अलग अलग प्रकार के सिक्कों या सिक्कों के समुच्चय के लिए भी "मुद्रा" शब्द पर्याप्त है
संजय भाई,
करेंसी के तौर पर मुद्रा और मुद्रिका एक ही मूल के हैं। अर्थवत्ता भी एक है। "भाव" भी अर्थवत्ता का विस्तार है।
मुद्रा का अर्थ है भाव मगर मूलतः हर्ष, प्रसन्नता, संतोष आदि ही इसके दायरे में आते हैं। मुद्रा का एक अर्थ हाव-भाव का प्रकटीकरण भी है जो इसी कड़ी का हिस्सा है। इन्हीं हाव-भाव का पत्थरों पर मानवाकृतियों में उत्कीर्णन मुद्रा कहलाया। नाथपंथी-तांत्रिक शब्दावली में भी मुद्रा शब्द का महत्व है जिनका संबंध अंगुलियों के विशिष्ट आध्यात्मिक संकेतों से है। इसी वजह से मुद्रा का एक अर्थ रहस्य भी है। बतौर मुहर, इन तमाम भावार्थों की व्याख्या यही है कि शासकीय या अन्य सांस्थानिक दस्तावेजों पर अंकित आधिकारिक-प्रामाणिक निशान या चिह्न को ही मुद्रा कहते हैं। मुद्रा का परिचय चिह्न और अंकन के रूप व्यापक प्रयोग होता है। रूपए-पैसे, करंसी के तौर पर तो मुद्रा शब्द का प्रयोग होता ही है, छपाई के लिए इससे ही बना मुद्रण शब्द प्रचलित है। छापने वाले के लिए मुद्रक शब्द भी बना लिया गया। मुद्रणालय, मुद्रांकन, मौद्रिक, मुद्रांकित इसी कड़ी के अन्य शब्द हैं जो इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
मुद्रा अथवा मुहर की एक अन्य व्युत्पत्ति भी बताई जाती है। पाश्चात्य पुरातत्विदों और भाषाशास्त्रियों के मुताबिक पत्थरों पर अब तक जो सबसे प्राचीन अंकन मिला है, वह सुमेरी सभ्यता (प्राचीन इराक में दजला फरात के दोआब में पनपी ईसा सेप्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता की एक मुद्राभी आठ से दस सदी पूर्व की सभ्यता) का है। दरअसल अंकन विद्या का ज्ञान सुमेरियों ने ही विश्व को दिया। राजकीय चिह्न को उत्कीर्ण करने के लिए प्राचीन सुमेरी चित्रलिपि में मुसुरू शब्द पढ़ा गया है। सुमेरी चित्रलिपि कीलाक्षर लिपि कहलाती है जो पत्थरों पर उत्कीर्ण की जाती थी। मुसुरू शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है मु अर्थात नाम, परिचय तथा सर यानी लिखना। जाहिर है तात्पर्य पत्थरों पर विरुदावली के बखान से ही है जो प्राचीनकाल से लेकर अब तक सभी प्रभावशाली हस्तियों का प्रमुख शग़ल रहा है। इसी मुसुरू ने प्राचीन ईरानी में मुध्र का रूप लिया जो संस्कृत में मुद्रा के रूप में दाखिल हुआ। रूपए-पैसे के लिए भी मुद्रा शब्द का प्रयोग इसी वजह से हुआ क्योंकि सिक्कों पर शासकीय चिह्न ही अंकित रहता है जो मुद्रा कहलाती है। चेहरे के हाव-भाव के लिए मुखमुद्रा जैसा शब्द खूब चलता है। यह वैसे ही हुआ जैसे ग्रीकोरोमन द्रख्म का संस्कृत रूप द्रम्म हुआ और बाद में दमड़ी दाम जैसे शब्द सामने आए।अलग अलग प्रकार के सिक्कों या सिक्कों के समुच्चय के लिए भी "मुद्रा" शब्द पर्याप्त है
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हो सकता है कि मैं "देसी शब्द" का अर्थ सही न समझ पा रहा हूँ.
फिर भी.. ग्रामीण और क्षेत्रीय भाषाओं में मुद्रा के लिए बहुत से शब्द प्रचलित है जैसे
फुटकर , चिल्लर, आना, नवा, इत्यादि.
हो सकता है ये शब्द इस चर्चा के मूल विषय से हट कर रहा हो पर मुद्रा से जुड़े क्षेत्रीय शब्दों के नाम पर मुझे यही याद आए
धन्यवाद