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तपेदिक या टीबी समाचार सारांश: २६ जून २००८: अंक ६५
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Citizen News
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Jun 26, 2008, 12:54:58 AM
6/26/08
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तपेदिक
या
टीबी
समाचार
सारांश
अंक
६५
गुरूवार
,
२६
जून
२००८
**********************
चेन्नई
के
ताम्बरम
टीबी
या
तपेदिक
अस्पताल
से
सम्बंधित
सानोटोरियम
में
एक
रोगी
की
मृत्यु
बिजली
के
नंगे
तार
से
चिपक
के
हो
गई
.
यह
टीबी
का
रोगी
अपने
वार्ड
से
निकल
कर
बाहर
जा
रहा
था
और
बरामदे
में
बिजली
का
नंगा
तार
पड़ा
हुआ
था
.
तार
पर
उसका
पैर
पड़ते
ही
बिजली
के
झटके
से
उसकी
मृत्यु
हो
गई
.
यदि
यह
हाल
है
टीबी
के
अस्पतालों
का
,
तो
नि
:
संदेह
बहुत
चिंता
का
विषय
है
.
स्वास्थ्य
व्यवस्थाओं
में
कल
की
रपट
के
अनुसार
रोगियों
को
अधिक
संक्रामक
रोगों
का
खतरा
रहता
है
(
नीचे
दी
गई
रपट
देखे
).
अब
यह
हाल
है
कि
नंगे
बिजली
के
तार
से
चिपक
के
मरने
का
भी
खतरा
है
.
उम्मीद
है
कि
अधिकारीगण
सुन
रहे
हैं
और
स्वास्थ्य
व्यवस्थाओं
का
मौहौल
सुधरेगा
!
उज़बेकिस्तान
देश
के
टीबी
या
तपेदिक
विशेषज्ञ
अमरीका
में
जा
कर
प्रभावकारी
टीबी
या
तपेदिक
नियंत्रण
के
बारे
में
जानकारी
ले
रहे
हैं
.
उज़बेकिस्तान
के
टीबी
डॉक्टरों
को
अमरीका
जाने
की
क्या
आवश्यकता
है
?
क्या
आपको
लगता
है
कि
अमरीका
को
प्रभावकारी
टीबी
नियंत्रण
में
महारथ
प्राप्त
है
?
या
फिर
उन
देशों
को
जो
इससे
जूझ
रहे
हैं
?
हो
सकता
है
अमरीकी
टीबी
डॉक्टरों
को
उज़बेकिस्तान
जा
कर
देखना
चाहिए
कि
कैसे
वहाँ
पर
सीमित
संसाधनों
में
टीबी
नियंत्रण
के
कार्यक्रम
चल
रहे
हैं
.
अस्पतालों
में
भीड़
होने
से
और
स्वास्थ्यकर्मियों
की
संख्या
में
कमी
होने
से
अब
स्वस्थ्य
केन्द्रों
में
संक्रामक
रोगों
के
फैलने
का
खतरा
अत्याधिक
बढ़
गया
है
.
इस
नए
शोध
के
अनुसार
,
जो
मरीज
संक्रामक
रोगों
के
इलाज
के
लिए
अस्पताल
गए
थे
,
न
केवल
उनके
रोग
का
समयोचित
इलाज
नही
हो
पाया
,
बल्कि
उनको
अन्य
संक्रामक
रोग
भी
हो
गए
जिससे
उनकी
अवस्था
अधिक
बिगड़
गई
.
अस्पतालों
में
संक्रामक
रोगों
के
नियंत्रण
के
लिए
जो
तरीके
बताये
गए
हैं
,
जिनमें
हवादार
कमरों
का
होना
,
मुंह
पर
मास्क
पहनना
,
साफ़
-
सफाई
रखना
,
शौचालय
आदि
को
अत्यधिक
साफ़
रखना
,
आदि
प्रमुख
हैं
.
विकसित
देशों
में
अन्य
प्रभावकारी
तरीके
अपनाए
जाते
हैं
जिनमें
अधिक
वायु
दबाव
,
वायु
फिल्टर
आदि
प्रमुख
हैं
.
इस
शोध
से
यह
भी
प्रमाणित
हुआ
कि
अस्पतालों
में
संक्रामक
रोगों
के
फैलने
से
मरीज
अधिक
समय
तक
अस्पताल
में
भरती
रहता
है
,
जो
अस्पतालों
में
अधिक
भीड़
बढ़ाता
है
,
और
संक्रामक
रोगों
के
फैलने
का
खतरा
भी
बढ़
जाता
है
.
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