वैसे मेरे जवाब को सुनकर 'उनकी बाँछें खिल गई' हों, ऐसा बिलकुल भी नहीं
हुआ..
मेरा अनुमान है कि बाँछों का सम्बन्ध मुछों से है. हर्ष भरी मुस्कान के साथ मुछें भी चोड़ी होती है उसे खिलना कहते है.
2010/9/22 अभय तिवारी <abha...@gmail.com>
कल चैट पर अनूप शुक्ला जी से बात हो रही थी, बात ही बात में उन्होने
मुझसे पूछा कि बाँछें का मतलब क्या होता है.. तो मैंने तो कह दिया कि
मुझे मालूम भी होगा तो चैट पर तो नहीं बताऊँगा.. शब्द चर्चा में पूछिये
तो आप के सवाल को सीरियसली लिया जाएगा.. ठीक कहा न मैंने?
वैसे मेरे जवाब को सुनकर 'उनकी बाँछें खिल गई' हों, ऐसा बिलकुल भी नहीं
हुआ..
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From: anil janvijay
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Sent: Wednesday, September 22, 2010 12:24 PM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] बाँछें
बाँछा का मतलब होता है-- इच्छा । और बाछ का मतलब होता है मुँह का कोना या होंठ
मुँह के कोने के अर्थ में बाछ का प्रयोग के बारे में मेरी कोई जानकारी नहीं लेकिन इच्छा के अर्थ में बाँछा पर मेरा भी यही सोचना है अनिल जी। संस्कृत में वाञ्छ धातु है जिसका अर्थ है इच्छा या कामना करना। इसी वाञ्छ से वांछा, वांछना और वांछित जैसे शब्द निकलते हैं। बाँछे मेरी समझ में इसी वांछना का एक रूप है.. बांछे खिलना मतलब इच्छाएं खुल जाना, कामनाओं में वृद्धि होना।
----- Original Message ----- From: anil janvijay
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Sent: Wednesday, September 22, 2010 12:24 PM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] बाँछें
बाँछा का मतलब होता है-- इच्छा । और बाछ का मतलब होता है मुँह का कोना या होंठ का कोना । मुस्कुराते हुए मुँह के दोनों कोने फ़ैल जाते हैं, इसीलिए कहा जाता है "बाछें खिलना" । "बाँछें" बाछें का ही ग़लत उच्चारण है ।
सौ मिल जायें इसकी कामना दबा के घूम रहे थे.. मिल गए सौ.. तो खिल गईं बाँछें..
और लगे सोचने कि जब सौ मिल सकते हैं तो हजार क्यों नहीं.. अब तो हजार चाहिये!
इसके उलट सौ की कामना थी.. जब सौ भी नहीं मिलते तो ग़रीब बेचारा साठ-सत्तर पर
समझौता करने को तैयार हो जाता है..
और ये व्युत्पत्ति मेरा अनुमान है.. कोई परम सत्य नहीं..
अब अनिलजी और अभयभाई भी इसी तरह सोचते हैं तो लगता है यही सही है।
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शुभकामनाओं सहित
अजित
http://shabdavali.blogspot.com/
Baachh, baachein is :
"corners of the mouth". Baachein khilna (corners of the mouths blooming) means "to be delighted".
Baanchh (with nasal vowel) is "desire" in Brajbhasha. Of course you're lucky, desire can lead to delight (anandalahari, madanalahari...).
देखें
http://groups.google.la/group/hindi/tree/browse_frm/month/2006-05/368083eb5f78b741?rnum=11&_done=/group/hindi/browse_frm/month/2006-05%3F#doc_7f954798de4263b2
यानी अभय , अनिल और राजेन्द्र तीनो सही हैं. बांछें[ होंठों के कोने ] बदन में वांछा के चलते खिलती है और मुहावरे में उस की संतुष्टि या संतुष्टि की उम्मीद के चलते.
याद आता है कि रागदरबारी में जब किसी की बांछें खिलतीं हैं , श्रीलाल शुक्ल यह जोड़ना नहीं भूलते-..' वे शरीर में जहां कहीं भी होती हों ..'