तपेदिक या टीबी समाचार सारांश: १९ मई २००८: अंक ४७

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May 19, 2008, 3:23:42 AM5/19/08
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तपेदिक या टीबी समाचार सारांश
अंक ४७
सोमवार, १९ मई २००८  


तम्बाकू से निकलते धुएँ में, मोटर-गाड़ियों से निकलते हुए धुएँ में, आदि में एक बेरंग बेमहक जहरीली गैस होती है जो टीबी या तपेदिक को लेटेंट ड्रग-रेसिस्तंत टीबी में परिवर्तित कर सकती है. ऐसा अलाबामा विश्वविद्यालय के शोध से प्रमाणित हुआ है.

 अनेकों शोध से यह पहले ही ज्ञात है कि तम्बाकू सेवन से तपेदिक या टीबी होने का खतरा अत्याधिक बढ़ जाता है. भारत में तम्बाकू-जनित मृत्यु का सबसे बड़ा कारण तपेदिक या टीबी है ( कि कैंसर) हालांकि तम्बाकू जनित कैंसर का दर भी काफ़ी अधिक और चिंताजनक है.

 पाकिस्तान इनस्तित्युत ऑफ़ मेडिकल साइंसेस से डॉ अब्दुल मजीद राजपूत ने चिकित्सकों से अनुरोध किया है कि वह स्वयं तम्बाकू का सेवन करें और अपने हर मरीज को तम्बाकू त्यागने के लिए प्रेरित करें. तम्बाकू नशा उन्मूलन के लिए प्रभावकारी विधियाँ स्थापित हैं, और उनको मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक ढंग से शामिल करने की आवश्यकता है.

 पाकिस्तान में भी आक्डें यह बताते हैं कि तम्बाकू सेवन करने से टीबी या तपेदिक का खतरा अत्याधिक बढ़ जाता है. चिकित्सकीय परामर्श में तम्बाकू नशा उन्मूलन को शामिल करना एक सार्थक पहल होगी.

 डॉ अब्दुल मजीद ने चिकित्सकों से यह भी आह्वान किया है कि हर रोगी और उसके अभिभावकों को तम्बाकू के जानलेवा कु-प्रभावों के बारे में जानकारी देना और तम्बाकू नशा त्यागने के लिए प्रेरित करना, चिकित्सकों का परम धर्म है.

 डॉ थॉमस एलेन, जो अमरीका के प्रसिद्ध टीबी या तपेदिक विशेषज्ञ हैं, उनका स्वयं लिखा गया यह लेख पढ़ने योग्य है. १९७० के दशक में डॉ एलेन ने स्वयं अमरीकी सरकार पर दबाव बनाया था कि टीबी या तपेदिक के लिए विशेष अस्पताल (सनोतोरियम) को बंद कर देना चाहिए, और टीबी या तपेदिक के इलाज की व्यवस्था आम-जन-अस्पतालों में ही शामिल करनी चाहिए. उनका कहना था कि टीबी या तपेदिक का दर अमरीका में कम हो रहा है, और प्रभावकारी दवाइयों के रहते यदि रोगी दवाएं समय से और अपने इलाज की पूरी अवधि में ले, तो टीबी या तपेदिक से निजात पायी जा सकती है.

 १९७० के दशक में टीबी या तपेदिक के लिए विशेष अस्पताल अमरीका में बंद होने लगे, सिर्फ़ एक को छोड़ कर - a.g.holley अस्पताल जो फ्लोरिडा में आज भी सक्रिय है. इस फ्लोरिडा स्थित अस्पताल को भी २००९ में बंद करने का निर्णय ले लिया गया है.

 डॉ एलेन का कहना है कि १९७० में जो टीबी या तपेदिक नियंतरण की हकीक़त थी, उसको देखते हुए वह निर्णय सही था, परन्तु एच.आई.वी और अन्य कारणों से टीबी या तपेदिक नियंतरण की वास्तविकता आज बिल्कुल बदल चुकी है - ड्रग रेसिस्तंत टीबी या तपेदिक के बढ़ते हुए दर से यह सब देशों के लिए खतरे की घंटी है कि बिना विलम्ब सक्रियता से टीबी नियंतरण कार्यक्रमों को मजबूत करें. अब यह सोचना चाहिए कि ड्रग रेसिस्तंत टीबी या तपेदिक का इलाज कहाँ पर सही तरीके से हो सकता है - घर पर, टीबी के विशेष अस्पतालों में, या जेल में?

 भारत के कोर्ट के जज ने पिछले हफ्ते ही एक कैदी को सिर्फ़ इसलिए जमानत पर रिहा कर दिया कि वह स्वच्छ और साफ मौहौल में घर पर टीबी या तपेदिक का इलाज सही ढंग से कर सके - परन्तु अमरीका में, अफ्रीका में कई ऐसे हादसे हुए हैं जहाँ लोगों को जबरन जेल में कैद कर के टीबी या तपेदिक का इलाज कराया जा रहा है.

 डॉ एलेन का यह लेख नि:संदेह सोचने पर मजबूर कर देता है - उम्मीद है कि जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों तक भी यह लेख पहुचेगा.

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