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"क्यूँ आकर रो रहा है गोविन्द की गली में "
भजन से अपने धमाकेदार भजनों की शुरुआत की और पांडाल में बैठा कोई भी ऐसा शक्स बाकी नहीं रहा जो भजन संध्या में एक भी बार नाचा ना हो | विनोद जी की आवाज में वाकई में कोई जादुई करिश्मा है जो हर इन्सान जुमने को मजबूर हो जाता है, 12/July/2010 को श्री सवालिया जी मंदिर प्रांगण में एक भजन संध्या का आयोजन रखा गया जिसमे से श्री विनोद जी द्वारा भाव प्रवाह किया गया , वहां के कुछ फोटो आप सब के लिये |

भजन संध्या के बीच कवि "अमृतवाणी" द्वारा स्वरचित पुस्तक "
सांवरा सेठ चालीसा " विनोद अग्रवाल जी को भेट करते हुए


:- "शेकर कुमावत "
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श्री सांवलिया सेठ at 7/27/2010 04:24:00 PM