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दोस्तों, इन दिनों बनारस में हूँ और बेहद व्यस्त हूँ। नया शहर,
नया कार्यभार। बहुत दिनों बाद यहाँ आना हुआ।
दमामा का उल्लेख एक शुरुआती पोस्ट में है ।
विशाल नक्कारा या धौंसा को ही दमामः कहते हैं जिसे उर्दू हिन्दी में दमामा कहा जाता है। यह बना है फारसी के दमाँ से जिसका मतलब होता है क्रोध में चिंघाड़ना, दहाड़ना, तेज आवाज़ करना आदि। बाढ़ और तीव्र प्रवाह वाली ध्वनियों के लिए भी यह शब्द प्रयोग में लाया जाता है। संस्कृत की डम् , धम् समानार्थी धातुएँ हैं जिनमें ध्वनि का भाव है। धम् में मूलतः ठोकने, बजाने, घूँसा मारने का भाव है। दमामा को पीटा ही जाता है। याद करें, इसी प्रकृति के एक वाद्य का नाम धौंसा भी होता है। दमादम भी इसी मूल का शब्द है जिसका मतलब लगातार ,मुसलसल है। `दमादम मस्त कलंदर ` से तो सभी परिचित हैं। सिखों का पवित्रतम स्थान दमदमी टकसाल भी इससे ही जुड़ा है। कबीर ने भी कई जगह ब्रह्मनाद के लिए अनहद बाजा या गगन दमामा शब्द का प्रयोग किया है। शिवजी का प्रिय वाद्य डमरू इससे ही बना है।
डमरू के आकार को अगर देखें तो इसमें दो बेहद छोटे नक्कारे एक दूसरे की पीठ से जुडे नज़र आते हैं और लकड़ी की शलाकाओं की जगह चमड़े पर आघात का काम सूत की गठान लगी दो लड़ियां करती हैं। डमरू की आवाज़ को डमडम और इस क्रिया को डुगडुगी कहते हैं। किसी बात के प्रचार या घोषणा के लिए डुगडुगी पीटना मुहावरा भी संदेश प्रणाली से जुड़ रहा है।
एक ओर बात, आपकी चर्चा गाँव के नाम के साथ लगे दमामी शब्द की कैसे
व्याख्या करती है?
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