मान लीजिए सरकार बदलती है
लेकिन क्या सिस्टम बदलेगा
गायों की हालत देखकर यही मन में प्रश्न आया..
कल सीतापुर और हरदोई में गौशालाओं पर जाना हुआ
गौशाला में ज्यादातर एक जैसी ही समस्या थी पर वह समस्या थी समय पर भूसा ना आना बताइए चार-चार दिन हो गए भूसा ही नहीं आया ।
गाय हमारी तरफ आ रही थी कि शायद या कुछ खाने को दें जबकि सरकार गाय को माता बोलती है और कुछ लोग तो उसे राष्ट्रीय पशु भी घोषित करना चाहते हैं फिर भी बताइए माता का कोई ऐसा हाल करता है भूखे थोड़ी मारा जाता है जिन गायों की मौत हुई है उनका जिम्मेदार कौन है उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा,सरकार की जिम्मेदारी होगी।
जबकि इन गायों को किसी बड़े जंगल में रखना चाहिए जहां पेड़ पानी छाया उन्हें मिल सके सभी गौशालाओं में मैंने देखा पेड़ नहीं लगे थे जबकि गाय या कोई भी पशु हो उसे पेड़ की नीचे बंधे देखा है टिन सेट में तो और नीचे गर्मी लगती है।
सरकार को यह गौशाला हटाकर इन गायों को किसी बड़े जंगल में रखना चाहिए और दूसरी बात यह है कि इन गौशालाओं में करोड़ों की लागत लगाई जा रही है काम कुछ नहीं दिख रहा,