Fw: Press note- जातीय भेदभाव व उत्पीड़न मुक्त कैम्पस के लिए यूजीसी नियमावली लागू करना होगा!

0 views
Skip to first unread message

Sandeep Pandey

unread,
Jan 31, 2026, 9:08:40 PM (5 hours ago) Jan 31
to Socialist Party


----- Forwarded Message -----
From: rajeev yadav <media....@gmail.com>
To: Sandeep Pandey <ashaa...@yahoo.com>
Sent: Sunday, February 1, 2026 at 03:30:21 AM GMT+5:30
Subject: Press note- जातीय भेदभाव व उत्पीड़न मुक्त कैम्पस के लिए यूजीसी नियमावली लागू करना होगा!

प्रेस के लिए प्रकाशनार्थ-

यूजीसी इक्विटी नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे लगाना निराशाजनक

मोदी सरकार में संविधान पर बढ़ते हमले के साथ एससी-एसटी व ओबीसी के साथ सामाजिक अन्याय बढ़ा है

सम्मान, हिस्सेदारी व बराबरी के लिए बहुजनों को निर्णायक संघर्ष में सड़कों पर उतरना होगा

यूपी-बिहार के दर्जनों संगठनों ने साझा बयान जारी कर यूजीसी इक्विटी नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे लगाने को निराशाजनक बताया है. स्टे लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गयी टिपण्णी हास्यास्पद है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे लगाना और साथ में की गयी टिपण्णी यूजीसी इक्विटी नियमावली के विरोधियों  के पक्ष में जाती हुई दीख रही है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले और टिपण्णियां अक्सरहां सदियों से अन्याय, उत्पीड़न व भेदभाव झेल रहे एससी-एसटी व ओबीसी के लिए निराशाजनक होती हैं. इससे पहले सुप्रीमकोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट को कमजोर कर दिया था और जिसे 2 अप्रैल 2018 के ऐतिहासिक आंदोलन और शहादतों के बाद फिर से हासिल किया जा सका. दूसरी तरफ, सुप्रीमकोर्ट ने संविधान विरोधी EWS पर एक दिन के लिए भी स्टे नहीं लगाया और सही घोषित कर दिया.

जारी बयान में संगठनों की ओर से कहा गया है कि मोदी राज में संविधान पर बढ़ते हमले के साथ एससी-एसटी व ओबीसी के साथ सामाजिक अन्याय बढ़ रहा है. इस दौर में हिंसा-उत्पीड़न व भेदभाव ऊंचाई हासिल कर रहा है. एकतरफ, 45 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में एससी के 64 प्रतिशत, एसटी के 84 प्रतिशत और ओबीसी के 80 प्रतिशत प्रोफेसर के आरक्षित पद खाली हैं तो 45 विश्वविद्यालयों में 38 कुलपति अगड़ी जाति से हैं. दूसरी तरफ, यूजीसी के अपने आँकड़े ही बताते हैं कि 2019 से 2024 के बीच विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

संगठनों की ओर से कहा गया है कि मोदी सरकार अगड़ी जाति के सदियों से जारी विशेषाधिकारों के पक्ष में खड़ी है तो दूसरी तरफ, एससी-एसटी व ओबीसी को सामाजिक न्याय मिले, इसके खिलाफ है. संविधान के खिलाफ जाकर मोदी सरकार ने EWS आरक्षण लागू कर दिया तो वहीं, एससी-एसटी व ओबीसी के आरक्षण पर लगतार हमला जारी है.

जारी बयान में कहा गया है कि सामाजिक न्याय के लिए संपूर्णता में ठोस व कारगर नीतियां व योजनाएं बनाने के लिए  जरूरी और बुनियादी एजेंडा जाति जनगणना है, जो लंबे समय से अनुत्तरित है. लगातार इसके पक्ष में आवाज उठती रही है. पिछले दिनों मोदी सरकार ने जाति जनगणना कराने की घोषणा की, लेकिन अभी जो जनगणना का फॉर्म जारी हुआ है, उसमें एससी और एसटी के लिए कॉलम तो है, लेकिन ओबीसी और शेष जातियों का ज़िक्र नहीं है. मोदी सरकार द्वारा जाति आधारित जनगणना कराने की मनसा पर भी सवाल खड़ा होता है.

संगठनों ने कहा है कि यूजीसी द्वारा लाई गयी इक्विटी नियमावली रोहित वेमुला और डाक्टर पायल ताडवी की संस्थानिक हत्या के बाद जारी संघर्षो की उपलब्धि है. हम पीछे कतई नहीं हट सकते. ठोस व कारगर इक्विटी नियमावली के लिए लड़ेंगे.

संगठनों ने कहा है कि यूजीसी इक्विटी नियमावली के खिलाफ अगड़ी जाति की आक्रमकता आश्चर्यजनक है. कुलमिलाकर वे सदियों से जारी अपने विशेषाधिकारों को बनाए रखने के लिए संगठित तौर पर सामने आए हैं और अन्याय-उत्पीड़न व भेदभाव को अधिकार की तरह देखते हैं.

संगठनों का मानना है कि बहुजनों को सम्मान, हर क्षेत्र में हर स्तर पर उचित हिस्सेदारी और बराबरी की लड़ाई को निर्णायक बनाना ही होगा, एकजुट होना ही होगा. यह संविधान बचाने और  बाबा साहब के सपनों के भारत के निर्माण की जरूरी लड़ाई है.

साझा प्रेस बयान जारी करने वाले संगठनों में शामिल हैं- सामाजिक न्याय मंच(यूपी),सामाजिक न्याय आंदोलन(बिहार), यादव सेना, रिहाई मंच, सामाजिक न्याय आंदोलन(यूपी),  हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी, पूर्वांचल किसान यूनियन, पिछड़ा वर्ग उत्थान संघ, संविधान बचाओ संघर्ष समिति, राष्ट्रीय किसान सेवा समिति, कम्यूनिस्ट फ्रंट(बनारस), नेशनल एलायंस फॉर सोशल जस्टिस, पूर्वांचल बहुजन मोर्चा, राष्ट्रीय बांस शिल्पी महासंघ, युवा चेतना मंच, राष्ट्रीय युवा मोर्चा, बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन(बिहार), राष्ट्रीय विद्यार्थी चेतना परिषद, नागरिक अधिकार मंच, अल्पसंख्यक दलित एकता मच, BPSS, अखंड भारत मिशन, अखिल भारतीय प्रजापति कुंभकार महासभा फोरम, निषाद सेवा संस्थान(उत्तर प्रदेश).

द्वारा- राजीव यादव, संतोष धरकार, सत्यम प्रजापति, इमरान, रिंकू यादव, शिव कुमार यादव, कुलदीप जनवादी, हृदय लाल मौर्या.

7007972084, 9452800752

Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages