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तपेदिक या टीबी समाचार सारांश: ३ जून २००८: अंक ५६
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Citizen News
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Jun 3, 2008, 12:28:35 AM
6/3/08
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तपेदिक
या
टीबी
समाचार
सारांश
अंक
५६
मंगलवार
,
३
जून
२००८
२
जून
२००८
को
संयुक्त
राष्ट्र
(United Nations)
द्वारा
जारी
एक
रपट
के
अनुसार
टीबी
या
तपेदिक
और
एच
.
आई
.
वी
के
उपचार
के
कार्यक्रम
अभी
तक
संग
मिलजुल
कर
काम
नही
करते
हैं
.
एच
.
आई
.
वी
से
ग्रसित
लोगों
में
टीबी
या
तपेदिक
ही
सबसे
बड़ा
मृत्यु
का
कारण
है
.
टीबी
या
तपेदिक
का
इलाज
मुमकिन
है
,
और
एच
.
आई
.
वी
से
ग्रसित
लोगों
की
प्रतिरोधक
छमता
कम
होने
की
वजह
से
उनको
टीबी
या
तपेदिक
होने
का
खतरा
कई
गुणा
अधिक
होता
है
.
इसलिए
आवश्यक
है
कि
एच
.
आई
.
वी
से
ग्रसित
लोग
टीबी
या
तपेदिक
संक्रमण
से
बचने
के
लिये
नियमित
परीक्षण
करायें
,
यदि
ले
टेंट
टीबी
या
तपेदिक
हो
तो
इसोनिअजिद
दवा
ले
के
सक्रिय
रोग
होने
से
बचें
,
और
यदि
सक्रिय
टीबी
रोग
हो
तो
उपयुक्त
दवा
समय
से
और
पूरी
अवधी
तक
लें
.
संयुक्त
राष्ट्र
द्वारा
जारी
इस
रपट
, "
Towards Universal Access: Scaling up priority HIV and TB interventions in the health sector
"
या
'
एच
.
आई
.
वी
और
टीबी
के
प्रभावकारी
उपचार
के
कार्यक्रमों
को
बढाया
जाए
'
रपट
को
डाउन
लोड
करने
के
लिये
यहाँ
पर
क्लिक्क
कीजिये
.
यूरोपियन
यूनियन
ने
संक्रामक
रोगों
के
नियंतरण
के
लिये
अब
तक
का
सबसे
बड़ा
अनुदान
दिया
है
-
यूरो
४०
मिलियन
!
इस
अनुदान
को
टीबी
या
तपेदिक
के
लिये
वैक्सीन
के
शोध
में
,
और
अन्य
संक्रामक
रोगों
के
शोध
आदि
में
निवेशित
किया
जाएगा
.
ग्रेनाडा
में
स्वास्थ्यकर्मी
इसलिए
चिंतित
हैं
क्योकि
अब
अस्पताल
में
टीबी
या
तपेदिक
के
रोगियों
के
लिये
कोई
अलग
से
वार्ड
नही
है
.
यानि
कि
जो
पहले
टीबी
या
तपेदिक
के
विशेष
अस्पताल
थे
,
अब
उनको
खत्म
कर
के
इस
बात
पर
जोर
दिया
जा
रहा
है
कि
सामान्य
अस्पताल
में
ही
इन
रोगियों
का
इलाज
किया
जाए
.
स्वास्थ्यकर्मी
इसलिए
चिंतित
हैं
क्योकि
अस्पताल
में
संक्रमण
के
रोकधाम
के
लिये
पर्याप्त
इंतजाम
नही
हैं
.
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