शब्दों में अनुस्वार का प्रयोग और शब्दों की वर्तनी का शुद्ध अथवा अशुद्ध होना

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Chopra

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May 17, 2013, 8:37:28 PM5/17/13
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महानुभावो,

कृपया नीचे तालिका में दिए गए शब्द देखें:

1

2

आरंभ

आरम्भ

संतुष्टि

सन्तुष्टि

संबंध

सम्बन्ध

प्रबंधक

प्रबन्धक

संपर्क

सम्पर्क

अंवेषक

अन्वेषक


आपके विचार में कॉलम 1 में दिए गए शब्दों की वर्तनी सही है या कॉलम 2 में दिए गए शब्दों की?

अगर दोनों वर्तनियाँ सही हैं तो कॉलम 1 में दिए गए शब्दों की वर्तनी अधिक शुद्ध है या कॉलम 2 में दिए गए शब्दों की?

सादर,

चोपड़ा

दिनेशराय द्विवेदी

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May 17, 2013, 8:42:26 PM5/17/13
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अंन्वेषक को छोड़ कर सभी शब्द सही हैं। अंन्वेषक गलत है। क्यों कि  व किसी भी समूह का सदस्य नहीं हैं। इस कारण अनुस्वार का प्रयोग उचित नहीं है। शब्द में अर्धाक्षर संयुक्त अक्षर का प्रथम अक्षऱ होता है। यदि प्रथमाक्षर द्वितीय अक्षर के समूह का अंतिम अक्षर हो तो उस के स्थान पर अनुस्वार का प्रयोग किया जाता है। इस कारण अन्वेषक सही है।


2013/5/18 Chopra <lingua...@gmail.com>

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दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
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narayan prasad

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May 17, 2013, 8:59:30 PM5/17/13
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<<अगर दोनों वर्तनियाँ सही हैं तो कॉलम 1 में दिए गए शब्दों की वर्तनी अधिक शुद्ध है या कॉलम 2 में दिए गए शब्दों की?>>

कॉलम 2 में दिए गए शब्दों की । संस्कृत में तो केवल दूसरे कॉलम की वर्तनी ही चलेगी ।

परन्तु, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय ने जो हिन्दी वर्तनी के मानकीकरण की पुस्तिका निकाली है, उसके अनुसार पहले कॉलम की वर्तनी को मानक माना गया है ।

'अंवेषक' बिलकुल अशुद्ध है । 'अन्वेषक' होना चाहिए ।

--- नारायण प्रसाद

2013/5/18 Chopra <lingua...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

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May 18, 2013, 8:05:37 AM5/18/13
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मैं दूसरे कॉलम वाली वर्तनी लिखने का आदी हूँ। हिन्दी में मानकीकरण के नाम पर सबसे ज्यादा मनमानी अनुस्वार के प्रयोग में ही नज़र आती है। हिन्दी निदेशालय को जो करना चाहिए था, वह न करते हुए उसने बरसों पहले अशुद्ध प्रयोगों को मानक बता कर ग़लत परिपाटी को मान्यता दे दी। जबकि व्यावहारिक प्रयोगों पर उसके विशेषज्ञों का नज़रिया स्पष्ट नहीं है। इन चक्करों में नहीं पड़ना चाहिए। बेहतर है, आपके लेखन में एकरूपता रहे।


2013/5/18 narayan prasad <hin...@gmail.com>
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अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230


  

दिनेशराय द्विवेदी

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May 18, 2013, 10:39:54 AM5/18/13
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आप बिलकुल सही कह रहे हैं अजित जी।



2013/5/18 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>



--

Sheo S. Jaiswal

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May 18, 2013, 10:52:40 AM5/18/13
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दूसरे कॉलम वाली वर्तनी के सही होने के पक्ष में दिए गए तर्क सही हैं। वस्तुतः द्विवेदी जी, नारायण प्रसाद जी तथा अजित जी ने मिलकर पूरी बात कह दी है। अनुस्वार के प्रयोग में काफी मनमानी प्रचलन में है। वह मानकीकरण की त्रुटि के कारण हो सकता है और उसके प्रयोग के नियम की जानकारी के अभाव या उसके प्रति लापरवाही के कारण भी। जो कुछ प्रचलन में आ गया, उसके प्रति बढती स्वीकार्यता का भाव भी उसका कारण है।      


2013/5/18 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
मैं दूसरे कॉलम वाली वर्तनी लिखने का आदी हूँ। हिन्दी में मानकीकरण के नाम पर सबसे ज्यादा मनमानी अनुस्वार के प्रयोग में ही नज़र आती है। हिन्दी निदेशालय को जो करना चाहिए था, वह न करते हुए उसने बरसों पहले अशुद्ध प्रयोगों को मानक बता कर ग़लत परिपाटी को मान्यता दे दी। जबकि व्यावहारिक प्रयोगों पर उसके विशेषज्ञों का नज़रिया स्पष्ट नहीं है। इन चक्करों में नहीं पड़ना चाहिए। बेहतर है, आपके लेखन में एकरूपता रहे।



--
Dr. S. S. Jaiswal

दिनेशराय द्विवेदी

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May 18, 2013, 10:55:43 AM5/18/13
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अक्सर लोग चंद्रविंदु और अनुस्वार के प्रयोग का भेद ही नहीं जानते।



2013/5/18 Sheo S. Jaiswal <jais...@gmail.com>



--

Madhusudan H Jhaveri

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May 18, 2013, 11:29:14 AM5/18/13
to shabdc...@googlegroups.com
Swadhyaya ke sahare shuddha Hindi seekhane wale kathinai anubhav karenge.

chandr bindu -main tab lagata hun, jahan anuswar ka uchchar akshar ke bilkul(saath) nikat hota hai.

 Galat ho to krupaya nirdesh Karen.

Pravas par (Font nahn hai)
-Kshamasv.

m. jhaveri


दिनेशराय द्विवेदी,कोटा, राजस्थान, भारत
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narayan prasad

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May 18, 2013, 1:22:49 PM5/18/13
to shabdc...@googlegroups.com
<<chandr bindu -main tab lagata hun, jahan anuswar ka uchchar akshar ke bilkul(saath) nikat hota hai.

 Galat ho to krupaya nirdesh Karen.
>>

चन्द्रबिन्दु का प्रयोग वहाँ किया जाता है जहाँ ध्वनि पूरी तरह से अनुनासिक (fully nasal) हो । उदाहरण  -

हंस (swan) और हँस (laugh)
हंसी (female swan) और हँसी (laughter)

जहाँ, कहाँ, यहाँ, वहाँ, माँ जैसे शब्दों में अनुस्वार का प्रयोग बिलकुल अशुद्ध है ।

--- नारायण प्रसाद

2013/5/18 Madhusudan H Jhaveri <mjha...@umassd.edu>

Baljit Basi

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May 18, 2013, 1:34:16 PM5/18/13
to शब्द चर्चा
हिंदी विशेष के मामलों में मेरे जैसे एक अहिंदी भाषी के विचार कोई मायने
नहीं रखते। फिर भी मैं अपने विचार दे रहा हैं। मेरे ख़्याल में कालम एक के
हेजे स्वीकार कर लेने चाहिएं। आधे अक्षर फ़ाल्तू का झमेला हैं। एक बिंदू
के साथ सभी काम चल जाते हैं।

संजय | sanjay

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May 19, 2013, 12:20:13 AM5/19/13
to shabdc...@googlegroups.com
आप हिन्दी भाषी हो और रात दिन सुनते हो तो बिन्दू में छिपे आधे म व आधे न या आधे ण को पहचान लोगे, वरना मैने सन्बम्ध बोलते हुए भी सुना है. 


2013/5/18 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>
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संजय बेंगाणी | sanjay bengani । 9601430808

narayan prasad

unread,
May 19, 2013, 1:12:44 AM5/19/13
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<<वरना मैने सन्बम्ध बोलते हुए भी सुना है.>>

इसका मतलब यह है कि केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा अनुस्वार के सम्बन्ध में किए गए मानकीकरण में संशोधन की आवश्यकता है ।

--- नारायण प्रसाद

2013/5/19 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

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May 19, 2013, 2:09:56 AM5/19/13
to shabdc...@googlegroups.com
<<वरना मैने सन्बम्ध बोलते हुए भी सुना है.>>
कोई हिन्दी वाला तो नहीं बोलेगा। हाँ, मराठी या गुजराती ज़रूर बोल सकता है। उनके उच्चार अलग हैं। वे अपनी भाषा बोल रहे होते हैं। हालाँकि मराठी में भी सम्बन्ध की वर्तनी संबंध ही लिखी जाती है।


2013/5/19 narayan prasad <hin...@gmail.com>
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Anil Janvijay

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May 19, 2013, 6:27:56 AM5/19/13
to shabdc...@googlegroups.com
मैं भी दूसरे कॉलम वाली वर्तनी ही लिखता हूँ। वही शुद्ध है। चन्द्रबिन्दु के सम्बन्ध में नियम यह है कि अगर ऊपर बिन्दी लगेगी तो वह चन्द्र-बिन्दु ही होगा। सिर्फ़ 'हंस' इसका अपवाद है --'हँसना' शब्द के कारण। मुझे तो बचपन में यही पढ़ाया गया था।


 
2013/5/19 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>



--
anil janvijay
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www.rachnakosh.com

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+7 916 611 48 64 ( mobile)

Baljit Basi

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May 19, 2013, 8:08:04 AM5/19/13
to शब्द चर्चा
समूह में कोई हिंदी फिनीमक Phonemics जानकार है जो यह समझा सके कि
तथाकथित अनुस्वार का वाकई अलग अलग उच्चारण है? नारायण प्रसाद यह बताऐं कि
'पूरी तरह से अनुनासिक ध्वनि' का क्या मतलब है?

अजित वडनेरकर

unread,
May 19, 2013, 8:31:48 AM5/19/13
to shabdc...@googlegroups.com
अनुस्वार तथाकथित नहीं, हकीक़त है:)



2013/5/19 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>
समूह में कोई हिंदी फिनीमक Phonemics जानकार है जो यह समझा सके कि
तथाकथित अनुस्वार का वाकई अलग अलग उच्चारण है? नारायण प्रसाद यह बताऐं कि
'पूरी तरह से अनुनासिक ध्वनि' का क्या मतलब है?
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Baljit Basi

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May 19, 2013, 8:49:02 AM5/19/13
to शब्द चर्चा
अजित भाई, तथाकथित का हमेशा मतलब 'हकीकत के उलट' नहीं होता। मेरे बयान को
इसके संदर्भ में समझें।

On 19 मई, 08:31, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> अनुस्वार तथाकथित नहीं, हकीक़त है:)
>

> 2013/5/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>


>
> > समूह में कोई हिंदी फिनीमक Phonemics जानकार है जो यह समझा सके कि
> > तथाकथित अनुस्वार का वाकई अलग अलग उच्चारण है? नारायण प्रसाद यह बताऐं कि
> > 'पूरी तरह से अनुनासिक ध्वनि' का क्या मतलब है?
>
> > --
> > You received this message because you are subscribed to the Google Groups
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>

> *
> अजित*http://shabdavali.blogspot.com/

Anil Janvijay

unread,
May 19, 2013, 8:50:05 AM5/19/13
to shabdc...@googlegroups.com
हिन्दी की वर्णमाला में अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ,  औ अँ, अः यही स्वर हैं। बिना चन्द्रबिन्दु वाला तो कोई स्वर नहीं है?  या है? या बना लिया गया है 'विद्वानों' द्वारा? हाँ, यह ठीक है कि चन्द्रबिन्दु अलग-अलग स्थिति में अलग-अलग बोला जाता है। मूल देवनागरी में तो 'नहीं'  को भी 'नहीँ' (चन्द्र-बिन्दु के साथ) लिखा जाना चाहिए।  
 

 
2013/5/19 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
अनुस्वार तथाकथित नहीं, हकीक़त है:)




--

अजित वडनेरकर

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May 19, 2013, 8:58:31 AM5/19/13
to shabdc...@googlegroups.com
जी बलजीत भाई, स्पष्ट हुआ।


2013/5/19 Anil Janvijay <anilja...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

unread,
May 19, 2013, 9:00:50 AM5/19/13
to shabdc...@googlegroups.com
पुरानी किताबों में आज भी ई स्वर के साथ भी चन्द्रबिन्दु ही छपा हुआ दिखता है।

narayan prasad

unread,
May 19, 2013, 10:44:32 AM5/19/13
to shabdc...@googlegroups.com
<<तथाकथित अनुस्वार का वाकई अलग अलग उच्चारण है?>>

जी, अनुस्वार का केवल एक ही उच्चारण होता है जो लगभग देवनागरी के ङ् जैसा या अंगरेज़ी के sing में n जैसा होता है । अतः "दांत" का उच्चारण लगभग "दाङ्त" जैसा (अतः बिलकुल अशुद्ध वर्तनी), या गलती से लोग "दान्त" भी बोल सकते हैं, जबकि "दाँत" का उच्चारण करते समय दाँ में चन्द्रबिन्दु का उच्चारण "माँ", "जहाँ", "कहाँ" आदि के चन्द्रबिन्दु जैसा होगा । "मां" लिखना बिलकुल अशुद्ध है, क्योंकि इसका उच्चारण "माङ्" जैसा कभी नहीं होता ।


<<'पूरी तरह से अनुनासिक ध्वनि' का क्या मतलब है?>>

"माँ", "जहाँ", "कहाँ" आदि के उच्चारण में आप पाएँगे कि अनुनासिक के उच्चारण के समय कण्ठ से हवा आसानी से निकल सकती है, कोई अवरोध नहीं होता । आप "हंस" और "हँस" का अलग-अलग उच्चारण करके जाँच सकते हैं ।

---नारायण प्रसाद


2013/5/19 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>

Baljit Basi

unread,
May 19, 2013, 7:24:28 PM5/19/13
to शब्द चर्चा
धन्यवाद नारायण प्रसाद जी

On 19 मई, 10:44, narayan prasad <hin...@gmail.com> wrote:
> <<तथाकथित अनुस्वार का वाकई अलग अलग उच्चारण है?>>
>
> जी, अनुस्वार का केवल एक ही उच्चारण होता है जो लगभग देवनागरी के ङ् जैसा या
> अंगरेज़ी के sing में n जैसा होता है । अतः "दांत" का उच्चारण लगभग "दाङ्त"
> जैसा (अतः बिलकुल अशुद्ध वर्तनी), या गलती से लोग "दान्त" भी बोल सकते हैं,
> जबकि "दाँत" का उच्चारण करते समय दाँ में चन्द्रबिन्दु का उच्चारण "माँ",
> "जहाँ", "कहाँ" आदि के चन्द्रबिन्दु जैसा होगा । "मां" लिखना बिलकुल अशुद्ध
> है, क्योंकि इसका उच्चारण "माङ्" जैसा कभी नहीं होता ।
>
> <<'पूरी तरह से अनुनासिक ध्वनि' का क्या मतलब है?>>
>
> "माँ", "जहाँ", "कहाँ" आदि के उच्चारण में आप पाएँगे कि अनुनासिक के उच्चारण
> के समय कण्ठ से हवा आसानी से निकल सकती है, कोई अवरोध नहीं होता । आप "हंस" और
> "हँस" का अलग-अलग उच्चारण करके जाँच सकते हैं ।
>
> ---नारायण प्रसाद
>

> 2013/5/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>


>
>
>
> > समूह में कोई हिंदी फिनीमक Phonemics जानकार है जो यह समझा सके कि
> > तथाकथित अनुस्वार का वाकई अलग अलग उच्चारण है? नारायण प्रसाद यह बताऐं कि

> > 'पूरी तरह से अनुनासिक ध्वनि' का क्या मतलब है?- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
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