Comparison - Investments in Fixed Deposit VS Debt Funds

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Manish Sanghvi

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Jul 11, 2011, 8:59:19 AM7/11/11
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निवेशकों को ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दौर में बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी में निवेश से ज्यादा रिटर्न मिल सकता है, लेकिन उनके सामने यह उलझन रहती है कि लंबी अवधि का निवेश करें या छोटी अवधि का। डेट म्यूचुअल फंड के निवेशकों के लिए फैसला करना और मुश्किल होता है। ज्यादातर निवेशक यह बात अच्छी तरह से समझते हैं कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का माहौल लंबी अवधि के निवेश के लिए बुरा होता है क्योंकि छोटी अवधि में उनके निवेश की वैल्यू घटती है।

फाइनैंशल अडवाइजर्स के मुताबिक, 'निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ब्याज दरें इस समय अपने उच्चतम स्तर पर हैं। रिजर्व बैंक इस साल 25 से 50 आधार अंक की बढ़ोतरी कर सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि इस साल ब्याज दरों पर कुछ समय तक दबाव बना रह सकता है। ऐसे में उनको बैंकों या कंपनियों के फिक्स्ड डिपॉजिट और एमएफ के एफएमपी और शॉर्ट टर्म स्कीमों में निवेश करना चाहिए।'

फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी)

ज्यादातर कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए बैंकों का एफडी पहली पसंद होती है, लेकिन इनसे मिलने वाले रिटर्न पर निवेशकों को आयकर के अपने स्लैब के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है। उन निवेशकों के लिए यह फायदेमंद नहीं होता, जो आयकर के सबसे ऊपर के स्लैब में आते हैं क्योंकि उन्हें ब्याज से होनेवाली आय पर 30.9 फीसदी टैक्स देना पड़ता है।

निवेश के जानकारों की राय में नैशनलाइज्ड बैंक के एफडी निम्न आय वर्ग के निवेशकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर निवेश विकल्प होते हैं। तीन महीने से एक साल की अवधि के बैंक एफडी में टैक्स पूर्व लगभग 7 से 9 फीसदी का रिटर्न मिलता है।

निवेशक छह महीने के फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं क्योंकि इस पर अच्छा रिटर्न मिल जाता है, लेकिन ज्यादातर जानकारों का मानना है कि एफडी पर 10 फीसदी सालाना का ब्याज ऑफर करने वाली कंपनियां, हो सकता है कि नकदी की तंगी से जूझ रही हों। इसलिए जानकार अतिरिक्त रिटर्न पाने के इच्छुक कंजर्वेटिव निवेशकों को डेट म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश करने की सलाह दे रहे हैं।

फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी)

बैंक 91 दिन के एफडी पर 7 से 8 फीसदी रिटर्न दे रहे हैं। दूसरी तरफ, एक साल के सीडी पर 9.8 फीसदी से लेकर 10 फीसदी तक का ब्याज मिलता है। इसलिए सीडी में निवेश करने का सबसे किफायती जरिया ऊंची यील्ड देने वाली म्यूचुअल फंड स्कीमें हो सकती हैं। अगर आपको लगता है कि आपको बीच में पैसे की जरूरत नहीं पड़ेगी तो एफएमपी में निवेश कर सकते हैं। एफएमपी क्लोज एंडेड डेट स्कीमें होती हैं, जो स्कीम की मैच्योरिटी से पहले या उसी दिन मैच्योर होनेवाले फिक्स्ड मैच्योरिटी इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करती हैं। मैच्योरिटी पर स्कीम भुनाई जाती है और उससे हासिल रकम निवेशकों में बांट दी जाती है। इन स्कीमों पर कोई इंट्रेस्ट रिस्क नहीं होता। बाजार में आपको 91 दिन, 180 दिन और एक साल का एफएमपी मिल सकता है। कोई भी एफएमपी यह नहीं बताती है कि आपको कितना रिटर्न मिलेगा, लेकिन बाजार के यील्ड से पता चलेगा कि उसकी यील्ड कितनी है। अगर 50 से 75 आधार अंक का यील्ड कम भी मिलता है तो भी आपको अच्छा रिटर्न मिल जाएगा।

एक साल से कम के एफएमपी में डिविडेंड ऑप्शन लेना अच्छा रहेगा। डिविडेंड पर एमएफ को 13.52 फीसदी का डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स देना पड़ता है। इससे इसका टैक्स बाद रिटर्न बैंक एफडी के मुकाबले काफी आकर्षक हो जाता है। बैंक एफडी के रिटर्न पर टैक्स स्लैब के हिसाब से अधिकतम 30.9 फीसदी का टैक्स लगता है। एक बात और। एफएमपी के ग्रोथ ऑप्शन पर कैपिटल गेंस टैक्स लगता है, जो एक साल से ज्यादा के निवेश पर बिना इंडेक्सेशन के 10 फीसदी या इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी, जो भी कम हो, होता है।

शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड

ये स्कीमें छोटी अवधि की फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करती हैं। फिलहाल एक साल से कम के शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड निवेश का अच्छा विकल्प हैं। इन फंडों की औसत मैच्योरिटी काफी कम होती है, इसलिए छोटी अवधि में ब्याज दरों में बदलाव का इनके एनएवी पर खास असर नहीं होता है। लेकिन रेपो रेट में 50 आधार अंक की बढ़ोतरी शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड्स का हुलिया बिगाड़ सकती है। जानकारों की राय में, 'शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड में निवेश करने से पहले औसत मैच्योरिटी और एग्जिट लोड के बारे में पता कर लेना चाहिए। औसत मैच्योरिटी आपके निवेश योजना की अवधि से कम होनी चाहिए। ज्यादातर फंड समय से पहले निकासी पर एग्जिट लोड वसूल करते हैं। '

आमतौर पर शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड मैनेजर औसत मैच्योरिटी कम रखना पसंद करते हैं। शॉर्ट टर्म रेट में बढ़ोतरी होने के आसार पर फंड इस रणनीति पर चलते रहते हैं। साल के अंतिम दिनों में ब्याज दरें उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है। ऐसे में फंड मैनेजर औसत मैच्योरिटी बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। ऐसे में आपको ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। लेकिन आरबीआई के रीपो दरों में बढ़ोतरी की संभावना पर शॉर्ट टर्म रेट चढ़ते हैं तो कुछ शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड्स की एनएवी पर दबाव बन सकता है। जो रिजर्व बैंक के रीपो दरों में अगली बढ़ोतरी का इंतजार करना चाहते हैं उनको लिक्विड या अल्ट्रा शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड्स में निवेश करना चाहिए।

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best  regards,
Manish Mahendra Sanghvi
98208 83148
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