हाल में संपन्न हुए 5 राज्यों के चुनाव पर आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की राष्ट्रीय कार्यसमिति की 5 मई 2026 की वर्चुअल बैठक में चुनावों के परिणामों पर चर्चा एवं निष्कर्ष
हाल में संपन्न हुए 5 राज्यों के चुनाव पर आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की राष्ट्रीय कार्यसमिति की 5 मई 2026 की वर्चुअल बैठक में चुनावों के परिणामों पर चर्चा करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया कि आम तौर पर भारतीय जनता पार्टी खासकर पश्चिम बंगाल और असम में हिंदुओं के बड़े हिस्से को अपने पीछे गोलबंद करने में सफल हुई है। साथ ही चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था, अर्धसैनिक बल और लंपट तत्वों ने भाजपा का प्रभाव बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। यह भी नोट किया गया कि ममता सरकार के राज में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की घटनाएं हुई लेकिन सबसे बड़ा कारक उसके पतन के लिए राजनीतिक विपक्ष खासतौर पर सीपीएम के ऊपर जिस तरह से दमनात्मक कार्रवाई की, उसने उसके पराभव को सुनिश्चित किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि दमन के मोदी माडल पर चलकर किसी भी क्षेत्रीय दल की सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की राजनीति का मुकाबला नहीं कर सकेगी।
जहां तक असम की बात है वहां भी विधानसभाओं के परिसीमन, आतंक, नफरत के आधार पर भाजपा को सफलता तो मिली है लेकिन यह भी गौर करने लायक है कि असम में कांग्रेस भी कारगर भूमिका नहीं निभा पा रही है।
केरल में यह तो सच है कि कांग्रेस और सीपीएम की अगुवाई में चलने वाले मोर्चे अपनी- अपनी सरकार बनाते रहे हैं। लेकिन पिछली बार चुनाव में सीपीएम को लगातार दो बार सरकार बनाने की जो सफलता मिली वह माहौल बनाए रखने में वाम मोर्चा सफल नहीं हो पाया। यह भी सच है कि अल्पसंख्यकों का बड़ा ध्रुवीकरण कांग्रेस के पक्ष में हुआ और कांग्रेस वहां अपनी सीटें व मत प्रतिशत बढ़ाने में सफल रही है। यह भी चिंता व्यक्त की गई कि यद्यपि भाजपा पिछले चुनाव की तुलना में अपना मत प्रतिशत बढ़ाने में सफल नहीं हुई लेकिन उसके विधायकों की संख्या बढ़ी है और उसकी उपस्थिति नये राजनीतिक ध्रुवीकरण पैदा कर सकती है। इस खतरे को भी कम करके नहीं आंकना चाहिए। कमेटी का यह भी मत था कि वाममोर्चा को अपनी प्रशासनिक विफलताओं और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीति की गिरावट पर जरूर गौर करना चाहिए और देश की लोकतांत्रिक आकांक्षा के अनुरूप अपने राजनीतिक, सांगठनिक ढांचे को पुनर्संयोजित करना चाहिए । जनमुद्दों को राजनीतिक ढंग से उठाने एवं नव उपनिवेशवाद के विरुद्ध राष्ट्रीय चेतना को जोड़ने के लिए बड़े लोकतांत्रिक गठबंधन के लिए काम करना चाहिए।
पुडुचेरी में पुरानी जैसी स्थिति दिखती है और वहां एनडीए की सरकार बनी है। लेकिन तमिलनाडु में जो नया राजनीतिक परिवर्तन हुआ है और दो साल पहले बनी टीवीके की अगुवाई में सरकार बन रही है, उस पर जरूर गौर किया जाना चाहिए। अभी तक की प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि युवा और शहरी मतदाताओं ने जोसेफ विजय के पक्ष में बड़े पैमाने पर मतदान किया, बल्कि उसका विस्तार ग्रामीण अंचल में भी हुआ है। इधर के वर्षों में एआईडीएमके के बिखराव से लोगों को यह लगने लगा था कि तमिलनाडु में डीएमके की अगुवाई में चल रहा गठबंधन मजबूत है और उसी की सरकार फिर से बनेगी। कुछ लोग इसे सामाजिक न्याय की सरकार का असली माडल बना कर राष्ट्रीय स्तर पर इसके विस्तार की वकालत करते थे। लेकिन उन्होंने इस बात का गौर नहीं किया कि इस सरकार के दौर में तमिलनाडु में दलितों के ऊपर दमनात्मक कार्रवाइयों में इजाफा हुआ है। दलितों और अति पिछड़ों के असंतोष ने भी डीएमके सरकार के पराभव में भूमिका निभाई और टीवीके की सरकार को बनाने में सहयोग किया।
हालांकि यह कहा जा रहा है कि भाजपा के खिलाफ अब इंडिया गठबंधन मजबूत होगा, लेकिन इसके लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं। वैसे भी इंडिया गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक विपक्ष का स्वभाव नहीं विकसित कर पाया था और उसके अंदर बदली परिस्थितियों में भी नये ध्रुवीकरण की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता है।
आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान को और मजबूत करने, छोटे बड़े राजनीतिक सामाजिक समूहों को इस अभियान से जोड़ने और विस्तार करने की कार्रवाई को बढ़ाने की जरूरत महसूस किया। हमें रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेंशन और भूमिहीनों के बसने लायक आवासीय जमीन के अधिकार और एससी, एसटी, अति पिछड़े, पसमांदा मुसलमान और महिलाओं के विकास के लिए पर्याप्त बजट के अभियान को बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए, खासकर अति पिछड़ों को शिक्षा और प्रशासन में उचित प्रतिनिधित्व मिले, रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट को लागू किया जाए।
वर्ग और पहचान यानी आर्थिक और सामाजिक असमानता के प्रश्न को समग्रता में देखा जाए। मजदूर आंदोलन, किसान आंदोलन, युवा आंदोलन जैसे आंदोलनों को विकसित करने की जरूरत है लेकिन उत्पीड़ित जातियों और समुदायों के आकांक्षाओं को भी अपने आंदोलन के केंद्र में लाना होगा। कारपोरेट के विरुद्ध राष्ट्रीय संप्रभुता और जनता के अधिकार की रक्षा के लिए एक समग्र राजनीतिक ध्रुवीकरण की तरफ बढ़ना होगा।
एआईपीएफ राष्ट्रीय कार्य समिति की तरफ से!
डाक्टर राहुल दास
राष्ट्रीय महासचिव।