वैसे शायद बाँसबरेली भी किसी जगह का नाम है तब यह "उल्टे बाँसबरेली जाना" हो सकता
है जो उतना कठिन या गूढ़ नहीं लगता।
रावत
> यूपी के शहर बरेली को ही बांसबरेली कहा जाता है. यहाँ बांस बहुत होते
बहुत सरल और सटीक उत्तर है। जितना पूछा था उससे अधिक मालूम पड़ा। धन्यवाद।
> हमारे उल्ट, यूरप में उल्लू को अकल्मन्द समझा जाता है.
वैसे हमारे यहाँ भी उल्लू खुद को अक्लमंद ही समझते हैं। ;-) ;-) ;-)
रावत
> > जैसे कोई बरफ जाए ले हिमालय- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> उद्धृत पाठ दिखाए
इसी से मिलती बात है उल्लू बनाना.. इसे ऊपर की व्याख्या के प्रकाश में देंखेगे
तो मतलब यही निकलेगा.. किसी एक को वाहन बनना होगा.. सारा बोझा उसे ही ढोना
होगा.. मगर उसे कुछ नहीं मिलेगा..
मार्क्स ने भी पूँजी की निर्माण की ऐसी ही व्याख्या की है.. मज़दूर के मेहनताने
का एक हिस्सा पूंजीपति रख लेता है और उस से कैपिटल की रचना होती है.. तंत्र में
इसे बलि देना के समान्तर समझा जा सकता है..
> > बलजीत बासी- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
2010/8/30 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>:
--
aabha
mumbai-67
2010/8/31 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>:
>
>
> ऊंची टीप , आभाजी.
> अ. हा. (अट्टहास!)
>
--
aabha
mumbai-67
कल मैं अपनी कन्या के साथ एकलव्य की पत्रिका /चकमक/ पढ़ रहा था, उसमें भी इब्बार रब्बी
के हवाले से इस मुहावरे को समझाया गया था। फ़र्क़ इतना है कि इस संस्करण में उल्लू ऐसी
मोटी लकड़ी का लट्ठा मालूम पड़ता है, जिसका इस्तेमाल खेत में पानी ले जाने के लिए करते थे,
जिसे चतुर-सुजान अपने खेत की सीध में कर लेते थे। कहीं उस लट्ठ को इसलिए तो उल्लू नहीं कहा
जाता था कि वो रात में जल-प्रवाह की पहरेदारी करता था?
..बस सोच रहा हूँ।
रविकान्त
> *From:* ashutosh kumar <mailto:ashuv...@gmail.com>
> *To:* shabdc...@googlegroups.com
> <mailto:shabdc...@googlegroups.com>
> *Sent:* Friday, August 27, 2010 9:24 PM
> *Subject:* Re: [शब्द चर्चा] Re: उल्लू सीधा करना
चकमक में आजकल सब कुछ छपता है: साहित्य, सिनेमा भी। मेरे ख़याल से उल्लू की कोई तस्वीर
नहीं छपी थी, मैं फिर से देखता हूँ, अगर कुछ मार्के की बात लगी तो स्कैन करके भेज दूँगा।
रविकान्त
अभी उस दिन भेंट हो गयी इब्बार रब्बी से. मैं पूछे बिना न रह सका की
उल्लू आखिर कैसे सीधा होता है . पता चला किला की उल्लू नामक वृक्ष अभी
हाल तक मंदी हाउस के इर्द गिर्द देखी जा सकते थे. इसी उल्लू पेड़
की लकड़ी से बनता है वह खेतों में पानी पहुंचाने वाला पाइपनुमा यंत्र ,
जो खुद भी उल्लू कहलाता है. तो जिस ने पाइप का रुख अपने खेतों की और
मोड़ लिया , उसी ने अपना उल्लू सीधा किया. अक्सर रातबिरात लोग पड़ोसी
के खेत से अपने खेत की और उस का रुख मोड़ कर अपना उल्लू सीधा कर लिया
करते है , और मुंह अँधेरे उस वापस पड़ोसी की ओर ठेल देते हैं.इस तरह खेत
पट जातें हैं और बिल पड़ोसी के नाम आता है.
अगर मुझे इंसानी भाव भंगिमा की तनिक भी पहचान है, तो वे झूठ बोलते या
सामने वाले को उल्लू बनाते से न लगे.
Artocarpus altilis (Hawaiian Name: ulu), लेकिन हिंदी में इसे उल्लू नहीं कहते।
हिंदी में कोई उल्लू नामक वृक्ष है क्या?
इस बार उल्लू पेड़ वाली नई है। अरलू [oroxylum indicum] नाम का एक पेड़ होता है
जिसे उल्लू भी कहा जाता है। इसका ट्र्म्पेट जैसा फूल रात को खिलता है और
चमगादडों द्वारा उसका परागण होता है। इस पेड़ को उगने के लिए इतना पानी चाहिये
होता है कि ये दिल्ली की रिज पर होता ही नहीं।
लेकिन इस के बाद की बात का सुर निहायत बेसुरा मालूम दे रहा है अब भी।
हम तो यही जानते हैं कि नहर/ नलकूप का पानी या तो पाइप से आता है या मेंड़ से।
उल्लू पेड़ की लकड़ी का ऐसा कोई उपयोग नहीं मिल रहा है, मान लीजिये अगर हो भी तो
सवाल यह है कि किस प्रदेश में ऐसा यंत्र होता है? जगह-जगह चीज़ों के नाम बदलते
हैं!
और अगर पड़ोसी के खेत से उल्लू अपने खेत की ओर मोड़ा गया तो अपना उल्लू सीधा हुआ
कि पड़ोसी का? तार्किक तो यह होगा कि उल्लू टेढ़ा कर लिया!
कोई ये नहीं कह रहा कि रब्बी साहब झूठ बोल रहे हैं.. लेकिन इसका अर्थ ये नहीं
कि वे सही ही बोल रहे हैं..
और अगर रब्बी साहब की व्युत्पत्ति सही है तो बतायें ये किस भौगोलिक क्षेत्र से
सम्बन्धित है.. वहाँ के ग्रामीण अंचल से इसका सत्यापन होते देर न लगनी चाहिये..
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---- Original Message -----
From: "Ashutosh Kumar" <ashuv...@gmail.com>
To: "शब्द चर्चा" <shabdc...@googlegroups.com>
----- Original Message -----From: अजित वडनेरकर
----- Original Message -----From: anil janvijay