पिनाक, शारंग(शार्ङ्ग) और गांडीव

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eg

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Mar 10, 2013, 8:55:28 AM3/10/13
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मिथक बताते हैं कि कण्व ऋषि के चरम तप में दीर्घ समय तक लीन रहने से उनके मूर्धा से बाँस निकल आया जिससे विश्वकर्मा ने तीन धनुष बनाये - पिनाक, शारंग (शार्ङ्ग) और गांडीव। पिनाक धारण करने के कारण शंकर पिनाकी कहलाये, शार्ङ्ग विष्णु के पास गया और गांडीव अर्जुन के पास।
बाणों से 'नाक' यानि आकाश को 'पिहित' करने यानि ढकने के कारण पिनाक का नाम ऐसा पड़ा। 
ऐसे ही 'गाण्डीव' और 'शार्ङ्ग' के भी मूल होंगे। कोई जन बतायेंगे कि क्या हो सकते हैं?
यह भी कि क्या शारंग और शार्ङ्ग एक ही हैं? 

सादर सधन्यवाद।        

Abhay Tiwari

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Mar 10, 2013, 9:03:25 AM3/10/13
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गांडीव तो खाण्डवदहन के बाद अर्जुन को अग्नि से भेंट में मिला था.. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि उस वन में खाण्ड यानी गन्ने की बहुलता रही होगी, जिसके चलते उसका नाम खाण्डव वन पड़ा होगा.. खाण्डव से गाण्डीव में दूरी ही कितनी है? 

2013/3/10 eg <girij...@gmail.com>

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eg

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Mar 10, 2013, 9:19:40 AM3/10/13
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समस्या यह है कि यह पहले सोम के पास बताया गया है, सोम से वरुण और वरुण से अग्नि को। ऐसे में मामला उलझ जाता है। एक स्थान पर उसे बज्र की गाँठ 'गंड' से बना बताया गया है लेकिन तब कण्व का लिंक बाधित होता है। 
'शार्ङ्ग' और 'शारंग' के बारे में भी कुछ प्रकाश डालिये। 

2013/3/10 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>

Baljit Basi

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Mar 10, 2013, 9:32:37 AM3/10/13
to शब्द चर्चा
शारंग का अर्थ कई रंगों वाला होना चाहिए।

Abhay Tiwari

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Mar 10, 2013, 9:36:55 AM3/10/13
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मिथक और इतिहास का भेद करना होगा.. सोम, वरुण, इन्द्र और अग्नि ये सभी मिथकीय तत्व हैं पर अर्जुन ऐतिहासिक (हालांकि इतिहासकार ऐसा नहीं मानते, वे अर्जुन को भी मिथकीय मानते हैं, मैं ऐसा नहीं मानता.. हमारे यहाँ के पुराण में इतिहास और मिथक का गड्ड-मड्ड हुआ है, उसे हमें ही अपनी समझ से अलगाना होगा) .. कहने का आशय ये है कि अर्जुन के पहले का सारा क़िस्सा मिथक है.. उसमें ज़्यादा मत उलझिये.. और गंड या गाँठ भी गन्ने से जुड़ता है..   

2013/3/10 eg <girij...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

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Mar 10, 2013, 9:38:23 AM3/10/13
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खण्ड, गण्ड पर ध्यान दें।


On Sun, Mar 10, 2013 at 7:02 PM, Baljit Basi <balji...@yahoo.com> wrote:
शारंग का अर्थ कई रंगों वाला होना चाहिए।
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अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230


  

Abhay Tiwari

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Mar 10, 2013, 9:44:28 AM3/10/13
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सही कह रहे हैं अजित भाई.. गण्ड से ही खण्ड बनता है..  और आज के गन्ने में भी गण्ड की ध्वनि मौजूद है.. कटे हुए गन्ने के टुकड़ो को गंडेरी कहते ही हैं.. 

2013/3/10 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

eg

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Mar 10, 2013, 9:44:31 AM3/10/13
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हम्म! भगवान सिंह शायद सोम की पहचान गन्ने से करते हैं।  

2013/3/10 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>

Abhay Tiwari

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Mar 10, 2013, 9:47:56 AM3/10/13
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और शार्ङग में शृंग छिपा है.. जो सींग से बना है वो शार्ङ्ग धनुष है.. 

Baljit Basi

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Mar 10, 2013, 9:53:40 AM3/10/13
to शब्द चर्चा
वनों को कृषियोग्य बनाने के लिए जलाया जाता था। खाण्डवदहन में भी आर्या
लोगों ने अनार्य के वन जलाये . ऐसा कुछ इतिहासकार कहते हैं। अगर वहां
पहले ही गन्ने थे तो जलाने की क्या जरूरत थी?

eg

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Mar 10, 2013, 9:55:18 AM3/10/13
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आर्य अनार्य की बातें अब ग़लत सिद्ध हो चुकी हैं। 

2013/3/10 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>
वनों को कृषियोग्य बनाने के लिए जलाया जाता था। खाण्डवदहन में भी आर्या
लोगों ने अनार्य के वन जलाये . ऐसा कुछ इतिहासकार कहते हैं। अगर वहां
पहले ही गन्ने थे तो जलाने  की  क्या जरूरत थी?

Abhay Tiwari

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Mar 10, 2013, 9:58:41 AM3/10/13
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उस समय गन्ने की कैश क्राप वाली खेती नहीं होती होगी.. जगह जला देने के कई लाभ हुए होंगे.. वहाँ रह रहे नाग जनों से भी छुटकारा मिल  गया .. और ज़मीन जैसे मनचाहे इस्तेमाल करने के लिए हाथ आ गई.. 

2013/3/10 eg <girij...@gmail.com>

Baljit Basi

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Mar 10, 2013, 10:01:30 AM3/10/13
to शब्द चर्चा

एक मिनट के लिए अगर आप की बात मान भी लूं तो भी यह बात सही है कि वनों को
कृषियोग्य बनाने के लिए जलाया जाता था। और खाण्डवदहन में ऐसा ही हुआ

eg

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Mar 10, 2013, 10:02:37 AM3/10/13
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अवश्य। 

2013/3/10 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>

Abhay Tiwari

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Mar 10, 2013, 10:24:23 AM3/10/13
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यह तो मेरे लिए निर्विवाद सी बात है.. 

2013/3/10 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>

अजित वडनेरकर

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Mar 10, 2013, 10:33:59 AM3/10/13
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Baljit Basi

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Mar 10, 2013, 11:54:48 AM3/10/13
to शब्द चर्चा
'खांडव' हिस्सा , भाग वाले अर्थ से भी बना हो सकता है। आज कल हमारे पास
उत्तर-खंड है।यह अनार्य शब्द हो सकता है क्योंकि वहां यही लोग रहते थे।

बलजीत बासी


On 10 मार्च, 10:33, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:

अजित वडनेरकर

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Mar 10, 2013, 12:14:35 PM3/10/13
to shabdc...@googlegroups.com
उत्तराखण्ड, उत्तरापथ, दक्षिणापथ जैसे शब्द भौगोलिक संकेत हैं। आर्य-अनार्य इसका क्या लेना देना ? उत्रराखण्ड शब्द में अनार्य जैसा क्या है?
"अनार्य रहते थे" इसका क्या अर्थ ? हम फिर उस राह पर जा रहे हैं जिसका कोई छोर नहीं मिलना।

Baljit Basi

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Mar 10, 2013, 12:27:49 PM3/10/13
to शब्द चर्चा
मुझे लिखते लिखते अहसास हो रहा था कुछ गलत बात हो रही है। संक्षिप्त में
लिखने की वजह से गड़बड़ हुई। मैं 'खांडव' की बात कर रहा था यहाँ अनार्य
रहते थे . इस लिए कहा कि यह उनका शब्द हो सकता है। आपके 'खंड ,काण्ड' से
संबंधित लेख में भी ऐसा संकेत मिलता है। खंड का अर्थ हिस्सा, भाग, होता
है इस लिए 'खांडव' के रूप में यह एक विशेष भू-खंड के नाम के तौर पर रूढ़
हो गया होगा। उतरखंड की तो मिसाल ही दी है की आज कल भी ऐसा है। मेरी लिखत
कई बार crossword के सुरागों जैसी होती है!

On 10 मार्च, 12:14, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:

अजित वडनेरकर

unread,
Mar 10, 2013, 12:30:48 PM3/10/13
to shabdc...@googlegroups.com


2013/3/10 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>
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Baljit Basi

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Mar 10, 2013, 12:40:50 PM3/10/13
to शब्द चर्चा
आपको फिर कोई सर पैर नहीं मिला? चलिए फिर के लिए छोड़ देते हैं। "अब की
बारी बख्श बन्दे को". आप के गुस्से से मेरा 'खाण्डवदहन' न हो
जाए!!!!!!!

On 10 मार्च, 12:30, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> [?]
>
> 2013/3/10 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
>
>
>
>

अजित वडनेरकर

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Mar 10, 2013, 12:44:35 PM3/10/13
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नहीं, आपकी बात स्पष्ट है अबकी बार। खाण्डव शब्द से गन्ने की अर्थवत्ता से हटते हुए आप क्षेत्र जैसी अर्थवत्ता का संकेत कर रहे हैं।
मैने स्माइली उस अंदाज़ पर लगाई जिस अंदाज़ में आपने स्पष्टिकरण दिया:)

2013/3/10 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>
>
>
>
>

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Baljit Basi

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Mar 10, 2013, 12:48:34 PM3/10/13
to शब्द चर्चा
सांस में सांस आया। अब चैन से सोयूंगा।

अजित वडनेरकर

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Mar 10, 2013, 12:52:02 PM3/10/13
to shabdc...@googlegroups.com
ग़ज़बै कर रहे हो प्राजी

On Sun, Mar 10, 2013 at 10:18 PM, Baljit Basi <balji...@yahoo.com> wrote:
सांस में सांस आया। अब चैन से सोयूंगा।
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