बाँछें

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अभय तिवारी

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Sep 22, 2010, 1:20:06 AM9/22/10
to शब्द चर्चा
कल चैट पर अनूप शुक्ला जी से बात हो रही थी, बात ही बात में उन्होने
मुझसे पूछा कि बाँछें का मतलब क्या होता है.. तो मैंने तो कह दिया कि
मुझे मालूम भी होगा तो चैट पर तो नहीं बताऊँगा.. शब्द चर्चा में पूछिये
तो आप के सवाल को सीरियसली लिया जाएगा.. ठीक कहा न मैंने?

वैसे मेरे जवाब को सुनकर 'उनकी बाँछें खिल गई' हों, ऐसा बिलकुल भी नहीं
हुआ..

संजय | sanjay

unread,
Sep 22, 2010, 1:22:33 AM9/22/10
to shabdc...@googlegroups.com
मेरा अनुमान है कि बाँछों का सम्बन्ध मुछों से है. हर्ष भरी मुस्कान के साथ मुछें भी चोड़ी होती है उसे खिलना कहते है.

2010/9/22 अभय तिवारी <abha...@gmail.com>



--
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संजय बेंगाणी | sanjay bengani | 09601430808
छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन
ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़, मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात. 
web : www.chhavi.inwww.tarakash.comwww.pinaak.org
blog:  www.tarakash.com/joglikhi


Rajendra Swarnkar

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Sep 22, 2010, 1:34:33 AM9/22/10
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फिर , औरतों की तो बांछें कभी खिल ही नहीं सकती … क्यों ?

2010/9/22 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>
मेरा अनुमान है कि बाँछों का सम्बन्ध मुछों से है. हर्ष भरी मुस्कान के साथ मुछें भी चोड़ी होती है उसे खिलना कहते है.

2010/9/22 अभय तिवारी <abha...@gmail.com>

कल चैट पर अनूप शुक्ला जी से बात हो रही थी, बात ही बात में उन्होने
मुझसे पूछा कि बाँछें का मतलब क्या होता है.. तो मैंने तो कह दिया कि
मुझे मालूम भी होगा तो चैट पर तो नहीं बताऊँगा.. शब्द चर्चा में पूछिये
तो आप के सवाल को सीरियसली लिया जाएगा.. ठीक कहा न मैंने?

वैसे मेरे जवाब को सुनकर 'उनकी बाँछें खिल गई' हों, ऐसा बिलकुल भी नहीं
हुआ..



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संजय बेंगाणी | sanjay bengani | 09601430808
छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन
ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़, मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात. 

संजय | sanjay

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Sep 22, 2010, 1:37:26 AM9/22/10
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यह तो सोचा ही नहीं....

2010/9/22 Rajendra Swarnkar <swarnkar...@gmail.com>
ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़, मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात. 

Rajendra Swarnkar

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Sep 22, 2010, 1:54:00 AM9/22/10
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मैं सोचता हूं  ख़ुशी से होंठों  का कानों की दिशा में फैल जाना ही बांछें खिलना है ।

राजस्थानी में बांछें खिलना को राफ्यां छीदी करना कहते हैं ।

राफ  यानी ( ऊपर वाले और नीचे वाले )  होंठों  का संधिस्थल  ।

- राजेन्द्र स्वर्णकार 
शस्वरं

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2010/9/22 Rajendra Swarnkar <swarnkar...@gmail.com>

Pritish Barahath

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Sep 22, 2010, 2:35:53 AM9/22/10
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कहीं इसका सम्बन्ध रोमावलियों से नहीं है  ?
पुलकित से कोई अर्थ-साम्य है ?

2010/9/22 Rajendra Swarnkar <swarnkar...@gmail.com>



--
Pritish Barahath
Jaipur

anil janvijay

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Sep 22, 2010, 2:54:10 AM9/22/10
to shabdc...@googlegroups.com
बाँछा का  मतलब होता है-- इच्छा । और बाछ का मतलब होता है मुँह का कोना या होंठ का कोना । मुस्कुराते हुए मुँह के दोनों कोने फ़ैल जाते हैं, इसीलिए कहा जाता है "बाछें खिलना" । "बाँछें" बाछें का ही ग़लत उच्चारण है ।

2010/9/22 Pritish Barahath <priti...@gmail.com>



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anil janvijay
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Abhay Tiwari

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Sep 22, 2010, 3:06:54 AM9/22/10
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मुँह के कोने के अर्थ में बाछ का प्रयोग के बारे में मेरी कोई जानकारी नहीं
लेकिन इच्छा के अर्थ में बाँछा पर मेरा भी यही सोचना है अनिल जी। संस्कृत में
वाञ्छ धातु है जिसका अर्थ है इच्छा या कामना करना। इसी वाञ्छ से वांछा, वांछना
और वांछित जैसे शब्द निकलते हैं। बाँछे मेरी समझ में इसी वांछना का एक रूप है..
बांछे खिलना मतलब इच्छाएं खुल जाना, कामनाओं में वृद्धि होना।


----- Original Message -----
From: anil janvijay
To: shabdc...@googlegroups.com
Sent: Wednesday, September 22, 2010 12:24 PM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] बाँछें


बाँछा का मतलब होता है-- इच्छा । और बाछ का मतलब होता है मुँह का कोना या होंठ

Rajendra Swarnkar

unread,
Sep 22, 2010, 3:30:37 AM9/22/10
to shabdc...@googlegroups.com
कामनाओं में वृद्धि तो हर दीन  दुखी  बीमार  के मा'मले में भी संभव है ।
…लेकिन  कामनाओं में वृद्धि  के समय  बाछें खिली होने की जगह 
अक्सर  मुंह लटका हुआ ही , मन उदास ही मिलेगा ।





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2010/9/22 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>
मुँह के कोने के अर्थ में बाछ का प्रयोग के बारे में मेरी कोई जानकारी नहीं लेकिन इच्छा के अर्थ में बाँछा पर मेरा भी यही सोचना है अनिल जी। संस्कृत में वाञ्छ धातु है जिसका अर्थ है इच्छा या कामना करना। इसी वाञ्छ से वांछा, वांछना और वांछित जैसे शब्द निकलते हैं। बाँछे मेरी समझ में इसी वांछना का एक रूप है.. बांछे खिलना मतलब इच्छाएं खुल जाना, कामनाओं में वृद्धि होना।


----- Original Message ----- From: anil janvijay
To: shabdc...@googlegroups.com
Sent: Wednesday, September 22, 2010 12:24 PM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] बाँछें


बाँछा का  मतलब होता है-- इच्छा । और बाछ का मतलब होता है मुँह का कोना या होंठ का कोना । मुस्कुराते हुए मुँह के दोनों कोने फ़ैल जाते हैं, इसीलिए कहा जाता है "बाछें खिलना" । "बाँछें" बाछें का ही ग़लत उच्चारण है ।

Abhay Tiwari

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Sep 22, 2010, 3:59:55 AM9/22/10
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हर दीन दुखी बीमार की कामनाएं होती हैं.. लेकिन कामनाओं की वृद्धि, सफलता के
मकाम पर पहुँचने पर होती है..

सौ मिल जायें इसकी कामना दबा के घूम रहे थे.. मिल गए सौ.. तो खिल गईं बाँछें..
और लगे सोचने कि जब सौ मिल सकते हैं तो हजार क्यों नहीं.. अब तो हजार चाहिये!

इसके उलट सौ की कामना थी.. जब सौ भी नहीं मिलते तो ग़रीब बेचारा साठ-सत्तर पर
समझौता करने को तैयार हो जाता है..

Pritish Barahath

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Sep 22, 2010, 4:07:43 AM9/22/10
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नहीं अभयजी ! यहाँ आपसे तनिक असहमत हैं।
बाँछें खिलना मुहावरे का प्रयोग तो तभी करते हैं जब कामना पूरी होने पर अत्यन्त प्रसन्नता होती है।
बाँछें खिलना कामना में वृद्धि होना नहीं जो सौ मिल गये हैं उनके मिल जानी की प्रसन्नता ही बाँछें खिलना है, इसके बाद हजार की कामना होती होगी होने दें, लेकिन वह बाँछें खिलना तो नहीं कहलायेगा। बिना सौ की पूर्ति हुए भी हजार की कामना जन्म ले सकती है (संभावना देखकर भी) तब क्या वह बाँछें खिलना हुआ ?

2010/9/22 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>



--
Pritish Barahath
Jaipur

Abhay Tiwari

unread,
Sep 22, 2010, 4:13:05 AM9/22/10
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बन्धु मेरी समझ से तो ये शब्द वांछना से बना है तो भावार्थ कामना खिलना ही है;
शब्द कालान्तर में चल कर कुछ का कुछ अर्थ भी वहन कर सकता है.. बाँछे खिलना का
अर्थ शुद्ध प्रसन्नता के अर्थ में लिया ही जाता है..

और ये व्युत्पत्ति मेरा अनुमान है.. कोई परम सत्य नहीं..

अजित वडनेरकर

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Sep 22, 2010, 4:19:41 AM9/22/10
to shabdc...@googlegroups.com
बीते साल इसी बाँछें खिलना वाले बाँछा के बारे में गुरुवर सुरेशकुमार
वर्मा जी से मेरी फोन पर बात हुई थी। मैने उन्हें वांञ्छा, वांछा, बाछा
वाली व्युत्पत्ति के बारे में जानना चाहा था। मुझे लगातार लगता था कि
बाँछा का मूँछ या श्मश्रु से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने सहमति जताई थी।

अब अनिलजी और अभयभाई भी इसी तरह सोचते हैं तो लगता है यही सही है।


--
शुभकामनाओं सहित
अजित
http://shabdavali.blogspot.com/

ashutosh kumar

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Sep 22, 2010, 12:42:10 PM9/22/10
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एक अन्य सूत्र से मिली जानकारी 

Baachh, baachein is : 

"corners of the mouth". Baachein khilna (corners of the mouths blooming) means "to be delighted". 
Baanchh (with nasal vowel) is "desire" in Brajbhasha. Of course you're lucky, desire can lead to delight (anandalahari, madanalahari...). 

देखें 

http://groups.google.la/group/hindi/tree/browse_frm/month/2006-05/368083eb5f78b741?rnum=11&_done=/group/hindi/browse_frm/month/2006-05%3F#doc_7f954798de4263b2

यानी अभय , अनिल और राजेन्द्र तीनो सही हैं. बांछें[ होंठों के कोने ]  बदन में वांछा के चलते खिलती है और मुहावरे में उस की संतुष्टि  या संतुष्टि की उम्मीद के चलते.

याद आता है कि रागदरबारी में जब किसी की बांछें खिलतीं हैं , श्रीलाल शुक्ल यह जोड़ना नहीं भूलते-..' वे शरीर में जहां कहीं भी होती हों ..'

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