नुक्ते वाले शब्दों की सही वर्ड लिस्ट

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V S Rawat

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Oct 28, 2015, 2:22:09 AM10/28/15
to th
क्या किसी के पास या किसी साइट पर ऐसी शब्द सूचि उपलब्ध है
जिसमें नुक्ते वाले शब्दों का
1. बिना नुक्ते का रूप
2. सही रूप (नुक्ते वाली स्पेलिंग)
दिया गया है?

इसी तरह से, गूगल ट्रांसलेट जो चन्द्रबिन्दु की जगह पर हर जगह बिन्दु लगा दिया करता है
तो क्या ऐसे शब्दों की सूचि बनाई गई है जिसमें बिन्दू वाली ग़लत स्पेलिंग, और साथ में
चनद्रबिन्दु वाली सही स्पेलिंग दी गई हो?

धन्यवाद।
रावत

subhash rathore

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Oct 28, 2015, 9:19:56 AM10/28/15
to technic...@googlegroups.com

sir net par ek link mila he

http://www.proz.com/forum/hindi/248710-हिंदी_में_नुक्ते_का_प्रयोग.html

--
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ken

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Oct 28, 2015, 11:12:49 PM10/28/15
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)

V S Rawat

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Oct 29, 2015, 12:20:29 AM10/29/15
to technic...@googlegroups.com
नहीं सुभाष जी,

इस थ्रेड में चर्चा हो रही है कि नुक़्ता लगाना चाहिए कि नहीं।

यहाँ पर कोई सूची नहीं है ऐसे शब्दों की।

धन्यवाद।
रावत

On 10/28/2015 5:58 PM, subhash rathore wrote:
> sir net par ek link mila he
>
> http://www.proz.com/forum/hindi/248710-हिंदी_में_नुक्ते_का_
> <http://www.proz.com/forum/hindi/248710-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A4%BE_>प्रयोग.html
>
> On Oct 28, 2015 11:52 AM, "V S Rawat" <vsr...@gmail.com
> <mailto:vsr...@gmail.com>> wrote:
>
> क्या किसी के पास या किसी साइट पर ऐसी शब्द सूचि उपलब्ध है
> जिसमें नुक्ते वाले शब्दों का
> 1. बिना नुक्ते का रूप
> 2. सही रूप (नुक्ते वाली स्पेलिंग)
> दिया गया है?
>
> इसी तरह से, गूगल ट्रांसलेट जो चन्द्रबिन्दु की जगह पर हर जगह बिन्दु लगा दिया करता है
> तो क्या ऐसे शब्दों की सूचि बनाई गई है जिसमें बिन्दू वाली ग़लत स्पेलिंग, और साथ में
> चनद्रबिन्दु वाली सही स्पेलिंग दी गई हो?
>
> धन्यवाद।
> रावत
>
> --
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> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
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V S Rawat

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Oct 29, 2015, 12:22:23 AM10/29/15
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जी केन जी,

इस पेज पर उर्दू हिन्दी शब्दकोश जैसा दिया हुआ है।
उसमें कई नुक़्ते वाले शब्द हैं जिन्हें निकाल कर इस्तेमाल किया जा सकता है।

परन्तु देखा तो पाया कि उनकी उर्दू में ही स्पेलिंग की कई ग़लतियाँ हैं, इसलिए इस आधार पर
कोई अनुवादक बनाना, ग़लत ली गई स्पेलिंग की वजह से सही को ग़लत कर बैठेगा।

धन्यवाद।
रावत

Vinod Sharma

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Oct 29, 2015, 2:13:42 AM10/29/15
to technical-hindi
बंधुओ,
मेरा विनम्र निवेदन है कि हिंदी भाषा में नुक्ते का कोई प्रावधान नहीं होता है। हमारी भाषा की परंपरा विदेशी शब्दों को आत्मसात करने की है। अर्थात हमारी भाषा में आने पर वह हिंदी का ही बन जाता है। उसके साथ हिंदी के अन्य शब्दों जैसा ही व्यवहार किया जाता है। अतः किसी आगत शब्द पर विदेशी भाषा के नियमों को लागू करना व्यावहारिक भी नहीं है और उचित भी नहीं है। कुछ पुराने लेखक जिन्हें उर्दू का भी ज्ञान था, इन नुक्ता युक्त अक्षरों का उपयोग करते रहे हैं। भावी पीढ़ियों के लिए हम क्यों अनावश्यक झंझट देकर जाना चाहते हैं।
नुक्ता लगे हुए अक्षर का उच्चारण भिन्न होता है। हिंदी भाषा से लगभग 50 साल से जुडे होने के बावजूद मैं क और क़, ख और ख़, ग और ग़, ज और ज़ के उच्चारणों में अंतर नहीं सीख पाया हूँ। हाँ केवल फ और फ़ के उच्चारण में भेद पता है क्योंकि यह भेद अंग्रेजी के एफ और हिंदी के फ में मौजूद है।
मेरी राय में नुक्ते पर ऊर्जा का व्यय निरर्थक है। 

--
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V S Rawat

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Oct 29, 2015, 2:43:35 AM10/29/15
to technic...@googlegroups.com
हिन्दी या अन्य भारतीय या ब्राह्मी-उदगमी भाषाओं का गुण है
यहा लिखत, वथा पढ़त (बोलत)

जैसा लिखा जाता है, वैसा बोला या पढ़ा जाता है।

इसलिए एक ही अक्षर के नुक्ते वाला और बिना नुक्ता वाला, दो उच्चारण होने से भाषा के मूल
गुण का उल्लंघन हो रहा है जिससे भाषा करप्ट हो जा रही है।

अभी तक लिखित भाषा को सॉफ़्टवेयर से पढ़ने पर किसी सहायता की आवश्यकता नहीं होती है,
क्योंकि हर वर्ण का एक अनूठा उच्चारण है, लेकिन अगर एक का क का उच्चारण कहीं क (बिना
नुक्ते वाला) हुआ, कहीं क़ (नुक्ते वाला) हुआ, तो फिर एक डिक्शनरी मेन्टेन करनी पड़ेगी कि
किस शब्द में किस तरह का उच्चारण करना है। जिससे जटिलता आएगी।

मैं तो नुक्ते का भरपूर इस्तेमाल करता हूँ और शुद्ध गुणों वाली भाषा का प्रयोग करना उचित
समझता हूँ।

यही भाषा का वास्तविक सम्मान है कि हम अपने तर्क के हिसाब से भाषा को तोड़ें-मरोड़ें नहीं।

आगे जैसी जिसकी इच्छा।

धन्यवाद।
रावत



On 10/29/2015 11:43 AM, Vinod Sharma wrote:
> बंधुओ,
> मेरा विनम्र निवेदन है कि हिंदी भाषा में नुक्ते का कोई प्रावधान नहीं होता है। हमारी
> भाषा की परंपरा विदेशी शब्दों को आत्मसात करने की है। अर्थात हमारी भाषा में आने पर वह
> हिंदी का ही बन जाता है। उसके साथ हिंदी के अन्य शब्दों जैसा ही व्यवहार किया जाता है।
> अतः किसी आगत शब्द पर विदेशी भाषा के नियमों को लागू करना व्यावहारिक भी नहीं है और
> उचित भी नहीं है। कुछ पुराने लेखक जिन्हें उर्दू का भी ज्ञान था, इन नुक्ता युक्त अक्षरों का
> उपयोग करते रहे हैं। भावी पीढ़ियों के लिए हम क्यों अनावश्यक झंझट देकर जाना चाहते हैं।
> नुक्ता लगे हुए अक्षर का उच्चारण भिन्न होता है। हिंदी भाषा से लगभग 50 साल से जुडे होने
> के बावजूद मैं क और क़, ख और ख़, ग और ग़, ज और ज़ के उच्चारणों में अंतर नहीं सीख पाया हूँ।
> हाँ केवल फ और फ़ के उच्चारण में भेद पता है क्योंकि यह भेद अंग्रेजी के एफ और हिंदी के फ में
> मौजूद है।
> मेरी राय में नुक्ते पर ऊर्जा का व्यय निरर्थक है।
>
> 2015-10-29 9:52 GMT+05:30 V S Rawat <vsr...@gmail.com
> <mailto:vsr...@gmail.com>>:
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com>
> <mailto:technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com>> को ईमेल भेजें.
> अधिक विकल्पों के लिए, https://groups.google.com/d/optout में जाएं.
>
>
> --
> आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "Scientific and
> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
> इस समूह की सदस्यता समाप्त करने और इससे ईमेल प्राप्त करना बंद करने के लिए,
> technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com> को ईमेल भेजें.
> अधिक विकल्‍पों के लिए, https://groups.google.com/d/optout पर जाएं.
>
>

Vinod Sharma

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Oct 29, 2015, 2:51:44 AM10/29/15
to technical-hindi
रावत जी,
क्या आपके इस पोस्ट में विरोधाभास नहीं है?
पहले तो आप नुक्ते के कारण होने वाली कठिनाइयाँ गिनाते हैं और
अंत में कहते हैं कि मैं तो नुक्ते का इस्तेमाल करता हूँ। तो बात
समझ में नहीं आई कि आप नुक्ते के प्रयोग के पक्ष में हैं या विरोध में।

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V S Rawat

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Oct 29, 2015, 5:18:58 AM10/29/15
to technic...@googlegroups.com
मैं इसके इस्तेमाल के पक्ष में हूँ।

धन्यवाद।
रावत

On 10/29/2015 12:21 PM, Vinod Sharma wrote:
> रावत जी,
> क्या आपके इस पोस्ट में विरोधाभास नहीं है?
> पहले तो आप नुक्ते के कारण होने वाली कठिनाइयाँ गिनाते हैं और
> अंत में कहते हैं कि मैं तो नुक्ते का इस्तेमाल करता हूँ। तो बात
> समझ में नहीं आई कि आप नुक्ते के प्रयोग के पक्ष में हैं या विरोध में।
>
> 2015-10-29 12:13 GMT+05:30 V S Rawat <vsr...@gmail.com
> <mailto:vsr...@gmail.com>>:
> <mailto:vsr...@gmail.com <mailto:vsr...@gmail.com>>>:
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%252Buns...@googlegroups.com>>
> <mailto:technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com>
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%252Buns...@googlegroups.com>>> को
> ईमेल भेजें.
> अधिक विकल्पों के लिए, https://groups.google.com/d/optout में
> जाएं.
>
>
> --
> आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "Scientific and
> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
> इस समूह की सदस्यता समाप्त करने और इससे ईमेल प्राप्त करना बंद करने के लिए,
> technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com>
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%252Buns...@googlegroups.com>> को

Dhananjay Chaube

unread,
Oct 29, 2015, 10:54:16 PM10/29/15
to technic...@googlegroups.com
नुक्ते के व्यर्थ चक्कर में न पड़ने की इस राय से मेरी भी पूर्णतया सहमति।

29 अक्तूबर 2015 को 11:43 am को, Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com> ने लिखा:
इस समूह की सदस्यता समाप्त करने और इससे ईमेल प्राप्त करना बंद करने के लिए, technical-hin...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.

Madhusudan H Jhaveri

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Oct 29, 2015, 11:29:58 PM10/29/15
to technic...@googlegroups.com
हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाना है। और भारत की अनेक भाषाओं में नुक्ता है ही नहीं।
गुजराती, और दक्षिण की चारो भाषाओं में नुक्ता होता नहीं है।मराठी में कहीं लिखा नहीं जाता।  सोचने के बाद लिपि देवनागरी की रचना के समय नुक्ते की संदिग्धता को सोचकर उसे "संकरित वर्ण" माना गया था। इस पर दीर्घ विचार कर उसे लिपि में प्रवेश नहीं किया गया।
कुछ गहरी जानकारी के लिए निम्न नाम पर चटकाएँ।

संस्कृत है- ”भव्य ब्रह्मांडीय संगीत” –डॉ.मधुसूदन

Posted On & filed under जरूर पढ़ें, महत्वपूर्ण लेख.

sanskrit

प्रवेश: ॐ —देववाणी संस्कृत: ”भव्य ब्रह्मांडीय संगीत” A Cosmic Grand Opera –कहते हैं, ”अमरिकन संस्कृत इन्स्टीट्यूट” के निर्देशक प्रो. व्यास ह्युस्टन ॐ —प्राचीन भारतीय ऋषि-मनीषियों ने, शब्द की अमरता का, गहन आकलन किया था। ॐ—मानवीय चेतना की उत्क्रान्ति का क्रम-विकास, भाषा-विकास के साथ अटूट रूप से जुडा हुआ है; इस तथ्य को समझा था। ॐ—संकरित… Read more »

V S Rawat

unread,
Oct 30, 2015, 9:02:03 AM10/30/15
to technic...@googlegroups.com
मैं नुक्ता इस्तेमाल करता हूँ, मेरे लिए इतना काफ़ी है।

मेरा यह स्टैण्ड किसी की भी राय से या किसी भी संस्था या व्यक्ति के निर्णय से नहीं बदलने
वाला है।

मैं इस थ्रेड को नुक्ते का इस्तेमाल करने पर रायशुमारी नहीं बनाना चाहता हूँ।

बस, मुझे नुक्ते वाले सही और ग़लत शब्दों की एक सूचि चाहिए थी ताकि मैं ग़लत शब्दों को
ऑटोमेटिक कनवर्ट करने के लिए कोई प्रोग्राम या हेल्प बना सकूँ जो सबके काम आएगी। इस
समूह का प्रयोजन यही है।

इसलिए जिसे इस्तेमाल करना हो वो करे, जिसे इस्तेमाल न करना हो वो न करे। मुझे कोई
ऐतराज़ या समर्थन करने का हक़ नहीं है।

धन्यवाद।
रावत

On 10/30/2015 8:59 AM, Madhusudan H Jhaveri wrote:
> हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाना है। और भारत की अनेक भाषाओं में नुक्ता है ही नहीं।
> *गुजराती, और दक्षिण की चारो भाषाओं में नुक्ता होता नहीं है।मराठी में कहीं लिखा नहीं
> जाता। सोचने के बाद लिपि देवनागरी की रचना के समय नुक्ते की संदिग्धता को सोचकर उसे
> "संकरित वर्ण" माना गया था। इस पर दीर्घ विचार कर उसे लिपि में प्रवेश नहीं किया गया।
> कुछ गहरी जानकारी के लिए निम्न नाम पर चटकाएँ।
> *
>
>
> संस्कृत है- ”भव्य ब्रह्मांडीय संगीत” –डॉ.मधुसूदन
> <http://www.pravakta.com/sanskrit-the-grand-cosmic-music/>
>
> Posted On July 5, 2012 & filed under जरूर पढ़ें
> <http://www.pravakta.com/category/must-read/>, महत्वपूर्ण लेख
> <http://www.pravakta.com/category/important-articles/>.
>
> sanskrit
>
> प्रवेश: ॐ —देववाणी संस्कृत: ”भव्य ब्रह्मांडीय संगीत” A Cosmic Grand Opera –कहते हैं,
> ”अमरिकन संस्कृत इन्स्टीट्यूट” के निर्देशक प्रो. व्यास ह्युस्टन ॐ —प्राचीन भारतीय
> ऋषि-मनीषियों ने, शब्द की अमरता का, गहन आकलन किया था। ॐ—मानवीय चेतना की
> उत्क्रान्ति का क्रम-विकास, भाषा-विकास के साथ अटूट रूप से जुडा हुआ है; इस तथ्य को
> समझा था। ॐ—संकरित… Read more »
> <http://www.pravakta.com/sanskrit-the-grand-cosmic-music/>
>
>
>
>
>
> ----- Original Message -----
> From: Dhananjay Chaube <anan...@gmail.com>
> To: technic...@googlegroups.com
> Sent: Thu, 29 Oct 2015 02:39:03 -0400 (EDT)
> Subject: Re: [technical-hindi] Re: नुक्ते वाले शब्दों की सही वर्ड लिस्ट
>
> नुक्ते के व्यर्थ चक्कर में न पड़ने की इस राय से मेरी भी पूर्णतया सहमति।
>
> 29 अक्तूबर 2015 को 11:43 am को, Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com
> <mailto:vinodj...@gmail.com>> ने लिखा:
>
> बंधुओ,
> मेरा विनम्र निवेदन है कि हिंदी भाषा में नुक्ते का कोई प्रावधान नहीं होता है।
> हमारी भाषा की परंपरा विदेशी शब्दों को आत्मसात करने की है। अर्थात हमारी भाषा
> में आने पर वह हिंदी का ही बन जाता है। उसके साथ हिंदी के अन्य शब्दों जैसा ही
> व्यवहार किया जाता है। अतः किसी आगत शब्द पर विदेशी भाषा के नियमों को लागू
> करना व्यावहारिक भी नहीं है और उचित भी नहीं है। कुछ पुराने लेखक जिन्हें उर्दू का भी
> ज्ञान था, इन नुक्ता युक्त अक्षरों का उपयोग करते रहे हैं। भावी पीढ़ियों के लिए हम
> क्यों अनावश्यक झंझट देकर जाना चाहते हैं।
> नुक्ता लगे हुए अक्षर का उच्चारण भिन्न होता है। हिंदी भाषा से लगभग 50 साल से जुडे
> होने के बावजूद मैं क और क़, ख और ख़, ग और ग़, ज और ज़ के उच्चारणों में अंतर नहीं सीख
> पाया हूँ। हाँ केवल फ और फ़ के उच्चारण में भेद पता है क्योंकि यह भेद अंग्रेजी के एफ और
> हिंदी के फ में मौजूद है।
> मेरी राय में नुक्ते पर ऊर्जा का व्यय निरर्थक है।
>
> 2015-10-29 9:52 GMT+05:30 V S Rawat <vsr...@gmail.com
> <mailto:vsr...@gmail.com>>:
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com>
>
> <mailto:technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com>> को
> ईमेल भेजें.
>
> अधिक विकल्पों के लिए, https://groups.google.com/d/optout में जाएं.
>
>
>
> --
>
> आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "Scientific and
> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
>
> इस समूह की सदस्यता समाप्त करने और इससे ईमेल प्राप्त करना बंद करने के लिए,
> technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com> को ईमेल भेजें.
>
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>
>
>
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>
> आपको यह संदश इसलिए मिला है क्योंकि आपने Google समूह के "Scientific and
> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
>
> इस समूह की सदस्यता समाप्त करने और इससे ईमेल प्राप्त करना बंद करने के लिए,
> technical-hin...@googlegroups.com

ePandit | ई-पण्डित

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Oct 30, 2015, 9:48:06 PM10/30/15
to technical-hindi
नुक्ता कई बार अपरिहार्य भी हो सकता है। उदाहरण के लिये अमेरिकन अंग्रेजी के जी (G) और ज़ी (Z) को देवनागरी में लिखने पर बिना नुक्ते उनका भेद न हो सकेगा।

मेरे विचार से सामान्य हिन्दी में व्यक्ति चाहे जैसा मर्जी लिखे लेकिन किसी शब्दकोश, व्याकरण या भाषा-विज्ञान की पुस्तक में नुक्ते का प्रयोग अवश्य होना चाहिये। हिन्दी भाषा की विशेषता इसकी ध्वन्यात्मकता है, इसलिये कई जगह मूल भाषायी उच्चारण बताने के लिये नुक्ता आवश्यक है। कई मामलों में नुक्ता लगाना भी उचित है और न लगाना भी। उदाहरण के लिये ख़ान का उच्चारण हिन्दी पट्टी में खान ही प्रचलित है, इसलिये सामान्य तौर पर इसे बिना नुक्ते के ही लिखना भी देशज उच्चारण अनुसार सही माना जायगा। हालाँकि किसी पाठ्यपुस्तक आदि में ख़ान को खान (mine) से अलग बताने के लिये नुक्ता जरूरी होगा।

जिन अंग्रेजी/अरबी/उर्दू मूल के शब्दों का हिन्दी में उच्चारण बिना नुक्ते वाला देसी हो गया है, उन्हें बिना नुक्ते भी लिखना सही है लेकिन जिनका मूल उच्चारण ही कायम है, वहाँ नुक्ता अवश्य लगाना चाहिये। साथ ही किसी पाठ्यपुस्तक में छात्रों को मूल शुद्ध उच्चारण से परिचित कराने हेतु भी नुक्ता अवश्य लगाना चाहिये।

29 अक्तूबर 2015 को 11:43 am को, Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com> ने लिखा:
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Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
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V S Rawat

unread,
Oct 30, 2015, 10:50:05 PM10/30/15
to technic...@googlegroups.com
जी हाँ, सही कहा कि "कई जगह मूल भाषायी उच्चारण बताने के लिये नुक्ता आवश्यक है।"

यह वास्तव में पढ़े-लिखे टाइप और अनपढ़-ग्रामीण टाइप का अन्तर हो जाता है।

अनपढ़-ग्रामीण व्यक्ति किसी भी वर्ण का कैसे भी उच्चारण कर लेगा, उसका उद्देश्य उसके
विचार को अभिव्यक्त करना भर होता है,
और देखा जाए तो अनपढ़-ग्रामीण या शब्द के शुद्ध रूप या वाक्य की संरचना की भी परवाह
नहीं करते हैं, वो बस कोई भी स्लैंग या देशज शब्द या अंग्रेज़ी शब्दों का भी गाँव-करण (जैसे
influence का इनफुलैन्स) करके उच्चारण कर देते हैं, या वर्ब (verb) को अपने हिसाब से
तोड़ मरोड़ लेते हैं (जैसे "होना है" की जगह "होइबै करी"), या वाक्य को किसी भी तरह से
बना लेते हैं।

उनकी बात व्यक्त तो हो जाती है, लेकिन सुनते ही हमें पता चल जाता है कि वो
अनपढ़-ग्रामीण व्यक्ति है।

जबकि पढ़ा-लिखा शुद्ध रूपों का प्रयोग करता है और नियमों का पालन करता है।

इसलिए अगर हम जानते-बूझते हुए भी, जबरन नुक़्ता हटा कर ग़लत प्रयोग करते हैं, तो सुनने
वाले को यही लगेगा कि यह अनपढ़-ग्रामीण व्यक्ति है।

यही मुख्य वजह है जो मुझे नुक़्ता युक्त यथासम्भव सही उच्चारण को अपनाने के लिए प्रेरित
करती है, भले ही यह अधिक जटिल हो।

जटिल है इसीलिए तो इसका इस्तेमाल करने के लिए अधिक प्रयास और बुद्धि लगती है।
वरना तो मूक-बधिर लोग तो बिना वाक-भाषा के ही साइन लैंन्वेज से भी अपना काम चला लेते हैं।

हिन्दी और इसके स्थानीय वर्जनों जैसे भोजपुरी या निमाड़ी में जो अन्तर है,
वही अन्तर नुक़्ता वाले शुद्ध उच्चारण और बिना नुक़्ते वाले अशुद्ध या लोकलाइज़्ड उच्चारण में हे।

नुक़्ते का सही इस्तेमाल न करना, हिन्दी को मूल भाषा का कोई स्थानीय या गँवारू रूपान्तरण
बना देता है।

अगर आप जानते हैं कि नुक़्ता क्या है, कहाँ लगता है, तो आप उस नुक़्ते वाले वर्ण और शब्द का
सही नुक़्ता-युक्त उच्चारण क्यों नहीं करते हैं?
आपको समस्या क्या है आख़िर?
क्या आपको पता ही नहीं है कि नुक़्ता क्या होते है?
क्या आपसे इसका उच्चारण करते नहीं बनता?
क्या आप भ्रमित हो जाते हैं?
यदि नहीं, तो फिर क्या कारण है?

क्या यह वजह हो सकती है कि यह अरबी से आया, जो मुस्लिमों आदि की भाषा है जिनसे आपका
धार्मिक विरोध है इसलिए आप उनकी भाषा भी नहीं अपनाना चाहते हैं?

तो फिर ध्यान दीजिए कि अरबी का हिन्दीकरण करने के लिए ही उर्दू भाषा को गढ़ा गया
था। कोई छोटा-मोटा बदलाव नहीं, इस उर्दू भाषा का मूल से आरम्भ ही हिन्दी के वर्णों को
अरबी भाषा से मिलान करने के लिए किया गया था।

मतलब कि अरबी वालों ने तो एक पूरी भाषा बना डाली कि भारत की भाषा और उनकी अरबी
भाषा के बीच पुल बने।

और भाई लोग एक रेती के दाने भर नुक़्ते का विरोध करके अपना जीवन सफल मान रहे हैं।

जब हिन्दी का कोई शब्द (जैसे गुरु, योग, बन्द आदि) को अंग्रेज़ी में शामिल किया जाता है,
तब हम हिन्दी वालों को ख़ुशी होती है।
लेकिन हम किसी और भाषा से कुछ भी लेने को तैयार नहीं हैं।

धन्यवाद।

रावत।


On 10/31/2015 7:17 AM, ePandit | ई-पण्डित wrote:
> नुक्ता कई बार अपरिहार्य भी हो सकता है। उदाहरण के लिये अमेरिकन अंग्रेजी के जी (G) और
> ज़ी (Z) को देवनागरी में लिखने पर बिना नुक्ते उनका भेद न हो सकेगा।
>
> मेरे विचार से सामान्य हिन्दी में व्यक्ति चाहे जैसा मर्जी लिखे लेकिन किसी शब्दकोश,
> व्याकरण या भाषा-विज्ञान की पुस्तक में नुक्ते का प्रयोग अवश्य होना चाहिये। हिन्दी भाषा
> की विशेषता इसकी ध्वन्यात्मकता है, इसलिये कई जगह मूल भाषायी उच्चारण बताने के लिये
> नुक्ता आवश्यक है। कई मामलों में नुक्ता लगाना भी उचित है और न लगाना भी। उदाहरण के
> लिये *ख़ान* का उच्चारण हिन्दी पट्टी में *खान* ही प्रचलित है, इसलिये सामान्य तौर पर
> इसे बिना नुक्ते के ही लिखना भी देशज उच्चारण अनुसार सही माना जायगा। हालाँकि किसी
> पाठ्यपुस्तक आदि में ख़ान को खान (mine) से अलग बताने के लिये नुक्ता जरूरी होगा।
>
> जिन अंग्रेजी/अरबी/उर्दू मूल के शब्दों का हिन्दी में उच्चारण बिना नुक्ते वाला देसी हो गया
> है, उन्हें बिना नुक्ते भी लिखना सही है लेकिन जिनका मूल उच्चारण ही कायम है, वहाँ नुक्ता
> अवश्य लगाना चाहिये। साथ ही किसी पाठ्यपुस्तक में छात्रों को मूल शुद्ध उच्चारण से परिचित
> कराने हेतु भी नुक्ता अवश्य लगाना चाहिये।
>
> 29 अक्तूबर 2015 को 11:43 am को, Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com
> <mailto:vinodj...@gmail.com>> ने लिखा:
>
> बंधुओ,
> मेरा विनम्र निवेदन है कि हिंदी भाषा में नुक्ते का कोई प्रावधान नहीं होता है।
> हमारी भाषा की परंपरा विदेशी शब्दों को आत्मसात करने की है। अर्थात हमारी भाषा
> में आने पर वह हिंदी का ही बन जाता है। उसके साथ हिंदी के अन्य शब्दों जैसा ही
> व्यवहार किया जाता है। अतः किसी आगत शब्द पर विदेशी भाषा के नियमों को लागू
> करना व्यावहारिक भी नहीं है और उचित भी नहीं है। कुछ पुराने लेखक जिन्हें उर्दू का भी
> ज्ञान था, इन नुक्ता युक्त अक्षरों का उपयोग करते रहे हैं। भावी पीढ़ियों के लिए हम
> क्यों अनावश्यक झंझट देकर जाना चाहते हैं।
> नुक्ता लगे हुए अक्षर का उच्चारण भिन्न होता है। हिंदी भाषा से लगभग 50 साल से जुडे
> होने के बावजूद मैं क और क़, ख और ख़, ग और ग़, ज और ज़ के उच्चारणों में अंतर नहीं सीख
> पाया हूँ। हाँ केवल फ और फ़ के उच्चारण में भेद पता है क्योंकि यह भेद अंग्रेजी के एफ और
> हिंदी के फ में मौजूद है।
> मेरी राय में नुक्ते पर ऊर्जा का व्यय निरर्थक है।
>
> 2015-10-29 9:52 GMT+05:30 V S Rawat <vsr...@gmail.com
> <mailto:vsr...@gmail.com>>:
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com>
> <mailto:technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com>> को
> ईमेल भेजें.
> अधिक विकल्पों के लिए, https://groups.google.com/d/optout में जाएं.
>
>
> --
> आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "Scientific and
> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
> इस समूह की सदस्यता समाप्त करने और इससे ईमेल प्राप्त करना बंद करने के लिए,
> technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hindi%2Bunsu...@googlegroups.com> को ईमेल भेजें.
> अधिक विकल्‍पों के लिए, https://groups.google.com/d/optout पर जाएं.
>
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> आपको यह संदश इसलिए मिला है क्योंकि आपने Google समूह के "Scientific and
> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
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Vinod Sharma

unread,
Nov 1, 2015, 10:39:15 AM11/1/15
to technical-hindi
व्यंग्य वह भी इतना विस्तृत, धन्यवाद।
एक अदना से अनुवादक के रूप में लगभग 20 वर्ष हिंदी की सेवा करने के बाद आज अपना गँवारूपन और अनपढ़ होना स्वीकार करता हूँ। जब से होश संभाला और हिंदी 
की पढ़ाई शुरू की हर किसी ने यही बताया कि उर्दू भाषा में नुक्ते का प्रयोग होता है। 
हिंदी भाषा की वर्णमाला में कोई भी ऐसा अक्षर नहीं है जिस के लिए नुक्ते का प्रयोग
किया जा सके।
अल्पज्ञ हूँ इसलिए उस हिंदी से परिचित नहीं हो सका जिसकी वर्णमाला में किसी अक्षर के नीचे नुकता लगता हो। आचार्य किशोरीदास बाजपेयी को हिंदी का पुरोधा
मानता रहा था जिन्होंने बार-बार कहा था कि शब्द किसी भी भाषा से आए, एक बार
हिंदी में समावेश होने के बाद वह हिंदी का हो जाता है। उसके साथ वही संस्कार और
व्यवहार होगा जो हिंदी के अन्य शब्दों के साथ होता है। हो सकता है पुराने जमाने के 
थे आचार्य जी, वे भी शायद अनपढ़ गँवार रहे होंगे क्योंकि अपने जीवन में उन्हें भी 
बहुत अधिक आलोचलाएँ झेलनी पड़ी थीं।
अब तो चला-चली की वेला है, आखिरी वक्त में क्या खाक मुसलमां होंगे। अब तक गँवार रह गए तो इसी तरह बचे कुचे दिन भी गुजार देंगे।  

इस समूह की सदस्यता समाप्त करने और इससे ईमेल प्राप्त करना बंद करने के लिए, technical-hin...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.

V S Rawat

unread,
Nov 1, 2015, 11:44:57 AM11/1/15
to technic...@googlegroups.com
आपको दुःख हुआ और अपमानजनक लगा,

लेकिन मेरा तर्क यही रहता है
कि जब मैं किसी को नुक्ते वाले शब्दों का, बिना नुक्ता लगाए प्रयोग करते पाता हूँ
तो मैं सोचता हूँ कि वह कम-पढ़ा-लिखा होगा, उसे पता नहीं होगा कि सही शब्द क्या है।

रावत

On 11/1/2015 9:08 PM, Vinod Sharma wrote:
> व्यंग्य वह भी इतना विस्तृत, धन्यवाद।
> एक अदना से अनुवादक के रूप में लगभग 20 वर्ष हिंदी की सेवा करने के बाद आज अपना गँवारूपन
> और अनपढ़ होना स्वीकार करता हूँ। जब से होश संभाला और हिंदी
> की पढ़ाई शुरू की हर किसी ने यही बताया कि उर्दू भाषा में नुक्ते का प्रयोग होता है।
> हिंदी भाषा की वर्णमाला में कोई भी ऐसा अक्षर नहीं है जिस के लिए नुक्ते का प्रयोग
> किया जा सके।
> अल्पज्ञ हूँ इसलिए उस हिंदी से परिचित नहीं हो सका जिसकी वर्णमाला में किसी अक्षर के
> नीचे नुकता लगता हो। आचार्य किशोरीदास बाजपेयी को हिंदी का पुरोधा
> मानता रहा था जिन्होंने बार-बार कहा था कि शब्द किसी भी भाषा से आए, एक बार
> हिंदी में समावेश होने के बाद वह हिंदी का हो जाता है। उसके साथ वही संस्कार और
> व्यवहार होगा जो हिंदी के अन्य शब्दों के साथ होता है। हो सकता है पुराने जमाने के
> थे आचार्य जी, वे भी शायद अनपढ़ गँवार रहे होंगे क्योंकि अपने जीवन में उन्हें भी
> बहुत अधिक आलोचलाएँ झेलनी पड़ी थीं।
> अब तो चला-चली की वेला है, आखिरी वक्त में क्या खाक मुसलमां होंगे। अब तक गँवार रह गए
> तो इसी तरह बचे कुचे दिन भी गुजार देंगे।
>
> 2015-10-31 8:19 GMT+05:30 V S Rawat <vsr...@gmail.com
> <mailto:vsr...@gmail.com>>:
> <mailto:vinodj...@gmail.com
> <mailto:vinodj...@gmail.com>>> ने लिखा:
>
> बंधुओ,
> मेरा विनम्र निवेदन है कि हिंदी भाषा में नुक्ते का कोई प्रावधान नहीं होता है।
> हमारी भाषा की परंपरा विदेशी शब्दों को आत्मसात करने की है। अर्थात
> हमारी भाषा
> में आने पर वह हिंदी का ही बन जाता है। उसके साथ हिंदी के अन्य शब्दों जैसा ही
> व्यवहार किया जाता है। अतः किसी आगत शब्द पर विदेशी भाषा के नियमों
> को लागू
> करना व्यावहारिक भी नहीं है और उचित भी नहीं है। कुछ पुराने लेखक जिन्हें
> उर्दू का भी
> ज्ञान था, इन नुक्ता युक्त अक्षरों का उपयोग करते रहे हैं। भावी पीढ़ियों के
> लिए हम
> क्यों अनावश्यक झंझट देकर जाना चाहते हैं।
> नुक्ता लगे हुए अक्षर का उच्चारण भिन्न होता है। हिंदी भाषा से लगभग 50
> साल से जुडे
> होने के बावजूद मैं क और क़, ख और ख़, ग और ग़, ज और ज़ के उच्चारणों में
> अंतर नहीं सीख
> पाया हूँ। हाँ केवल फ और फ़ के उच्चारण में भेद पता है क्योंकि यह भेद अंग्रेजी
> के एफ और
> हिंदी के फ में मौजूद है।
> मेरी राय में नुक्ते पर ऊर्जा का व्यय निरर्थक है।
>
> 2015-10-29 9:52 GMT+05:30 V S Rawat <vsr...@gmail.com
> <mailto:vsr...@gmail.com>
> <mailto:vsr...@gmail.com <mailto:vsr...@gmail.com>>>:
> <mailto:technical-hindi%252Buns...@googlegroups.com>>> को
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Madhusudan H Jhaveri

unread,
Nov 1, 2015, 12:03:50 PM11/1/15
to technic...@googlegroups.com

श्री. रावत जी आप का निम्न प्रश्नों पर क्या मत है?

आप के तर्क के अनुसार कौनसा सही मानते हैं?

और आप कौनसे प्रयोग का पुरस्कार करते हैं?
(१) पङ्क  या पंक?

(२) पञ्च या पंच ?

(३) घण्ट या घंट ?

(४) अन्त या अंत ?

(५) कम्प या कंप?

डॉ. मधुसूदन

----- Original Message -----
From: V S Rawat <vsr...@gmail.com>
To: technic...@googlegroups.com
Sent: Sun, 01 Nov 2015 11:44:48 -0500 (EST)
Subject: Re: [technical-hindi] Re: नुक्ते वाले शब्दों की सही वर्ड लिस्ट

इस समूह की सदस्यता समाप्त करने और इससे ईमेल प्राप्त करना बंद करने के लिए, technical-hin...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.

V S Rawat

unread,
Nov 2, 2015, 2:32:37 AM11/2/15
to technic...@googlegroups.com
नुक्ते की बात हो रही है, आपका बात से अलग कोई सवाल है तो आप अलग थ्रेड में पोस्ट करें।

मुझसे व्यक्तिगत रूप से कोई प्रश्न मत पूछें, क्योंकि मैं आपको जानता नहीं हूँ, और स्पष्ट है कि
आप किसी हिडन एजेण्डा लेकर यहाँ पर अब नमूदार हुए हैं।
जो भी पूछना है वो सबसे पूछें। जिसे उत्तर देना हो वो देगा, जिसे नहीं देना होगा, उसे चुप
रहने का अधिकार है।

मुझे आपके फैलाए जा रहे जाल में फँसने में रुचि नहीं है।

धन्यवाद।
रावत


ShreeDevi Kumar

unread,
Nov 2, 2015, 3:14:47 AM11/2/15
to technic...@googlegroups.com

Rawatji,

Someone with access to soft copy of a good hindi dictionary should be able to cull out a word list of all words with nuqta.

You can see the hindi script grammar from tdil site which has a section regrading loan words for a small list used as example in the recommendations by central hindi directorate.

http://tdil-dc.in/index.php?option=com_download&task=showresourceDetails&toolid=1625&lang=en

- sent from my phone. excuse the brevity.

Anunad Singh

unread,
Nov 2, 2015, 4:54:48 AM11/2/15
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
मानक हिंदी वर्तनी (केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा जारी) सम्बन्धी नीति यह कहती है:

2.14 विदेशी ध्वनियाँ

2.14.1 उर्दू शब्द
उर्दू से आए अरबी-फ़ारसी मूलक वे शब्द जो हिंदी के अंग बन चुके हैं और जिनकी विदेशी ध्वनियों का हिंदी ध्वनियों में रूपांतर हो चुका है, हिंदी रूप में ही स्वीकार किए जा सकते हैं। जैसे :– कलम, किला, दाग आदि (क़लम, क़िला, दाग़ नहीं)। पर जहाँ उनका शुद्‍ध विदेशी रूप में प्रयोग अभीष्ट हो अथवा उच्चारणगत भेद बताना आवश्‍यक हो, वहाँ उनके हिंदी में प्रचलित रूपों में यथास्थान नुक्‍ते लगाए जाएँ। जैसे :– खाना : ख़ाना, राज : राज़, फन : हाइफ़न आदि।

इसमें नुक्तों के प्रयोग का जो विकल्प दिया गया है उसका एक उदाहरण उर्दू या फारसी  कविता को  लिखते (प्रस्तुत करते/उद्दृत करते ) समय हो सकती है। मुझे और कोई  स्थिति नहीं दिखती जब हिन्दी में अपनी बात कहते समय नुक्ते का प्रयोग किये जाने की नीतिगत स्वतन्त्रता हो।

Vinod Sharma

unread,
Nov 2, 2015, 4:57:52 AM11/2/15
to technical-hindi
तब तो हमें अनपढ़ गँवार नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उर्दू की कविता/ गजल लिखने का नहीं हमारा काम तो अनुवाद करने का है।

--
आपको यह संदश इसलिए मिला है क्योंकि आपने Google समूह के "Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
इस समूह की सदस्यता समाप्त करने और इससे ईमेल प्राप्त करना बंद करने के लिए, technical-hin...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.

Yashwant Gehlot

unread,
Nov 2, 2015, 5:36:47 AM11/2/15
to technical-hindi
मानकीकरण की पुस्तिका से जो संदर्भ लिया गया है, उसमें दो बातें हैं-
1) ऐसे शब्द जिनकी विदेशी ध्वनियों का हिंदी ध्वनियों में रूपांतर हो चुका है (कलम, किला, दाग आदि)
2) ऐसे शब्द जिनका शुद्ध विदेशी रूप में प्रयोग अभीष्ट हो अथवा उच्चारणगत भेद बताना आवश्यक हो (ख़ाना, राज़, फ़न आदि)

मानकीकरण पुस्तिका में केवल पहले प्रकार के शब्दों में नुक़्ते का प्रयोग नहीं करने की छूट दी है (...हिंदी रूप में ही स्वीकार किए जा सकते हैं।), दूसरी श्रेणी के नहीं। दूसरी श्रेणी के बारे में स्पष्ट लिखा है- यथास्थान नुक्‍ते लगाए जाएँ
वैसे तो हर कोई अपने तरीके से लिखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन मानकीकरण का अपना महत्व है।  जब मानक और सही स्वरूप की बात होगी तो 'ज़िंदा', 'ज़िंदगी' को ही सही माना जाएगा, 'जिंदा', 'जिंदगी' को नहीं।'

यशवंत



2015-11-02 15:24 GMT+05:30 Anunad Singh <anu...@gmail.com>:

Anunad Singh

unread,
Nov 2, 2015, 5:57:22 AM11/2/15
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
यशवन्त जी,
अपने सन्देश के अन्तिम वाक्य में शायद आपने उल्टा ही अर्थ दे दिया है। 

'जिन्दा' ही मानक रूप (सही रूप) है। आप शायद यह कहना चाहते हैं कि अरबी/फारसी में जिन्दगी को ऐसे ( ... ) लिखा जाता है (जिसका मूल उच्चारण की दृष्टि से लिप्यन्तरण यह है- ज़िंदगी) । 

ध्यान दीजिये कि जब मानक हिन्दी की बात की जा रही है तब उसमें दो चीजें हैं, पहले देसीकरण और फिर लिप्यन्तरण।

Yashwant Gehlot

unread,
Nov 2, 2015, 6:06:27 AM11/2/15
to technical-hindi
मैंने दोनों शब्द उक्त मानकीकरण पुस्तिका (3.15.2) से लिए हैं।

सादर,
यशवंत

--
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अधिक विकल्पों के लिए, https://groups.google.com/d/optout में जाएं.



--
Yashwant Gehlot

Vinod Sharma

unread,
Nov 2, 2015, 6:23:55 AM11/2/15
to technical-hindi
लेकिन बंधु इसका पता कैसे चलेगा कि किस शब्द में लगाना है और किसमें नहीं? क्या इससे अराजकता की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी? आप केवल लिखित भाषा में इनका इस्तेमाल करना चाहते हैं, जबकि उच्चारण में एक-दो प्रतिशत लोगों को छोड़ कर शेष 98 प्रतिशत एक समान उच्चारण करते हैं। यह उच्चारण भेद जब तक मालूम नहीं होगा, यह निर्णय करना लगभग असंभव होगा कि किस अक्षर पर नुक्ता लगाना है और किस पर नहीं। और यह सही उच्चारण केवल मदरसों में सिखाया जाता है। 

--
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Vinod Sharma

unread,
Nov 2, 2015, 6:34:12 AM11/2/15
to technical-hindi
हिंदी के प्रचार प्रसार की दृष्टि से सरलीकरण करने की आवश्यकता है या उसे अप्राकृतिक उलझनों में उलझा कर और कठिन बनाने की। 
इसका निर्णय कर लिया जाए कि जिस अक्षर का उच्चारण कोई नहीं जानता (अपवाद को छोड़ कर) उसका निर्धारण क्या शब्दों को रट कर किया जाएगा?

Vinod Sharma

unread,
Nov 2, 2015, 6:43:33 AM11/2/15
to technical-hindi
नुक्ते को समझने के लिए आपको उर्दूु आनी निहायत जरूरी है। जैसे उर्दू में क, ख, ग के लिए दो-दो अक्षर हैं। जब तक आपको यह पता नहीं हो कि कौनसा शब्द उर्दू के किस अक्षर से आरंभ होता है, आप नुक्ते का निर्णय नहीं कर सकते। इसी प्रकार उर्दू में ज की ध्वनि के लिए 4 अक्षर हैं। क्या कोई हिंदी वाला ज के चार उच्चरण कर सकता है? नहीं न। फिर उर्दू की लाश को हिंदी में ढोने की जरूरत कहाँ से आ गई? हाँ अंग्रेजी के लिए यह तर्कसंगत है कि हिंदी में F और Z की ध्वनियाँ नहीं हैं। इस लिए आगत अंग्रेजी शब्दों में फ और ज के लिए नुक्ते का प्रयोग किया जा सकता है।

Yashwant Gehlot

unread,
Nov 2, 2015, 7:26:03 AM11/2/15
to technical-hindi
यह गूगल समूह (या कोई भी अन्य चर्चा समूह) केवल चर्चा के लिए है जहाँ हम बगैर किसी के प्रति दुर्भावना रखे अपने विचार प्रकट करते हैं। इन समूहों की यही उपयोगिता है। यहाँ यह निर्णय नहीं हो सकता कि 'सरलीकरण' क्या है और 'अप्राकृतिक उलझन' क्या है। विचारों में मतभेद हो सकते हैं, होने भी चाहिए। हम अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं, निर्णय नहीं।

हिंदी में वैसे भी मानकीकरण संदर्भों की कमी है। यदि भारत सरकार की ओर से कोई मानकीकरण पुस्तिका जारी हुई है तो अपने व्यक्तिगत आग्रह भुलाकर मैं उसका सम्मान करूँगा ताकि हम मानकीकरण की दिशा में आगे बढ़ सकें।

जिस तरह मैंने अंग्रेज़ी में स्पैलिंग्स सीखी हैं, हिंदी में सही और मानक वर्तनी सीखने में बुराई नहीं समझता। हिंदी के पठन-पाठन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने की वजह से त्रुटिपूर्ण हिंदी लिखने वाले बहुमत में हैं। उनकी सुविधा के लिए हिंदी का 'सरलीकरण' किया जा सकता है या नहीं, यह तो अगली मानकीकरण पुस्तिका आने पर ही पता लगेगा।

यशवंत
--
Yashwant Gehlot

Vinod Sharma

unread,
Nov 2, 2015, 7:33:59 AM11/2/15
to technical-hindi
 ठीक है मैं स्वयं को अनपढ़ गँवार स्वीकार  कर अपनी ओर से पटाक्षेप करता हूँ। अब इस विषय पर मेरी कोई पोस्ट नहीं आएगी।
 

Anunad Singh

unread,
Nov 2, 2015, 9:10:15 AM11/2/15
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण (२००३) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी यहाँ है-


देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी का भारतीय मानक अगस्त २०१२ में तैयार किया गया था। इसे आईएस/IS 16500 : 2012 के रूप में लागू किया गया है।

V S Rawat

unread,
Nov 2, 2015, 9:21:30 AM11/2/15
to technic...@googlegroups.com
यशवन्त जी और अनुनाद जी

यहाँ पर जिस अर्थ में उपयोग किया गया है, उसमें बिना नुक़्ते वाला "जिन्दा" हो सकता है।

क्योंकि अरबी या उर्दू में एक और शब्द होता है, नुक़्ते वाला "ज़िन्दा", जिसका अर्थ जेल या
कारागार या क़ैदख़ाना होता है। इसका पूर्ण रूप ज़िन्दान होता है।

याद कीजिए कि मुगल-ए-आज़म में प्यार किया तो डरना क्या वाले गाने के बाद अक़बर ग़ुस्सा
होते हैं, तो "दारोग़ा-ए-ज़िन्दान" की आवाज़ लगाते हैं, मतलब कि वो अनारकली को जेल में
डलवा रहे हैं।

वैसे तो उर्दू में ज के अलावा 4 नुक़्ते वाले ज़ होते हैं, इसलिए मुझे पता नहीं कि इसके लिए कोई
दूसरा नुक़्ते वाला ज़ हो, और पहले (जिन्दा) के लिए कोई दूसरा ही नुक़्ते वाला ज़ हो।

लेकिन यह हो सकता है, कि समान प्रकार के दो शब्दों को अलग करने के लिए एक को जिन्दा
और दूसरे को ज़िन्दा बनाया हो।


On 11/2/2015 4:36 PM, Yashwant Gehlot wrote:
> मैंने दोनों शब्द उक्त मानकीकरण पुस्तिका (3.15.2) से लिए हैं।
>
> सादर,
> यशवंत
>
> 2015-11-02 16:27 GMT+05:30 Anunad Singh <anu...@gmail.com
> <mailto:anu...@gmail.com>>:
>
> यशवन्त जी,
> अपने सन्देश के अन्तिम वाक्य में शायद आपने उल्टा ही अर्थ दे दिया है।
>
> 'जिन्दा' ही मानक रूप (सही रूप) है। आप शायद यह कहना चाहते हैं कि अरबी/फारसी
> में जिन्दगी को ऐसे ( ... ) लिखा जाता है (जिसका मूल उच्चारण की दृष्टि से
> लिप्यन्तरण यह है- ज़िंदगी) ।
>
> ध्यान दीजिये कि जब मानक हिन्दी की बात की जा रही है तब उसमें दो चीजें हैं, पहले
> देसीकरण और फिर लिप्यन्तरण।
>
> --
> आपको यह संदश इसलिए मिला है क्योंकि आपने Google समूह के "Scientific and
> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
> इस समूह की सदस्यता समाप्त करने और इससे ईमेल प्राप्त करना बंद करने के लिए,
> technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hin...@googlegroups.com> को ईमेल भेजें.
> अधिक विकल्पों के लिए, https://groups.google.com/d/optout में जाएं.
>
>
>
>
> --
> Yashwant Gehlot
>
> --
> आपको यह संदश इसलिए मिला है क्योंकि आपने Google समूह के "Scientific and
> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
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V S Rawat

unread,
Nov 2, 2015, 9:25:05 AM11/2/15
to technic...@googlegroups.com
विनोद जी,

यही समस्या तमिल भाषियों को आती है जब वो कहते हैं कि हिन्दी में तो 4 क होते हैं, 4 च,
4 ट, 4 त, 4 प होते हैं।

क्योंकि तमिल में पंचाक्षर समूह का प्रथमाक्षर और अन्तिमाक्षर ही होता है। बीच के तीन
अक्षर नहीं होते हैं।

लेकिन सीखने वाले सीखते हैं, बोलना, उपयोग करना जान जाते हैं।

इसलिए अगर कोई तमिल मूल भाषी वर्णों का शुद्ध उच्चारण करता है तो इसके पीछे उसका बहुत
पढ़ा-लिखा होना, उसकी गहन तपस्या स्पष्ट समझ में आती है।

हमें भी नुक़्ते के लिए यह तपस्या करनी पड़ेगी तभी हम भाषा का उचित सम्मान दे पाएँगे।

धन्यवाद।
रावत

On 11/2/2015 4:53 PM, Vinod Sharma wrote:
> लेकिन बंधु इसका पता कैसे चलेगा कि किस शब्द में लगाना है और किसमें नहीं? क्या इससे
> अराजकता की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी? आप केवल लिखित भाषा में इनका इस्तेमाल करना
> चाहते हैं, जबकि उच्चारण में एक-दो प्रतिशत लोगों को छोड़ कर शेष 98 प्रतिशत एक समान
> उच्चारण करते हैं। यह उच्चारण भेद जब तक मालूम नहीं होगा, यह निर्णय करना लगभग असंभव
> होगा कि किस अक्षर पर नुक्ता लगाना है और किस पर नहीं। और यह सही उच्चारण केवल
> मदरसों में सिखाया जाता है।
>
> 2015-11-02 16:06 GMT+05:30 Yashwant Gehlot <yge...@gmail.com
> <mailto:yge...@gmail.com>>:
>
> मानकीकरण की पुस्तिका से जो संदर्भ लिया गया है, उसमें दो बातें हैं-
> 1) ऐसे शब्द जिनकी विदेशी ध्वनियों का हिंदी ध्वनियों में रूपांतर हो चुका है (कलम,
> किला, दाग आदि)
> 2) ऐसे शब्द जिनका शुद्ध विदेशी रूप में प्रयोग अभीष्ट हो अथवा उच्चारणगत भेद बताना
> आवश्यक हो (ख़ाना, राज़, फ़न आदि)
>
> मानकीकरण पुस्तिका में केवल पहले प्रकार के शब्दों में नुक़्ते का प्रयोग नहीं करने की छूट
> दी है (...हिंदी रूप में ही स्वीकार किए जा सकते हैं।), दूसरी श्रेणी के नहीं। दूसरी
> श्रेणी के बारे में स्पष्ट लिखा है- यथास्थान नुक्‍ते लगाए जाएँ
> वैसे तो हर कोई अपने तरीके से लिखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन मानकीकरण का अपना
> महत्व है। जब मानक और सही स्वरूप की बात होगी तो 'ज़िंदा', 'ज़िंदगी' को ही
> सही माना जाएगा, 'जिंदा', 'जिंदगी' को नहीं।'
>
> यशवंत
>
>
>
> 2015-11-02 15:24 GMT+05:30 Anunad Singh <anu...@gmail.com
> <mailto:anu...@gmail.com>>:
>
> मानक हिंदी वर्तनी (केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा जारी) सम्बन्धी नीति यह
> कहती है:
>
>
> 2.14 विदेशी ध्वनियाँ
>
> 2.14.1 उर्दू शब्द
>
> उर्दू से आए अरबी-फ़ारसी मूलक वे शब्द जो हिंदी के अंग बन चुके हैं और जिनकी
> विदेशी ध्वनियों का हिंदी ध्वनियों में रूपांतर हो चुका है, हिंदी रूप में ही
> स्वीकार किए जा सकते हैं। जैसे :– कलम, किला, दाग आदि (क़लम, क़िला, दाग़
> नहीं)। पर जहाँ उनका शुद्‍ध विदेशी रूप में प्रयोग अभीष्ट हो अथवा उच्चारणगत
> भेद बताना आवश्‍यक हो, वहाँ उनके हिंदी में प्रचलित रूपों में यथास्थान नुक्‍ते
> लगाए जाएँ। जैसे :– खाना : ख़ाना, राज : राज़, फन : हाइफ़न आदि।
>
> इसमें नुक्तों के प्रयोग का जो विकल्प दिया गया है उसका एक उदाहरण उर्दू या
> फारसी कविता को लिखते (प्रस्तुत करते/उद्दृत करते ) समय हो सकती है। मुझे और
> कोई स्थिति नहीं दिखती जब हिन्दी में अपनी बात कहते समय नुक्ते का प्रयोग
> किये जाने की नीतिगत स्वतन्त्रता हो।
>
>
> --
> आपको यह संदश इसलिए मिला है क्योंकि आपने Google समूह के "Scientific and
> Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
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> technical-hin...@googlegroups.com
> <mailto:technical-hin...@googlegroups.com> को ईमेल भेजें.
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Anunad Singh

unread,
Nov 2, 2015, 10:14:24 AM11/2/15
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
शब्दों का अर्थ केवल वर्तनी से निर्धारित नहीं होता बल्कि सन्दर्भ  का भी महत्व होता है। इसलिये मैं आपके उपरोक्त कथन से तथा श्रीश जी के इसी तरह के कथनों से सहमत नहीं हूँ कि नुक्ते के न लगाने से अर्थ का अनर्थ हो जायेगा। सन्दर्भ के अनुसार अर्थ बिलकुल सही लगाया जायेगा।  कवि लोग तो इसे ही अलंकार का रूप दे देते हैं।  यमक और श्लेष  इसी के कमाल हैं। अंग्रेजी का order कम से कम तीन अर्थों में प्रयुक्त होता है (वही वर्तनी) - आज्ञा/आदेश,  क्रम और  घात/डिग्री (जैसे ऑर्डर ऑफ मैट्रिक्स)।

इस चर्चा में यह भी ध्यान देने योग्य है कि हिन्दी और देवनागरी दोनों एक ही नहीं हैं। संस्कृत और हिन्दी में जिसे 'मन्दिर' लिखते हैं उसे ही मराठी में 'मन्दीर' लिखते हैं। मराठी के लिये यही 'देसीकरण' है।

Sameer Sharma

unread,
Nov 2, 2015, 11:04:08 PM11/2/15
to technic...@googlegroups.com

आप सभी महानुभावों से निवेदन है की विषयसम्मत बातें करें और सौहार्द बनाये रखें। मतभिन्नता एक बात है और मनभेद एक।

छोड़ें इस को अब और आगे बढ़ें । अपने सहृदय और विशाल ह्रदय होने से एकता भी बनी रहेगी।

कृपया अनुरोध को ठुकराये नहीं ।

समीर

चंदन कुमार मिश्र

unread,
Feb 17, 2017, 6:53:37 AM2/17/17
to technic...@googlegroups.com
यहाँ किसी ने वह सूची प्रस्तुत नहीं की या नहीं बताया! बहस में हजार शब्द बोल गए!
हम भी समर्थन में हैं! हाँ, बाध्यकारी नहीं होना चाहिए, लेकिन प्रयोग बढे
तो बेहतर!

--
चंदन कुमार मिश्र

hindibhojpuri.blogspot.com
bhojpurihindi.blogspot.com

Narayan Prasad

unread,
Feb 17, 2017, 8:30:01 AM2/17/17
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
इस विषय पर बहस यहीं रोक दी जाय तो अच्छा । यह तकनीकी विषय नहीं । किसी अन्य उचित समूह में इस विषय पर चर्चा करें ।
--- नारायण प्रसाद

--
आपको यह संदेश इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि आपने Google समूह "Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)" समूह की सदस्यता ली है.
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ken

unread,
Feb 17, 2017, 6:52:11 PM2/17/17
to Scientific and Technical Hindi (वैज्ञानिक तथा तकनीकी हिन्दी)
These written English words in Hindi media are more annoying than nukta words.

package students sports gallery bank happening  hangout adult paragraph Happy Valentine's Day
pækɪʤ ˈstudənts spɔrts ˈgæləri bæŋk ˈˈhæpənɪŋ ˈhæŋˌaʊt ˈædəlt /ˈpærəgræf, -ˌgrɑf/  .hæpi væləntaɪnz deɪ...IPA
păkij ˈstudants spŏrts ˈgălari bănk ˈhăpanɪng ˈhăngaaut ˈădalt ,prăragrăf /graaf  Hăpi vălantäinz dei /हॅपी वॅलनटाइन्ज़ डे
ॅ ॉ / ă ŏ

देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण 2016
https://drive.google.com/open?id=0B5OzIUkLll_rYkRhOG5DUnY2R2M
Do teachers teach these newly added  (  ॅ , ॉ     ) sounds to children in school?
Why Manakikaran don't show these sounds in their booklet ?

Would you prefer this type of write as pronounced Global Hindi for an easy Roman Transliteration.
ं ->म् न्
ें->ॅ
ों->ॉ
़ ->Remove nukta if not needed
ि ->  ी
Manakikaran shows how to write Hindi but don't show how to teach Hindi the way English grammar does.

अभीव्यक्ती रॅशनल वाचनयात्रा (एक ज ‘ई अने उ’ मां..)
https://govindmaru.wordpress.com/

Will Manakikaran approve this type of simple Vartani for Hindi?
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