बाद में सोचने पर मैंने दो पद और सोचे- भावबुद्धि व भावबोध। आप भी बताएं!
आम तौर पर हिंदीवाले जब भावबोध कहते हैं तो उन का मतबल किसी रचना की केन्द्रीय संवेदना और विचार से होता है. EI शायद किसी व्यक्ति की भावनात्मक बुद्धिमत्ता को कहते हैं.
रविकान्त
Abhay Tiwari wrote:
> अगर भावबोध पहले से ही चलन में है तो भावनाबोध पर नक्की किया जाय?
>
> ----- Original Message -----
> *From:* अजित वडनेरकर <mailto:wadnerk...@gmail.com>
> *To:* shabdc...@googlegroups.com
> <mailto:shabdc...@googlegroups.com>
> *Sent:* Thursday, December 09, 2010 2:43 AM
> *Subject:* Re: [शब्द चर्चा] इमोशनल इंटेलिजेंस
>
> मराठी में हम भावनात्मक बुद्धिमत्ता वाला अभिप्राय ही रखते हैं और हिन्दी में काफ़ी
> हद तक वही बात है जो आप कह रहे हैं आशु भाई।
>
> 2010/12/8 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com
> <mailto:ashuv...@gmail.com>>
>
>
>
> आम तौर पर हिंदीवाले जब भावबोध कहते हैं तो उन का /मतबल/ किसी रचना
> की केन्द्रीय संवेदना और विचार से होता है. EI शायद किसी व्यक्ति की
> भावनात्मक बुद्धिमत्ता को कहते हैं.
>
>
>
>
> --
> शुभकामनाओं सहित
> *अजित*
> http://shabdavali.blogspot.com/
>
----- Original Message -----From: anil janvijay
नहीं-नहीं बड़ी बुद्धिमत्ता की बात कही..
या फिर बुद्धिमानी की बात कही?
अरे! तीनों एक हैं भैया..
----- Original Message -----
From: ashutosh kumar
To: shabdc...@googlegroups.com
Sent: Friday, December 10, 2010 8:44 AM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] इमोशनल इंटेलिजेंस
ऐसा एक और उदाहरण है - दयालुता।
दया> दयालु> दयालुता जबकि दयालुता का दया से अलग कोई अर्थ नहीं है!
(अध्यापक की तरह कौपी मत जांचो! )
----- Original Message -----
From: ashutosh kumar
To: shabdc...@googlegroups.com
Sent: Friday, December 10, 2010 8:58 AM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] इमोशनल इंटेलिजेंस
बुद्धिमानी में आप कह रहे हैं कि व्यावहारिक बुद्धि है। जबकि बुद्धि निरपेक्ष
बुद्धि है! रसाल जी के कोष में बुद्धिमत्ता के अर्थ हैं - समझदारी, होशियारी,
अक़लमंदी। और बुद्धिमानी के पहले के तीनों के अलावा बुद्धिमत्ता। यानी
बुद्धिमत्ता और बुद्धिमानी में तो कोई फ़र्क़ नहीं है। आम चलन में बुद्धि का भी
यह भी अर्थ है - आप न मानें।
एमोशनल इंटेलिजेंस के इंटेलिजेंस को आप बुद्धिमानी मानते हैं कि बुद्धि? कामिल
बुल्के उसे सीधे-सीधे बुद्धि या समझ बताते हैं।
इमोशनल इंटेलिजेंस मे व्यावहारिकता का पहलू नहीं है। कुत्तो की इमोशनल
इंटेलिजेंस बहुत तीव्र होती हैं, क्या वे व्हावहारिक होते हैं? नहीं!
----- Original Message -----
From: ashutosh kumar
To: shabdc...@googlegroups.com
Sent: Friday, December 10, 2010 9:13 AM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] इमोशनल इंटेलिजेंस

भावना- बोध में मुझे थोड़ी सी दिक्कत है. भावनाओं की समझ .'किस के लिए हलकान हो रही हो ?वह तुम्हारी भावनाओं को क्या समझेगा. भावना- बोध उस में है ही नहीं. "वैसे , भावबुद्धि के लिए मैं राजी हूँ.
मेरी एक भतीजी उन बच्चों में है जिन्हे आजकल स्पेशल चाइल्ड कहा जाता है। किसी
भी चीज़ को सीखने में वह एक बहुत लम्बा समय लगाती है। लेकिन भावनाबोध उसका इतना
विकसित है कि सब उसकी इस प्रतिभा से चमत्कृत रहते हैं। कौन दुखी है, कौन परेशान
है, कौन प्रफ़ुल्लित है वह पलक झपकते ही ताड़ लेती है। उसकी प्रतिभा की सत्ता उस
प्रतिभा से स्वतंत्र है जिसे पारम्परिक रूप से बुद्धि के रूप में चिह्नित किया
जाता है। इसीलिए मैं इसके लिए शब्द का चयन करने में भी बुद्धि के बदले बोध को
वरीयता देना चाहूँगा, हालांकि दोनों का मूल बुध् ही है। वैसे ध्वनि भी मुझे
भावनाबोध की ही जंच रही है।
----- Original Message -----
From: अजित वडनेरकर
To: shabdc...@googlegroups.com
Sent: Friday, December 10, 2010 10:45 AM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] इमोशनल इंटेलिजेंस
हम भी राजी
भाव में प्रवृत्ति, विचार, उद्देश्य, इच्छा, मुद्रा, कल्पना तमाम अर्थ हैं, भावना भी उसमें हैं लेकिन इमोशन के लिए भावना सटीक शब्द है। इसलिए भावनाबुद्धि, भावबुद्धि से अधिक उपयुक्त मालूम दे रहा है। मगर मेरी पहली पसन्द अभी भी भावनाबोध ही है। और वह इसलिए नहीं कि शब्द मैंने सुझाया है। बल्कि इसलिए कि भावनाबोध बुद्धि से स्वतंत्र एक प्रत्यय है।
----- Original Message -----From: ashutosh kumarSent: Friday, December 10, 2010 12:04 PMSubject: Re: [शब्द चर्चा] इमोशनल इंटेलिजेंस
दो बिंदु पर झगड़ा है:
१. भाव या भावना; इस सन्दर्भ में भाव नहीं भावना प्रबल है इसलिए जो भी पद बने
उसमें भावना की उपस्थिति को मेरा १०० टक्के समर्थन है।
२. बुद्धि या बोध में। इमोशनल इंटेलिजेंस का मतलब विविध है लेकिन जो मूल अर्थ
है, उसी को लेके चला जाय। और वो यह कि अपनी और दूसरों की भावनाओं को त्वरित ढंग
से पहचानने की क्षमता। उसका इस्तेमाल कौन और कैसे किस सन्दर्भ में करता है यह
दूसरा मसला है। बोध मुझे क्यों रुचता है मैंने पिछले सन्देश में साफ़ किया है।
अतिरिक्त भावुकता और बुद्धि के अतिरेक - इन दो अतियों से बचने की होशियारी.. यह
आपकी अपनी एक परिभाषा हो सकती है। लेकिन यह मूल शब्द में निहित नहीं है।
[पादटिप्पणी: 'हे संत शिरोमणि अभयानन्द' कहने में आशु का मंतव्य 'हे महामूर्ख
गर्दभानन्द' कहने का बिलकुल नहीं है। आशुतोष मेरा पुराना मित्र है और शुरु से
ही मेरे संतत्व का भक्त है। :) ]
----- Original Message -----
From: ashutosh kumar
To: shabdc...@googlegroups.com
Sent: Friday, December 10, 2010 12:04 PM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] इमोशनल इंटेलिजेंस
> अर्थ बनता है वह भावना ही है.- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> उद्धृत पाठ दिखाए
> >> उद्धृत पाठ दिखाए- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
वैसे मैं तो आप को परमहंस ही मानता हूँ .
> ये सूक्ष्म भेद आप ही भाँप सकते थे!
>
>
>
> ----- Original Message -----
> From: "Baljit Basi" <baljit_b...@yahoo.com>
> To: "शब्द चर्चा" <shabdc...@googlegroups.com>
> Sent: Friday, December 10, 2010 9:37 PM
> Subject: [शब्द चर्चा] Re: इमोशनल इंटेलिजेंस
>
> > वह तो परमहँसीकरण है!
>
> > On 10 दिस., 10:47, "Abhay Tiwari" <abhay...@gmail.com> wrote:
> >> आशु ने ही तो किया है!
>
> >> ----- Original Message -----
> >> From: "Baljit Basi" <baljit_b...@yahoo.com>
> >> To: "शब्द चर्चा" <shabdc...@googlegroups.com>
> >> Sent: Friday, December 10, 2010 9:13 PM
> >> Subject: [शब्द चर्चा] Re: इमोशनल इंटेलिजेंस
>
> >> > 'मेरे संतत्व का भक्त है। ' अभय जी क्या आप का परमहंसीकरण हो चूका है?!
>
> >> > On 10 दिस., 03:07, "Abhay Tiwari" <abhay...@gmail.com> wrote:
> >> >> माई डिअर आशु!
>
> >> >> दो बिंदु पर झगड़ा है:
> >> >> १. भाव या भावना; इस सन्दर्भ में भाव नहीं भावना प्रबल है इसलिए जो भी पद
> >> >> बने
> >> >> उसमें भावना की उपस्थिति को मेरा १०० टक्के समर्थन है।
> >> >> २. बुद्धि या बोध में। इमोशनल इंटेलिजेंस का मतलब विविध है लेकिन जो मूल
> >> >> अर्थ
> >> >> है, उसी को लेके चला जाय। और वो यह कि अपनी और दूसरों की भावनाओं को
> >> >> त्वरित
> >> >> ढंग
> >> >> से पहचानने की क्षमता। उसका इस्तेमाल कौन और कैसे किस सन्दर्भ में करता
> >> >> है
> >> >> यह
> >> >> दूसरा मसला है। बोध मुझे क्यों रुचता है मैंने पिछले सन्देश में साफ़ किया
वैसे अभय जी को परमहंस मान ही लिया गया है तो बिनती है कि 'अभयतिवारीकरण' या 'अतिकरण' पर भी विचार किया जाए:)
2010/12/10 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>
आप की ज़र्रानवाज़ी है वरना नाचीज़ किस क़ाबिल है.. ये मैं ज़रूर कहता लेकिन.. मैं तो परमहंस हूँ। .. हूँ ना?
:)
----- Original Message ----- From: "Baljit Basi" <balji...@yahoo.com>
To: "शब्द चर्चा" <shabdc...@googlegroups.com>
Sent: Friday, December 10, 2010 9:59 PM
Subject: [शब्द चर्चा] Re: इमोशनल इंटेलिजेंस
वैसे मैं तो आप को परमहंस ही मानता हूँ .
On 10 दिस., 11:17, "Abhay Tiwari" <abhay...@gmail.com> wrote:
ये सूक्ष्म भेद आप ही भाँप सकते थे!
----- Original Message -----
From: "Baljit Basi" <baljit_b...@yahoo.com>
To: "शब्द चर्चा" <shabdc...@googlegroups.com>
Sent: Friday, December 10, 2010 9:37 PM
Subject: [शब्द चर्चा] Re: इमोशनल इंटेलिजेंस
> वह तो परमहँसीकरण है!
> On 10 दिस., 10:47, "Abhay Tiwari" <abhay...@gmail.com> wrote:
>> आशु ने ही तो किया है!
>> ----- Original Message -----
>> From: "Baljit Basi" <baljit_b...@yahoo.com>
>> To: "शब्द चर्चा" <shabdc...@googlegroups.com>
>> Sent: Friday, December 10, 2010 9:13 PM
>> Subject: [शब्द चर्चा] Re: इमोशनल इंटेलिजेंस
>> > 'मेरे संतत्व का भक्त है। ' अभय जी क्या आप का परमहंसीकरण हो चूका है?!
>> > On 10 दिस., 03:07, "Abhay Tiwari" <abhay...@gmail.com> wrote:
>> >> माई डिअर आशु!
>> >> दो बिंदु पर झगड़ा है:
>> >> १. भाव या भावना; इस सन्दर्भ में भाव नहीं भावना प्रबल है इसलिए जो भी >> >> पद
>> >> बने
>> >> उसमें भावना की उपस्थिति को मेरा १०० टक्के समर्थन है।
>> >> २. बुद्धि या बोध में। इमोशनल इंटेलिजेंस का मतलब विविध है लेकिन जो >> >> मूल
>> >> अर्थ
>> >> है, उसी को लेके चला जाय। और वो यह कि अपनी और दूसरों की भावनाओं को
>> >> त्वरित
>> >> ढंग
>> >> से पहचानने की क्षमता। उसका इस्तेमाल कौन और कैसे किस सन्दर्भ में >> >> करता
>> >> है
>> >> यह
>> >> दूसरा मसला है। बोध मुझे क्यों रुचता है मैंने पिछले सन्देश में साफ़ >> >> किया
On 10 दिस., 11:46, Bharatbhooshan Tiwari
<bharatbhooshan.tiw...@gmail.com> wrote:
> वैसे अभय जी को परमहंस मान ही लिया गया है तो बिनती है कि 'अभयतिवारीकरण' या
> 'अतिकरण' पर भी विचार किया जाए:)
>
> 2010/12/10 Abhay Tiwari <abhay...@gmail.com>
>
>
>
> > आप की ज़र्रानवाज़ी है वरना नाचीज़ किस क़ाबिल है.. ये मैं ज़रूर कहता लेकिन.. मैं
> > तो परमहंस हूँ। .. हूँ ना?
>
> > :)
>
> > ----- Original Message ----- From: "Baljit Basi" <baljit_b...@yahoo.com>
यह तो अतिश्य है....इस बहाने, जिन को न पता हो जानकारी दे दूं , अंगरेजी
का goose 'हंस' का सुजाति है. अंगरेजी में एक supergoose चीज भी होती
है.
On 10 दिस., 11:46, Bharatbhooshan Tiwari
<bharatbhooshan.tiw...@gmail.com> wrote:> 2010/12/10 Abhay Tiwari <abhay...@gmail.com>
> वैसे अभय जी को परमहंस मान ही लिया गया है तो बिनती है कि 'अभयतिवारीकरण' या
> 'अतिकरण' पर भी विचार किया जाए:)
>
>
>
>
> > आप की ज़र्रानवाज़ी है वरना नाचीज़ किस क़ाबिल है.. ये मैं ज़रूर कहता लेकिन.. मैं
> >>> >> >> दो बिंदु पर झगड़ा है:
> >>> >> >> १. भाव या भावना; इस सन्दर्भ में भाव नहीं भावना प्रबल है इसलिए जो भी
> >>> >> >> पद
> >>> >> >> बने
> >>> >> >> उसमें भावना की उपस्थिति को मेरा १०० टक्के समर्थन है।
> >>> >> >> २. बुद्धि या बोध में। इमोशनल इंटेलिजेंस का मतलब विविध है लेकिन जो
> >>> >> >> मूल
> >>> >> >> अर्थ
> >>> >> >> है, उसी को लेके चला जाय। और वो यह कि अपनी और दूसरों की भावनाओं को
> >>> >> >> त्वरित
> >>> >> >> ढंग
> >>> >> >> से पहचानने की क्षमता। उसका इस्तेमाल कौन और कैसे किस सन्दर्भ में >>
> >>> >> करता
> >>> >> >> है
> >>> >> >> यह
> >>> >> >> दूसरा मसला है। बोध मुझे क्यों रुचता है मैंने पिछले सन्देश में साफ़
On 10 दिस., 12:02, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> और लुफ्तांसा में भी यही हंस झाँक रहा है। चिह्न भी यही है।
> लुफ्त में लॉफ्ट यानी ऊपर उठने या ऊँचाई का भाव है।
>
> 2010/12/10 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
> *अजित*http://shabdavali.blogspot.com/- उद्धृत पाठ छिपाएँ -