मुहावरा और कहावत

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eg

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Aug 25, 2012, 1:43:55 AM8/25/12
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'मुहावरा' क्या मुँह से सम्बन्धित है? मूँहा मूही चलने वाली बात। 
'कहावत'? कहने सुनने की बात जैसा कुछ? 
दोनों में अंतर है क्या? 

 

हंसराज सुज्ञ

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Aug 25, 2012, 1:46:20 AM8/25/12
to शब्द चर्चा
मेरे मन में भी यही प्रश्न खड़ा हुआ था :)
ज्ञानीजन निवारण करें………


 सविनय,
हंसराज "सुज्ञ"

सुज्ञ


Date: Sat, 25 Aug 2012 11:13:55 +0530
Subject: [शब्द चर्चा] मुहावरा और कहावत
From: girij...@gmail.com
To: shabdc...@googlegroups.com

अजित वडनेरकर

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Aug 25, 2012, 1:56:24 AM8/25/12
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इसकी चर्चा यहाँ करने की कोई वजह नहीं । प्राथमिक स्तर के विषय हैं और इन पर पर्याप्त सामग्री नेट पर बिखरी हुई है । हाँ, किसी मुहावरे या कहावत का अर्थ न खुलता हो तो चर्चा हो सकती है ।

2012/8/25 हंसराज सुज्ञ <hansra...@msn.com>



--


अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230


  


Rangnath Singh

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Aug 25, 2012, 1:58:17 AM8/25/12
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मुहावरा के सम्बन्ध में मेरा अज्ञान जाहिर होने के बाद बेहतर है कि कहावत के बारे में भी अपनी कह लूँ :-)

मुझे तो यही लगता है, कहावतें पारंपरिक किन्तु अलिखित ज्ञान की वाहक होती हैं...ज्यादतर कहावतें, नैतिक या लोकोपयोगी शिक्षा हि देती हैं....

2012/8/25 हंसराज सुज्ञ <hansra...@msn.com>

Abhay Tiwari

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Aug 25, 2012, 2:11:59 AM8/25/12
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मुहावरा का मुँह से कोई लेना-देना नहीं.. अरबी धातु है हवर जिसका अर्थ होता है लौटना, बदलना, चक्कर लगाना.. उस से बना है..  

2012/8/25 Rangnath Singh <rangna...@gmail.com>

narayan prasad

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Aug 25, 2012, 5:38:37 AM8/25/12
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यदि व्याकरणिक रचना की दृष्टि से देखा जाय तो मुहावरा एक वाक्यांश (phrase) होता है (जैसे - आँख आना, आँख लगना, इत्यादि), जबकि कहावत या लोकोक्ति (proverb) एक पूरा वाक्य (जैसे - "बैल न कूदे, कूदे तंगी।", "सत्तर चूहे खाके बिल्ली चली हज को ।", इत्यादि) । जैसा कि शब्द से ही मालूम पड़ता है, कहावत या लोकोक्ति जनता के अपने जीवन के अनुभवों पर आधारित होते हैं ।
 --- नारायण प्रसाद

अजित वडनेरकर

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Aug 25, 2012, 7:03:44 AM8/25/12
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जैसे - आँख आना, आँख लगना, इत्यादि
आँख आना तो एक किस्म के नेत्र-विकार का लक्षण हुआ । इसे मुहावरा कैसे कहेंगे ?
हाँ, आँख दिखाना, आँख लगना मुहावरे हैं ।

2012/8/25 narayan prasad <hin...@gmail.com>

यदि व्याकरणिक रचना की दृष्टि से देखा जाय तो मुहावरा एक वाक्यांश (phrase) होता है (जैसे - आँख आना, आँख लगना, इत्यादि), जबकि कहावत या लोकोक्ति (proverb) एक पूरा वाक्य (जैसे - "बैल न कूदे, कूदे तंगी।", "सत्तर चूहे खाके बिल्ली चली हज को ।", इत्यादि) । जैसा कि शब्द से ही मालूम पड़ता है, कहावत या लोकोक्ति जनता के अपने जीवन के अनुभवों पर आधारित होते हैं ।
 --- नारायण प्रसाद

Baljit Basi

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Aug 25, 2012, 7:17:45 AM8/25/12
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'आँख आना' भी मुहावरा ही है जिसका अर्थ आंख दुखना होता है. यहाँ आना का
अर्थ come वाला नहीं

On 25 अग, 07:03, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> जैसे - *आँख आना*, आँख लगना, इत्यादि


> आँख आना तो एक किस्म के नेत्र-विकार का लक्षण हुआ । इसे मुहावरा कैसे कहेंगे ?
> हाँ, आँख दिखाना, आँख लगना मुहावरे हैं ।
>
> 2012/8/25 narayan prasad <hin...@gmail.com>
>
> > यदि व्याकरणिक रचना की दृष्टि से देखा जाय तो मुहावरा एक वाक्यांश (phrase)
> > होता है (जैसे - आँख आना, आँख लगना, इत्यादि), जबकि कहावत या लोकोक्ति
> > (proverb) एक पूरा वाक्य (जैसे - "बैल न कूदे, कूदे तंगी।", "सत्तर चूहे खाके
> > बिल्ली चली हज को ।", इत्यादि) । जैसा कि शब्द से ही मालूम पड़ता है, कहावत या
> > लोकोक्ति जनता के अपने जीवन के अनुभवों पर आधारित होते हैं ।
> >  --- नारायण प्रसाद
>
> --
>

> *
> अजित*http://shabdavali.blogspot.com/

Baljit Basi

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Aug 25, 2012, 7:32:06 AM8/25/12
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पंजाबी में एक गीत है," जदों अख लगदी ए, लगदी नई अख नी' यहाँ 'आँख लगना'
के दो अलग अलग मुहावरई प्रयोग हैं, अर्थात जब इशक होता है तो नींद नहीं
आती.
बलजीत बासी

> > औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> उद्धृत पाठ दिखाए

अजित वडनेरकर

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Aug 25, 2012, 8:45:19 AM8/25/12
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''आँख आना' भी मुहावरा ही है जिसका अर्थ आंख दुखना होता है. यहाँ आना का अर्थ come वाला नहीं   "
बलजीत भाई,
आँख आना
में "आना" को "आगमन" के अर्थ में तो शायद ही कोई लेता हो:)
आँख सम्बन्धी विकार जिसका लक्षण लाली, सूजन और दर्द है, इसे ही आँख आना कहते हैं ।
इसका प्रयोग मुहावरे के तौर पर नहीं सीधे आँख के विकार की सूचना देने के लिए ही होता है, न कि अभिव्यक्ति को ज़ोरदार बनाने के लिए ।

2012/8/25 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>
--


अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230


  


Baljit Basi

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Aug 25, 2012, 8:52:29 AM8/25/12
to शब्द चर्चा
चलिए मैं एक और तरह से सवाल करता हूँ. क्या हम इसे 'नेत्र आना' कह सकते
हैं?

On 25 अग, 08:45, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
>  *''आँख आना' भी मुहावरा ही है जिसका अर्थ आंख दुखना होता है. यहाँ आना का
> अर्थ come वाला नहीं*   "
> *बलजीत भाई,
> आँख आना *में "आना" को "आगमन" के अर्थ में तो शायद ही कोई लेता हो:)


> आँख सम्बन्धी विकार जिसका लक्षण लाली, सूजन और दर्द है, इसे ही आँख आना कहते
> हैं ।
> इसका प्रयोग मुहावरे के तौर पर नहीं सीधे आँख के विकार की सूचना देने के लिए
> ही होता है, न कि अभिव्यक्ति को ज़ोरदार बनाने के लिए ।
>

> 2012/8/25 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>


>
>
>
>
>
> >  'आँख आना' भी मुहावरा ही है जिसका अर्थ आंख दुखना होता है. यहाँ आना का
> > अर्थ come वाला नहीं
>
> > On 25 अग, 07:03, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> > > जैसे - *आँख आना*, आँख लगना, इत्यादि
> > > आँख आना तो एक किस्म के नेत्र-विकार का लक्षण हुआ । इसे मुहावरा कैसे
> > कहेंगे ?
> > > हाँ, आँख दिखाना, आँख लगना मुहावरे हैं ।
>
> > > 2012/8/25 narayan prasad <hin...@gmail.com>
>
> > > > यदि व्याकरणिक रचना की दृष्टि से देखा जाय तो मुहावरा एक वाक्यांश
> > (phrase)
> > > > होता है (जैसे - आँख आना, आँख लगना, इत्यादि), जबकि कहावत या लोकोक्ति
> > > > (proverb) एक पूरा वाक्य (जैसे - "बैल न कूदे, कूदे तंगी।", "सत्तर चूहे
> > खाके
> > > > बिल्ली चली हज को ।", इत्यादि) । जैसा कि शब्द से ही मालूम पड़ता है,
> > कहावत या
> > > > लोकोक्ति जनता के अपने जीवन के अनुभवों पर आधारित होते हैं ।
> > > >  --- नारायण प्रसाद
>
> > > --
>
> > > *
> > > अजित*http://shabdavali.blogspot.com/
> > > औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230
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> अजित*http://shabdavali.blogspot.com/

अजित वडनेरकर

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Aug 25, 2012, 9:29:18 AM8/25/12
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बोलचाल की भाषा में ही नेत्र कहाँ बचा है जो आप सवाल कर रहे हैं?  मुद्दा यह नहीं है ।
"पेट में दर्द", "पेट में मरोड़" शारीरिक विकार के लक्षण  हैं और  सीधे-सीधे इन्हीं अर्थों में इनका प्रयोग होता है ।
मगर एक का भला होने पर दूसरे को बुरा लगने जैसी अभिव्यक्ति के संदर्भ में या आशंका, ईर्ष्या अथवा जलन को जताने के लिए भी बतौर मुहावरा इन वाक्यांशों का प्रयोग होता है ।
क्या आप "आँख आना" में नेत्र-विकार से हट कर ऐसी ही किसी मुहावरेदार अर्थवत्ता से परिचित हैं ?


2012/8/25 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>



--


अजित

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औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230


  


Dr. Sheo Shankar Jaiswal

unread,
Aug 26, 2012, 2:58:42 AM8/26/12
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'आँख आने' का एक ही अर्थ है. किसी पर दिल आना मुहावरा है, पर आँख आना नहीं. 

2012/8/25 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>



--
Dr. S S Jaiswal

lalit sati

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Aug 26, 2012, 3:15:16 AM8/26/12
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मेरे विचार से तो "आंख आना" भी मुहावरा ही हुआ। किसी शारीरिक विकार की अभिव्यक्ति भी किसी मुहावरे द्वारा हो सकती है।  "आंख आना" में आने के प्रत्यक्ष अर्थ से भिन्न अर्थ है यहां पर।

2012/8/26 Dr. Sheo Shankar Jaiswal <jais...@gmail.com>

Dr. Sheo Shankar Jaiswal

unread,
Aug 26, 2012, 3:34:25 AM8/26/12
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दिल आना, दिमाग फिरना, हाथ मलना, पैर कांपना, जबान फिसलना, कलेजा मुंह को आना, सिर चकराना, दिल बैठना आदि मुहावरे हैं. जी मिचलाना, दस्त लगना, आँख आना आदि मुहावरे नहीं हैं. 

2012/8/26 lalit sati <lalit...@gmail.com>

lalit sati

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Aug 26, 2012, 4:01:21 AM8/26/12
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मुहावरा—आँख आना=एक रोग जिसमें आँख लाल होती सूजती और दुखती है।
(http://pustak.org/home.php?mean=8957)


आँख आना = आँख दुखना
(भारतकोश के कहावत लोकोक्ति मुहावरे खंड में)

Dr. Sheo Shankar Jaiswal

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Aug 26, 2012, 4:49:51 AM8/26/12
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फिर तो पसली चलना, नब्ज़ गायब होना आदि भी मुहावरे कहे जायेंगे. भारतकोश का प्रमाण अपनी जगह है. लेकिन यह बात ध्यान में रखी जा सकती है कि पेट में दर्द और पेट में मरोड़ होने के दो-दो अर्थ हैं. हाथ-पैर कांपने का एक शाब्दिक अर्थ है और एक मुहावरे का अर्थ. उस तरह आँख आने का कोई दूसरा अर्थ नहीं है. इसी वज़ह से आँख आने को मुहावरा मानने में कठिनाई हो सकती है. लेकिन लगता है इस मामले में ख़म ठोककर कुछ कहना शायद संभव नहीं है.   

अजित वडनेरकर

unread,
Aug 26, 2012, 7:07:30 AM8/26/12
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ललित भाई,
पुस्तक डॉट आर्ग या किसी अन्य कोश के हवाले से बात नहीं बनती है । यह संदर्भ मैं बहुत पहले देख चुका हूँ । शब्दकोशों में भी भर्ती की प्रविष्टियाँ मिलती हैं । खासतौर पर हिन्दी कोशों में यह बीमारी आम है ।

अजित वडनेरकर

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Aug 26, 2012, 7:11:27 AM8/26/12
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"लेकिन लगता है इस मामले में ख़म ठोककर कुछ कहना शायद संभव नहीं है"

@Dr. Sheo Shankar Jaiswal मैं तो खम ठोक कर ही इसे मुहावरा नहीं मानने की बात कर रहा हूँ । जिसे मानना है, माने :)
उनसे कोई बहस भी नहीं करनी । हमने अपना पक्ष और आधार रख दिया है ।

2012/8/26 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

दिनेशराय द्विवेदी

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Aug 26, 2012, 7:18:02 AM8/26/12
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कोई माने या न माने पर "पसली चलना" और "नब्ज गायब होना" जैसे शब्द समूहों को बोलियों में मुहावरों की तरह लोग प्रयोग करते हैं। क्या हिन्दी को इन से वंचित हो जाना चाहिए?
--
दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ...  अनवरत    तीसरा खंबा

अजित वडनेरकर

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Aug 26, 2012, 7:22:47 AM8/26/12
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"क्या हिन्दी को इन से वंचित हो जाना चाहिए?"
वंचित की बात कहाँ से आ गई दिनेशजी ? आँख आना को मुहावरा कहा जाए या नहीं, इस पर बात चल रही थी । इसका अर्थ यह तो नहीं कि आँख आना अभिव्यक्ति के प्रयोग पर ऐतराज है किसी को ।

अजित वडनेरकर

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Aug 26, 2012, 7:28:26 AM8/26/12
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फिर तो आप हँसली उतरना को भी मुहावरा कहेंगे । नब्ज़ गायब होना, पसली चलना की अन्य अभिव्यक्तियाँ क्या हैं ?
पसलियों में हरकत को ही पसली चलना कहते हैं । नब्ज़ की हरकत गुम होना ही नब्ज़ गायब होना है । ये सीधे सरल अर्थवाही वाक्यांश हैं, मुहावरे नहीं ।
हाँ, होशो-हवास गुम या होश गुम होना के मुहावरा होने पर किसी को संदेह नहीं । 

2012/8/26 दिनेशराय द्विवेदी <drdwi...@gmail.com>

दिनेशराय द्विवेदी

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Aug 26, 2012, 7:31:06 AM8/26/12
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बात तो अपने स्थान पर है, पर बहस में यह प्रकट करना कि "पसली चलना" और "नब्ज गायब होना" भी मुहावरे नहीं हैं ठीक तो नहीं। साहित्यिक हिन्दी नहीं तो भी उस की बोलियों में इन का प्रयोग होता रहा है।


2012/8/26 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
"क्या हिन्दी को इन से वंचित हो जाना चाहिए?"
वंचित की बात कहाँ से आ गई दिनेशजी ? आँख आना को मुहावरा कहा जाए या नहीं, इस पर बात चल रही थी । इसका अर्थ यह तो नहीं कि आँख आना अभिव्यक्ति के प्रयोग पर ऐतराज है किसी को ।

अजित वडनेरकर

unread,
Aug 26, 2012, 7:43:31 AM8/26/12
to shabdc...@googlegroups.com
दिनेशजी मैं कहना चाह रहा हूँ कि ये वाक्यांश मुहावरा  नहीं कहे जा सकते । ये लोकप्रिय अभिव्यक्तियाँ हैं । इनका प्रयोग तो भाषा में होता रहा है, होते रहना चाहिए । साहित्यिक और लोक बोली का भी कोई प्रश्न नहीं है । उसकी "पलक झपक" रही थी में पलक झपकाने की क्रिया मुहवारा नहीं है मगर  "पलक झपकते" ही वो गायब था । में पलक झपकना मुहावरा है ।
जिस तरह से हम अपनी किसी भी अभिव्यक्ति से पहले यह नहीं देखते कि प्रयुक्त शब्द अरबी से आयातित है या फ़ारसी से और बेसाख्ता उसके ज़रिये अपने भाव व्यक्त करते हैं उसी तरह किसी भी अभिव्यक्ति से पहले यह भी ध्यान नहीं रहता कि वह मुहावरा है । हमारे दिमाग़ में सिर्फ़ यह होता है कि उक्त अभिव्यक्ति के लिए एक बहुप्रचलित वाक्य अथवा शब्दयुग्म पहले से मौजूद है और हम उससे काम चलाते हैं ।

इसे यूँ समझें कि हर बहुप्रचलित वाक्यांश या शब्दयुग्म को मुहावरा नहीं माना जा सकता ।

2012/8/26 दिनेशराय द्विवेदी <drdwi...@gmail.com>

दिनेशराय द्विवेदी

unread,
Aug 26, 2012, 7:54:25 AM8/26/12
to shabdc...@googlegroups.com
1. उसे देखते ही मेरी तो नब्ज ही गायब हो गई। (यहाँ होश उड़ने के स्थान पर इस का प्रयोग है और किया जाता है) खास कर ग्रामीण किस्सागोई में।
2. चुनाव लड़ना कोई खेल नहीं, अच्छे अच्छों की पसलियाँ चलने लगती हैं।

lalit sati

unread,
Aug 26, 2012, 7:56:58 AM8/26/12
to shabdc...@googlegroups.com
"आँख आना" में "आना" अपने अभिधात्मक अर्थ में नहीं है, अपने लाक्षणिक अर्थ में है। इसलिए मुझे लगा कि यह मुहावरा है। "आँख आना" केवल एक ही अर्थ के लिए प्रयुक्त होता है केवल इसलिए इसे मुहावरा नहीं माना जाना चाहिए?

अजित वडनेरकर

unread,
Aug 26, 2012, 7:58:32 AM8/26/12
to shabdc...@googlegroups.com
बढ़िया है ।
इन प्रयोगों से मैं परिचित नहीं हूँ ।
निश्चित ही तब इन्हें मुहावरा कहना सही है ।

अजित वडनेरकर

unread,
Aug 26, 2012, 8:02:13 AM8/26/12
to shabdc...@googlegroups.com
ललित भाई,
मानना न मानना तो निजी मामला है । उससे फ़र्क़ नहीं पड़ता । अलबत्ता इसका प्रयोग तो एक ही अभिव्यक्ति के लिए हो रहा है न !
"एक महिने से मेरी आँख आ रही है" यह वाक्य मेरी मुहावरेदार भाषा का सबूत तो नहीं बनेगा ?
अलबत्ता,  "पलक झपकते ही उत्ताद वहाँ से उड़नछू हो गया" इसे मुहावरेदार भाषा कहा जा सकता है ।

अजित वडनेरकर

unread,
Aug 26, 2012, 8:18:50 AM8/26/12
to shabdc...@googlegroups.com
दिनेश भाई, ग्रामीण बोली से आपका तात्पर्य हाड़ौती अंचल की लोकबोली से है या उत्तर भारतीय ग्रामीण हिन्दी से ।
पसली और नब्ज के दोनो वाक्य प्रयोगों से मैं अनभिज्ञ हूँ । क्योंकि होश खुश्क होना, दम खुश्क होना, दम सूखना, जान सूखना आदि मुहावरों की तर्ज़ पर नब्ज़ ग़ायब होना का प्रयोग मेरे लिए नया है । उत्तर-भारतीय हिन्दी की प्रवृत्तियों से मैं परिचित हूँ ।
आप हाड़ोती ज़बान में इसे बताएँ तो शायद यह और सहज लगे ।

Sheo S. Jaiswal

unread,
Aug 27, 2012, 12:28:14 AM8/27/12
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पसली चलना और नब्ज़ गायब होना अपने शाब्दिक अर्थों के अलावा अन्य अर्थों में प्रयुक्त होते हैं, यह जानकारी मुझे भी नहीं है. भोजपुरी में भी ऐसे प्रयोग नहीं होते. आँख आना को लेकर उपजे विवाद पर मुझे 'मुंह आना' स्मरण आ रहा है जो मुंह पकने (मुंह में छाले पड़ने) के अर्थ में प्रयोग किया जाता है. इस सन्दर्भ में एक शब्दकोष में दी गई मुहावरे की परिभाषा की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ. "मुहावरा ऐसे शब्दों का समूह है जो एक विशिष्ट संहति में प्रयुक्त होने पर उन शब्दों के अलग-अलग अर्थ को मिलाकर जो अर्थ निकलता है, उससे भिन्न अर्थ देते हैं." 'आँख आना' को इस कसौटी पर कसें और देखें कि इसे मुहावरा कहा जा सकता है या नहीं? दिनेश राय द्विवेदी जी पसली चलने और नब्ज़ गायब होने का जो और अर्थ बता रहे हैं, उसके आधार पर तो इन्हें मुहावरा माना जाना चाहिए. सवाल बस इतना है कि ये शब्दयुग्म इन अर्थों में प्रयोग होते हैं या नहीं? ललित जी का आग्रह है कि आँख आना में 'आना' शाब्दिक अर्थ से भिन्न अर्थ दे रहा है. इसलिए इसे मुहावरा कहा जाना चाहिए. मुझे लगता है कि ऐसी स्थिति में दोनों पक्षों के लिए असहत होने के लिए सहमत होने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. So let us agree to differ.     

अजित वडनेरकर

unread,
Aug 27, 2012, 10:48:57 AM8/27/12
to shabdc...@googlegroups.com
सहमत

2012/8/27 Sheo S. Jaiswal <jais...@gmail.com>
330.gif

Sheo S. Jaiswal

unread,
Aug 27, 2012, 10:48:53 PM8/27/12
to shabdc...@googlegroups.com
धन्यवाद अजित जी. 

2012/8/27 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
330.gif
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