मेरा पूरा बचपन ही वामपंथियों के साथ गुज़रा है।
घर के अन्दर भी और घर के बाहर भी।
माँ बहन की गाली मुँह से न निकालने वालें के लिए सबसे प्रिय और सहज गाली
थी, ‘बूर्ज़ुआ’।
जैसे ही किसी ने सत्ता पक्ष का सर्मथन किया, “साला बूर्ज़ुआ है”।
जैसे ही कोई जींस और टी-शर्ट पहनकर सामने से गुज़रा, “साला बूर्ज़ुआ है”।
जैसे ही किसी ने औद्योगिकरण की बात की, “साला बूर्ज़ुआ है”।
यहाँ तक कि अगर किसी ने दार्जिलिंग टी, वह भी बिना दूध और बिना निम्बू के
बना कर पी लिया तो वह भी ‘बूर्ज़ुआ’ कहलाता था।
खादी कांग्रेस का प्रतीक था। जींस अमेरिकी था। वे दोनों अलग अलग
‘बूर्ज़ुआजी’ थे। पर दोनों का कम्बीनेशन यानी खादी का कुर्ता और जींस
पहनने वाले वामपंथी कहलाते थे।
हिन्दी भाषी वामपंथियों के सामने अगर कोई अंग्रेज़ी माध्यम से पढ़ा, अपनी
धौंस जमा कर निकल जाता, तो इनकी सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती थी, क्योंकि
इनकी समझ में कुछ आता नहीं था। उसके जाने के बाद ये कहते थे, “साला कहता
तो सही है, लेकिन है साला बूर्ज़ुआ”।
मैं किसी को आहत नहीं करना चाहता, केवल पुरानी बातें याद कर रहा हूँ। एक
फ़्रांसीसी नाटककार ‘मौलियर’ ने मध्ययुग में एक नाटक लिखा था “बूर्ज़ुआ
जेंटलमैन”।
मुझे केवल इतना ही पता है कि यह फ़्रांसीसी शब्द है। पर इसका अर्थ नहीं
पता। एक ज़माने में हिन्दी में इसका बहुत इस्तेमाल हुआ। तो क्या हम इसे
हिन्दी का शब्द मान सकते हैं ?
अगर संभव हो तो अर्थ भी बताएँ।
2010/7/7 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>:
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aabha
mumbai-67
अजित साहब ने 'पुर' = क़िला(वैदिक उदा. पुरंदर=इन्द्र) की चर्चा की है, उसको थोड़ा और
खींचने की संभावना है।
रविकान्त
Abhay Tiwari wrote:
> बृहस्पति वाले बृह से बरो और बुर्ज होते हुए बुर्ज़ुआ का रिश्ता अजित भाई ने बख़ूबी बताया
> है। इसका मार्क्सवादी अर्थ कुछ ऐसा है-
>
> मार्क्सवादी हलक़ो में इसे गाली की तरह प्रयोग यूं करते हैं क्योंकि मध्यकाल में योरोप या
> फ़्रांस में तीन प्रमुख सामाजिक वर्ग थे; कुलीन सामन्त, छोटे-मोटे व्यापारी और आम जनता।
> औद्यौगीकरण के साथ, और फ़्रांसीसी क्रांति के बाद कुलीन सामन्ती वर्ग तो सत्ताहीन कर
> दिया गया और असली सत्ता इस तथाकथित मध्यवर्ग या बुर्ज़ुआ के हाथ में आ गई क्योंकि वो
> अपने पैसे की ताक़त से उत्पादन के साधनों पर क़ब्ज़ा कर के पूँजीपति बन बैठा। तो ऐसा
> ग़ैर-कुलीन वर्ग जिसने अपने शिक्षा और सम्पदा के ज़रिये उत्पादन के साधनों पर क़ब्ज़ा कर
> लिया वह है बुर्ज़ुआ।
> इस के अलावा एक और शब्द है पेटी बुर्ज़ुआ- इसका भी मार्क्सवादी मतलब वही है और इस
> वर्ग के अरमान भी वही हैं लेकिन औक़ात ज़रा कम है।
>
> ----- Original Message -----
> *From:* अजित वडनेरकर <mailto:wadnerk...@gmail.com>
> *To:* shabdc...@googlegroups.com
> <mailto:shabdc...@googlegroups.com>
> *Sent:* Wednesday, July 07, 2010 2:05 AM
> *Subject:* Re: बूर्ज़ुआ
>
> फरीद भाई, इस शब्द के बारे में सफर पर
> कुछ माह पहले लिखा था-
> *बुर्जुआ वर्ग का बुर्ज
> <http://shabdavali.blogspot.com/2010/04/blog-post_21.html>*
>
> 2010/7/7 farid khan <kfari...@gmail.com
> <mailto:kfari...@gmail.com>>