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तपेदिक या टीबी समाचार सारांश अंक ६४ बुधवार, २५ जून २००८ **********************
अस्पतालों में भीड़ होने से और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या में
कमी होने से अब स्वास्थ्य केन्द्रों में संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा
अत्याधिक बढ़ गया है. इस नए शोध के अनुसार, जो मरीज संक्रामक रोगों के इलाज
के लिए अस्पताल गए थे, न केवल उनके रोग का समयोचित इलाज नही हो पाया,
बल्कि उनको अन्य संक्रामक रोग भी हो गए जिससे उनकी अवस्था अधिक बिगड़ गई.
अस्पतालों
में संक्रामक रोगों के नियंत्रण के लिए जो तरीके बताये गए हैं, जिनमें
हवादार कमरों का होना, मुँह पर मास्क पहनना, साफ़-सफाई रखना, शौचालय आदि को
अत्यधिक साफ़ रखना, आदि प्रमुख हैं. विकसित देशों में अन्य प्रभावकारी
तरीके अपनाए जाते हैं जिनमें अधिक वायु दबाव, वायु फिल्टर आदि प्रमुख हैं.
इस
शोध से यह भी प्रमाणित हुआ कि अस्पतालों में संक्रामक रोगों के फैलने से
मरीज अधिक समय तक अस्पताल में भरती रहता है, जो अस्पतालों में अधिक भीड़
बढ़ाता है, और संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है.
नोवार्टिस नामक दवा कंपनी और ग्लोबल अलायंस फॉर टीबी ड्रग देवेलोप्मेंट,
यानि कि टीबी या तपेदिक की दवाएँ बनने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ के मध्य
पाँच साल का समझौता हो गया है जिसके तहत नोवार्टिस दवा कंपनी टीबी की नई
दवा खोजने के लिए शोध करेगी. इस समझौते के तहत टीबी या तपेदिक जो ड्रग
रेसिस्तंत है यानि कि ऐसी टीबी जिस पर मौजूदा दवाएँ कारगर नही हैं, ऐसी
ड्रग रेसिस्तंत टीबी के लिए भी नई दवाएँ खोजने के लिए नोवार्टिस शोधरत
रहेगी.
यह
एक सराहनीय प्रयास है क्योंकि कई विकासशील देश कर्जे के कारण जन-स्वास्थ्य
और विकास के कार्यक्रमों पर अपेक्षा के अनुरूप निवेश नही कर पा रहे हैं.
उदाहरण के तौर पर घाना में जितना पैसा जन-स्वास्थ्य के कार्यक्रम पर व्यय
होता है, उसका ८ गुणा अधिक विश्व बैंक के क़र्ज़ को लौटने में जाता है.
अन्य दाता एजेन्सी से अनुरोध है कि जर्मनी के इस उदाहरण से प्रेरित हो कर
विकासशील देशों में जन-स्वास्थ्य और विकास से जुड़े हुए कार्यक्रमों में
निवेश को प्रोत्साहन दें, और कर्जे को माँफ करें.