनुपम विशेषता है। मैंने कुछ विद्वानों से सुना है -- (डॉ. कविता वाचक्नवी जी ने भी एक ईमेल संदेश में ऐसा लिखा था...)
 
यदि देवनागरी 'क' की आकृति किसी खोखली नली (मिट्टी के पाइप आदि से) बनाई जाए और जहाँ शिरोरेखा से वर्ण जुड़ता है, उस स्थान पर फूँक मारी जाए तो 'क' ध्वनि ही निकलेगी... इसी प्रकार अ से ह तक की आकृतियों से वही ध्वनियाँ निकलेगी... इतनी ध्वनिवैज्ञानिक थी यह लिपि..., शायद इसीलिए शिरोरेखा का प्रावधान किया गया होगा। संसार की किसी अन्य लिपि में शिरोरेखा नजर नहीं आती... देवनागरी पर फिर से प्रयोगशाला में अनुसन्धान की जरूरत है...
 
लेकिन कभी परीक्षण करके देखना सम्भव नहीं हुआ, न ही इस विषय में को प्रामाणिक लिखित या मुद्रित सामग्री अभी तक मिली है...
 
"देवनागरी लिपि तथा हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण" पुस्तिका में भी शिरोरेखा सहित लिपि को ही मान्यता दी गई है।
 
हालांकि शिरोरेखा के बिना भी अनेक प्राचीन महान् लोगों की हस्तलिखित पाण्डिलिपियाँ पुस्तकालयों में देखी हैं।

--
हरिराम
प्रगत भारत <http://hariraama.blogspot.com>
2012/12/27 V S Rawat <vsr...@gmail.com>
मुझे तो नहीं मिला।

Vinod Sharma

unread,
Dec 27, 2012, 1:46:08 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
मैं हरीरामजी से पूर्णतः सहमत हूँ। शिरोरेखा देवनागरी का अलंकरण है।
शिरोरेखा-विहीन शब्द ऐसे लगते हैं जैसे जंगल में पेड़ों से पत्ते झड़ गए हों
और ठूँठ ही ठूँठ खड़े हों। मेरे विचार से शिरोरेखा विहीन देवनागरी की ओर
जाना प्रतिगामी कदम होगा। ब्राह्मी, प्राकृत, पाली आदि के परिष्कार के
उपरांत देवनागरी का विकास हुआ था। क्या हम पीछे की ओर लौटना चाहते
हैं?

2012/12/27 Hariraam <hari...@gmail.com>




--
 
 



--
सादर,
विनोद शर्मा

V S Rawat

unread,
Dec 27, 2012, 2:00:44 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
आपके सौंदर्य बोध को नमन।
:-) हा हा।
 
इतने मज़बूत शब्द लिख देते हैं कि आगे की सारी सोच ही बाधित हो जाए। आपका लिखा पढ़ कर अगर कोई फ़ॉन्ट निर्माता शिरोरेखाविहीन फॉन्ट को विकसित करेगा तो वह ख़ुद को अपराधी समझेगा।
 
फिर भी, यदि किसी दूसरे सदस्य का सौंदर्यबोध इतना गहरा न हो, तो पुन: निवेदन है कि शिरोरेखा विहीन एक फ़ॉन्ट विकसित करने का प्रयास करें। एक प्रयोग करना तो बनता है।
 
रावत

2012/12/27 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>

Pk Sharma

unread,
Dec 27, 2012, 4:00:22 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
sometimes i get confused between the two V's

now one V says something totally opposite the other V

परन्तु भाईयों गुजराती, कैथी  लिपि में तो शिरोरेखा होती ही नहीं !
और अनेक अन्य लिपियों में भी नहीं होती 
लिपियाँ तो सारी ही मान्य होती हैं |

2012/12/27 V S Rawat <vsr...@gmail.com>
आपके सौंदर्य बोध को नमन।
:-) हा हा।
 
इतने मज़बूत शब्द लिख देते हैं कि आगे की सारी सोच ही बाधित हो जाए। आपका लिखा पढ़ कर अगर कोई फ़ॉन्ट निर्माता शिरोरेखाविहीन फॉन्ट को विकसित करेगा तो वह ख़ुद को अपराधी समझेगा।
 
फिर भी, यदि किसी दूसरे सदस्य का सौंदर्यबोध इतना गहरा न हो, तो पुन: निवेदन है कि शिरोरेखा विहीन एक फ़ॉन्ट विकसित करने का प्रयास करें। एक प्रयोग करना तो बनता है।-- 

Hariraam

unread,
Dec 27, 2012, 4:20:03 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
देवनागरी फोंट निर्माण करना विश्व की अन्य लिपियों के फोंट निर्माण करने से काफी कठिन कार्य है। क्योंकि एक वर्ण की शिरोरेखा को पिछले वर्ण की शिरोरेखा पर 5% ओवरलैप करके डिजाइन करना पड़ता है। अन्यथा एक शब्द के सभी वर्ण एक दूसरे से कटे हुए लगते हैं।
 
पेजमेकर, इनडिजाइन आदि में प्रकाशनार्थ हिन्दी पाठ की डिजाइन करते वक्त character spacing, kerning आदि को off रखना पड़ता है, अन्यथा अक्षरों के बीच में हल्का स्पेस आने के कारण शिरोरेखा में कटाव आ जाता है। जो काफी भद्दा दिखता है। CorelDraw आदि में जब किसी शब्द को आउटलाइन रूप में सेट करते हैं या किसी हिन्दी पाठ को गोलाकार लोगों में चाप या अर्द्धवृत्त की आकृति में सजाते हैं तो शिरोरेखा एक-दूसरे वर्णों पर ओवरलैप हुई दिखाई देती है। इसलिए शब्द को फिर काफी परिश्रम करके सिंगल रेखा वाली आउटलाइन में मैनुअली सजाना पड़ता है। इसमें काफी परिश्रम व समय लगता है।
 
शिरोरेखा के कारण ही ओटोमेटिक डैटाबेस में, OCR में, ऑन-लाइन फॉर्म्स आदि भरने में (एक खाने में एक अक्षर रूप में) काफी समस्या आती है और कोई उच्च तकनीकी वाला कार्य देवनागरी में नहीं हो पाता।
 
शिरोरेखा विहीन देवनागरी का फोंट बनाना तो काफी सरल है। समय की मांग के साथ तकनीकी बदलती है। लोगों के अभ्यास बदलते हैं।
 
इसके लिए किसी मुक्त स्रोत के एक फोंट को लेकर उसकी शिरोरेखा को हटाकर आरम्भिक रूप में प्रयास किया जा सकता है।
 
हालांकि अभी सबसे ज्यादा मांग हो रही है, केवल मूल व्यंजन एवं केवल मूल स्वरों वाली मात्राओं तथा संयुक्ताक्षरों से रहित देवनागरी की।

2012/12/27 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>

V S Rawat

unread,
Dec 27, 2012, 4:37:11 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
जी हाँ, मूल एकल पूर्ण अक्षरों से प्रारंभ कर सकते हैं। फिर अर्धाक्षर, मात्राएँ, संयुक्ताक्षर वग़ैरह एक-एक करके जोड़े जाते रहेंगे।
 
कर्निंग की समस्या पर ध्यान भी न दिया जाए प्रारंभ में, और अक्षर कटे-कटे अलग-अलग दिखें तो भी कोई बात नहीं। रिफ़ाइन तो बाद को बहुत तरीक़े से कर लिया जाएगा।
 
पहला क़दम तो लोगों के विचार जानना है कि क्या शिरोरेखा विहीन देवनागरी अक्षर किसी भी स्तर तक स्वीकार्य हैं कि या पूरी तरह से अस्वीकार हैं जैसे विनोद शर्मा जी को अस्वीकार हैं।
 
मैं तो पुराना पापी हूँ शिरोरेखा विहीन देवनागरी के इस्तेमाल का, तो मेरा तो नरक में जाना तय है। बिना शिरोरेखा के लिखने में कम समय लगता है, स्याही कम खर्च होती है, मिटाना कम पड़ता है। कई लाभ भी हैं। दिखने में साफ़-साफ़ दिखता है।
 
रावत

2012/12/27 Hariraam <hari...@gmail.com>

--
 
 

Pk Sharma

unread,
Dec 27, 2012, 4:38:15 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
तो प्रद्युम्न को लिखेंगे प  ्र द  ् य उ म  ् न   ?

काफ़ी बड़ा बदलाव होगा |



2012/12/27 Hariraam <hari...@gmail.com>

हालांकि अभी सबसे ज्यादा मांग हो रही है, केवल मूल व्यंजन एवं केवल मूल स्वरों वाली मात्राओं तथा संयुक्ताक्षरों से रहित देवनागरी की।

Pk Sharma

unread,
Dec 27, 2012, 5:21:55 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
2012/12/27 V S Rawat <vsr...@gmail.com>
बिना शिरोरेखा के लिखने में कम समय लगता है, स्याही कम खर्च होती है, मिटाना कम पड़ता है। कई लाभ भी हैं। दिखने में साफ़-साफ़ दिखता है।

मुझे भी शिरोरेखा रहित लिखने की विधि का सहारा लेना पड़ा था माध्यमिक मे तीव्र गति से लिख कर अव्वल आने के लिये

नरक में तो हैं ही 

उस लोक में अपन साथ ही टिकट कटा लेंगे -- शिरोरहित वाले   :-) 

Vineet Chaitanya

unread,
Dec 27, 2012, 6:00:25 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
यदि नयी लिपि ही बनानी है तो एक सुझाव:
पृष्ठभूमि:
   क्योंकि देवनागरि लिपि के व्यञ्जनों में  "अ" निहित होता है इसीलिये "हल् चिह्न" और "मात्रा" की आवश्यकता पडती है.
  
   "किसी स्वर की मात्रा" = "हल् चिह्न" + "वही स्वर"
    उदाहरण: "ी" = "्" + "ई"

अतः
      यदि हम शुद्ध हल् और स्वर की लिपि चाहते हैं तो हम यह मान सकते हैं कि शिरोरेखा रहित व्यञ्जन शुद्ध हल् होते हैं. (समरूपता के लिये स्वर की भी शिरोरेखा हटायी जा सकती है, किन्तु इससे उनसे द्योतित मूल्य में कोई अन्तर नहीं माना जायेगा) इस लिपि में
हरि = "हअरइ" (<- शिरोरेखा के बिना वाले रूप होने चाहिये).
तुलना के लिये: hari

विनीत चैतन्य
   
 

2012/12/27 Hariraam <hari...@gmail.com>

--
 
 

V S Rawat

unread,
Dec 27, 2012, 7:16:07 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
पता नहीं किस बड़े बदलाव की बात कह रहे हैं।
 
उ नहीं होगा उसमें, ु होगा।
 
रावत

2012/12/27 Pk Sharma <pksharm...@gmail.com>
तो प्रद्युम्न को लिखेंगे प  ्र द  ् य उ म  ् न   ?

pk sharma

unread,
Dec 27, 2012, 8:07:20 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com, vc99...@gmail.com, v...@iiit.ac.in


On Thursday, 27 December 2012 16:30:25 UTC+5:30, Vineet Chaitanya wrote:
 
हरि = "हअरइ" (<- शिरोरेखा के बिना वाले रूप होने चाहिये).
तुलना के लिये: hari


   "किसी स्वर की मात्रा" = "हल् चिह्न" + "वही स्वर"
    उदाहरण: "ी" = "्" + "ई"


तो     री  =  " र"  +  "्" + "ई " ?
या फ़िर    री    होगा ही नहीं  ?    "र" +"इ" से ही री लिखी जायेगी ? जैसे कि आपने   हअरइ  लिखा है ?

Hariraam

unread,
Dec 27, 2012, 8:07:23 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
जी नहीं, -
प्रद्युम्न को लिखना होगा-
 
प्‌र्‌अद्‌य्‌उम्‌न्‌अ
PRADYUMNA
 
बशर्ते कि
हल्+युक्त = अ-रहित = मूल व्यंजन (34 मूल व्यंजनों को)
को युनिकोड में एक कोड प्वाइंट रूप में एनकोड किया जाए।
 
लोग कहेंगे - पढ़ने/समझने में कठिनाई होगी, जीहाँ आरम्भ में होगी...
लेकिन लोग अंग्रेजी में PRADYUMNA कैसे आराम से पढ़ लेते हैं? कैसे तत्काल लिख/टाइप करके एसएमएस कर लेते हैं?
हिन्दी को ताक पर कैसे रख देते हैं?
 
लाभ--
 
- कोई मात्रा या कोई संयुक्ताक्षर का प्रयोग नहीं। शुद्ध व्यंजन + शुद्ध स्वर।
 
- अंग्रेजी और हिन्दी दोनों में FIELD SIZE लगभग एक समान, ओटो डैटाबेस के अनुकूल
एक खाने में एक अक्षर लिखकर ऑन लाइन फार्म भरने के पूर्ण अनुकूल
 
- परम्परागत "प्रद्युम्न" रूप में प्रदर्शन -
ओपेन टाइप फोंट में सम्मिलित ग्लीफ रिप्लेशमेंट तकनीक स्वतः व तत्काल कर देगी।
- आपरेटिंग सीस्टम्स के रेण्डरिंग इंजन की कोई जरूरत नहीं।
- प्रोसेसिंग सरल, इनपुट सरल, सार्टिंग, इण्डेक्सिंग सब सरल,
- चाहे रेलवे स्टेशनों के कोड देवनागरी में लिखना हो या
- चाहे अन्य किसी तकनीकी पुर्जे का कोड-नाम, संक्षिप्त नाम लिखना हो
- चाहे तत्काल एसएमएस करना हो - सब सरल
- भारतीय भाषाएँ "Complex Script" के दागी ठप्पे से मुक्त
- जटिल प्रौद्योगिकी, इनपुट में देरी, इत्यादि से होनेवाली अरबों रुपये के बेकार श्रम की बचत
- राष्ट्रीय आय कई गुना ज्यादा... भारत फिर से सोने की चिड़िया नहीं, "हीरे की चिड़िया"...
 
किन्तु... परन्तु....
- क्या ऐसा 'महाशक्ति' करने देगी??? कोई भारत की उन्नति सह पाएगा????
- 1988 से संस्कृत को मूल विद्वानों द्वारा की जा रही मांग को दबाया/कुचला जाता रहा है...
 

 
2012/12/27 Pk Sharma <pksharm...@gmail.com>

pk sharma

unread,
Dec 27, 2012, 8:09:50 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
On Thursday, 27 December 2012 17:46:07 UTC+5:30, Rawat wrote:
पता नहीं किस बड़े बदलाव की बात कह रहे हैं।

लोगों को लिखने व पढ़ने की आदत में बदलाव
 
 
उ नहीं होगा उसमें, ु होगा।

मात्राएँ होंगी या नहीं होंगी ?
 
 
रावत

V S Rawat

unread,
Dec 27, 2012, 8:18:05 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
मैंने आपका उत्तर पहले पढ़ा था, सुझाव का पोस्ट बाद को आया था, इसलिए संदर्भ समझ में नहीं आ पाया था।
 
रावत

2012/12/27 pk sharma <pksharm...@gmail.com>

--
 
 

V S Rawat

unread,
Dec 27, 2012, 8:19:07 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
इस सुझाव का शिरोरेखा से कोई संबंध नहीं है।
 
बेहतर होता कि इस सुझाव को अलग थ्रेड में पोस्ट किया जाता।
 
रावत

2012/12/27 Vineet Chaitanya <v...@iiit.ac.in>

Anunad Singh

unread,
Dec 27, 2012, 8:46:24 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
फिर कई मुद्दों का घालमेल हो रहा है।

मूल बात सिरोरेखा रहित देवनागरी से चली थी। और उसका प्रमुख लाभ 'अधिक गति से देवनागरी लिख पाना' बताया गया था। अभी बात मात्राओं को उपर/नीचे/पीछे से हटाकर आगे लगाने की हो रही है और उसके लिए प्रमुख लाभ यह होगा कि 'आनलाइन फॉर्म भरने में आसानी हो जाएगी।'  बात इससे भी आगे निकलकर देवनागरी का नया यूनिकोड बनाने तक पहुंच गई है।

ये सब सुझाव मुझे उसे डॉक्टर के सुझाव जैसे लग रहे हैं जो सिरदर्द होने पर सिर कटवाकर सिरदर्द से छुटकारा पाने की सलाह देता है। क्या फॉर्म भरने वाली समस्या इतनी महत्वपूर्ण है ? क्या यह समस्या असाध्य है? छोटा सा काम हम नहीं कर पा रहे हैं तो देवनागरी को बदलने के बाद आने वाली समस्याओं कैसे हल कर पाएंगे?

-- अनुनाद

Pk Sharma

unread,
Dec 27, 2012, 8:53:32 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
हरि = "हअरइ" (<- शिरोरेखा के बिना वाले रूप होने चाहिये).
तुलना के लिये: hari

विनीत चैतन्य


एसे ? (संलग्न)

hari.png

ePandit | ई-पण्डित

unread,
Dec 27, 2012, 11:27:38 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
शिरोरेखा विहीन देवनागरी का प्रमुख लाभ आपने 'अधिक गति से देवनागरी लिख पाना' बताया है। लेकिन यह बात हस्तलेखन में ही है, कम्प्यूटर पर लिखने में हमें बस वर्ण ही टाइप करने होते हैं शिरोरेखा अलग से नहीं लगानी पड़ती।

व्यक्तिगत रूप से मेरा विचार है कि शिरोरेखा विहीन हिन्दी सुन्दर नहीं लगती। कक्षा में पढ़ाते हुये (बोर्ड पर लिखते हुये) किसी समय कालांश समाप्त होने वाला हो और सवाल थोड़ा बाकी रहता हो तो पूरा करने के लिये मैं भी जल्दी में दो-चार पंक्तियाँ बिना शिरोरेखा लिख लेता हूँ पर यह आदर्श स्थिति नहीं है। शिरोरेखा देवनागरी को सुन्दर और पठनीय बनाती है। यदि शिरोरेखा इतनी ही बेकार  चीज होती तो हमारे पूर्वज इसे कब का खत्म कर चुके होते।

कम्प्यूटर पर तो इसके लिये फॉण्ट बनाने की मेहनत कुछ समझ नहीं आती क्योंकि जैसा मैंने पहले कहा कि हस्तलेखन में ही शिरोरेखा न लगाने से गति का कुछ अन्तर पड़ता है, कम्प्यूटर पर टंकण में तो वह स्वतः लगती है।

फिर भी ये मेरे व्यक्तिगत विचार हैं। कोई भी ऐसा फॉण्ट बनाने के लिये स्वतन्त्र है, अच्छा विचार हुआ तो स्वतः चलेगा। बस कृपया मुझे विरोधी-सरोधी वगैरा घोषित मत कर देना। :)

27 दिसम्बर 2012 8:36 am को, Pk Sharma <pksharm...@gmail.com> ने लिखा:
--
 
 



--
Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
If u can't beat them, join them.

ePandit: http://epandit.shrish.in/

Madhusudan H Jhaveri

unread,
Dec 27, 2012, 11:44:27 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
शिरोरेखा शब्द की सीमा भी दिखा कर अगला शब्द,कहाँ प्रारंभ होता है, वह भी बता देती है।
ऐसे भी शब्द निश्चित हैं, जो बिना शिरोरेखा उलझन खडी कर सकते होंगे।
परम्परा इतनी न बदलें, कि आनेवाली पीढियाँ, भूतकाल से भी कट जाएँ।
मेरी मातृभाषा गुजराती में शिरोरेखा ना होने के कारण ऐसी उलझने अनुभव की है।
विशेष किसी के पत्र में, जगह बचाने के लिए शब्द पास पास लिखे जाने के कारण यह अनुभव किया है।
द्वयर्थी अर्थकरण भी होता हुआ देखा है।
मधुसूदन


From: "ePandit | ई-पण्डित" <sharma...@gmail.com>
To: technic...@googlegroups.com
Sent: Thursday, December 27, 2012 11:27:38 AM
Subject: Re: [technical-hindi] शिरोरेखा रहित हिन्दी
--
 
 

ken

unread,
Dec 27, 2012, 11:55:39 AM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
शर्मा जी 
यहाँ आपका स्टेटमेन्ट भारत की सबसे  सरल शिरोरेखा  मुक्त गुजराती लिपि में  है ।

મૈં હરીરામજી સે પૂર્ણતઃ સહમત હૂઁ। શિરોરેખા દેવનાગરી કા અલંકરણ હૈ।
શિરોરેખા-વિહીન શબ્દ ઐસે લગતે હૈં જૈસે જંગલ મેં પેડ઼ોં સે પત્તે ઝડ઼ ગએ હોં
ઔર ઠૂઁઠ હી ઠૂઁઠ ખડ઼ે હોં। મેરે વિચાર સે શિરોરેખા વિહીન દેવનાગરી કી ઓર
જાના પ્રતિગામી કદમ હોગા। બ્રાહ્મી, પ્રાકૃત, પાલી આદિ કે પરિષ્કાર કે
ઉપરાંત દેવનાગરી કા વિકાસ હુઆ થા। ક્યા હમ પીછે કી ઓર લૌટના ચાહતે
હૈં?

बृहस्पतिवार, 27 दिसम्बर 2012 12:46:08 am UTC-6 को, विनोद शर्मा ने लिखा:

ken

unread,
Dec 27, 2012, 12:15:15 PM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
Madhsudan ji,

Gujarati is written this way because Gujarat does not have language correction board.If Gujarati is written in bold Italic format,  it will look lot better.Also in Gujarat there is a language reform movement to use short "u " and long ' i "only  in writing.

शिरोरेखा शब्दकी सीमाभी दिखाकर अगला शब्द,कहाँ प्रारंभ होता है, वहभी बता देती है।
ऐसेभी शब्द निश्चित हैं, जो बिना शिरोरेखा उलझन खडीकर सकते होंगे। 
परम्परा इतनीन बदलें, कि आनेवाली पीढियाँ, भूतकालसेभी कट जाएँ।
मेरी मातृभाषा गुजरातीमें शिरोरेखा ना होनेके कारण ऐसी उलझने अनुभव की है।
विशेष किसीके पत्रमें, जगह बचानेके लिए शब्द पास पास लिखे जानेके कारण यह अनुभव किया है।
द्वयर्थी अर्थकरणभी होता हुआ देखा है।
मधुसूदन 

बृहस्पतिवार, 27 दिसम्बर 2012 10:44:27 am UTC-6 को, Madhu Jhaveri ने लिखा:

V S Rawat

unread,
Dec 27, 2012, 12:25:26 PM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
यदि शिरोरेखा इतनी पसंद आ रही है सदस्यों को, तो कोई गुजराती फ़ॉन्ट विकसित करनी चाहिए जिसमें वर्णों के ऊपर शिरोरेखा जोड़ी जाए।
 
मैं परम्परा बदलने वाला कौन होता हूँ? मेरी बात कोई सुनेगा नहीं।
यह तो प्रयोग करने की बात है। अंग्रेज़ी फ़ॉन्ट की किसी भी साइट पर जाएँ, तो आपको लाखों न सही, हज़ारों ऐसे एस्काई फ़ॉन्ट मिलेंगे जिनमें अंग्रेज़ी के अक्षरों को अद्भुत तरीक़ों से लिखा हुआ है। वो सब एक प्रयोग ही है। किसी को पसंद आ जाता है, किसी को नहीं आता है।

जब तक ऐसा कोई फ़ॉन्ट तैयार नहीं किया जाता जिसमें गुजराती के ऊपर शिरोरेखा हो, या देवनागरी के ऊपर शिरोरेखा न हो, तब तक चर्चा ही कर सकते हैं, उपयोग और लोकप्रिय होने के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
 
मुझे फ़ॉन्ट बनाना आता नहीं है, वरना मैं तो ऐसी शिरोरेखा वाली गुजराती और बिना शिरोरेखा वाली देवनागरी फ़ॉन्ट बना के दिखाता और आपके विचार पूछता कि कैसी लग रही है। फिर भी,यदि कोई सदस्य ऐसी सरल सॉफ़्टवेयर बता सकता है जिसमें मैं मंगल के सारे वर्णों से शिरोरेखा हटा पाऊँगा, तो मेरा मार्गदर्शन करें। मैं करके देखना चाहता हूँ।
जिन्हें फ़ॉन्ट बनाना आता है मेरा निवेदन है कि वो यदि थोड़ा समय लगा सकते हैं तो इस प्रयोग को करें। यही विज्ञान और शोध का आधार है कि हम अपने निजी विचारों को बीच में न लाएँ कि मुझे अच्छी नहीं लगती, तो मैं नहीं बनाऊँगा।

--
रावत

2012/12/27 ken <drk...@gmail.com>

--
 
 

ken

unread,
Dec 27, 2012, 12:47:14 PM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
Mr.Sharma,
India's future lies in simplification.Let the people of India decide what's good for them.  
How many other Indian languages or world languages use Shirorekha for their scripts?
The beauty lies in the eyes of beholder.
The water always follows the easy path to ocean.
 
Here is Shirorekha word shown in multi languages.
 
शिरोरेखा 
শিরোরেখা 
શિરોરેખા 
ಶಿರೋರೆಖ 
ശിരോരേഖ 
ਸ਼ਿਰੋਰੇਖਾ 
ஷிரோறேக்ஹா 
శిరోరేఖ 
شروریکھا
Shirorekha


बुधवार, 26 दिसम्बर 2012 9:06:02 pm UTC-6 को, pk sharma ने लिखा:

ken

unread,
Dec 27, 2012, 1:10:31 PM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
Rawat ji,

I have also contacted so many techies for this project but no one knows how to apply matraas on Roman letters. 

Is there any way to put these English letters in these  dotted circles?

This way I like to create a phonetically perfect One Roman keyboard for all Indian Languages resembling to old Brahmi script.

If you know any font designer,please let me know.

ka  kા  િk  kી  kુ  kૂ  kૅ  kે kૈ  kૉ    kો  kૌ   kં  kઃ

few words:

kીd=kid

kૂk =cook

kૅt= cat

kીp=keep

kૉt=cot

kેk=cake


बृहस्पतिवार, 27 दिसम्बर 2012 11:25:26 am UTC-6 को, Rawat ने लिखा:

ken

unread,
Dec 27, 2012, 2:22:39 PM12/27/12
to technic...@googlegroups.com
Type Shirorekha here and see the varieties of fonts.
http://www.fontspace.com/category/typewriter

Font Designing.........
http://www.gomediazine.com/tutorials/part2draw-storm/#.UNyfluQ72ot

बृहस्पतिवार, 27 दिसम्बर 2012 11:47:14 am UTC-6 को, ken ने लिखा:

Vineet Chaitanya

unread,
Dec 28, 2012, 12:13:08 AM12/28/12
to technic...@googlegroups.com
"ई" के स्थान पर "इ" होनी चाहिये, बाकी ठीक है.

2012/12/27 Pk Sharma <pksharm...@gmail.com>

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