पुल्लिंग
On 15 दिस., 06:33, madan mohan arvind <madanmohanarv...@gmail.com>
wrote:
जुगाड़ स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग.
कि समय पर काम आए । २. हिफाजत से रखना । सुरक्षित रखना ।यत्न और रक्षापूर्वक रखना ।जुगाड़ † संज्ञा पुं० [देश० अथवा सं० योग (= जोयन) + हिं० आड़ (प्रत्य०)] १. व्यवस्था । कार्यसाधन

जुगाड़ स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग.
On 19 दिस., 04:21, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> लिंग को लेकर जो उदाहरण प्रस्तुत किए हैं वे पत्रकारों की कमअक्ली का प्रतीक
> हैं। उन्हें मानक मानना हमारी नादानी होगी।
> कोई भी अखबार भाषा को लेकर सजग नहीं है।
>
> मध्यकालीन कवियों नें वैसे ही तुकबन्दी के चक्कर में कई शब्दों के ऐसे रूप
> बदले कि व्युत्पत्ति तलाशने के शौकीन हमेशा चक्कर में पड़ जाते हैं कि किसी
> शब्द का जन्मसूत्र कहीं मिलता है और उसका रूपान्तर चक्कर में डालने वाला!!!
> दरअसल तुक और मात्रा के चक्कर में शब्दों के वे रूपान्तर सचमुच जनमानस में रूढ
> हो गए और हमने सोचा कि वे ज़बान पर चढ़कर हुए रूपान्तर हैं।
>
> बहरहाल बहुत से बदलाव मंजूर हैं, मगर नासमझी के नहीं। हमने भी गलत प्रयोग किया
> तो जैसा आज हम किन्हीं अखबारों को मानक मान कर उदाहरण
> पेश कर रहे हैं (जहाँ भाषा के समझदारों की कमी है) वैसे ही कल को इस समूह का
> लोग हवाला देंगे कि भई अब तो शब्दचर्चा समूह ने भी मान्यता दे दी है। कम से कम
> यहाँ तो भाषा के प्रति सम्वेदनशील लोग ही आते हैं और सही नज़रिए से, सही लिखना
> चाहते हैं न कि परम्परा या शुद्धता की आड़ में।
>
> सो बंधुओं अखबार को मानक न मानें। किसी ज़माने में बोलचाल की भाषा का मानक
> अखबार था, आज नहीं।
>
> जुगाड़ पुल्लिंग है।
>
> 2011/12/19 Madan Mohan Sharma <madanmohanarv...@gmail.com>
>
>
>
>
>
> > आदरणीय, मैंने जुगाड़ के कुछ स्त्रीलिंग प्रयोग भी देखे हैं, आपकी सेवामें
> > प्रस्तुत हैं, क्या अब जुगाड़ को स्त्रीलिंग और पुलिंग दोनों रूपों में
> > स्वीकार किया जाना चाहिए-
> > दैनिक भास्कर- अल्पसंख्यकों को लुभाने की जुगाड़, बैठकों में मस्त नेताजी
> > लिंक
> >http://www.bhaskar.com/article/MH-managed-minorities-2528151.html
> > दैनिक भास्कर- वहां जगह बनाने की जुगाड़ में साइन नहीं की है हॉलीवुड फिल्म
> > लिंक
> >http://bollywood.bhaskar.com/article/ENT-BOL-the-great-gatesby-i
> > s-not-my-gateaway-to-hollywoodamitabh-bachchan-2420307.html
> > भोपाली अफसरों के लिए टिकट की जुगाड़ लिंक
> >http://www.patrika.com/news.aspx?id=728018
> > फिर मंत्री बनने की जुगाड़ में लालू यादव लिंक
> >http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/9116406.cms
> > चाईनीज झालरों ने छीनी कुम्हारों की रोजी, बच्चे पेट की जुगाड़ में सड़कों
> > पर' लिंक
> >www.bundelkhandsamachar.com
>
> > 2011/12/19 ई-स्वामी <esw...@gmail.com>
>
> >> भाई लोग, ई-स्वामी और ई-पंडित में कन्फ़्यूज हो गए हैं ..जुगाड को
> >> स्त्रीलिंग बनाने पर पंडिज्जी आमादा हैं मै नही! :)
>
> >> 2011/12/18 संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com>
>
> >>> स्वामीजी, स्त्री का जुगाड़, स्त्रीलिंग होगा?
>
> >>> 2011/12/18 दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com>
>
> >>>> ई-स्वामी जी,
> >>>> उस अर्थ में भी जुगाड़ पुर्लिंग ही होगा।
>
> >>>> 2011/12/18 ePandit | ई-पण्डित <sharma.shr...@gmail.com>
>
> >>>>> एक अर्थ में जुगाड़ स्त्रीलिंग भी है (कामवासना की पूर्ति के सन्दर्भ
> >>>>> में)। कॉलेज में कुछ छात्र इसका स्लैंग रूप में प्रयोग करते थे - एक जगाड़
> >>>>> फंसै लिया।
>
> >>>>> 2011/12/15 madan mohan arvind <madanmohanarv...@gmail.com>
>
> >>>>>> जुगाड़ स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग.
>
> >>>>> --
> >>>>> *Shrish Benjwal Sharma* *(श्रीश बेंजवाल शर्मा <http://hindi.shrish.in>
> >>>>> )*
> >>>>> ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
> >>>>> *If u can't beat them, join them.*
>
> >>>>> ePandit <http://epandit.shrish.in/>:* *http://epandit.shrish.in/
>
> >>>> --
> >>>> *दिनेशराय द्विवेदी, *कोटा, राजस्थान, भारत
> >>>> Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
> >>>> *क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ... अनवरत <http://anvarat.blogspot.com/> तीसरा
> >>>> खंबा <http://teesarakhamba.blogspot.com/>*
>
> >>> --
> >>> संजय बेंगाणी | sanjay bengani
> >>> *छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन*
> >>> ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़,
> >>> मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात.
> >>> chhavi.in | तरकश <http://www.tarakash.com/2/index.php> | मेरा ब्लॉग<http://www.tarakash.com/joglikhi>
>
> >> --
> >>http://hindini.com
> >>http://hindini.com/eswami
>
> --
>
> *
> अजित*http://shabdavali.blogspot.com/
> मोबाइल-
> औरंगाबाद- 07507777230- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> उद्धृत पाठ दिखाए
On 19 दिस., 04:21, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> लिंग को लेकर जो उदाहरण प्रस्तुत किए हैं वे पत्रकारों की कमअक्ली का प्रतीक
> हैं। उन्हें मानक मानना हमारी नादानी होगी।
> कोई भी अखबार भाषा को लेकर सजग नहीं है।
>
> मध्यकालीन कवियों नें वैसे ही तुकबन्दी के चक्कर में कई शब्दों के ऐसे रूप
> बदले कि व्युत्पत्ति तलाशने के शौकीन हमेशा चक्कर में पड़ जाते हैं कि किसी
> शब्द का जन्मसूत्र कहीं मिलता है और उसका रूपान्तर चक्कर में डालने वाला!!!
> दरअसल तुक और मात्रा के चक्कर में शब्दों के वे रूपान्तर सचमुच जनमानस में रूढ
> हो गए और हमने सोचा कि वे ज़बान पर चढ़कर हुए रूपान्तर हैं।
>
> बहरहाल बहुत से बदलाव मंजूर हैं, मगर नासमझी के नहीं। हमने भी गलत प्रयोग किया
> तो जैसा आज हम किन्हीं अखबारों को मानक मान कर उदाहरण
> पेश कर रहे हैं (जहाँ भाषा के समझदारों की कमी है) वैसे ही कल को इस समूह का
> लोग हवाला देंगे कि भई अब तो शब्दचर्चा समूह ने भी मान्यता दे दी है। कम से कम
> यहाँ तो भाषा के प्रति सम्वेदनशील लोग ही आते हैं और सही नज़रिए से, सही लिखना
> चाहते हैं न कि परम्परा या शुद्धता की आड़ में।
>
> सो बंधुओं अखबार को मानक न मानें। किसी ज़माने में बोलचाल की भाषा का मानक
> अखबार था, आज नहीं।
>
> जुगाड़ पुल्लिंग है।
>
> 2011/12/19 Madan Mohan Sharma <madanmohanarv...@gmail.com>
>
>
>
>
>
> > आदरणीय, मैंने जुगाड़ के कुछ स्त्रीलिंग प्रयोग भी देखे हैं, आपकी सेवामें
> > प्रस्तुत हैं, क्या अब जुगाड़ को स्त्रीलिंग और पुलिंग दोनों रूपों में
> > स्वीकार किया जाना चाहिए-
> > दैनिक भास्कर- अल्पसंख्यकों को लुभाने की जुगाड़, बैठकों में मस्त नेताजी
> > लिंक
> >http://www.bhaskar.com/article/MH-managed-minorities-2528151.html
> > दैनिक भास्कर- वहां जगह बनाने की जुगाड़ में साइन नहीं की है हॉलीवुड फिल्म
> > लिंक
> >http://bollywood.bhaskar.com/article/ENT-BOL-the-great-gatesby-i
> > s-not-my-gateaway-to-hollywoodamitabh-bachchan-2420307.html
> > भोपाली अफसरों के लिए टिकट की जुगाड़ लिंक
> >http://www.patrika.com/news.aspx?id=728018
> > फिर मंत्री बनने की जुगाड़ में लालू यादव लिंक
> >http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/9116406.cms
> > चाईनीज झालरों ने छीनी कुम्हारों की रोजी, बच्चे पेट की जुगाड़ में सड़कों
> > पर' लिंक
> >www.bundelkhandsamachar.com
>
> > 2011/12/19 ई-स्वामी <esw...@gmail.com>
>
> >> भाई लोग, ई-स्वामी और ई-पंडित में कन्फ़्यूज हो गए हैं ..जुगाड को
> >> स्त्रीलिंग बनाने पर पंडिज्जी आमादा हैं मै नही! :)
>
> >> 2011/12/18 संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com>
>
> >>> स्वामीजी, स्त्री का जुगाड़, स्त्रीलिंग होगा?
>
> >>> 2011/12/18 दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com>
>
> >>>> ई-स्वामी जी,
> >>>> उस अर्थ में भी जुगाड़ पुर्लिंग ही होगा।
>
> >>>> 2011/12/18 ePandit | ई-पण्डित <sharma.shr...@gmail.com>
>
> >>>>> एक अर्थ में जुगाड़ स्त्रीलिंग भी है (कामवासना की पूर्ति के सन्दर्भ
> >>>>> में)। कॉलेज में कुछ छात्र इसका स्लैंग रूप में प्रयोग करते थे - एक जगाड़
> >>>>> फंसै लिया।
>
> >>>>> 2011/12/15 madan mohan arvind <madanmohanarv...@gmail.com>
>
> >>>>>> जुगाड़ स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग.
>
> >>>>> --
> >>>>> *Shrish Benjwal Sharma* *(श्रीश बेंजवाल शर्मा <http://hindi.shrish.in>
> >>>>> )*
> >>>>> ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
> >>>>> *If u can't beat them, join them.*
>
> >>>>> ePandit <http://epandit.shrish.in/>:* *http://epandit.shrish.in/
>
> >>>> --
> >>>> *दिनेशराय द्विवेदी, *कोटा, राजस्थान, भारत
> >>>> Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
> >>>> *क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ... अनवरत <http://anvarat.blogspot.com/> तीसरा
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> >>> मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात.
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> अजित*http://shabdavali.blogspot.com/
> मोबाइल-
@राजेंदर
मैंने परंपरागत कवियों की छंदबद्ध कविता के सिलसिले में यह बात कही है.
आज कल पंजाबी में भी शायद ही कोई ऐसे करता है. फिर भी ढून्ढने पर आज भी
मिसालें मिल जायेंगे. और मैंने तो इसको बुरी बात कहा ही नहीं. हिंदी में
भी ढेर ऐसी कवितायेँ हैं . आपके ब्लॉग में मै ज़रूर पधारूंगा , कविता
मानने के लिए, अशुधियां देखने के लिए नहीं!
On 19 दिस., 08:31, Rajendra Swarnkar <swarnkarrajen...@gmail.com>
wrote:
> बहुत अच्छी चर्चा रही है ...
>
> @ कवियों को तो बख्श दो , उनका तो यह जन्मसिद्ध अधिकार है .
> जैसे बच्चे की तुतलाहट मन को भाती है ऐसे ही कवियों का शब्द को बिगाड़ना
> अच्छा लगता है.
> यह एक तरह अलंकार का ही रूप है. कविता आखिर है क्या,- शब्दों का हेरफेर.
> आदरणीय बलजीत जी , पता नहीं आप किस प्रकार के कवियों की बात कर रहे हैं
>
> *मैं आपको आमंत्रित करता हूं , मेरे ब्लॉग
> शस्वरं<http://shabdswarrang.blogspot.com>पर पधारें विशुद्ध काव्य का
> ब्लॉग है ६८ प्रविष्टियों में कोई ७५-८० गीत-ग़ज़ल
> हैं , एक भी शब्द गलत खोज कर बताइए ... :)*
> ये रहा लिंकhttp://shabdswarrang.blogspot.com
>
> 2011/12/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
> > > उद्धृत पाठ दिखाए- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
On 19 दिस., 09:08, Abhay Tiwari <abhay...@gmail.com> wrote:
> एक मिसाल मेरे ज़ेहन में आती है: तू गंगा की मौज है मैं जमना का धारा
>
> परम्परा से धारा स्त्रीलिंग है।
>
> 2011/12/19 Rajendra Swarnkar <swarnkarrajen...@gmail.com>
>
>
>
>
>
> > बहुत अच्छी चर्चा रही है ...
>
> > @ कवियों को तो बख्श दो , उनका तो यह जन्मसिद्ध अधिकार है .
> > जैसे बच्चे की तुतलाहट मन को भाती है ऐसे ही कवियों का शब्द को बिगाड़ना
> > अच्छा लगता है.
> > यह एक तरह अलंकार का ही रूप है. कविता आखिर है क्या,- शब्दों का हेरफेर.
> > आदरणीय बलजीत जी , पता नहीं आप किस प्रकार के कवियों की बात कर रहे हैं
>
> > *मैं आपको आमंत्रित करता हूं , मेरे ब्लॉग शस्वरं<http://shabdswarrang.blogspot.com>पर पधारें विशुद्ध काव्य का ब्लॉग है ६८ प्रविष्टियों में कोई ७५-८० गीत-ग़ज़ल
> > हैं , एक भी शब्द गलत खोज कर बताइए ... :)*
> > ये रहा लिंक
> >http://shabdswarrang.blogspot.com
>
> > 2011/12/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
> ...
>
> और पढ़ें »- उद्धृत पाठ छिपाएँ -

और अजीत जी कृपया कवियों को तो बख्श दो , उनका तो यह जन्मसिद्ध अधिकार



On 19 दिस., 09:42, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> राजेन्द्रजी,
> शब्दों के रूपान्तर या उन्हें मात्रा के अनुकूल बनाने की परिपाटी तो वेदों में
> भी मिलती है जहाँ शब्दों के एकाधिक उच्चार मिलते हैं। कविताजगत की यह
> सार्वदेशिक प्रवृत्ति है। इसमें कोई नकारात्मक अभिव्यक्ति नहीं है। प्राचीन और
> मध्यकालीन कवियों के यहाँ यह छेड़छाड़ ज्यादा हुई है। कबीर कहीं पर कबीरा है
> तो कहीं कबिरा। बात वही मात्रा की है। दोनों रूप प्रचलित हैं। यूँ देखा जाए तो
> कबीर से कबीरा या कबिरा होना ही नहीं चाहिए था। पर रूपान्तर होने से समान
> मात्रा वाले शब्दों के साथ निर्वाह हो गया और अगली पंक्तियों में रजकता के साथ
> अर्थवत्ता में भी निरालापन आ गया।
>
> कविताओं के ज़रिए भी भाषा को नए नए शब्द मिलते हैं।
>
> 2011/12/19 Rajendra Swarnkar <swarnkarrajen...@gmail.com>
>
>
>
>
>
> > बहुत अच्छी चर्चा रही है ...
>
> > @ कवियों को तो बख्श दो , उनका तो यह जन्मसिद्ध अधिकार है .
> > जैसे बच्चे की तुतलाहट मन को भाती है ऐसे ही कवियों का शब्द को बिगाड़ना
> > अच्छा लगता है.
> > यह एक तरह अलंकार का ही रूप है. कविता आखिर है क्या,- शब्दों का हेरफेर.
> > आदरणीय बलजीत जी , पता नहीं आप किस प्रकार के कवियों की बात कर रहे हैं
>
> > *मैं आपको आमंत्रित करता हूं , मेरे ब्लॉग शस्वरं<http://shabdswarrang.blogspot.com>पर पधारें विशुद्ध काव्य का ब्लॉग है ६८ प्रविष्टियों में कोई ७५-८० गीत-ग़ज़ल
> > हैं , एक भी शब्द गलत खोज कर बताइए ... :)*
> > ये रहा लिंक
> >http://shabdswarrang.blogspot.com
>
> > 2011/12/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
> ...
>
> और पढ़ें »- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
मेरा ख्याल है *कबीरा तो *कबीर का सम्बोधकी रूप बनाने के लिए किया गया
On 19 दिस., 10:10, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> बललजीत भाई,
> ये सामान्य वृत्ति रही है।
> वटुः से बिट्टू, बिट्टा, बेटवा, बेटा, बिट्टी, बिट्टन, बिटुला, बिटुड़ा, बेटू,
> बिटुड़ी, बिटुड़ली और यहाँ तक कि बेटीबाई जैसे सम्बोधन भी
> देखने को मिलते हैं। नामों के रूपान्तरण में लगाव तत्व महत्वपूर्ण होता है।
> आदर या वात्सल्य दोनों ही स्थितियों में
> सम्बोधनों के साथ मनोभाव जुड़ने से रूपान्तर होता है।
>
> 2011/12/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
मेरे भतीजे का छोटा नाम बिट्टू है और मैं उसको हमेशा *बटवर्धन कहकर
On 19 दिस., 10:10, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> बललजीत भाई,
> ये सामान्य वृत्ति रही है।
> वटुः से बिट्टू, बिट्टा, बेटवा, बेटा, बिट्टी, बिट्टन, बिटुला, बिटुड़ा, बेटू,
> बिटुड़ी, बिटुड़ली और यहाँ तक कि बेटीबाई जैसे सम्बोधन भी
> देखने को मिलते हैं। नामों के रूपान्तरण में लगाव तत्व महत्वपूर्ण होता है।
> आदर या वात्सल्य दोनों ही स्थितियों में
> सम्बोधनों के साथ मनोभाव जुड़ने से रूपान्तर होता है।
>
> 2011/12/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
On 19 दिस., 10:41, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> बटवर्धन मज़ेदार है।
> पटवर्धन पराठी सरनेम है।
>
> 2011/12/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
एक और बात, दूसरों को छेड़ने के लिए उनका नाम विकृत किया जाता है. यह
मेरा घर का नाम "बाळू" साथी इसे हिन्दी का बालू समझें।
On 19 दिस., 10:53, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> मेरा घर का नाम "बाळू" साथी इसे हिन्दी का बालू समझें।
> मुझसे बड़े बहन-भाई नाराज़ी में मेरे नाम का उल्लेख अन्य पुरुष में शिकायत के
> स्वर में "त्या बाळट्ल्याने"
> अर्थात "उस बालट्टे ने" किया करते थे:)
>
> 2011/12/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
On 19 दिस., 11:07, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> बिल्लू और बालू में छन रही है:)
>
> 2011/12/19 अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com>
>
>
>
> > *ये तो चक दे हो गया जी
> > इसीलिए यहाँ भी घबरा रहे थे बताने में प्राजी[?]*
> ...
>
> और पढ़ें »
>
> 364.gif
> < 1Kदेखेंडाउनलोड करें- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
On 19 दिस., 11:38, Anil Janvijay <aniljanvi...@gmail.com> wrote:
> बलजीत बासी जी से क्षमा सहित (यह बात आपके लिए नहीं है)
> हिन्दी को अपनी मातृभाषा बताने वाले पंजाबियों ने और हिन्दी में लिखने वाले
> पंजाबी भाषी लेखकों ने
> हिन्दी का जितना बेड़ा ग़र्क किया है, उतना शायद ही किसी ने किया हो। पंजाबीनुमा
> हिन्दी लिखने वाले
> इन लेखकों से मैं कभी-कभी इसलिए चिढ़ जाता हूँ कि वे लोग हिन्दी की टाँग ही
> नहीं तोड़ते, हिन्दी का
> ठेका भी ले लेते हैं कि उनसे बड़ा हिन्दी का विद्वान कोई नहीं है।
>
> 2011/12/19 अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com>
>
>
>
> > ग़ज़ब कर दिया न आपने। साहित्यिकों जैसी विनम्रता का प्रदर्शन?
> > अब आप प्राजी की जगह ब्राजी हो गए हैं।
> > मज़ेदार रही यह शृंखला। अब इसे विराम देने का वक्त आ गया है।
>
> > 2011/12/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
> ...
>
> और पढ़ें »- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
ये बेचारे दोनों तरफ से दुर्कारे जाते हैं , पंजाबी साहित्यकारों की ओर
On 19 दिस., 12:42, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> अनिलजी की हिन्दी पंजाबी की इस बात पर मेरा यक़ीन नहीं है।
>
> 2011/12/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
On Dec 19 2011, 6:29 pm, Abhay Tiwari <abhay...@gmail.com> wrote:
> हिन्दी में लिंग का कोई तार्किक नियम न होने से ऐसी अराजकता होती है.. इस पर
> विद्वान लोग बड़ी-बड़ी बहसे कर चुके हैं पर हल कोई नहीं निकला..
>
> इस पर ऊर्जा व्यय करने से कोई लाभ नहीं.. हर आदमी की ज़ुबान नहीं पकड़ी जा
> सकती.. जैसा है ़चलने दीजिये..
>
> यही हमारी हिन्दी का स्वभाव है कि इसमें प्रयोगों की विविधता है।
>
> 2011/12/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
>
> > आपकी बात से मतभेद नहीं है. फिर भी यह तो मानना पड़ेगा कि बहुत से लोग
> > हैं, जिन में से कई अखबारों में काम करते होंगे जो इस शब्द को
> > स्त्रीलिंग समझते हैं. उनकी नालायकी इस बात में है कि उनहोंने मानक रूप
> > देखने का कष्ट नहीं किया. साईकल को आम तौर पर पुल्लिंग माना जाता है
> > लेकिन कई लोग इसको स्त्रीलिंग की तरह बोलते हैं. दहीं शब्द का भी यही
> > हाल है, यहाँ तक कि बुल्ले शाह जैसा कवी इसको स्त्रीलिंग बना रहा है.
> > इसमें आपकी कविता वाली तोलतुकांत वाली मजबूरी भी हो सकती है:
> > "उत्तों आई धम्मी, दहीं नई जम्मी" ( सुबह होने को है लेकिन अभी तक दहीं
> > नहीं जमा). वैसे दहीं भी ऐसे शब्दों में है जिनको कई लोग स्त्रीलिंग
> > समझते हैं. मैंने ऐसा देखा है कि बहुत सारे शब्द जो परम्परा से पुल्लिंग
> > रहे हैं उनको शहरी लोग स्त्रीलिंग बना रहे हैं. इस मानसिकता को इस मंच पर
> > विचारना चाहिए. क्यों ना एक छोटी सी सूची बनाई जाये? वचन का भी कुछ ऐसा
> > ही हाल है. ढाबों वाले आम ही कहते हैं, एक चाय, दो चाय.
>
> > On 19 दिस., 04:21, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> > > लिंग को लेकर जो उदाहरण प्रस्तुत किए हैं वे पत्रकारों की कमअक्ली का प्रतीक
> > > हैं। उन्हें मानक मानना हमारी नादानी होगी।
> > > कोई भी अखबार भाषा को लेकर सजग नहीं है।
>
> > > मध्यकालीन कवियों नें वैसे ही तुकबन्दी के चक्कर में कई शब्दों के ऐसे रूप
> > > बदले कि व्युत्पत्ति तलाशने के शौकीन हमेशा चक्कर में पड़ जाते हैं कि किसी
> > > शब्द का जन्मसूत्र कहीं मिलता है और उसका रूपान्तर चक्कर में डालने वाला!!!
> > > दरअसल तुक और मात्रा के चक्कर में शब्दों के वे रूपान्तर सचमुच जनमानस में
> > रूढ
> > > हो गए और हमने सोचा कि वे ज़बान पर चढ़कर हुए रूपान्तर हैं।
>
> > > बहरहाल बहुत से बदलाव मंजूर हैं, मगर नासमझी के नहीं। हमने भी गलत प्रयोग
> > किया
> > > तो जैसा आज हम किन्हीं अखबारों को मानक मान कर उदाहरण
> > > पेश कर रहे हैं (जहाँ भाषा के समझदारों की कमी है) वैसे ही कल को इस समूह का
> > > लोग हवाला देंगे कि भई अब तो शब्दचर्चा समूह ने भी मान्यता दे दी है। कम से
> > कम
> > > यहाँ तो भाषा के प्रति सम्वेदनशील लोग ही आते हैं और सही नज़रिए से, सही
> > लिखना
> > > चाहते हैं न कि परम्परा या शुद्धता की आड़ में।
>
> > > सो बंधुओं अखबार को मानक न मानें। किसी ज़माने में बोलचाल की भाषा का मानक
> > > अखबार था, आज नहीं।
>
> > > जुगाड़ पुल्लिंग है।
>
> > > 2011/12/19 Madan Mohan Sharma <madanmohanarv...@gmail.com>
>
> > > > आदरणीय, मैंने जुगाड़ के कुछ स्त्रीलिंग प्रयोग भी देखे हैं, आपकी सेवामें
> > > > प्रस्तुत हैं, क्या अब जुगाड़ को स्त्रीलिंग और पुलिंग दोनों रूपों में
> > > > स्वीकार किया जाना चाहिए-
> > > > दैनिक भास्कर- अल्पसंख्यकों को लुभाने की जुगाड़, बैठकों में मस्त नेताजी
> > > > लिंक
> > > >http://www.bhaskar.com/article/MH-managed-minorities-2528151.html
> > > > दैनिक भास्कर- वहां जगह बनाने की जुगाड़ में साइन नहीं की है हॉलीवुड
> > फिल्म
> > > > लिंक
> > > >http://bollywood.bhaskar.com/article/ENT-BOL-the-great-gatesby-i
> > > > s-not-my-gateaway-to-hollywoodamitabh-bachchan-2420307.html
> > > > भोपाली अफसरों के लिए टिकट की जुगाड़ लिंक
> > > >http://www.patrika.com/news.aspx?id=728018
> > > > फिर मंत्री बनने की जुगाड़ में लालू यादव लिंक
> > > >http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/9116406.cms
> > > > चाईनीज झालरों ने छीनी कुम्हारों की रोजी, बच्चे पेट की जुगाड़ में सड़कों
> > > > पर' लिंक
> > > >www.bundelkhandsamachar.com
>
> > > > 2011/12/19 ई-स्वामी <esw...@gmail.com>
>
> > > >> भाई लोग, ई-स्वामी और ई-पंडित में कन्फ़्यूज हो गए हैं ..जुगाड को
> > > >> स्त्रीलिंग बनाने पर पंडिज्जी आमादा हैं मै नही! :)
>
> > > >> 2011/12/18 संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com>
>
> > > >>> स्वामीजी, स्त्री का जुगाड़, स्त्रीलिंग होगा?
>
> > > >>> 2011/12/18 दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com>
>
> > > >>>> ई-स्वामी जी,
> > > >>>> उस अर्थ में भी जुगाड़ पुर्लिंग ही होगा।
>
> > > >>>> 2011/12/18 ePandit | ई-पण्डित <sharma.shr...@gmail.com>
>
> > > >>>>> एक अर्थ में जुगाड़ स्त्रीलिंग भी है (कामवासना की पूर्ति के सन्दर्भ
> > > >>>>> में)। कॉलेज में कुछ छात्र इसका स्लैंग रूप में प्रयोग करते थे - एक
> > जगाड़
> > > >>>>> फंसै लिया।
>
> > > >>>>> 2011/12/15 madan mohan arvind <madanmohanarv...@gmail.com>
>
> > > >>>>>> जुगाड़ स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग.
>
> > > >>>>> --
> > > >>>>> *Shrish Benjwal Sharma* *(श्रीश बेंजवाल शर्मा <
> >http://hindi.shrish.in>
> > > >>>>> )*
> > > >>>>> ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
> > > >>>>> *If u can't beat them, join them.*
>
> > > >>>>> ePandit <http://epandit.shrish.in/>:* *http://epandit.shrish.in/
>
> > > >>>> --
> > > >>>> *दिनेशराय द्विवेदी, *कोटा, राजस्थान, भारत
> > > >>>> Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
> > > >>>> *क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ... अनवरत <http://anvarat.blogspot.com/>
> > तीसरा
> > > >>>> खंबा <http://teesarakhamba.blogspot.com/>*
>
> > > >>> --
> > > >>> संजय बेंगाणी | sanjay bengani
> > > >>> *छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन*
> > > >>> ए-507, स्मिता टावर,
>
> ...
>
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