problem in using unicode.

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Gunjan Kr

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Jul 17, 2012, 8:28:44 AM7/17/12
to technic...@googlegroups.com
प्रिये साथियो
मुझे Unicode में कुछ शब्द लिखने में परेशानी हो रही है, जबकि कुछ कंप्यूटर में सही लिखा रहा है.
कृपया इस का कारण ओर निदान बताएं
१. द्वारा
२. विद्या
ये संयुक्षर है . कुछ PC में हलंत के साथ दिखाई देता है. स्क्रीन शोट सग्लंग है.
धन्यवाद
गुंजन कुमार
unicode-font.png

V S Rawat g

unread,
Jul 17, 2012, 12:16:32 PM7/17/12
to technic...@googlegroups.com
ऐसा शायद फ़ॉण्ट में बिल्ट इन है।
मंगल फ़ॉण्ट ऐसा अलग-अलग दिखाता है। शायद एरियल यूनीकोड फ़ॉण्ट संयु्क्ताक्षर में दिखाता है।

रावत

Leena Mehendale

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Jul 18, 2012, 2:18:21 PM7/18/12
to technic...@googlegroups.com
मेरे मंगल फॉण्ट
में संयुक्त दीखता है।

2012/7/17 V S Rawat g <vsr...@gmail.com>
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ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किंच जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः मा गृधः कस्यस्विद्धनम्।।
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Leena Mehendale
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Hariraam

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Jul 18, 2012, 3:05:43 PM7/18/12
to technic...@googlegroups.com
विण्डोज एक्सपी के मंगल फोंट में संयुक्त रूप में प्रकट होते थे, किन्तु विण्डोज 7 के मंगल फोंट में सरल हलन्त युक्त रूप में प्रकट करने का प्रावधान किया गया है।

Pk Sharma

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Jul 18, 2012, 9:00:26 PM7/18/12
to technic...@googlegroups.com
will installing mangal.ttf of winXp in win7 solve the problem ?

2012/7/19 Hariraam <hari...@gmail.com>

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्   ा   ि     ी   ु   ू   े   ै   ो   ौ  on 1 2 3 4 5   6   7 8 9 0
क ख  ग  घ  ङ     स     च  छ  ज  झ  ञ     ह   on q w e r t    y    u  i o p  [  ]
ट  ठ  ड  ढ  ण      ष     त  थ  द   ध   न          on  a s d f g   h    j  k  l  ;  ''
    य  र  ल  व      श     प  फ  ब  भ   म          on     z x c v   b   n m ,  .  /

Gunjan Kr

unread,
Jul 19, 2012, 4:52:39 AM7/19/12
to technic...@googlegroups.com
महासय,

"विण्डोज एक्सपी के मंगल फोंट में संयुक्त रूप में प्रकट होते थे, किन्तु विण्डोज 7 के मंगल फोंट में सरल हलन्त युक्त रूप में प्रकट करने का प्रावधान किया गया है।"

ये प्रावधान किस उद्देश्य से किया गया है? मुझे मेरे विभाग के ४०,००० कर्मचारियों में unicode प्रयोग को प्रोत्साहित करना है.सही जानकारी से मुझे शिक्षित करे
धन्यवाद
गुंजन कुमार

2012/7/19 Pk Sharma <pksharm...@gmail.com>



--
Thank You
With warm regards

Gunjan Kumar 


Dr Rajeev kumar Rawat

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Jul 19, 2012, 5:33:50 AM7/19/12
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आदरणीय गुंजन जी महाशय

कृपया अपना परिचय दें और कौंन से विभाग में हैं क्योंकि 40000 कर्मचारियों
का प्रशिक्षण बहुत ही दुष्कर कार्य है, आपके पास टीम में कितने सदस्य और क्या
कार्य योजना आपने बनाई है, स्पष्ट करें, चर्चा करेंगे तो मैं सरकारी अधिकारी होने के
नाते कुछ सहायक अवश्य होऊंगा।
सादर

2012/7/19 Gunjan Kr <gunjan...@gmail.com>



--
डॉ. राजीव कुमार रावत,हिंदी अधिकारी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर-721302
09641049944,09564156315

Anunad Singh

unread,
Jul 19, 2012, 6:07:01 AM7/19/12
to technic...@googlegroups.com
गुंजन जी,
वैसे तो हलन्त वाला अर्धाक्षर रखना है या उसे अगले वर्ण के साथ संयुक्त करना है, यह फॉण्ट-डिजाइनर की पसन्द पर निर्भर करता है। देवनागरी में मानकीकरण की दिशा में थोड़ा-बहुत जो काम हुआ है उसमें (मेरी समझ से) हलन्त के प्रयोग को बढ़ावा देने की नीती दिखती है।  शायद फॉण्ट डिजाइनर इसी का अनुसरण कर रहे हों।

-- अनुनाद

19 जुलाई 2012 2:22 pm को, Gunjan Kr <gunjan...@gmail.com> ने लिखा:

Vineet Chaitanya

unread,
Jul 19, 2012, 7:10:17 AM7/19/12
to technic...@googlegroups.com
Unicode का वास्तव में इससे कोई सम्बन्ध नहीं है. आपकी एक ही फाइल अलग अलग फोंट का प्रयोग करने पर अलग अलग दीख सकती है. हर व्यक्ति अपनी पसन्द के फोंट का प्रयोग कर सकता है.


विनीत चैतन्य


2012/7/19 Gunjan Kr <gunjan...@gmail.com>

Hariraam

unread,
Jul 19, 2012, 9:11:01 AM7/19/12
to technic...@googlegroups.com
विण्डोज 7 में संयुक्ताक्षरों का प्रयोग भारत सरकार के केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा "हिन्दी की मानक वर्तनी" के नए संशोधन के अनुसार किया गया है। हालांकि मानकों का पूरी तरह अनुपालन नहीं हो पाया है।

'द्व' का संयुक्त रूप ('द' के नीचे 'व' लगाकर) उलझन पैदा करता था। कुछ लोग "द्वारा" को "व्दारा" रूप में भी गलत टाइप करते थे।

'द्व' का संयुक्त रूप ('द' के नीचे 'व' लगाकर) 'द्ब' का भी भ्रम पैदा करता था, 'उद्बोधन' में 'द' के नीचे 'ब' लगाकर लिखने पर 'व' और 'ब' में अन्तर स्पष्ट नहीं हो पाता था।

"द्वितीय" तो विण्डोज-7 में नए मानक वर्तनी के अनुसार सही प्रकट होता है। किन्तु 'पद्मिनी' पुराने रूप में ही प्रकट होता है।

नई मानक वर्तनी के अनुसार 'पद्मिनी' को 'पद्‌मिनी' की तरह सरल रूप में लिखा जाना चाहिए। छोटी ई की मात्रा सिर्फ 'म' पर ही लगनी चाहिए। लेकिन विण्डोज 7 से मंगल फोंट में डिफॉल्ट रूप में 'पद्मिनी' तथा ZWJ के साथ "पद्‍मिनी" (गलत रूप में) एवं ZWNJ के साथ "पद्‌मिनी" (सही रूप में) प्रकट होता है।

मानकों के अनुसार जहाँ हलन्त युक्त संयुक्ताक्षर का प्रयोग हो वहाँ छोटी-इ की मात्रा केवल अन्तिम अक्षर पर ही लगनी चाहिए। संयुक्ताक्षरों के पहले वर्ण-घटक के बायें या दोनों वर्ण-घटकों के ऊपर नहीं। यह ध्वनिविज्ञान की दृष्टि से अवैज्ञानिक है।

कुछ लोग पद्मिनी को 'पद्‍मिनी' अर्थात् छोटी-इ की मात्रा को द् पर लगाकर लिखते हैं, जो पूर्णतया गलत है। किसी भी हलन्त युक्त वर्ण पर कोई मात्रा कदापि लग ही नहीं सकती।

अर्थात्--  क्ा क्ि क्ी क्ु क्ू क्ृ क्े क्ै क्ो क्ौ -- कभी लिखे ही नहीं जा सकते।

क्+अ = क -- होने पर ही इस पर मात्राएँ लग सकती हैं।

अतः "द्‍मि" में द् पर छोटी इ की मात्रा लगना सर्वथा गलत है। उच्चारण भी " प द् मि नी " ही होता है। "पद्‍मिनी" उच्चारण नहीं होता, न ही "पदिमिनी"।
पुराने फोंट में 'द्‍म' जैसे संयुक्ताक्षरों पर लगाने के लिए एक ज्यादा चौड़ी टोपी वाली छोटी-इ की मात्रा प्रकट होती थी, जिसे नए संशोधन में हटा दिया गया है।

प्रयास किया जा रहा है कि आगामी विण्डोज-8 में सभी संयुक्ताक्षर पूर्णतया वैज्ञानिक हों, कहीं कोई अवैज्ञानिकता नहीं रहे।

इस तकनीकी वर्ग के विद्वानों से अनुरोध है कि विण्डोज-8 के रिलीज के पूर्व इसके बीटा/आर.सी./ वर्सन को इन्स्टाल करके जाँच करें एवं माईक्रोसॉफ्ट को अपना फीडबैक दें।

-- हरिराम

Leena Mehendale

unread,
Jul 19, 2012, 9:01:53 PM7/19/12
to technic...@googlegroups.com, gunjan...@gmail.com
एक सरलसा मार्ग है कि अपने कम्प्यूटरपर ओपन ऑफिस भी बैठा लें जो फ्री डाउनलोड के लिये उपलब्ध है। उसमें संयुक्ताक्षर वैसे ही लिखे जाते हैं जैसे आपको चाहिये। एक ध्यान रखना होगा कि फाइल सेव्ह करते समय उसे खास तौर पर विण्डोज 2000 में सेव्ह करने कहना पडेगा। 

विण्डोज7 ऑपरेटिंग सिस्टममें ओपन ऑफिस बखूबी काम करता है, इसके लिये कोई अलग ऑ.सि. नही लगानी पडेगी।
वैसे आप किस ऑफिस में हैं । 

2012/7/19 Gunjan Kr <gunjan...@gmail.com>

महासय,
"विण्डोज एक्सपी के मंगल फोंट में संयुक्त रूप में प्रकट होते थे, किन्तु विण्डोज 7 के मंगल फोंट में सरल हलन्त युक्त रूप में प्रकट करने का प्रावधान किया गया है।"

ये प्रावधान किस उद्देश्य से किया गया है? मुझे मेरे विभाग के ४०,००० कर्मचारियों में unicode प्रयोग को प्रोत्साहित करना है.सही जानकारी से मुझे शिक्षित करे
धन्यवाद
गुंजन कुमार


Leena Mehendale

unread,
Jul 19, 2012, 9:14:04 PM7/19/12
to technic...@googlegroups.com
मराठी मानकमें  द्व' का संयुक्त रूप ('द' के नीचे 'व' लगाकर) मान्य किया गया है। यदि हिंदीका अलग रहा तो बार बार कठिनाइयाँ आती रहेंगी। अब समय आ गया है कि कोइ लीडरशिप दिखाये और पूरे राष्ट्रका ध्यान रखकर कुछ मानक तय करे।

Leena Mehendale

unread,
Jul 19, 2012, 9:34:57 PM7/19/12
to technic...@googlegroups.com
गुंजनजी 40000 कर्मचारियों में unicode प्रयोग को प्रोत्साहित करनेका आपका संकल्प तो कमालका है। 
मुझे लगा कि मेरे ये तीन लिंक्स आपके कामके हैं। इनमेंसे दूसरी और तीसरी मेरे प्रस्तावित पुस्तक "संगणककी जादुई दुनिया" के पहले और अन्तिम भागकी लिंक्स हैं। पहली आपको सहायक होगी लोगोंमें प्रिंट आउट बाँटने के लिये । क्या आपके पास प्रशिक्षककी पूरी व्यवस्था है? या कोई सहायता चाहिये? 

http://anu-vigyan.blogspot.com/2010/08/1.html 

महासय,
"विण्डोज एक्सपी के मंगल फोंट में संयुक्त रूप में प्रकट होते थे, किन्तु विण्डोज 7 के मंगल फोंट में सरल हलन्त युक्त रूप में प्रकट करने का प्रावधान किया गया है।"

ये प्रावधान किस उद्देश्य से किया गया है? मुझे मेरे विभाग के ४०,००० कर्मचारियों में unicode प्रयोग को प्रोत्साहित करना है.सही जानकारी से मुझे शिक्षित करे
धन्यवाद
गुंजन कुमार


Hariraam

unread,
Jul 19, 2012, 11:04:38 PM7/19/12
to technic...@googlegroups.com
मराठी मानक की एक प्रति कृपया पीडीएफ फार्मेट में अटैच करें। यदि मुद्रित पाठ है तो कृपया स्कैन करके अटैच करने का कष्ट करें। ताकि आगामी मानक समिति को पेश किया जा सके।

Anunad Singh

unread,
Jul 19, 2012, 11:48:02 PM7/19/12
to technic...@googlegroups.com
मेरे विचार से ऐसे कार्यक्रमों को 'यूनिकोड का प्रशिक्षण' कहने के बजाय 'कम्प्यूटर पर हिन्दी लिखना-पढ़ना' या 'कम्प्यूटर पर भारतीय भाषाएँ लिखना-पढ़ना' (या कुछ और बेहतर वाक्यांश) होना चाहिये।  इसमें यूनिकोड की चर्चा तो होनी चाहिये किन्तु केवल सतही बातें होनी चाहिये;  यूनिकोड की तकनीकी बातें बिलकुल छूई नहीं जानी चाहिये। क्योंकि यह बहुत अधिक 'टेक्निकल' हो जाता है, बहुत कम लोगों को समझ में आयेगा और अधिक सम्भावना यह है कि समझाने वाला ही गलत समझा दे। सबसे बड़ी बात है कि सामान्य आदमी को यह जानकर क्या लाभ होगा कि 'क' का यूनिकोड यह है, 'ख' का वह, आदि। या लिगेसी में कम्प्यूटर सामग्री का भण्डारण कैसे करता है और यूनिकोड में कैसे?

आरम्भ में ही लोगों को कम्प्यूटर पर हिन्दी लिखने के एक से अधिक तरीके बताए जाँय। (करके दिखाया जाय) उन्हें विभिन्न परिस्थितियों में हिन्दी लिखने के लिये उपलब्ध विकल्प बताए जाँय। विभिन्न परिस्थितियों से मेरा मतलब आनलाइन, आफलाइन, विण्डोज, लिनक्स, आईएमई आधारित विकल्प, ब्राउजर आधारित, ब्राउजर के ऐड-आन, बुकमार्कलेट आदि।  इसके बात उन्हें यह समझाया जाय कि पुराने फाण्ट (लिगेसी फॉण्ट) में लिखना छोड़कर वे यूनिकोड को अंगीकार करें। इसके लिये यूनिकोड के विभिन्न लाभ बताए जाँय। उन्हें यह भी बताया जाय कि वे अपने पुराने फॉण्टों में लिखी सामग्री को फॉण्ट-परिवर्तकों की सहायता से यूनिकोड में बदल सकते हैं जिससे वह 'अमर' हो जायेगी। उन्हें फॉण्ट परिवर्तकों की प्राप्ति के लिंक बताए जाँय।

इसके अलावा उन्हें भाषा के उच्चतर सॉफ्टवेयर औजारों के बारे में जानकारी दी जाय। अनुवादक, वर्तनी जाँचक, ट्रांसलेशन मेमोरी, देवनागरी में अकारादि क्रम में शॉटन, टेक्स्ट-से-वाक, सुनकर लिखने वाले प्रोग्राम, आप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्नीशन, कॉन्कार्डैंस, शब्दकोश अप्लिकेशन, देवनागरी में खोज (सर्च), हिन्दी की पारिभाषिक शब्दावलियाँ और विभिन्न प्रकार के हिन्दी शब्दकोश आदि की चर्चा की जाय।

इसके अलावा उन्हें हिन्दी के चर्चा समूह बनाने, मौजूद चर्चा समूहों पर चर्चा करने, हिन्दी विकिपीडिया और उस पर योगदान करने, हिन्दी में ब्लॉग लिखने, प्रसिद्ध और लोकप्रिय सॉफ्टवेयरों के इंटरफेसों को हिन्दी में अनुवाद करने, भारतीय भाषा संगणन पर कार्यशालाएँ आयोजित करने, हिन्दी की सामग्री एवं सॉफ्तवेयरों को आफलाइन उपयोग के लिये प्रचारित-प्रसारित करने आदि के लिये प्रेरित किया जाय।

-- अनुनाद सिंह

V S Rawat g

unread,
Jul 20, 2012, 1:26:47 AM7/20/12
to technic...@googlegroups.com
संयुक्ताक्षरों को पहचानना हिन्दी को नए सीखे लोगों के लिए कठिन होता है।
इसलिए संयुक्ताक्षरों के स्थान पर हलन्त से जुड़े हुए अक्षरों को लिखना जिससे उनका क्रम और
उच्चारण स्वाभाविक ही समझ में आ जाता है, मुझे यह अच्छा निर्णय लगता है।

इससे हिन्दी सरल हो गई है।

धन्यवाद।
रावत
>> <mailto:gunjan...@gmail.com>> ने लिखा:
>>
>> महासय,
>>
>> "विण्डोज एक्सपी के मंगल फोंट में संयुक्त रूप में प्रकट होते थे, किन्तु विण्डोज 7 के
>> मंगल फोंट में सरल हलन्त युक्त रूप में प्रकट करने का प्रावधान किया गया है।"
>>
>> ये प्रावधान किस उद्देश्य से किया गया है? मुझे मेरे विभाग के ४०,००० कर्मचारियों
>> में unicode प्रयोग को प्रोत्साहित करना है.सही जानकारी से मुझे शिक्षित करे
>> धन्यवाद
>> गुंजन कुमार
>>
>> 2012/7/19 Pk Sharma <pksharm...@gmail.com
>> <mailto:pksharm...@gmail.com>>
>>
>> will installing mangal.ttf of winXp in win7 solve the problem ?
>>
>>
>> 2012/7/19 Hariraam <hari...@gmail.com
>> <mailto:hari...@gmail.com>>
>>
>> विण्डोज एक्सपी के मंगल फोंट में संयुक्त रूप में प्रकट होते थे, किन्तु
>> विण्डोज 7 के मंगल फोंट में सरल हलन्त युक्त रूप में प्रकट करने का
>> प्रावधान किया गया है।
>>
>>
>> On 18-07-2012 23:48, Leena Mehendale wrote:
>>> मेरे मंगल फॉण्ट
>>> में संयुक्त दीखता है।
>>>
>>> 2012/7/17 V S Rawat g <vsr...@gmail.com
>>> <mailto:vsr...@gmail.com>>
>>>
>>> ऐसा शायद फ़ॉण्ट में बिल्ट इन है।
>>> मंगल फ़ॉण्ट ऐसा अलग-अलग दिखाता है। शायद एरियल यूनीकोड
>>> फ़ॉण्ट संयु्क्ताक्षर में दिखाता है।
>>>
>>> रावत
>>>
>>>
>>> On 7/17/2012 5:58 PM India Time, _Gunjan Kr_ wrote:
>>>
>>> प्रिये साथियो
>>> मुझे Unicode में कुछ शब्द लिखने में परेशानी हो रही है,
>>> जबकि कुछ कंप्यूटर में सही लिखा
>>> रहा है.
>>> कृपया इस का कारण ओर निदान बताएं
>>> १. द्वारा
>>> २. विद्या
>>> ये संयुक्षर है . कुछ PC में हलंत के साथ दिखाई देता है.
>>> स्क्रीन शोट सग्लंग है.
>>> धन्यवाद
>>> गुंजन कुमार
>>>
>>>
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>> क ख ग घ ङ स च छ ज झ ञ ह on q w e r t y
>> u i o p [ ]
>> ट ठ ड ढ ण ष त थ द ध न on a s d f
>> g h j k l ; ''
>> य र ल व श प फ ब भ म on z x c
>> v b n m , . /
>>
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narayan prasad

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Jul 20, 2012, 2:10:42 AM7/20/12
to technic...@googlegroups.com
सबसे पहले तो सभी सदस्यों से अनुरोध करता हूँ कि आलतू-फालतू पूर्व के अनेक सन्देशों को अपने सन्देश के साथ संलग्न (append) न करें । केवल पूर्व के सन्देश को अथवा उसके उचित अंश को ही संलग्न करें ।

 
<<संयुक्ताक्षरों को पहचानना हिन्दी को नए सीखे लोगों के लिए कठिन होता है।>>

यह तो अतिशयोक्ति है । मेरे अनुभव में केवल थोड़े से अभ्यास से विदेशी लोग भी आसानी से देवनागरी के संयुक्ताक्षर पहचान लेते हैं । फिर केवल भारतीयों को ही क्यों कठिनाई उत्पन्न होती है, यह समझ में नहीं आता । लगभग सभी भारतीय लिपियों में (मलयालम में सबसे अधिक और शायद तमिल में सबसे कम) संयुक्ताक्षर होते हैं । तमिल में देवनागरी के हल् चिह्न जैसा ही व्यञ्जन के ऊपर "पुल्लि" (बिन्दु) से काम चलाया जाता है । लगता है, लिपि को काँट-छाँट कर सॉफ्टवेयर में इन्कोडिंग को आसान बनाने का प्रयत्न किया जा रहा है, जबकि होना चाहिए इसके ठीक उलटा ।

यदि संयुक्ताक्षर से इतना ही परहेज किया जाना है तो केवल ऐसे संयुक्ताक्षर में हल् चिह्न का प्रयोग किया जाय जिसमें हल्-चिह्न युक्त व्यञ्जन अगले वर्ण के अंश के रूप में उच्चरित नहीं होता, जैसे - द् ब, द् ग, द् भ [उदाहरणार्थ - उद्बोधन (= उद् + बोधन), भगवद्गीता (= भगवद् + गीता), उद्भट (= उद् + भट)] इत्यादि, परन्तु द् + व जैसे संयुक्ताक्षर जब एक ही साथ उच्चरित होते हैं (जैसे द्वार, द्वितीय, द्विवेदी आदि में), तो इसे हल्-चिह्न से तोड़ना उचित प्रतीत नहीं होता । हाँ, यदि पृथक् उच्चरित हों [जैसे, भगवद्वचन (= भगवद् + वचन)], तो ऐसा करना उचित होगा ।

--- नारायण प्रसाद



2012/7/20 V S Rawat g <vsr...@gmail.com>

Gunjan Kr

unread,
Jul 20, 2012, 2:51:52 AM7/20/12
to technic...@googlegroups.com
महासय/महोदया
मै CCTNS झारखण्ड प्रोजेक्ट से जुड़ा हु और सरकारी वेबसाइट और सॉफ्टवेर को हिंदी में करने के लिए पिछले ५ सालो से प्रयासरत हु. इस कार्य में कई NIC और पुलिस अधिकारियो का सहयोग रहा है.technical-हिंदी समूह का करीब ३ सालो से सदस्य हु. CCTNS के कैपसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम के तहत अभी तक करीब २१००० कर्मचारियों को कंप्यूटर की आधारभूत शिक्षा दी जा रही है और .मै आधिकारिक प्रवक्ता नहीं हु और ज्यादा जानकारी के लिए http://eschool.jhpolice.gov.in  एवं http://jhpolice.gov.in/ देखा जा सकता है.
मै मुक्त श्रोत समूह जो की सरकारी संस्थाओ को सहयोग करती है उसका संस्थापक समिति का सदस्य हु.Drupal ,Moodle,Wordpress,Mysql ,LINUX , ओपन एरप, मोबाइल प्रोग्रामिंग,software as service,infrastructure as service,क्लौड infrastucture आदि की जानकारियो को जरूरतमंद सरकारी संस्थाओ से साझा करता हु.
मुझे आपलोगों के सहयोग के आवश्यकता है
धन्यवाद
गुंजन कुमार.




2012/7/20 V S Rawat g <vsr...@gmail.com>
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Vinod Sharma

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Jul 20, 2012, 2:53:16 AM7/20/12
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<<संयुक्ताक्षरों को पहचानना हिन्दी को नए सीखे लोगों के लिए कठिन होता है।>>

मुझे तो इसके उलट, हलंत चिह्न युक्त हिंदी काफी अटपटी और बनावटी सी नजर आती है। उत्प्रेरणा या मत्स्य लिखना हो तो
उ त् प् रे र णा  और म त् स् य  का उच्चारण करना ही मुश्किल हो जाता है। इसको सरल बताया जा रहा है। मुझे तो हिदी के सरलीकरण के हिमायतियों की सोच समझ में नहीं आती। नारायणजी की यह बात ज्यादा संभव लगती है कि किसी तकनीकी समस्या को हल/सरल करने के लिए ये हलन्त वाला तरीका निकाला गया है। एक हलन्त तक तो चल जाएगा जहाँ 2 या 3 व्यंजन संयुक्त होते हैं वहां अलग अलग लिखे व्यंजनों को मिला कर सही उच्चारण करना बहुत ही मुश्किल काम है। देवनागरी लिपि अपने आप में संपूर्ण है। तथाकथित वैज्ञानिकता के नाम पर सत्ताधारी चाहे जो खिलवाड़ कर सकते हैं। अश्वत्थामा को देख कर सही उच्चारण करना आसान है या अश् व त् था मा को देख कर। लोग लेखन में भी छोटी इ की मात्रा हलन्त अक्षर को बाहर छोड़ कर लगाने लगे हैं, जो देखने में ही अटपटा लगता है। शान् ति  भक् ति आदि।

Hariraam

unread,
Jul 20, 2012, 3:21:23 AM7/20/12
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आप "द्वितीय" और "द्‍वितीय" में से किसे सही मानेंगे?

कुछ संयुक्ताक्षर ऐसे हैं जो पूर्णतया मिलकर उच्चरित होते हैं, 'अ' ध्वनिरहित अर्थात् हलन्त
युक्त प्रथम व्यञ्जन का उच्चारण परिवर्तित होकर अगले व्यंजन के अतिरिक्त गुरुत्व में बदलकर
प्रकट होता है - जैसे -
क्क - पक्का
क्ख - रक्खासिंह
ग्ग - चुग्गा
ग्घ - बग्घी
च्छ - स्वच्छ
ज्झ - झञ्ज्झा
ट्ट - पट्टी
ट्ठ - पट्ठा
ड्ड - गड्डी
ड्ढ - गड्ढा
त्त - पत्ता
त्थ - उत्थान
द्द - गद्दी
द्ध - गिद्ध
प्प - गप्प
म्म - मम्मी
स्स - गुस्सा

शेष सभी में 'अ' ध्वनि रहित पहले व्यञ्जन का उच्चारण स्पष्ट होता ही है, चाहे कमोबेश रूप
में ही क्यों न हो।

चूँकि कम्प्यूटर प्रोसेसिंग में विशेषकर डैटाबेस आदि में ऊपर से नीचे जुड़े संयुक्ताक्षरों की रेण्डरिंग
में कुछ जटिलता आती है, अतः इन्हें बायें से दायें क्रम में जोड़कर प्रकट करने को प्राथमिकता
दी जा रही है।

सदस्यों से निवेदन है कि देवनागरी संयुक्ताक्षरों (किन किन संयुक्ताक्षरों को किस रूप में प्रकट
होने को प्राथमिकता के क्रम में) की एक सम्पूर्ण सूची प्रस्तुत करें... ताकि भावी देवनागरी
ओपेन टाइप फोंट में तदनुसार व्यवस्था करने के लिए निर्माताओं/प्राधिकारियों को अनुरोध
किया जा सके।

Hariraam

unread,
Jul 20, 2012, 4:32:41 AM7/20/12
to technic...@googlegroups.com
विनोद जी,


On 20-07-2012 12:23, Vinod Sharma wrote:
<<संयुक्ताक्षरों को पहचानना हिन्दी को नए सीखे लोगों के लिए कठिन होता है।>>
कोई भी वर्ण/अक्षर/संयुक्ताक्षर कठिन या सरल नहीं होता, बल्कि 'परिचित' या 'अपरिचित' होता है। हरेक अपरिचित वस्तु हमें "अटपटी" लगती है।
जो लोग ऊपर से नीचे जुड़े संयुक्ताक्षरों में लिखने/पढ़ने के वर्षों से अभ्यस्त हैं, या परिचित हैं उन्हें वे सही व सरल लगते हैं, जो नए देवनागरी लिपि सीखने वाले लोग हैं, उन्हें बायें से दायें जुड़े संयुक्ताक्षर ही सहज समझ में आते हैं। ऊपर से नीचे जुड़े संयुक्ताक्षर क्लिष्ट/अपरिचित/अटपटे लगते हैं।

उत्प्रेरणा या मत्स्य लिखना हो तो
उ त् प् रे र णा  और म त् स् य  का उच्चारण करना ही मुश्किल हो जाता है।
जिन व्यंजनों (8) की खड़ी पाई नहीं है, केवल उन्हीं को हलन्त जोड़कर संयुक्ताक्षर रूप में लिखने को प्राथमिकता दी जा रही है। कोई भी उत्‌प्‌रेरणा नहीं या मत्‌स्‌य नहीं लिखने का कष्ट नहीं करेगा।

वैसे यदि आपके सामने "म के नीचे त और उसके नीचे य" लगा हुए प्राचीन रूप का संयुक्ताक्षर आए तो क्या आपको वह सरल लगेगा? या अपरिचित या अटपटा लगेगा?

प्राचीनकाल में भोजपत्र/कागज पर हाथ से लिखने का प्रचलन था, शीघ्र लेखन के लिए संयुक्ताक्षरों का विकास होता गया। ऊपर से नीचे जोड़कर लिखना सरल व शीघ्र होता था। लेकिन आज तकनीकी युग है। टाइप करना है। कैसे व सरलता से अपना पाठ टाइप कर सकें, यही उद्देश्य सभी का है।

मान लीजिए कि कम्प्यूटर में "ओटोमेटिक संयुक्ताक्षर बनाने" की "ग्लीफ रिप्लेसमेंट" सुविधा न हो और आपको टाइप मशीन में टाइप करने की तरह कैरिज रिटर्न करके बैकस्पेस लगाकर रोलर को एक वर्ण ऊपर उठाकर ऊपर से नीचे के संयुक्ताक्षर टाइप करना पड़े, फिर रोलर को वापस एक वर्ण नीचे लाकर अगले वर्ण के बराबर पहुँचकर टाइप करना पड़े तो कितना समय लगेगा व कितनी तकलीफ होगी?

जब मैनुअल टाइपराइटर बने, प्रचलित हुए, तब से बायें से दायें संयुक्ताक्षरों का प्रचलन होने लगा। उस जमाने में यह काफी अटपटा लगता था। आज हम सभी इसके आदी हो गए हैं, अभ्यस्त/परिचित हो गए हैं तो हमें 'सही' व 'सरल' लगने लगे हैं।

इसको सरल बताया जा रहा है। मुझे तो हिदी के सरलीकरण के हिमायतियों की सोच समझ में नहीं आती। नारायणजी की यह बात ज्यादा संभव लगती है कि किसी तकनीकी समस्या को हल/सरल करने के लिए ये हलन्त वाला तरीका निकाला गया है।
देवनागरी की तकनीकी समस्या के समाधान के लिए वर्षों से प्रयास होते रहे हैं। कुछ लोगों का सुझाव था कि अधिकांशतः प्रचलित "पूर्णाक्षरों" की भी युनिकोड में एनकोडिंग होनी चाहिए। जिसप्रकार CJK (चीनी, जापानी, कोरियायी) में 25000 से अधिक अक्षरों की युनिकोड में एनकोडिंग की गई है, वैसे ही देवनागरी के भी पूर्णाक्षरों की होनी चाहिए।  "Evertype" आदि संस्थानों द्वारा संयुक्ताक्षरों/पूर्णाक्षरों के फोंट्स बनाने का बीड़ा भी उठाया गया था। कई समूहों पर देवनागरी "पूर्णाक्षरों" की सूची मांगी गई थी। लेकिन आज तक देवनागरी का "विद्वान" कोई सम्पूर्ण सूची प्रस्तुत नहीं कर पाया।


एक हलन्त तक तो चल जाएगा जहाँ 2 या 3 व्यंजन संयुक्त होते हैं वहां अलग अलग लिखे व्यंजनों को मिला कर सही उच्चारण करना बहुत ही मुश्किल काम है।
चूँकि हमारा उद्देश्य समग्र विश्व में हिन्दी/देवनागरी को फैलाना है। मान लीजिए, यदि विश्व के हरेक स्थान व व्यक्ति का नाम देवनागरी लिपि में लिखना है तो हमें किन किन संयुक्ताक्षरों की जरूरत होगी? उनके अनुसार दो या तीन या चार या पाँच व्यञ्जन युक्त संयुक्ताक्षर बनाने पड़ेंगे? तदनुसार संयुक्ताक्षरों/पूर्णाक्षरों का निर्माण भी किया जा सकता है। तकनीकी विशेषज्ञ प्रस्तुत हैं। किन्तु 'देवनागरी' के प्रखर विद्वान ही स्वयं उलझन में पड़ जाते हैं। कुल कितने पूर्णाक्षर हो जाएँगे? इन्हें टाइप करना कितना कठिन हो जाएगा?

भाषा किसी कारखाने में नहीं बनायी जाती। कालक्रम में प्रयोग में आते आते विकसित होती है। भाषा में आए किसी 'विकार' को भी 'विकास' ही माना जाता है।

देवनागरी लिपि अपने आप में संपूर्ण है। तथाकथित वैज्ञानिकता के नाम पर सत्ताधारी चाहे जो खिलवाड़ कर सकते हैं।
"सत्ताधारी" कोई भी नहीं है, न ही कोई तकनीकी विकास कार्य किसी सत्ताधारी द्वारा किया जा सका है। अधिकांशतः तकनीकी विकास स्वयंसेवियों द्वारा निःशुल्क ही हुए हैं, होते आए हैं। सरकार या सत्ताधारी तो बस स्वयंसेवियों द्वारा किए गए विकास कार्यों पर ठप्पा लगाकर या फीता काटकर अपनी वाहवाही मात्र करवाते हैं।

सत्ताधारी को दोष देकर आप उलटे उनको बेकार में ही "श्रेय" दे रहे हैं।

अश्वत्थामा को देख कर सही उच्चारण करना आसान है या अश् व त् था मा को देख कर। लोग लेखन में भी छोटी इ की मात्रा हलन्त अक्षर को बाहर छोड़ कर लगाने लगे हैं, जो देखने में ही अटपटा लगता है। शान् ति  भक् ति आदि।

आपको "द्वितीय" और "द्‍वितीय" में से कौन-सा सही लगता है? कृपया वैज्ञानिक आधार पर अपने विवेक से बताएँ। क्या अटपटा/अपरिचित लगता है- इसे महत्व न दें।

जब नया नया मोबाइल फोन प्रचलित हुआ था, जब पहली बार हमने खरीदा था, तो इसे संचालित करना कितना अटपटा/कठिन लगा था? कुछ दिन के अभ्यास के बाद सब ठीक हो गया।
आज यह कितना सरल व उपयोगी लग रहा है। मोबाईल के बिना एक हाथ कट गया सा लगता है।
वैसे ही हरेक नया प्रयोग अपरिचित/अटपटा लगता है, बाद में उससे ऐसा प्रेम हो जाता है कि छोड़े नहीं छूटता।

वर्तमान 16 बिट ओपेन टाइप फोंट तकनीकी में सब सम्भव है। 65536 ग्लीफ एक फोंट ही फाइल में बनाए जा सकते हैं। संयुक्ताक्षरों/पूर्णाक्षरों की समेकित सूची कोई संस्थान "सर्वसम्मति" से जारी कर दे तो तकनीकी विशेषज्ञों के लिए फोंट व इसकी रेण्डरिंग व्यवस्था बनाकर जारी की जा सकती है।

फिलहाल हमारा उद्देश्य यह है
(1) देवनागरी के पुराने उपयोक्ताओं को उनकी चाहत अनुसार हर संयुक्ताक्षर/पूर्णाक्षर प्रकट करने की सुविधा मिले और
साथ ही
(2) कम से कम वर्णों में देवनागरी इनपुट हो सके ताकि हरेक छोटे मोबाईल फोन पर भी तीव्रता के साथ सन्देश/पाठ प्रसारित हो सकें।

Dhananjay Chaube

unread,
Jul 20, 2012, 6:18:52 PM7/20/12
to technic...@googlegroups.com


मुझे तो ऐसा लगता है कि द्ध,द्म,द्व,श्व आदि की तरह ही 'श्र' को भी विदा करने का समय आ गया है। इसके साथ ही, वर्तमान समय में जब हम 'ऋ' का 'रि' की तरह ही उच्चारण करते हैं तो 'ऋ' को भी विदाई दे देनी चाहिए।

सविनय
धनंजय

Hariraam

unread,
Jul 20, 2012, 8:54:15 PM7/20/12
to technic...@googlegroups.com
धनञ्जय जी,


On 21-07-2012 03:48, Dhananjay Chaube wrote:
मुझे तो ऐसा लगता है कि द्ध,द्म,द्व,श्व आदि की तरह ही 'श्र' को भी विदा करने का समय आ गया है।
आप चाहें तो 'श्र' को सरल रूप 'श्‍र'
'श्री' को 'श्‍री' भी लिख सकते हैं।
इसके बारे में विशेष विवरण सहित ये आलेख देख सकते हैं-

इसके साथ ही, वर्तमान समय में जब हम 'ऋ' का 'रि' की तरह ही उच्चारण करते हैं तो 'ऋ' को भी विदाई दे देनी चाहिए।
ऋ एक स्वर है, जबकि 'र' एक व्यञ्न। ऋ को हिन्दी में 'रि...' व अन्य भाषाओं में 'रु...' की तरह उच्चारण किया जाता है, जो सही नहीं है।
दुःख की बात है कि अधिकांश हिन्दीभाषियों को भी देवनागरी वर्णमाला की सही जानकारी नहीं है।
लेकिन स्वाभाविक है - क्योंकि पहली कक्षा में पढ़ाई जानेवाली 'वर्णमाला' की पुस्तक में भी पूरा वर्णन नहीं दिया जाता। 'ऋ' का सही उच्चारण नहीं सिखाया जाता।
ऋ ॠ ऌ ॡ आदि के सही उच्चारण एवं प्रयोग भी लोग भूल चुके हैं।
'र' के अनेक रूप में प्रयोग --
ऋ, ॠ, र, रु रू, "क्र,..ह्र," "ट्र" "ठ्र" "कर्क, सर्प, सर्वै, गर्वैं (- रेफ)" "त्र", "श्र" "ष्र" "स्र"- लोगों में भ्रम व भ्रान्ति पैदा करते हैं।
इस बारे में विशेष तकनीकी आलेख
"देवनागरी -र- का रहस्य"
प्रस्तुति अधीन है, जिसमें कुछ प्रयोगों को स्पष्ट करने के लिए "फ्लैश" चलचित्रों की व्यवस्था करनी पड़ेगी।


Anuradha R.

unread,
Jul 20, 2012, 10:11:24 PM7/20/12
to technic...@googlegroups.com
 "पद्‍मिनी" उच्चारण नहीं होता, न ही "पदिमिनी"।
हरिराम जा का बात से सहमत हूं। यह फ़ॉन्ट लेआउट में भिन्नता काफी दुखदायी है।
- अनुराधा

Hariraam

unread,
Jul 21, 2012, 2:34:59 AM7/21/12
to technic...@googlegroups.com
अनुराधा जी,

समर्थन के लिए धन्यवाद। पुनश्च-

चूँकि जब किसी व्यञ्जन पर हलन्त लगता है तो वह स्वर-रहित हो जाता है, या उसे मूल व्यञ्जन या आधा-अक्षर कहा जाता है।
अतः हलन्त-युक्त व्यञ्जन पर कोई भी स्वर की मात्रा(dependent vowel) कदापि लग ही नहीं सकती।
यथा - क्ा, क्ि क्ी .... क्ै क्ौ

अतः
पद्‍मिनी लिखा जाना वैज्ञानिक रूप से गलत है  (क्योंकि हलन्तयुक्त व्यंजन पर छोटी-ई की मात्रा गलती से लगी है), पद्‌मिनी सही है।
द्‍वितीय गलत है द्‌वितीय सही है।
उद्‍विग्न गलत है, उद्विग्न सही है।
उद्‍भिज गलत है, उद्‌भिज सही है।
सद्‍चित गलत है सद्‌चित सही है।
पट्‍टियाँ गलत है पट्‌टियाँ सही है।


अतः कई वर्षों तक विद्वानों के विचार-विमर्श के पश्चात् "हिन्दी वर्तनी के मानक" में किसी संयुक्ताक्षर में हलन्तयुक्त व्यंजन के बाद में ही छोटी-इ की मात्रा को लगाने का नियम बनाया गया है। विण्डोज-7 में इसी को डिफॉल्ट रूप में प्रकट (render) करने का प्रयास किया गया है कि  हालांकि कई ऐसे संयुक्ताक्षरों में अभी सुधार किया जाना बाकी है। आशा है विण्डोज-8 के मंगल फोंट में पूरा सुधार कर लिया जाएगा।
--

narayan prasad

unread,
Jul 21, 2012, 2:44:08 AM7/21/12
to technic...@googlegroups.com
<<सद्‍चित गलत है सद्‌चित सही है।>>

दोनों में से कोई सही नहीं है । सही है - सच्चित् ।

--- नारायण प्रसाद

2012/7/21 Hariraam <hari...@gmail.com>
अनुराधा जी,

समर्थन के लिए धन्यवाद। पुनश्च-
..................

अतः
पद्‍मिनी लिखा जाना वैज्ञानिक रूप से गलत है  (क्योंकि हलन्तयुक्त व्यंजन पर छोटी-ई की मात्रा गलती से लगी है), पद्‌मिनी सही है।
द्‍वितीय गलत है द्‌वितीय सही है।
उद्‍विग्न गलत है, उद्विग्न सही है।
उद्‍भिज गलत है, उद्‌भिज सही है।
सद्‍चित गलत है सद्‌चित सही है। ..........

Hariraam

unread,
Jul 21, 2012, 3:04:47 AM7/21/12
to technic...@googlegroups.com
सुधार के लिए आभार!

इसे यदि स-िच्‌चत्  रूप में लिखने का प्रयास किया जाए तो (हलन्त-युक्त व्यञ्जन पर मात्रा लगाना गलत होने के कारण) रेण्डर हो ही नहीं पाएगा, "सच्‌चित्" रूप में लिखने का प्रयास करने पर लिखा जा सकेगा।

Vinod Sharma

unread,
Jul 21, 2012, 3:49:41 AM7/21/12
to technic...@googlegroups.com
सच्चित आराम से लिखा जाता है और सही भी है। सद्+चिदानंद =सच्चिदानंद

2012/7/21 Hariraam <hari...@gmail.com>

--
आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
इस समूह में पोस्ट करने के लिए, technic...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.
इस समूह से सदस्यता समाप्त करने के लिए, technical-hin...@googlegroups.com को ईमेल करें.

Vineet Chaitanya

unread,
Jul 21, 2012, 3:52:46 AM7/21/12
to technic...@googlegroups.com
हरिरामजी,

           वास्तव में देवनागरी लिपि की प्रकृति के अनुसार "ि" मात्रा को बडा करके पूर्ण संयुक्ताक्षर पर लगाया जाना चाहिये. C-DAC के fonts में इसलिये अलग अलग कई ि मात्राएँ होती थी.

विनीत चैतन्य

2012/7/21 Hariraam <hari...@gmail.com>

--
आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
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Vinod Sharma

unread,
Jul 21, 2012, 5:14:58 AM7/21/12
to technic...@googlegroups.com
मात्रा तो पूर्ण व्यंजन पर ही लगती है, लेकिन उसका ऊपरी गोलाकार रूप अंडाकार हो जाता है। हलन्त युक्त अक्षरों को अलग अलग लिखने के प्रयोजन की पूर्ति के लिए पहले तो छोटी इ की मात्रा को छोटा किया गया फिर कहा गया कि हलन्त अक्षर पर मात्रा नहीं लग सकती। अब इन शब्दों में देखिए कि यह हलन्त पर लगी है या पूर्ण अक्षर पर शक्ति, शान्ति, भक्ति, पश्चिम, मेक्सिको, लब्धि
इनको पढ़ना सहज और स्वाभाविक लग रहा है या शक् ति, शान् ति, भक् ति पश् चिम, मेक् सिको  को। मुझे लगता है कि दो वर्ग बने रहेंगे। अपेक्षाकृत युवावर्ग जो संयुक्ताक्षरों की बनावट से परिचित नहीं है वह इस परिवर्तन के पक्ष में रह सकता है, लेकिन 50 या इससे ऊपर के लोगों के लिए तो यह प्रयोग अटपटा ही रहेगा।

2012/7/21 Vineet Chaitanya <v...@iiit.ac.in>

Hariraam

unread,
Jul 21, 2012, 7:26:32 AM7/21/12
to technic...@googlegroups.com
विनोद जी,

On 7/21/12, Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com> wrote:
....इन शब्दों में देखिए कि यह हलन्त पर लगी है या पूर्ण


> अक्षर पर शक्ति, शान्ति, भक्ति, पश्चिम, मेक्सिको, लब्धि

यहाँ संयुक्ताक्षरों में प्रथम व्यञ्जन का हलन्त रूप नहीं है। ये बायें
से दायें जुड़े हुए संयुक्ताक्षर हैं। अतः क्त, न्त, श्च, क्स ब्ध आदि
एक-एक जुड़े हुए वर्ण के बायीं ओर लगी है।

> इनको पढ़ना सहज और स्वाभाविक लग रहा है या शक् ति, शान् ति, भक् ति पश् चिम,
> मेक् सिको को।

विण्डोज के USP में ऐसी व्यवस्था की गई है कि सामान्यतया कोई इन्हें टाइप
कर ही नहीं सकता। डिफाल्ट रूप में क्ति, न्ति, श्चि, क्सि ही प्रकट
होंगे।

यदि क्‌ति, न्‌ति, श्‌चि, क्‌सि रूप में प्रकट करना हो तो इसके लिए ZWNJ
का सहारा लेना पड़ेगा।

कृपया भ्रम में न पड़ें। यहाँ सिर्फ उन्हीं व्यञ्जनों की बात हो रही है,
जिनकी खड़ी पाई नहीं है, जिन्हें बायें से दायें क्रम में जोड़कर
संयुक्ताक्षर नहीं बनाया जा पा रहा है। ऊपर से नीचे क्रम में जुड़े
संयुक्ताक्षर के विकल्प रूप में बायें से दायें जोड़ने के लिए हलन्त
लगाकर प्रकट करना पड़ रहा है। और वह भी जब ये वर्ण संयुक्ताक्षर के
प्रथम-वर्ण के रूप में आयें।
यथा - 1.ङ, 2.छ, 3.ट, 4.ठ, 5.ड, 6.ढ, 7.द, 8.र

इनमें भी र का तो आधा रूप रेफ के रूप में उपलब्ध है।
छ का किसी संयुक्ताक्षर के प्रथम वर्ण के रूप में प्रयोग नहीं मिलता।
अत: सिर्फ ङ, ट, ठ, ड ढ, द - ये छः ही व्यञ्जन जब किसी संयुक्ताक्षर में
पहले वर्ण के स्थान पर आते हैं तो हलन्त का प्रयोग करके विकल्प रूप में
बायें से दायें जोड़कर प्रकट करने की जरूरत पड़ती है।

क - क्‍ फ - फ्‍ ह - ह्‍ के भी आधे अक्षर उपलब्ध हैं। जिनके आधे अक्षर
उपलब्ध नहीं हैं, सिर्फ उन्हीं को हलन्त के सहारे आधा करने की जरूरत
पड़ती है।

पुनः निवेदन : भ्रम में न पड़ें।

> 2012/7/21 Vineet Chaitanya <v...@iiit.ac.in>
>
>> हरिरामजी,
>> वास्तव में देवनागरी लिपि की प्रकृति के अनुसार "ि" मात्रा को बडा
>> करके पूर्ण संयुक्ताक्षर पर लगाया जाना चाहिये. C-DAC के fonts में इसलिये
>> अलग
>> अलग कई ि मात्राएँ होती थी.
>>
>> विनीत चैतन्य

विनीत जी,

जैसा कि विनोद जी ने पिछले एक सन्देश में प्रश्न उठाया था कि जहाँ दो से
अधिक वर्णों से मिलकर बने संयुक्ताक्षर हों वहाँ क्या व्यवस्था होगी?
उत्प्रेरणा, मत्स्य।

यदि हमें हिन्दी को विश्वभाषा बनाना है तो संसार की समस्त भाषाओं/लिपियों
के सारे पाठ को देवनागरी/हिन्दी में लिखने, टंकित करने और सरलता से
स्पष्ट प्रकट करने की क्षमता हासिल करनी ही होगी।

फिलहाल सिर्फ संसार के सभी व्यक्तियों और स्थानों के नामों को देवनागरी
लिपि में लिखने का अभियान चलायें तो यह कहना मुश्किल होगा कि कौन-कौन-से
वर्णों के संयुक्ताक्षरों की जरूरत नहीं होती।

उदाहरण के लिए संस्कृत में एक संयुक्ताक्षर पाँच वर्णों से मिलकर बना है
- "कार्त्स्न्या" यहाँ र्+त्+स्+न्+या पाँच वर्ण मिलकर एक
संयुक्ताक्षर/पूर्णाक्षर (syllable) है। यदि कोई अपना नाम कार्त्सन्यि रख
ले, तो उसे लिखने/टाइप करने के लिए तो आपको फिर एक इतनी ज्यादा चौड़ी
टोपीवाली छोटी इ की मात्रा बनानी होगी, जो पूरे पाँचों वर्णों को ढँक
सके।

सुना है कि संस्कृत में एक ऐसा भी संयुक्ताक्षर है जो नौ वर्णों से मिलकर
बना है, वहाँ क्या करेंगे, क्या उस पर लगाने के लिए नौगुना चौड़ी टोपी
वाली छोटी-इ की मात्रा बनाएँगे?

दुःख की बात है कि इन्हीं भ्रान्तियों और वैज्ञानिकता पर पुरानी रूढ़ियों
को हावी होने देने के कारण ही देवनागरी/हिन्दी का प्रयोग बाधा प्राप्त हो
रहा है।

विशेषकर डैटाबेस प्रयोगों में हिन्दी का प्रयोग नगण्य हो रहा है, जो
कार्य हाथ से लिखकर आराम से हिन्दी में हो पा रहे थे, वे अब
कम्प्यूटरीकरण के युग में मजबूरी में अंग्रेजी में ही किए जा रहे हैं।

रेलवे रिजर्वेशन फार्म भले ही त्रिभाषी/द्विभाषी रूप में छपा रहता है,
भले की जनता उसे हिन्दी, बंगला, तेलगू आदि भारतीय भाषाओं में भरकर दे,
बुकिंग क्लर्क को कम्प्यूटर में अंग्रेजी में ही प्रविष्टि करनी पड़ती
है। बाद में वह NTrans नामक साफ्टवेयर के माध्यम से लिप्यन्तरित होकर
चार्ट में द्विभाषी छपता है, किन्तु उसमें हिन्दी में छपे नामों में
भयंकर त्रुटियाँ पाईं जाती हैं।

डाकघरों में रजिस्ट्री और स्पीडपोस्ट कम्प्यूटर द्वारा होने लगे हैं, भले
ही लिफाफे पर पता हिन्दी या कन्नड़ में लिखा हो, बुकिंग क्लर्क को
अंग्रेजी में ही कम्प्यूटर में प्रविष्टि करनी पड़ती है, और हिन्दी में
पते लिखे पत्र स्पीडपोस्ट से भी हिन्दीतर भाषी प्रदेशों में कई दिन बाद
पहुँच पाते हैं।

हवाई टिकट हिन्दी में क्यों नहीं प्रिंट हो पा रहे। उनमें मूलतः यात्री
का नाम हिन्दी में क्यों नहीं आ पाता।

इनकम टैक्स रिटर्न (ऑनलाइन) हिन्दी में क्यों नहीं भर पा रहे हैं?
विभिन्न फार्म आदि आजकल "एक खाने में एक अक्षर भरें" की शैली में छपे
होते हैं, चाहे स्कूल में भर्ती का आवेदनपत्र हो या पासपोर्ट के लिए
आवेदन पत्र हो। ताकि उन्हें OCR के सहारे Automatic database में
कम्प्यूटर में संसाधित किया जा सके। यदि हिन्दी में कोई एक खाने में एक
अक्षर भरे तो क्या भरेगा?

आम जनता एक Syllable को एक अक्षर मानती है। कोई एक खाने में शा और दूसरे
में न्ति भरेगा, जबकि न्ति में न हलन्त, त और छोटी-इ चार वर्ण मिलकर बने
हैं। इनकी फील्डसाइज ओटोमेटिक रूप में कैसे निकलेगी?

आज लगभग सभी लोग मोबाईल का उपयोग कर रहे हैं। अधिकांश लोग हिन्दी के
वाक्य भी रोमन लिपि में लिखकर एसएमएस कर रहे हैं। देवनागरी का प्रयोग इसी
(भ्रान्ति तथा रूढ़िवादिता के कारण उपजी) जटिलता के कारण ही बाधाप्राप्त
हो रहा है। दुख की बात है कि लोग "उत्‌प्‌रेरणा" को पढ़ने में कठिनाई
होने का रोना रोते हैं, पर जब यही शब्द रोमन में लिखा एसएमएस मिले -
utprerana तो आराम से पढ़ लेते हैं, और स्वयं टाइप करके जबाब भी दे देते
हैं। देवनागरी/हिन्दी का प्रयोग भूल जाते हैं।

जो पहले शादी-विवाह के निमन्त्रण हिन्दी में देते थे, आजकल अंग्रेजी में
ही करने लगे हैं।

जो सेठ लोग पहले अपने व्यापारिक हिसाब किताब के खाते हिन्दी में ही लिखते
थे, आज कम्प्यूटरीकरण होने पर टाली आदि सॉफ्टवेयरों पर अंग्रेजी में ही
करने लगे हैं।

जिन कार्यालयों में मुद्रित प्रपत्र में वार्षिक गोपनीयता रिपोर्ट या
अप्रेजल हिन्दी में भरे जाते थे, अब SAP के अन्तर्गत कम्प्यूटरीकृत हो
जाने पर मजबूरी में अंग्रेजी में ही करना पड़ रहा है। क्योंकि परम्परागत
रूप में रेण्डरिंग में कठिनाई आती है।

अतः यदि आप जैसे विद्वान भी "जैसा होता आया है, वैसा ही हो" भले ही वह
विज्ञान या तर्कसम्मत हो या न हो - का ही समर्थन करते रहेंगे तो
हिन्दी/देवनागरी का प्रयोग आगे बढ़ेगा या कमेगा - यह निर्णय आप ही करें?

केवल येन-केन प्रकारेण प्रचलित पद्धति में देवनागरी/हिन्दी पाठ को
कम्प्यूटर में टाइप कर लेना, प्रदर्शित/मुद्रित कर लेना भर ही "समग्र
कम्प्यूटिंग" नहीं है। Just typing out text traditionally, not all
that, what computing is.

कम्प्यूटर का प्रमुख कार्य डैटाबेस है, यदि यह मूलतः व सरलता से देवनागरी
में नहीं हो पाता तो देवनागरी/हिन्दी व भारतीय लिपियों का प्रयोग घटेगा
ही।

यदि तीव्रता से हो रहे IT के विकास के साथ कदम मिलाकर न चले तो
"देवनागरी" लिपि सर्वश्रेष्ठ है, यह सिर्फ एक "नारा" मात्र बनकर रह
जाएगी।

अतः यह तकनीकी व वैज्ञानिक हिन्दी वर्ग के सभी विद्वानों को सोचना चाहिए
और रातों रात इसका हल निकालना चाहिए। किसी सरकारी तन्त्र पर, किसी तकनीकी
संस्थान का सहारा लिए बिना ही हमें स्वयंसेवी रूप से निःशुल्क व समर्पण
भाव से इन समस्याओं का सरल समाधान निकालना ही होगा।

Vinod Sharma

unread,
Jul 21, 2012, 9:22:06 AM7/21/12
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यदि यह कवायद इन छह व्यंजनों के लिए ही है, तब ठीक है.
बात समझ में आ गई। इतना प्रयास करके समझाने के लिए आभार।

2012/7/21 Hariraam <hari...@gmail.com>

Navneet Kumar

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Jul 21, 2012, 11:14:37 AM7/21/12
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> सुना है कि संस्कृत में एक ऐसा भी संयुक्ताक्षर है जो नौ वर्णों से मिलकर
> बना है,

संस्कृत में ६ अक्षरों का संयोग तो सुना है पर ९ का नहीं। कृपया यदि ९
वाले संयोग का पता हो तो उद्धृत करें। ६ व्यंजनों का संयोग यह हैः-
तिलान्त्स्त्र्यावपति ( न्+त्+स्+त्+र्+य्) ।
यहाँ तिलान् के बाद वाला त् (डः सि धुट्) वाला है। अर्थात् संधि करने के
कारण उपस्थित हुआ है।
--
»नवनीत कुमार

Vineet Chaitanya

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Jul 22, 2012, 1:45:25 AM7/22/12
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हरिराम जी,

               मुख्य समस्या इस बात कि अनभिज्ञता है कि देवनागरी को जब चाहें तब आवश्यकतानुसार वर्णात्मक रूप में भी लिखा जा सकता है और तब मात्रा की आवश्यकता भी नहीं रहती है, संस्कृत व्याकरण पढाते समय वर्णात्मक रूप ही सुविधाजनक होता है. अतः ऐसी स्थिति के लिये वर्णात्मक रूप भी उपलब्ध करवाया जा सकता है.
प्रश्न केवल जनमत तैयार करने का है.

विनीत चैतन्य

2012/7/21 Hariraam <hari...@gmail.com>

V S Rawat g

unread,
Jul 24, 2012, 12:23:30 PM7/24/12
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On 7/21/2012 3:48 AM India Time, _Dhananjay Chaube_ wrote:

>
>
> मुझे तो ऐसा लगता है कि द्ध,द्म,द्व,श्व आदि की तरह ही 'श्र' को भी विदा करने का
> समय आ गया है।

इससे तो मैं सहमत हूँ। ऐसा करने से लिखित हिन्दी सरल हो जाएगी।


इसके साथ ही, वर्तमान समय में जब हम 'ऋ' का 'रि' की तरह ही
> उच्चारण करते हैं तो 'ऋ' को भी विदाई दे देनी चाहिए।

हमें ऋ का सही उच्चारण पता लगाना चाहिए।

>
> सविनय
> धनंजय
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