दमामी

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Rahul Singh

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May 10, 2013, 7:45:20 PM5/10/13
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एक शब्‍द है 'दमामी' नगाड़े के अर्थ में नहीं, बल्कि राजस्‍व प्रयोजन में. आमतौर पर इसका प्रयोग ऐसे ग्राम नामों के साथ हुआ पाया है, जो वीरान हैं, यह किस भाषा का शब्‍द है और इसका अर्थ क्‍या होता है, मैं फिलहाल इसका अर्थ मानता आ रहा हूं, आबादी रहित गांव.

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राहुल कुमार सिंह
छत्‍तीसगढ
+919425227484
http://akaltara.blogspot.com

दिनेशराय द्विवेदी

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May 10, 2013, 9:47:47 PM5/10/13
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राजस्थान में ढोल बजाने वालों की जाति को दमामी कहते हैं।


2013/5/11 Rahul Singh <rahuls...@gmail.com>

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दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
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Rahul Singh

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May 11, 2013, 5:09:03 AM5/11/13
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जी, कबीर की प्रसिद्ध पंक्ति है- गगन दमामा बाजिया, पड्या निसानैं घाव, आम तौर पर दमामा-दमामी शब्‍द इस अर्थ में तो प्रचलित है, लंकिन राजस्‍व में प्रयुक्‍त खास कर ग्राम नाम के साथ 'दमामी' के बारे में जानकारी चाह रहा हूं.


2013/5/11 दिनेशराय द्विवेदी <drdwi...@gmail.com>

Anil Janvijay

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May 11, 2013, 6:43:22 AM5/11/13
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राहुल जी,
राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में ढोल-ताशे वाले को या बैंड-बाजे बजाने वाले लोगों की एक जाति होती है। इस जाति को  दमामी कहा जाता है।  दमामियों के गाँव को भी दमामी गाँव कहा जाता है। लेकिन  'वीरान गावँ' के अर्थ में  दमामी शब्द का प्रयोग मैं पहली बार सुन रहा हूँ। मैंने लगभग सभी शब्दकोश छान मारे। कई विद्वानों से भी पूछा -- लेकिन किसी ने भी अभी तक इस बारे में कुछ नहीं बताया है।

anil janvijay
कृपया हमारी ये वेबसाइट देखें
www.rachnakosh.com

Moscow, Russia
+7 916 611 48 64 ( mobile)

दिनेशराय द्विवेदी

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May 11, 2013, 6:49:56 AM5/11/13
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अनिल जी की बात से सहमति है। हो सकता है पहले वह दमामी गाँव रहा हो। बाद में लोगों के स्थान छोड़ देने से वीरान हो गया हो।



2013/5/11 Anil Janvijay <anilja...@gmail.com>

Rahul Singh

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May 11, 2013, 7:38:11 AM5/11/13
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किसी और संभावना पर विचार आवश्‍यक जान पड़ता है, क्‍योंकि छत्‍तीसगढ़ में यह शब्‍द दमामी, बजाने वालों की जाति के अर्थ में प्रचलित नहीं है.

अजित वडनेरकर

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May 11, 2013, 9:06:43 AM5/11/13
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दोस्तों, इन दिनों बनारस में हूँ और बेहद व्यस्त हूँ। नया शहर, नया कार्यभार। बहुत दिनों बाद यहाँ आना हुआ।

दमामा का उल्लेख एक शुरुआती पोस्ट  में है ।

विशाल नक्कारा या धौंसा को ही दमामः कहते हैं जिसे उर्दू हिन्दी में दमामा कहा जाता है। यह बना है फारसी के दमाँ से जिसका मतलब होता है क्रोध में चिंघाड़ना, दहाड़ना, तेज आवाज़ करना आदि। बाढ़ और तीव्र प्रवाह वाली ध्वनियों के लिए भी यह शब्द प्रयोग में लाया जाता है। संस्कृत की डम् , धम् समानार्थी धातुएँ हैं जिनमें ध्वनि का भाव है। धम् में मूलतः ठोकने, बजाने, घूँसा मारने का भाव है। दमामा को पीटा ही जाता है। याद करें, इसी प्रकृति के एक वाद्य का नाम धौंसा भी होता है। दमादम भी इसी मूल का शब्द है जिसका मतलब लगातार ,मुसलसल है। `दमादम मस्त कलंदर ` से तो सभी परिचित हैं। सिखों का पवित्रतम स्थान दमदमी टकसाल भी इससे ही जुड़ा है। कबीर ने भी कई जगह ब्रह्मनाद के लिए अनहद बाजा या गगन दमामा शब्द का प्रयोग किया है। शिवजी का प्रिय वाद्य डमरू इससे ही बना है।

डमरू के आकार को अगर देखें तो इसमें दो बेहद छोटे नक्कारे एक दूसरे की पीठ से जुडे नज़र आते हैं और लकड़ी की शलाकाओं की जगह चमड़े पर आघात का काम सूत की गठान लगी दो लड़ियां करती हैं। डमरू की आवाज़ को डमडम और इस क्रिया को डुगडुगी कहते हैं। किसी बात के प्रचार या घोषणा के लिए डुगडुगी पीटना मुहावरा भी संदेश प्रणाली से जुड़ रहा है।

 


अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230


  

Vinod Sharma

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May 11, 2013, 9:56:47 AM5/11/13
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दमामी की चर्चा कबाड़खाना नामक ब्लॉग पर भी की गई है जिसमें कविवर देवव्रत जोशी की कविता छगन बा दमामी पर चर्चा में दमामी का अर्थ बताया गया  है-
.दमामी यानी ढोल और अन्य कई वाद्य बजाने वाली वह प्रजाति जिसका संगीत संस्कार न जाने कितने परिवारों में मंगल का अवगाहन करता है.
यहाँ पढ़ सकते हैं



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bestregards.gif
विनोद शर्मा

Baljit Basi

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May 11, 2013, 8:34:44 PM5/11/13
to शब्द चर्चा
अजित जी,
क्या 'दमामा' शब्द धातू के ध्वनि भाव से बना या पीटने के भाव से?
मेरे ख़्याल में' 'दमदमा मस्त कलंदर' में' दमादम साँस का भाव देता है.
मतलब' स्वास स्वास', लगातार.
शायद आपका भाव बठिंडा के पास दमदमा साहिब से है जो सिक्खों का एक तख़्त
है. सिक्ख रवायत अनुसार यहाँ गुरु गोबिंद सिंह ने लड़ाई दौरान दम लिया था
और कोई नौ महीना रहे थे. यहाँ ही गुरू ग्रंथ साहब में नौवें गुरू की वाणी
शामिल की गई. 'दमदमी टकसाल' भी यहाँ से प्रचलित हुआ अर्थात ग्रंथ साहब की
व्याख्या की एक प्रणाली. गुरू के साथ सम्बन्धित कई दमदमे साहिब हैं।

Baljit Basi

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May 11, 2013, 9:06:25 PM5/11/13
to शब्द चर्चा

एक ओर बात, आपकी चर्चा गाँव के नाम के साथ लगे दमामी शब्द की कैसे
व्याख्या करती है?

Vinod Sharma

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May 11, 2013, 9:19:41 PM5/11/13
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बासी जी, अब तक कि चर्चा से यह तो साफ हो गया कि दमामी के पीछे दो अलग-अलग धाराएं रही हैं।
1. यह सही है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि में दमामी एक जाति है जिनका काम नगाड़े, धौंसे, डुगडुगी बजाने का हुआ करता था। 
2. दम का अर्थ है- साँस ,  यानी जैसे दम ले ले घड़ी भर- साँस लेले घड़ी भर।
एक तीसरा अर्थ दम का शक्ति या ताकत भी है। रोब या प्रभाव भी है। एक मुहावरा है- दम देना अर्थात रोब दिखाना।
तो दमादम के पीछे साँस वाला अर्थ ही है- यानी लगातार। और दमामी जाति का नामकरण भी हो सकता है लगातार बिना रुके ढोल-नगाड़े बजाने के कारण पड़ा हो।  ताकत, रोब के अर्थ को लेकर गाड़ी रुक जाती है। हो सकता है इसमें भी साँस वाला ही अर्थ समाविष्ट हो, क्योंकि ताकत का संबंध साँस से भी है। आप जरूरत से ज्यादा ताकत लगाते हैं तो आपका दम उखड़ने लगता है।
विनोद

2013/5/12 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>


एक ओर बात, आपकी चर्चा गाँव के नाम के साथ लगे दमामी शब्द की कैसे
व्याख्या करती है?
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दिनेशराय द्विवेदी

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May 11, 2013, 9:36:38 PM5/11/13
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मध्यप्रदेश में गांधीसागर बांध बना तो वहाँ दमदमा नाम का एक गाँव डूब गया। वहाँ के लोग अब दमदमा वाले कहलाते हैं।
राहुल जी ने जिस तरह से गाँव के नामों का उल्लेख किया है उन में दमामी शब्द गाँव के विशेषण के लिए प्रयोग हुआ लगता है। इधर हाडौती में खेड़ली नाम के बहुत गाँव हैं। पहचान के लिए उन के साथ विशेषण लगाए जाते हैं। एक गाँव है खेड़ली पुरोहित। इसी तरह दमामी शब्द का प्रयोग हुआ है। किसी गाँव में कुछ ढोली जा कर बसे होंगे या बसाए गए होंगे तो उन्हें गाँव के बाहर भूमि दी गई होगी। हो सकता है यह भूमि गाँव से एक-आधा किलोमीटर दूर हो। यह बस्ती पहले दमामी कहलाई होगी बाद में गाँव के साथ उस का नाम जुड़ा होगा। सवाई माधोपुर जिले में पहाड़ियों के बीच कोई दस वर्ग किलोमीटर का मैदान है। इस के हर कोने में पहाडी की तलहटी में एक बस्ती है। चारों बस्तियों को मिला कर गाँव बनता है, नाम है जाखोदा। अब हर बस्ती का नाम अलग भी है लेकिन गाँव के नाम के साथ मिल कर।


2013/5/12 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>



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अजित वडनेरकर

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May 12, 2013, 7:16:22 AM5/12/13
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बलजीत भाई,
दम, धम् में दबाव का भाव ही मुख्य है। दमामा में जहाँ पीटना ठोकना प्रमुख है वहीं दम, दमा (अर्थात श्वास वाला दबाव) ये भी इन्ही का विस्तार है। शब्दों का सफर में विस्तार से इसकी व्याख्या तीन या चार कड़ियों में है। प्रस्तुत चर्चा में दमामा शब्द कहीं पढ़ा था, सो मैने लिंक दिया।
बसाहट के अर्थ में दमामी शब्द के बारे में अभी मैंने कुछ नहीं सोचा है। वैसे राहुलजी के सोच की दिशा सही लग रही है। मेरा विचार है कि जिस प्रमुख गाँव में राजस्व वसूली का काम दमामे की घोषणा से होता होगा उसके साथ दमामी शब्द जुड़ा। एक विशेष तिथि को आसपास की बसाहटों से लोग उस घोषणा को सुनने विशेष आबादी या गाँव में एकत्र होते होंगे। पुराने दौर में राजस्व वसूली या अन्य कार्यों के सम्पादन के लिए आम घोषणाओं या मुनादी का बड़ा चलन था। ये मुनादियाँ प्रायः ढोल, नगाड़े, दमामा या ऐसे ही अन्य वाद्यों के ज़रिये ध्यान आकर्षित करने के बाद की जाती थीं। धार्मिक दमादम स्पष्ट ही कलंदरों के दम लगाने की परम्परा दिख रही है। मस्त विशेषण से यह और भी स्पष्ट है। एक ही धातु की विभिन्न अर्थवत्ताएँ होती हैं जो कड़ी दर कड़ी जुड़ी भी रहती हैं। भावों के स्तर पर उनमें वैविध्य विकसित होता जाता है किन्तु उनमें मूल अर्थ की सूक्ष्म धारा भी प्रवाहित रहती है। भाषा, व्युत्पत्ति और विवेचना में दिलचस्पी रखने वालों के लिए उसे पहचानना बहुत कठिन भी नहीं है।
सादर,
अजित


2013/5/12 दिनेशराय द्विवेदी <drdwi...@gmail.com>



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दिनेशराय द्विवेदी

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May 12, 2013, 7:30:42 AM5/12/13
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दमदमा मस्त कलंदर नहीं, बल्कि दमादम मस्त कलंदर है।


2013/5/12 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
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