राजेन्द्र स्वर्णकार जी ने जो अर्थ बताए हैं बिलकुल सही हैं।
दह्र अरबी का शब्द है। अरबी के शब्द, संस्कृत की ही तरह धातुओं से बनते हैं।
संस्कृत में धातुओं के हिज्जो को लेकर कोई नियम नहीं है, अरबी में है। हर अरबी धातु
में तीन हिज्जे होते हैं। दह्र भी एक धातु है जिसका अर्थ है- घटना या होना।
दह्र से दहरा, दहारा, दहूरा आदि अन्य
अरबी शब्द बनते हैं जो हिन्दी-उर्दू में कम चलते हैं। दह्र का
एक और अर्थ आदत भी है..